प्राचीन और आरंभिक मध्यकालीन भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Ancient and Early Medieval India)
HIS 101F B.A. Ist Semester Examination, 2025-26 History Ancient and Early Medieval India (Till 1206 […]
HIS 101F B.A. Ist Semester Examination, 2025-26 History Ancient and Early Medieval India (Till 1206 […]
पल्लव राजवंश 1.पल्लव राजवंश ने मुख्य रूप से किस क्षेत्र पर शासन किया? (A)
पल्लव राजवंश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Pallava Dynasty) Read More »
भारत में नवपाषाण काल नवपाषाण काल में प्रागैतिहासिक मानव ने एक नए युग में प्रवेश
भारत में नवपाषाण काल (Neolithic Period in India) Read More »
राजपूतों की पराजय और तुर्कों की सफलता के कारण 12वीं और 13वीं शताब्दी में तुर्कों
संस्कार भारतीय संस्कृति का आधारभूत तत्व हैं, जो मानव जीवन को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक
प्राचीन भारतीय समाज में पुरुषार्थों का विशेष महत्त्व रहा है। भारतीय दर्शन और संस्कृति में
भारतीय संस्कृति में आश्रम व्यवस्था का विशेष महत्त्व है। यह व्यवस्था मानव जीवन को जन्म
पूर्वी गंग वंश भारत के पूर्वी तट पर, मुख्य रूप से आधुनिक ओडिशा (उड़ीसा) और
काकतीय राजवंश एक तेलुगु राजवंश था, जिसने 12वीं से 14वीं शताब्दी के बीच पूर्वी दक्कन
छत्तीसगढ़ में काकतीय छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में काकतीय वंश ने 1324 ई. से 1947
छत्तीसगढ़ में काकतीय वंश का इतिहास (History of Kakatiya dynasty in Chhattisgarh) Read More »
गणपतिदेव (1199–1262 ई.) प्रारंभिक संघर्ष गणपतिदेव काकतीय राजवंश के सबसे लंबे समय तक शासन करने
काकतीय साम्राज्य की महान शासिका रुद्रमा देवी, जिन्हें रुद्राम्बा या रुद्रदेव महाराज के नाम से
काकतीय राजवंश 1.काकतीय राजवंश की उत्पत्ति किससे जोड़ी गई है? (A) करिकाल चोल (B) राष्ट्रकूट
काकतीय राजवंश से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs related to Kakatiya Dynasty) Read More »
होयसलकालीन सांस्कृतिक उपलब्धियाँ होयसल वंश, जिसने 11वीं से 14वीं शताब्दी तक दक्षिण भारत के कर्नाटक,
होयसलकालीन सांस्कृतिक उपलब्धियाँ (Cultural Achievements of the Hoysala Period) Read More »
होयसल राजवंश (950-1343 ई.) होयसल राजवंश दक्षिण भारत के मध्यकालीन इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण शक्ति
भारत के प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास में गंग वंश दो अलग-अलग राजवंशों—पश्चिमी गंग और पूर्वी
पल्लव प्रशासन पल्लवों ने अपने लगभग 600 वर्षों के शासनकाल (लगभग 275-907 ई.) में दक्षिण
परमार भोज (1010-1055 ई.) राजा भोज परमार (1010-1055 ई.) की गणना प्राचीन भारत के सबसे
वाक्पति द्वितीय ‘मुंजराज’ (974-995 ई.) वाक्पति द्वितीय ‘मुंजराज’ (974-995 ई.) परमार वंश के शक्तिशाली शासक
नरसिंहवर्मन द्वितीय (695-722 ई.) परमेश्वरवर्मन प्रथम के पश्चात्, लगभग 695 ई. में उसके पुत्र नरसिंहवर्मन
परमेश्वरवर्मन प्रथम (670-695 ई.) परमेश्वरवर्मन प्रथम (670-695 ई.) महेंद्रवर्मन द्वितीय का पुत्र और पल्लव वंश
नंदिवर्मन तृतीय (846-869 ई.) नंदिवर्मन तृतीय (846-869 ई.) पल्लव वंश का अंतिम शक्तिशाली शासक था,
दंतिवर्मन (796-847 ई.) नंदिवर्मन द्वितीय का पुत्र दंतिवर्मन (796-847 ई.), जो राष्ट्रकूट राजकुमारी रेवा से
नंदिवर्मन द्वितीय (730–796 ई.) परमेश्वरवर्मन द्वितीय की मृत्यु के बाद पल्लव राज्य में राजनीतिक संकट
नरसिंहवर्मन प्रथम (630-668 ई.) नरसिंहवर्मन प्रथम (630-668 ई.) पल्लव वंश का एक महत्त्वपूर्ण शासक था,
महेंद्रवर्मन प्रथम (600-630 ई.) महेंद्रवर्मन प्रथम (600-630 ई.) पल्लव वंश का एक महान राजा था,
