टाइबेरियस (Tiberius)

टाइबेरियस (Tiberius)

रोमन सम्राट टाइबेरियस : जीवन, शासन, व्यक्तित्व और इतिहास

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(16 नवंबर 42 ई.पू.–16 मार्च 37 ई.)

टाइबेरियस (Tiberius Julius Caesar Augustus) रोमन साम्राज्य के प्रथम शाही राजवंश जूलियो–क्लॉडियन वंश का दूसरा शासक तथा रोम का दूसरा सम्राट था। उसने 14 ईस्वी से 37 ईस्वी तक शासन किया और प्रथम सम्राट ऑगस्टस के दत्तक पुत्र एवं उत्तराधिकारी के रूप में सत्ता ग्रहण की। एक अनुभवी सेनानायक के रूप में टाइबेरियस ने पैनोनिया, डालमाटिया, रेटिया तथा जर्मानिया के सीमावर्ती क्षेत्रों में सफल सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया, जिससे रोमन साम्राज्य की सीमाएँ सुरक्षित एवं सुदृढ़ हुईं।

प्रशासनिक दृष्टि से वह एक कठोर, अनुशासित तथा व्यावहारिक शासक सिद्ध हुआ। उसने अनावश्यक सैन्य विस्तार के स्थान पर वित्तीय सुधारों, सीमाओं की सुरक्षा तथा शासन-व्यवस्था की स्थिरता को प्राथमिकता दी। यद्यपि उसका शासनकाल राजनीतिक संघर्षों, पारिवारिक तनावों और दरबारी षड्यंत्रों से प्रभावित रहा, फिर भी उसकी गणना रोमन इतिहास के उन शासकों में की जाती है, जिन्होंने साम्राज्य का विस्तार करने के बजाय उसके संगठन, सुदृढ़ीकरण और स्थायित्व पर विशेष बल दिया। अपने शासन के अंतिम वर्षों में वह अधिक कठोर, एकांतप्रिय तथा निरंकुश हो गया था, फिर भी आधुनिक इतिहासकारों ने उसे रोमन साम्राज्य के सर्वाधिक सक्षम, कुशल एवं प्रभावशाली प्रशासकों में स्थान दिया है।

टाइबेरियस का पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जीवन

टाइबेरियस का जन्म 16 नवंबर 42 ईसा पूर्व को रोम में हुआ था। उसका पिता टाइबेरियस क्लॉडियस नीरो एक प्रतिष्ठित रोमन कुलीन, मजिस्ट्रेट तथा जूलियस सीज़र के अधीन नौसेना के सेनापति रह चुका था। उसकी माता लिविया ड्रूसिला अत्यंत सुंदर, बुद्धिमती तथा प्रतिष्ठित कुल की महिला थी। वह अपने पति की निकट संबंधी भी थी। टाइबेरियस के माता-पिता दोनों ही प्राचीन पैट्रिशियन जेंस क्लॉडिया से संबंधित थे, जिसे रोमन गणराज्य के प्रारंभिक काल से ही अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता था। लिविया, अपने दत्तक संबंध के कारण लिवी परिवार से भी संबद्ध थी।

जूलियस सीज़र की हत्या (44 ईसा पूर्व) के बाद हुए गृहयुद्धों में टाइबेरियस के पिता ने सीज़र के उत्तराधिकारी मार्क एंटनी का समर्थन किया। जब ऑक्टेवियन ने सत्ता-संघर्ष में मार्क एंटनी को पराजित किया, तब टाइबेरियस का परिवार पहले सिसिली और बाद में यूनान चला गया। राजनीतिक परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर कुछ वर्षों बाद उसका परिवार पुनः रोम लौट आया।

