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प्राचीन इतिहास

Magadh Utkarsh: Contribution of Haryanka, Shishunag and Nanda Dynasty

मगध का उत्कर्ष : हर्यंक, शिशुनाग और नंद वंश का योगदान (Magadh ka Utkarsh: Contribution of Haryanka, Shishunag and Nanda Dynasty)

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मगध महाजनपद प्राचीनकाल से ही राजनीतिक उत्थान, पतन एवं सामाजिक-धार्मिक जागृति का केंद्र-बिंदु रहा है। छठीं शताब्दी ई.पू. के सोलह महाजनपदों में से एक मगध…

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The State of India in the Sixth century BC: Sixteen Mahajanapadas

छठी शताब्दी ईसापूर्व में भारत की दशा : सोलह महाजनपद (The State of India in the Sixth century BC: Sixteen Mahajanapadas)

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आरंभिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई.पू. को एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल माना जाता है। यह काल प्रायः आरंभिक राज्यों, नगरों, लोहे के बढ़ते प्रयोग…

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Major Sects of Buddhism and Buddhist Musics

बौद्ध धर्म के प्रमुख संप्रदाय और बौद्ध संगीतियाँ (Major Sects of Buddhism and Buddhist Musics)

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थेरवाद (स्थविरवाद) बौद्ध धर्म का प्रमुख स्वरूप थेरवाद (स्थविरवाद) है। थेरवादी प्राचीन बौद्ध धर्म के पालि धर्म-ग्रंथों को आधिकारिक मानते हैं तथा अपनी वंशावली को…

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मध्यकालीन इतिहास

दिल्ली सल्तनत: सैय्यद और लोदी वंश, 1414-1450 ई. (Delhi Sultanate: Syed and Lodi Dynasty,1414-1450 AD)

Delhi Sultanate: Syed and Lodi Dynasty
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सुल्तान महमूद की मृत्यु के पश्चात् दिल्ली के सरदारों ने दौलत खाँ लोदी को दिल्ली का सुल्तान स्वीकार कर लिया। मार्च, 1414 ई. में खिज्र…

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मराठों का उदय और क्षत्रपति शिवाजी (Rise of Marathas and Kshatrapati Shivaji)

Rise of Marathas and Kshatrapati Shivaji
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मराठा राज्य का निर्माण एक क्रांतिकारी घटना है। भारतीय इतिहास के पूर्व मध्यकाल में मराठों की राजनैतिक एवं सांस्कृतिक कार्यों में उज्जवल परंपराएँ थीं। उस…

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दिल्ली सल्तनत: तुगलक वंश 1320-1412 ई. (Delhi Sultan: Tughlaq Dynasty 1320-1412 AD)

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तुगलक वंश की स्थापना 1320 ई. में गाजी मलिक (गयासुद्दीन तुगलक) ने की थी। गाजी मलिक का वंश स्वदेशी माना जाता है। उसका पिता बलबन…

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आधुनिक इतिहास

अठारहवीं शताब्दी में भारत

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अभी हाल तक भारतीय इतिहास में अठारहवीं सदी को एक ‘अंधकार युग’ के रूप चित्रित किया जाता रहा था क्योंकि उस समय भारत में अव्यवस्था…

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विश्व इतिहास

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

(Khilafat and Non-Cooperation Movement

खिलाफत और असहयोग (Khilafat

1919 से 1922 के मध्य अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध दो सशक्त जन-आंदोलन चलाये गये- खिलाफत और असहयोग आंदोलन। खिलाफत और

Swadeshi Movement

स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi Movement)

गरमपंथी राजनीति की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति बंगाल विभाजन-विरोधी स्वदेशी आंदोलन में हुई, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है।

भारत के बाहर क्रांतिकारी

भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने के लिए क्रांतिकारियों ने शरण की खोज, प्रेस कानूनों से मुक्त रहकर क्रांतिकारी साहित्य

क्रांतिकारी आंदोलन का उदय

क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास का स्वर्णयुग है। बीसवीं शताब्दी के आरंभ में जब उग्रपंथी राष्ट्रवादी स्वदेशी, बहिष्कार,

1857 की क्रांति का

1857 की क्रांति के स्वरूप और चरित्र को लेकर बहस लगभग उसके आरंभ-काल में ही शुरू हो चुकी थी। मालेसन,

1857 की क्रांति :

ब्रिटिश राज के विरुद्ध भारतीय जनता के असंतोष और प्रतिरोध की पहली बड़ी अभिव्यक्ति 1857 में एक सशस्त्र सिपाही विद्रोह

विविध

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