पल्लवकालीन सांस्कृतिक उपलब्धियाँ पल्लव राजवंश दक्षिण भारत का एक प्रमुख एवं शक्तिशाली राजवंश था, जिसने
पल्लवकालीन सांस्कृतिक उपलब्धियाँ (Cultural Achievements of the Pallava Period) Read More »
दक्कन क्षेत्र, विशेष रूप से कर्नाटक में, 1156 से 1181 ई. तक एक अन्य कलचुरि
कल्याणी के कलचुरि (Kalachuris of Kalyani, 1156-1181 A.D.) Read More »
त्रिपुरी के कलचुरि (675–1212 ई.) त्रिपुरी के कलचुरि राजवंश का भारत के इतिहास में महत्त्वपूर्ण
रायपुर के कलचुरि : लहुरी शाखा रायपुर की कलचुरि (लहुरी शाखा) का इतिहास छत्तीसगढ़ के
रतनपुर के कलचुरि (1000–1741 ई.) छत्तीसगढ़ में कलचुरि शासन की नींव त्रिपुरी के कलचुरि शासक
रतनपुर के कलचुरि (Kalachuris of Ratanpur, 1000–1741 AD) Read More »
छत्तीसगढ़ के कलचुरि : रतनपुर और रायपुर शाखा छत्तीसगढ़ भारत के इतिहास में एक समृद्ध
कलचुरि राजवंश (550-1850 ई.) कलचुरि राजवंश, जिसे हैहयवंशी कलचुरि भी कहा जाता है, भारतीय इतिहास
सरयूपार के कलचुरि कलचुरियों की सबसे प्राचीन शाखा मध्य भारत में नर्मदा नदी के ऊपरी
कलचुरियों का इतिहास : महिष्मती शाखा (575-620) कलचुरियों की सबसे प्राचीन शाखा मध्य भारत में
पुरातात्त्विक और साहित्यिक स्रोत उत्तर भारत का राजनीतिक इतिहास (550 ई. से 1200 ई.) एक
उत्तर भारत के ऐतिहासिक स्रोत (Historical Sources of North India, 550 AD to 1200 AD) Read More »
मध्यकालीन भारतीय इतिहास (Medieval Indian History) से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया
नाथपंथ (संप्रदाय) पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (MCQs and Answers on Nathpanth) Read More »
प्राचीन और आरंभिक भारत से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है,
आठवीं शताब्दी में अरबों की सिंध विजय (712 ई.) के बाद सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक घटना
हर्ष की मृत्यु के बाद की राजनीतिक स्थिति हर्ष की मृत्यु (647-648 ई.) के पश्चात्
पुलकेशिन द्वितीय (609-642 ई.) पुलकेशिन द्वितीय बादामी के चालुक्य वंश का महानतम् शासक था। वह
उत्तम चोल (970-985 ई.) उत्तम चोल (मधुरांतक) परांतक द्वितीय का चचेरा भाई और शेंबियन महादेवी
शाकंभरी के चौहान चाहमान राजवंश पूर्वमध्यकालीन भारत का एक राजपूत राजवंश था, जिसने सातवीं शताब्दी
शाकंभरी का चाहमान राजवंश (Chahamana Dynasty of Shakambhari) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए. की प्रथम सेमेस्टर
प्राचीन भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-5 (MCQs on Ancient Indian History-5) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए. की सेमेस्टर परीक्षाओं
प्राचीन भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-4 (MCQs on Ancient Indian History-4) Read More »
सिंधुघाटी की सभ्यता से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो
सिंधुघाटी की सभ्यता पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Indus Valley Civilisation) Read More »
देवगिरि के यादव दक्कन में देवगिरि के यादव (सेउण) वंश का राजनीतिक उत्कर्ष बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी
देवगिरि का सेउण राजवंश (Seuna Dynasty of Devagiri) Read More »
वर्धन राजवंश पाँचवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उत्तर-पश्चिमी भारत पर होने वाले हूण आक्रमण शक्तिशाली
अरब आक्रमण शक्तिशाली गुप्तों के पतन के बाद हर्षवर्धन (606-647 ई.) ने एक बार पुनः
सिंध और मुल्तान पर अरब आक्रमण (Arab Invasion of Sindh and Multan) Read More »