39 ईसा पूर्व में लिविया ने, गर्भवती होने के बावजूद टाइबेरियस क्लॉडियस नीरो से तलाक लेकर ऑक्टेवियन से विवाह कर लिया, जो आगे चलकर ऑगस्टस के नाम से प्रसिद्ध हुआ। टाइबेरियस अपने जैविक पिता के संरक्षण में रहा, जबकि 38 ईसा पूर्व में उसके छोटे भाई नीरो क्लॉडियस ड्रूसस का जन्म हुआ। लगभग नौ वर्ष की आयु में टाइबेरियस ने अपने पिता के अंतिम संस्कार के अवसर पर रोस्ट्रा से सार्वजनिक श्रद्धांजलि (अंत्येष्टि-भाषण) प्रस्तुत किया। इसके बाद टाइबेरियस अपने भाई ड्रूसस तथा माता लिविया के साथ ऑगस्टस के संरक्षण में रहने लगा।

टाइबेरियस (Tiberius)
टाइबेरियस और उसकी माँ लिविया (14–19 ई.)

टाइबेरियस ने ऑगस्टस की पुत्री जूलिया तथा ऑगस्टस की बहन ऑक्टाविया के पुत्र मार्सेलस के साथ शिक्षा प्राप्त की। उस समय ऑगस्टस के पश्चात उत्तराधिकार का कोई निश्चित कानून नहीं था, इसलिए टाइबेरियस, मार्सेलस तथा अन्य संभावित उत्तराधिकारियों को भावी शासन के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया। उन्हें वक्तृत्व-कला, साहित्य, विधि, कूटनीति तथा सैन्य शिक्षा प्रदान की गई और प्रशासनिक कार्यों से भी परिचित कराया गया। 29 ईसा पूर्व में एक्टियम के युद्ध में मार्क एंटनी और क्लियोपेट्रा सप्तम पर ऑगस्टस की विजय के उपलक्ष्य में निकाले गए विजय-जुलूस में तेरह वर्षीय टाइबेरियस ऑगस्टस के रथ के दाहिने ओर के घोड़े पर सवार होकर सम्मिलित हुआ।

27 ईसा पूर्व में जब टाइबेरियस लगभग पंद्रह वर्ष का था, ऑगस्टस उसे और मार्सेलस को गॉल के सैन्य चौकियों का निरीक्षण कराने ले गया। वहाँ उसे युद्ध का अनुभव तो नहीं मिला, किंतु उसने सैनिकों के मार्च का संचालन, किलों की व्यवस्था तथा सैनिक छावनियों को सदैव सतर्क रखने की कला का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। रोम लौटने पर ऑगस्टस ने अपनी पुत्री जूलिया का विवाह मार्सेलस से कर दिया।

टाइबेरियस और उत्तराधिकार का प्रश्न

23 ईसा पूर्व में ऑगस्टस गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। उसकी संभावित मृत्यु से रोमन साम्राज्य में पुनः गृहयुद्ध छिड़ने की आशंका उत्पन्न हो गई। अधिकांश इतिहासकारों का मत है कि इस समय ऑगस्टस के उत्तराधिकारी का प्रश्न अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन गया था। यद्यपि ऑगस्टस ने संकेत दिया था कि उसकी मृत्यु के बाद मार्कस विप्सानियस अग्रिप्पा और मार्सेलस उसके उत्तराधिकारी होंगे, फिर भी उत्तराधिकार का प्रश्न उसके शासन की सबसे बड़ी राजनीतिक समस्या बना रहा।

इस स्थिति से निपटने के लिए अनेक संभावित उत्तराधिकारियों पर विचार किया गया, जिनमें टाइबेरियस और उसका भाई ड्रूसस भी शामिल थे। 24 ईसा पूर्व में अठारह वर्ष की आयु में टाइबेरियस ने ऑगस्टस के निर्देशन में राजनीतिक जीवन में प्रवेश किया और क्वेस्टर के पद पर नियुक्त हुआ। उसे विधि द्वारा निर्धारित आयु से पाँच वर्ष पहले प्रेटर तथा कॉन्सल के पद के लिए चुनाव लड़ने का विशेष अधिकार भी प्रदान किया गया। इसी प्रकार की विशेष व्यवस्था उसके भाई ड्रूसस के लिए भी की गई।