जैन धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
जैन धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Jainism-2) Read More »
जैन धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
जैन धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Jainism-1) Read More »
बौद्ध धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
बौद्ध धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-3 (MCQs on Buddhism- 3) Read More »
बौद्ध धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
बौद्ध धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Buddhism- 2) Read More »
बौद्ध धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
बौद्ध धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Buddhism- 1) Read More »
प्राचीन भारतीय इतिहास से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो
प्राचीन भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Ancient Indian History-2) Read More »
प्राचीन भारतीय इतिहास से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो
प्राचीन भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-3 (MCQs on Ancient Indian History-3) Read More »
प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
बंधन और मोक्ष प्रायः सभी भारतीय दर्शनों में बंधन का अर्थ निरंतर जन्म ग्रहण करना
जैन दर्शन में बंधन और मोक्ष (Bondage and Moksha in Jain Philosophy) Read More »
जैन चतुर्विध-संघ:श्वेतांबर और दिगंबर अनुशासित समूह को ‘संघ’ कहते हैं। संघ के कुछ नियम-अनुबंध तथा
जैन धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और दर्शन है। श्रमणों में कदाचित्
जैन दर्शन और न्याय धर्म, दर्शन और न्याय—इन तीनों के सुमेल से ही व्यक्ति के
जैन न्याय शास्त्र का विकास (Development of Jain Jurisprudence) Read More »
मदुरा के पांड्य सुदूर दक्षिण भारत में तमिल प्रदेश के प्रारंभिक राजवंशों में चेरों और
मारवर्मन् कुलशेखर पांड्य प्रथम (1268-1308 ई.) मारवर्मन् कुलशेखर पांड्य प्रथम (1268-1308 ई.) पांड्य राजवंश का
मारवर्मन् कुलशेखर पांड्य प्रथम (Maravarman Kulasekara Pandyan I) Read More »
जटावर्मन् सुंदरपांड्य प्रथम (1251-1270 ई.) मारवर्मन् सुंदरपांड्य के बाद पांड्य राजगद्दी पर जटावर्मन् सुंदरपांड्य प्रथम
जटावर्मन् सुंदरपांड्य प्रथम (Jatavarman Sundara Pandyan I) Read More »
चोल राजवंश का राजनीतिक इतिहास (850-1279 ई.) सुदूर दक्षिण भारत के तमिल प्रदेश में प्राचीनकाल
राजेंद्र तृतीय (1252-1279 ई.) राजराज तृतीय के बाद 1252 ई. में राजेंद्र तृतीय चोल सिंहासन
राजराज तृतीय (1216-1256 ई.) कुलोत्तुंग तृतीय की मृत्यु के पश्चात् राजराज तृतीय 1216 ई. में
कुलोत्तुंग तृतीय (1178–1218 ई.) कुलोत्तुंग तृतीय ‘परकेशरिवर्मन’ चोल राजवंश का अंतिम महान शासक था, जिसने
राजराज द्वितीय (1146-1173 ई.) कुलोत्तुंग द्वितीय के पश्चात् उसका पुत्र राजराज द्वितीय 1150 ई. में
कुलोत्तुंग द्वितीय (1135-1152 ई.) 1135 ई. में विक्रमचोल की मृत्यु के बाद कुलोत्तुंग द्वितीय चोल
राजेंद्र चोल द्वितीय (1052-1064 ई.) राजेंद्र द्वितीय (1052-1064 ई.), जिन्हें राजेंद्रदेव चोल भी कहा जाता
विक्रम चोल (1122-1135 ई.) कुलोत्तुंग प्रथम की मृत्यु के बाद 1122 ई. में विक्रम चोल
परांतक द्वितीय (957-973 ई.) अरिंजय की मृत्यु (957 ई.) के बाद अन्विल ताम्रपत्र में उल्लिखित
कुलोत्तुंग चोल प्रथम (1070-1122 ई.) कुलोत्तुंग प्रथम के सिंहासनारोहण से चोल इतिहास में एक नये
वीरराजेंद्र चोल (1063-1070 ई.) राजेंद्र द्वितीय की मृत्यु के बाद उसका अनुज वीरराजेंद्र 1063 ई.
राजाधिराज प्रथम (1044-1054 ई.) राजेंद्र चोल प्रथम की मृत्यु के बाद उसका पुत्र राजाधिराज राजकेशरी
राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ई.) राजराज की मृत्यु के बाद उसकी कोडंबलुर की राजकुमारी थिरिपुवना
राजराज (अरुमोलिवर्मन) (985-1015 ई.) चोल राजवंश की महत्ता का वास्तविक संस्थापक परांतक द्वितीय (सुंदर चोल)
परांतक प्रथम (907-955 ई.) आदित्य प्रथम की मृत्यु के अनंतर 907 ई. में उसका पुत्र
संगमकालीन चोल सुदूर दक्षिण भारत के तमिल प्रदेश में प्राचीनकाल में जिन राजवंशों का उत्कर्ष
संगम युग में चोल राजवंश (Chola Dynasty in Sangam Age) Read More »
पल्लव राजवंश (275-897 ई.) पल्लव राजवंश प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली एवं गौरवशाली राजवंश था,
पल्लव राजवंश का राजनीतिक इतिहास (Political History of the Pallava Dynasty) Read More »
पाल राजवंश (750-1200 ई.) आठवीं शती के मध्य में भारत के पूर्वी भाग में जिस
कदंब राजवंश (345-540 ई.) कदंब राजवंश प्राचीन भारत का एक राजवंशी ब्राह्मण परिवार था, जिसने
बनवासी का कदंब राजवंश (Kadamba Dynasty of Banavasi) Read More »
सेन वंश 12वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत के बंगाल में सेन राजवंश ने अपना
राष्ट्रकूट राजवंश राष्ट्रकूट राजवंश ने लगभग दो सौ वर्षों से अधिक समय तक भारतीय उपमहाद्वीप
राष्ट्रकूट राजवंश का राजनीतिक इतिहास (Political History of Rashtrakuta Dynasty) Read More »
राष्ट्रकूट राजवंश का पतन खोट्टिग (967-972 ई.) कृष्ण तृतीय निःसन्तान मर गया था। करहद अभिलेख
राष्ट्रकूट राजवंश का पतन (Fall of Rashtrakuta Dynasty) Read More »
कृष्ण तृतीय (939-967 ई.) अमोघवर्ष तृतीय के बाद उसका ज्येष्ठ पुत्र और युवराज कृष्ण तृतीय
अमोघवर्ष द्वितीय, गोविंद चतुर्थ और अमोघवर्ष तृतीय (929-939 ई.) अमोघवर्ष द्वितीय (929-930 ई.) इंद्र तृतीय
इंद्र तृतीय (914-929 ई.) कृष्ण द्वितीय के पश्चात् उसका पौत्र इंद्र तृतीय (914-929 ई.) राजा
कृष्ण द्वितीय (880-914 ई.) अमोघवर्ष के पश्चात् उसका पुत्र कृष्ण द्वितीय 880 ई. के लगभग
अमोघवर्ष प्रथम (814-878 ई.) गोविंद तृतीय की मृत्यु के पश्चात् उसका अल्पवयस्क पुत्र शर्व ‘अमोघवर्ष’
गोविंद तृतीय (793-814) ध्रुव प्रथम के कई पुत्र थे, जिनमें स्तंभ रणावलोक, कर्कसुवर्णवर्ष, गोविंद तृतीय
ध्रुव ‘धारावर्ष’ ( 780-793 ई.) अपने अग्रज गोविंद द्वितीय को अपदस्थ कर ध्रुव ने राष्ट्रकूट
कृष्ण प्रथम (756-774 ई.) चित्तलदुर्ग से प्राप्त एक लेख के अनुसार दंतिदुर्ग के कोई पुत्र
दंतिदुर्ग (735-756 ई.) इंद्र द्वितीय के बाद उसकी चालुक्यवंशीय पत्नी भवनागा से उत्पन्न पुत्र दंतिदुर्ग
गुर्जर प्रतिहार राजवंश हर्षोत्तर काल में गुर्जरात्रा प्रदेश में प्रतिहार राजवंश का उदय हुआ, जो
गुर्जर प्रतिहार राजवंश (The Gurjara Pratihara Dynasty) Read More »
बुंदेलखंड के चंदेल प्रतिहार साम्राज्य के पतन के पश्चात् बुंदेलखंड के भूभाग पर चंदेल वंश