टाइबेरियस का पहला विवाह

अपने सार्वजनिक जीवन के प्रारंभिक काल में टाइबेरियस ने ऑगस्टस के घनिष्ठ मित्र तथा प्रसिद्ध सेनानायक मार्कस विप्सानियस अग्रिप्पा की पुत्री विप्सानिया अग्रिप्पीना से विवाह किया, जिससे एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम ड्रूसस जूलियस सीज़र था। बाद में उसे ऑगस्टस के आदेश पर विप्सानिया को तलाक देकर उसकी पुत्री जूलिया द एल्डर से विवाह करना पड़ा।

टाइबेरियस का आरंभिक नागरिक एवं सैन्य जीवन

सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करने के पश्चात् टाइबेरियस ने कुछ समय तक रोमन न्यायालयों में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। इसी अवधि में उसकी रुचि यूनानी साहित्य, दर्शन तथा वक्तृत्व-कला के अध्ययन में भी विकसित हुई। 20 ईसा पूर्व में टाइबेरियस सम्राट ऑगस्टस के साथ पूर्वी प्रांतों की यात्रा पर गया। इससे पूर्व 53 ईसा पूर्व में कैराइ के युद्ध में मार्कस लिसिनियस क्रैसस, 40 ईसा पूर्व में डेसीडियस सक्सा तथा 36 ईसा पूर्व में मार्क एंटनी की पराजय के परिणामस्वरूप पार्थिया ने रोमन सेना के सैन्य ध्वज (ईगल) अपने अधिकार में कर लिया था। पार्थिया के राजा फ्राटेस चतुर्थ के साथ ऑगस्टस द्वारा की गई कूटनीतिक वार्ताओं में टाइबेरियस ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप बिना किसी युद्ध के पार्थिया ने रोमन सैन्य ध्वज लौटा दिए। इसके उपरांत टाइबेरियस एक शक्तिशाली सेना के साथ आर्मेनिया गया, जहाँ उसने रोमन समर्थक राजकुमार तिग्रानेस तृतीय को सिंहासन पर बैठाया। इस प्रकार आर्मेनिया पुनः रोमन प्रभाव-क्षेत्र में आ गया और रोमन-पार्थियन सीमा पर राजनीतिक संतुलन स्थापित हो गया।

16 ईसा पूर्व में टाइबेरियस को प्रेटर नियुक्त किया गया। अगले वर्ष 15 ईसा पूर्व में उसे पश्चिमी अभियानों में अपने छोटे भाई नीरो क्लॉडियस ड्रूसस की सहायता के लिए भेजा गया। जब ड्रूसस ने अपनी सेना को गैलिया नार्बोनेन्सिस और राइन सीमा पर केंद्रित किया, तब टाइबेरियस ने आल्प्स क्षेत्र की जनजातियों के विरुद्ध अभियान चलाया। दोनों भाइयों के संयुक्त सैन्य अभियानों के परिणामस्वरूप रेटिया तथा उसके निकटवर्ती प्रदेश रोमन साम्राज्य के अधीन आ गए। इस अभियान के दौरान रोमन सेना डेन्यूब नदी के उद्गम क्षेत्र तक पहुँची और उस क्षेत्र की भौगोलिक तथा सामरिक जानकारी प्राप्त की। इन अभियानों के फलस्वरूप आल्प्स और डेन्यूब क्षेत्र में रोमन साम्राज्य की उत्तरी सीमा अधिक सुरक्षित और सुदृढ़ हो गई। 13 ईसा पूर्व में रोम लौटने पर टाइबेरियस ने कॉन्सल का पद ग्रहण किया। लगभग इसी समय उसके पुत्र ड्रूसस जूलियस सीज़र का जन्म हुआ।

12 ईसा पूर्व में मार्कस विप्सानियस अग्रिप्पा की मृत्यु के बाद टाइबेरियस को एड्रियाटिक सागर के उत्तर-पूर्व में स्थित पैनोनिया प्रांत की विद्रोही जनजातियों को शांत करने का दायित्व सौंपा गया। अपने कुशल नेतृत्व और प्रभावी सैन्य रणनीति के माध्यम से उसने वहाँ रोमन सत्ता को पुनः सुदृढ़ किया तथा कई जनजातियों को अधीन कर लिया। अनुशासनप्रियता, न्यायपूर्ण व्यवहार और सैनिकों के कल्याण के प्रति उसकी सजगता के कारण वह अपनी सेना में अत्यंत सम्मानित और लोकप्रिय सेनानायक बन गया। रोम लौटने पर उसकी इस विजय के उपलक्ष्य में उसे अनेक राजकीय सम्मान प्रदान किए गए।