जेजाकभुक्ति के चंदेल (Chandelas of Jejakabhukti) Read More »
परमार वंश भारतीय इतिहास में एक प्रमुख राजपूत राजवंश था, जिसने आठवीं से चौदहवीं शताब्दी
गुजरात के चौलुक्य (सोलंकी) वंश का इतिहास हर्ष की मृत्यु के उपरांत प्रतिहारों ने संपूर्ण
गुजरात का चौलुक्य राजवंश (Chaulukya Dynasty of Gujarat ) Read More »
पूर्वी चालुक्य राज्य वेंगी का पूर्वी चालुक्य राज्य मुख्यतः कृष्णा और गोदावरी नदियों के बीच
वेंगी के पूर्वी चालुक्य (Eastern Chalukyas of Vengi) Read More »
प्रतिहार साम्राज्य के पतन के बाद कन्नौज और वाराणसी में गहड़वाल वंश की स्थापना हुई।
कल्याणी का चालुक्य राजवंश 10वीं शताब्दी के अंतिम चरण में कल्याणी या कल्याण में भी
पश्चिमी चालुक्य राजवंश (Western Chalukya Dynasty) Read More »
1871 ई. के पेरिस कम्यून के पश्चात् पश्चिमी यूरोप में कोई शक्तिशाली जनव्यापी क्रांतिकारी विस्फोट
1905 ई. की रूसी क्रांति (Russian Revolution of 1905 AD) Read More »
वातापी का चालुक्य राजवंश छठी शताब्दी ईस्वी के मध्यकाल में संपूर्ण भारतीय प्रायद्वीप में राजनीतिक
वातापी का चालुक्य राजवंश (Chalukya Dynasty of Vatapi) Read More »
छठी शताब्दी ईस्वी के मध्यकाल में संपूर्ण भारतीय प्रायद्वीप में राजनीतिक विकेंद्रीकरण का एक महत्त्वपूर्ण
गुप्तकालीन भारत का चित्रण भारत प्राचीन काल से ही धर्म, कला, राजनीति, सभ्यता एवं संस्कृति
चीनी यात्री फाह्यान का यात्रा-विवरण (Travel details of Chinese traveler Fahien) Read More »
मौखरि गुप्त राजवंश के सामंत थे और गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद उन्होंने अपनी
उत्तर-गुप्त राजवंश सम्राट गुप्त वंश के अवनति काल में उनके अधीन उत्तर भारत के विभिन्न
औलिकर राजवंश पाँचवीं शताब्दी के मध्य में मालवा पर औलिकर राजवंश के लोग गुप्त साम्राज्य
मालवा का औलिकार वंश और यशोधर्मन (Aulikar Dynasty of Malwa and Yashodharman) Read More »
गुप्त युग : भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल गुप्त युग भारतीय इतिहास का एक ऐसा युग
गुप्त युग का मूल्यांकन (Evaluation of Gupta Age) Read More »
गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर भारत में राजनीतिक रिक्तता, अस्थिरता और अराजकता का
हूण हूण मध्य एशिया की एक खानाबदोश (यायावर) बर्बर जाति थी। इसने 165 ई.पू. में
भारत में हूण सत्ता का उत्थान-पतन (Rise and Fall of Huna Power in India) Read More »
गुप्तकाल साहित्यिक विकास साहित्यिक विकास की दृष्टि से गुप्तकाल बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इस काल
गुप्तकालीन कला कला अभीष्ट दिव्यता की प्राप्ति और उसके साथ एकाकार होने का पवित्रतम साधन
गुप्तकालीन कला और स्थापत्य (Art and Architecture in Gupta Period) Read More »
गुप्तकालीन धर्म गुप्तकाल को प्रायः ब्राह्मण धर्म के पुनरुत्थान का चरमोत्कर्ष माना जाता है। गुप्त
गुप्तकालीन धर्म और धार्मिक जीवन (Religion and Religious Life in Gupta Period) Read More »