टाइबेरियस का पारिवारिक संकट और दूसरा विवाह

मार्कस विप्सानियस अग्रिप्पा की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार के प्रश्न पर टाइबेरियस और उसके भाई ड्रूसस का महत्त्व बढ़ गया था। इसी समय ऑगस्टस ने अपनी विधवा पुत्री जूलिया द एल्डर का पुनर्विवाह कराने का निश्चय किया। जिस प्रकार कभी टाइबेरियस के पिता को लिविया से अलग होकर ऑक्टेवियन (ऑगस्टस) के आदेश का पालन करना पड़ा था, उसी प्रकार टाइबेरियस को भी 11 ईसा पूर्व में ऑगस्टस के आदेश पर अपनी प्रिय पत्नी विप्सानिया को तलाक देकर सम्राट की विधवा पुत्री जूलिया द एल्डर से विवाह करना पड़ा। यह विवाह पूरी तरह राजनीतिक था और टाइबेरियस इसके लिए अनिच्छुक था।

इसके बाद 9 ईसा पूर्व में जर्मानिया के अभियान के दौरान उसका प्रिय भाई ड्रूसस घोड़े से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उस समय टाइबेरियस टिसिनम (वर्तमान पाविया) में था। समाचार मिलते ही वह तीव्र गति से यात्रा कर उसके पास पहुँचा और उसके अंतिम समय में उपस्थित रहा। ड्रूसस की मृत्यु के बाद टाइबेरियस स्वयं उसके पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक रोम लेकर आया।

जूलिया के साथ टाइबेरियस का वैवाहिक जीवन

टाइबेरियस जूलिया से विवाह करने के लिए अनिच्छुक था, क्योंकि वह अपनी पहली पत्नी विप्सानिया के साथ अत्यंत सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहा था। टाइबेरियस की दूसरी पत्नी जूलिया सम्राट ऑगस्टस की एकमात्र पुत्री थी, जो पहले मार्सेलस और बाद में मार्कस विप्सानियस अग्रिप्पा की पत्नी रह चुकी थी तथा कई बच्चों की माता थी। वह अत्यंत सुंदर, मिलनसार और सामाजिक स्वभाव की थी, किंतु उसकी अपनी सौतेली माता लिविया से नहीं बनती थी। विवाह के कुछ समय बाद ही टाइबेरियस और जूलिया के संबंध तनावपूर्ण हो गए। प्राचीन स्रोतों में जूलिया पर अनेक प्रेम-संबंधों और व्यभिचार के आरोप लगाए गए हैं। यद्यपि इन विवरणों में कुछ अतिरंजना हो सकती है, फिर भी इतना स्पष्ट है कि इन घटनाओं से टाइबेरियस के व्यक्तिगत जीवन और राजनीतिक प्रतिष्ठा दोनों को गहरा आघात पहुँचा। ऑगस्टस द्वारा बनाए गए नैतिक कानूनों के अनुसार व्यभिचार करने वाली पत्नी के विरुद्ध पति को कानूनी कार्रवाई करनी होती थी, किंतु जूलिया सम्राट ऑगस्टस की पुत्री होने के कारण उसके विरुद्ध कठोर कदम उठाना टाइबेरियस के लिए अत्यंत कठिन था।