गुप्तकालीन भारतीय समाज गुप्तकालीन भारतीय समाज परंपरागत चार वर्णों—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में विभाजित
गुप्तकालीन सामाजिक जीवन (Social Life in Gupta Period) Read More »
गुप्तकाल में भारत ने राजनैतिक, सामाजिक एवं भौतिक उन्नति के चरमोत्कर्ष का साक्षात्कार किया। अपने
गुप्तकालीन प्रशासन और आर्थिक जीवन (Gupta Administration and Economic Life) Read More »
परवर्ती गुप्त शासक स्कंदगुप्त की मृत्यु के बाद गुप्त राजवंश का सूरज अस्ताचल की ओर
स्कंदगुप्त (455-467 ई.) कुमारगुप्त की मृत्यु के पश्चात गुप्त शासन की बागडोर उनके सुयोग्य पुत्र
स्कंदगुप्त ‘क्रमादित्य’ (Skandagupta ‘Kramaditya’) Read More »
कुमारगुप्त महेंद्रादित्य (415-455 ई.) चंद्रगुप्त द्वितीय के बाद उनके पुत्र कुमारगुप्त 415 ई. में सत्तारूढ़
कुमारगुप्त प्रथम ‘महेंद्रादित्य’ (Kumaragupta I ‘Mahendraditya’) Read More »
चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ समुद्रगुप्त की प्रधान महिषी दत्तदेवी से उत्पन्न पुत्र चंद्रगुप्त द्वितीय असाधारण प्रतिभा,
चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ (Chandragupta II ‘Vikramaditya’) Read More »
रामगुप्त की ऐतिहासिकता गुप्त अभिलेखों में उल्लिखित वंश-तालिका में समुद्रगुप्त के बाद चंद्रगुप्त द्वितीय का
रामगुप्त की ऐतिहासिकता (Historicity of Ramgupta) Read More »
‘पराक्रमांक’ समुद्रगुप्त (335-375 ई.) चंद्रगुप्त प्रथम के बाद 335 ई. में लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से
प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत भारतवर्ष विश्व के प्राचीनतम एवं महानतम देशों में अग्रणी है।
प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत (Sources of Ancient Indian History) Read More »
गुप्तों का आदि-स्थान गुप्तों की जाति की तरह उनके आदि-स्थान के विषय में भी इतिहासकारों
गुप्तों की उत्पत्ति-विषयक समस्या गुप्तों की उत्पत्ति-विषयक समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो सका
गुप्त राजवंश भारतीय इतिहास में सर्वांगीण विकास और समृद्धि के लिए गौरवपूर्ण स्थान रखता है।
गुप्त राजवंश के ऐतिहासिक स्रोत (Historical Sources of Gupta Dynasty) Read More »
उत्तरी भारत में कुषाणों के पतन और गुप्तों के उदय से पूर्व के काल को
तीसरी शताब्दी ई. में सातवाहनों की शक्ति के नष्ट होने पर दक्षिण भारत में कई
मौर्योत्तरकालीन समाज मौर्योत्तर काल के शुंग और संभवतः सातवाहन वंश के शासक ब्राह्मण थे। अतः
मौर्योत्तरकालीन राज्य-व्यवस्था मौर्य साम्राज्य के पतन के साथ ही भारतीय इतिहास की राजनीतिक एकता कुछ
मौर्योत्तरकालीन राज्य-व्यवस्था एवं आर्थिक जीवन (Post-Mauryan Polity and Economic Life) Read More »
मौर्यकालीन सामाजिक जीवन पूर्ववर्ती धर्मशास्त्रों की भाँति कौटिल्य ने भी वर्णाश्रम व्यवस्था को सामाजिक संगठन
मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था, समाज, धर्म और कला-संबंधी जानकारी के लिए कौटिल्य का अर्थशास्त्र, मेगस्थनीज-कृत
कुषाण राजवंश भारत के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास में कुषाण राजवंश एक सीमा चिन्ह है।
शकों के आरंभिक इतिहास मगध के विशाल मौर्य साम्राज्य की शक्ति के क्षीण होने पर
भारत में शक (सीथियन) और पार्थियन शासन (Shaka (Scythian) and Parthian Rule in India) Read More »
प्राचीन भारत में कलिंग राज्य : खारवेल प्राचीन भारत में कलिंग एक समृद्ध राज्य था।
कलिंग का खारवेल वंश (Kharavela Dynasty of Kalinga) Read More »
सातवाहन वंश सातवाहन वंश भारत का एक प्राचीन राजवंश था, जिसने दूसरी शताब्दी ई.पू. के
सातवाहन राजवंश और गौतमीपुत्र सातकर्णि (Satavahana Dynasty and Gautamiputra Satakarni) Read More »
मौर्य साम्राज्य के पतन के साथ ही विकेंद्रीकरण की प्रवृत्तियाँ क्रियाशील हो उठीं और भारत
भारत में हिंद-यवन शासन (Indo-Greek Rule in India) Read More »
शुंग राजवंश : पुष्यमित्र शुंग चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य द्वारा स्थापित विशाल मौर्य साम्राज्य की
शुंग राजवंश : पुष्यमित्र शुंग (Shunga Dynasty : Pushyamitra Shunga) Read More »
विश्व इतिहास का महान् सम्राट अशोक न केवल भारतीय इतिहास, बल्कि विश्व इतिहास के महानतम
अशोक महान् का मूल्यांकन (Evaluation of Asoka the Great) Read More »
भारतीय प्रायद्वीप का तमिलकम् प्रदेश सुदूर दक्षिण में भारतीय प्रायद्वीप त्रिभुजाकार रूप में कन्याकुमारी तक
अशोक के उत्तराधिकारी अशोक के बाद मौर्य साम्राज्य का पतन आरंभ हो गया और लगभग
अशोक का शासन-संगठन अशोक के शासन-संगठन का प्रारूप लगभग वही था, जो चंद्रगुप्त मौर्य के
मौर्य सम्राट अशोक अशोक महान की गणना प्राचीन विश्व के महानतम शासकों में की जाती
मौर्य सम्राट अशोक महान् (Mauryan Emperor Asoka the Great) Read More »
चंद्रगुप्त मौर्य महान् विजेता और साम्राज्य-निर्माता ही नहीं, अपितु योग्य प्रशासक भी थे। उन्होंने अपने मंत्री
चंद्रगुप्त मौर्य की शासन-व्यवस्था (Chandragupta Maurya’s Administration) Read More »
बिंदुसार (ई.पू. 298- ई.पू. 273) चंद्रगुप्त की मृत्यु के पश्चात् उनका पुत्र बिंदुसार ई.पू. 298
मौर्य सम्राट बिंदुसार (Mauryan Emperor Bindusara) Read More »
जिस समय मगध के नेतृत्व में पूर्वी भारत में एकीकरण की प्रक्रिया चल रही थी,
भारत पर ईरानी और यूनानी आक्रमण ( Iranian and Greek Invasions of India) Read More »
जैन परंपरा में लोक विश्व, जगत् अथवा संसार के लिए जैन परंपरा में सामान्यरूप से
जैन परंपरा में लोक और ईश्वर (Folk and God in Jain Tradition) Read More »
चंद्रगुप्त मौर्य के आगमन से भारतीय इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात हुआ और
मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य (Maurya Emperor Chandragupta Maurya) Read More »
व्यवहार की दृष्टि से ज्ञान का अर्थ जानना, समझना या परिचित होना होता है। प्रत्येक
जैन दर्शन में ज्ञान मीमांसा (Epistemology in Jain Philosophy) Read More »
जैन परंपरा में आचार जैन परंपरा में आचार के स्तर पर श्रावक और श्रमण- ये
मौर्यों के इतिहास-निर्माण के साधन 326 ई.पू. में जब सिकंदर की सेनाएँ पंजाब के विभिन्न
मगध मगध महाजनपद प्राचीन भारत में एक प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक जागृति का केंद्र
गणराज्य आरंभ में साम्राज्यवादी इतिहासकारों की धारणा थी कि भारत में सदैव निरंकुश राजाओं का
प्राचीन भारत में गणराज्य (Republics in Ancient India) Read More »
छठी शताब्दी ईसापूर्व में भारत आरंभिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई.पू. को एक महत्त्वपूर्ण
थेरवाद (स्थविरवाद) बौद्ध धर्म का प्रमुख स्वरूप थेरवाद (स्थविरवाद) है। थेरवादी प्राचीन बौद्ध धर्म के
बुद्ध ने कोई ग्रंथ नहीं लिखा और न अपने शिष्यों को अपना उपदेश किसी विशिष्ट,
गौतम बुद्ध की शिक्षाएँ (Teachings of Gautam Buddha) Read More »
गौतम बुद्ध और बौद्ध धर्म का उदय बौद्ध धर्म का उदय ई.पू. छठी शताब्दी में
बौद्ध धर्म और गौतम बुद्ध (Buddhism and Gautama Buddha) Read More »
जैन धर्म का उद्भव और प्राचीनता छठी शताब्दी ई.पू. के संप्रदायों में सबसे प्राचीन संप्रदाय
भगवान महावीर और उनकी शिक्षाएँ (Lord Mahavira and his Teachings) Read More »
बौद्धिक आंदोलन ई.पू. छठी शताब्दी प्राचीन भारत के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण सीमा-चिह्न है। इस
ई.पू. छठी शताब्दी में बौद्धिक आंदोलन (Intellectual Movement in the Sixth Century BC) Read More »
भौगोलिक विस्तार ऋक्-संहिता से इतर संहिता ग्रंथों, ब्राह्मणों, आरण्यकों और उपनिषदों का रचनाकाल लगभग ई.पू.
उत्तर वैदिककालीन संस्कृति (Post Vedic Culture, 1000–500 BC) Read More »
वैदिक काल और वैदिक साहित्य वैदिक काल प्राचीन भारतीय संस्कृति का वह कालखंड माना जाता
पत्थर से धातु के प्रयोग तक का संक्रमण धातुओं की खोज और प्रारंभिक प्रयोग मानव
ताम्र-पाषाणिक संस्कृतियाँ हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद लगभग दूसरी सहस्राब्दी ई.पू. में, सिंधु क्षेत्र
ताम्र-पाषाणिक पशुचारी-कृषक संस्कृतियाँ (Copper-Stone Cattle Cultivator Cultures) Read More »
सिंधुघाटी की सभ्यता विश्व की प्राचीनतम नदी घाटी सभ्यताओं में से एक हड़प्पा सभ्यता का
मध्यपाषाण काल मध्यपाषाण काल, जो यूनानी शब्द ‘मेसोस’ (मध्य) और ‘लिथोस’ (पत्थर) से व्युत्पन्न है,
भारत में मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period in India) Read More »
भारत में प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ मानव सभ्यता का विकास अकस्मात् अथवा त्वरित नहीं, वरन् क्रमिक और
भारत में पुरापाषाण काल (Palaeolithic Period in India) Read More »
भारत का भौगोलिक परिचय भारत गणराज्य दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा
भारत का भौगोलिक परिचय (Geographical Introduction of India) Read More »