टाइबेरियस का रोड्स की ओर प्रस्थान

6 ईसा पूर्व में जब टाइबेरियस को ट्रिब्यून की शक्तियाँ (ट्रिब्यूनिसिया पोतेस्तास) प्रदान की गई, किंतु तभी उसने अचानक सार्वजनिक जीवन से अलग होने की घोषणा कर दी और और रोड्स द्वीप में निवृत्त जीवन व्यतीत करने चला गया। उसके इस निर्णय का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं है। अधिकांश इतिहासकारों का मानना है कि ऑगस्टस ने अपनी पुत्री जूलिया और मार्कस विप्सानियस अग्रिप्पा के पुत्रों गायस सीज़र तथा लुसियस सीज़र को अपना वास्तविक उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय कर लिया था, जबकि टाइबेरियस स्वयं को केवल एक अस्थायी उत्तराधिकारी के रूप में देख रहा था। दूसरी ओर, टाइबेरियस की पत्नी जूलिया का उच्छृंखल तथा सार्वजनिक रूप से विवादास्पद व्यवहार भी उसके इस निर्णय का एक प्रमुख कारण माना जाता है। इतिहासकार टैसिटस के अनुसार रोड्स जाने का सबसे गहरा कारण जूलिया के प्रति टाइबेरियस की घृणा तथा अपनी पूर्व पत्नी विप्सानिया के प्रति उसका गहरा प्रेम था। जिस स्त्री से वह प्रेम करता था, उससे मिलने पर उसे रोक लगा दी गई थी, जबकि उसे ऐसी पत्नी के साथ जीवन बिताना पड़ रहा था, जिससे वह असंतुष्ट था।

टाइबेरियस के इस निर्णय से ऑगस्टस की उत्तराधिकार-योजना संकट में पड़ गई। गायस और लुसियस अभी छोटे थे और लगभग 57 वर्षीय ऑगस्टस के पास तत्काल कोई योग्य उत्तराधिकारी नहीं था। इसलिए उसकी मृत्यु के बाद सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण की कोई निश्चित गारंटी नहीं रह गई थी। साथ ही यह भी निश्चित नहीं था कि ऑगस्टस का परिवार अथवा उसके सहयोगी भविष्य में भी सत्ता पर अपना प्रभाव बनाए रख सकेंगे। प्राचीन स्रोतों के अनुसार ऑगस्टस ने टाइबेरियस को रोड्स जाने से रोकने का प्रयास किया, किंतु वह अपने निर्णय पर अडिग रहा। कहा जाता है कि उसने ओस्टिया के बंदरगाह पर अपने जहाज़ को तब तक रोके रखा, जब तक उसे यह समाचार नहीं मिल गया कि ऑगस्टस पूर्णतः स्वस्थ है। इसके बाद वह रोड्स के लिए प्रस्थान कर गया और कई वर्षों तक सक्रिय राजनीति से दूर रहा।

रोड्स में टाइबेरियस का निर्वासन और व्यक्तित्व में परिवर्तन

जब टाइबेरियस रोड्स पहुँचा, तब उनकी आयु 36 वर्ष थी और वह अपनी क्षमता एवं प्रभाव के उच्चतम स्तर पर था। वह एक विशाल साम्राज्य का शासन करने, बड़े युद्धों का नेतृत्व करने तथा सीमावर्ती प्रांतों का प्रशासन सँभालने में पूर्णतः सक्षम था। किंतु रोड्स में उसके पास कोई महत्त्वपूर्ण दायित्व नहीं था, जिसके परिणामस्वरूप उसकी ऊर्जा और प्रतिभा मानो भीतर ही भीतर दबने लगी और उसके स्वभाव में परिवर्तन आने लगा।

यद्यपि टाइबेरियस के शासनकाल का इतिहास या तो उनके पुराने सहयोगी वेलेयियस पैटरकुलस जैसे प्रशंसकों ने लिखा या फिर उनके विरोधियों ने, इसलिए इन स्रोतों को पूर्णतः निष्पक्ष नहीं माना जा सकता, फिर भी इतना स्पष्ट है कि इस अवधि में उसके व्यक्तित्व में उल्लेखनीय परिवर्तन आया। धीरे-धीरे उसकी रुचि मुख्यतः अपने निजी जीवन और व्यक्तिगत सुखों तक सीमित होती चली गई। रोड्स में उसका स्वभाव अधिक एकाकी हो गया  जो व्यक्ति पहले सरल और मिलनसार था, वह धीरे-धीरे उदास, चिड़चिड़ा और क्रोधी बन गया। यद्यपि टाइबेरियस अपनी इच्छा से रोम छोड़कर गया था, फिर भी सम्राट ऑगस्टस की अनुमति के बिना वह वापस नहीं लौट सकता था। ऑगस्टस ने उसे दस वर्षों से अधिक समय तक रोम लौटने की अनुमति नहीं दी।

टाइबेरियस की रोम वापसी और उत्तराधिकारी के रूप में प्रतिष्ठा

अंततः लिविया ने जूलिया के अनैतिक आचरणों के प्रमाण एकत्र करके ऑगस्टस के समक्ष प्रस्तुत किए। ऑगस्टस अत्यंत क्रोधित हुआ। उसके अपने बनाए कानूनों के अनुसार जूलिया को मृत्युदंड दिया जा सकता था, किंतु ऐसा नहीं किया गया। अंततः 2 ईसा पूर्व में उसने जूलिया को आजीवन पंडाटेरिया नामक छोटे द्वीप पर निर्वासित कर दिया। इसके बाद भी टाइबेरियस को तत्काल वापस नहीं बुलाया गया। उस समय ऑगस्टस के उत्तराधिकार के लिए उसके तीन पौत्र प्रमुख दावेदार थे, जो सभी जूलिया के पुत्र थे- गायस सीज़र, लुसियस सीज़र और अग्रिप्पा पोस्टुमस। किंतु 2 ईस्वी में लुसियस की मैसिलिया (मार्सेय) में मृत्यु हो गई। 4 ईस्वी में गायस सीज़र की भी लाइसिया में एक सैन्य अभियान के दौरान मृत्यु हो गई और टाइबेरियस को रोम लौटने की अनुमति दे दी गई यद्यपि ऑगस्टस व्यक्तिगत रूप से टाइबेरियस को विशेष पसंद नहीं करता था, फिर भी परिस्थितियों के कारण उसने 26 जून 4 ईस्वी को उसे विधिवत गोद लेकर अपना पुत्र और उत्तराधिकारी घोषित किया। इसके बदले टाइबेरियस को अपने भतीजे जर्मेनिकस को गोद लेना पड़ा, जो उसके भाई नीरो क्लॉडियस ड्रूसस तथा ऑगस्टस की भतीजी एंटोनिया माइनर का पुत्र था।

दत्तक ग्रहण के साथ ही टाइबेरियस को ट्रिब्यूनीय शक्ति (ट्रिब्यूनिसिया पोतेस्तास) प्रदान की गई तथा ऑगस्टस के सर्वोच्च सैन्य एवं प्रशासनिक अधिकार (माइउस इम्पेरियम) में भी भागीदारी मिली। इसके बाद टाइबेरियस ही ऑगस्टस का एकमात्र व्यावहारिक उत्तराधिकारी रह गया।

टाइबेरियस के प्रमुख सैन्य अभियान

4 ईस्वी में ऑगस्टस द्वारा दत्तक पुत्र बनाए जाने के बाद टाइबेरियस पुनः रोमन राजनीति और सेना का प्रमुख नेता बन गया। 5 ईस्वी में उसने जर्मानिया में सफल अभियान चलाकर रोमन प्रभुत्व को एल्बे नदी तक विस्तारित किया। इसके बाद 6 ईस्वी में उसने शक्तिशाली मार्कोमनी जनजाति के विरुद्ध एक विशाल सैन्य अभियान की योजना बनाई। इस अभियान के अंतर्गत उसने दो दिशाओं से आक्रमण (पिंसर मूवमेंट) की रणनीति अपनाई। स्वयं टाइबेरियस कार्नुंटुम से डेन्यूब मार्ग के सहारे कई सेनाओं का नेतृत्व करते हुए क्वाडी प्रदेश से होकर मार्कोमनी क्षेत्र की ओर बढ़ा, जबकि जनरल गायस सेंटियस सैटर्निनस ने मोगुन्टियाकम (वर्तमान माइंज) से राइन सीमा पार कर पूर्व की ओर अग्रसर होकर दूसरी दिशा से आक्रमण किया। इस संयुक्त अभियान का उद्देश्य मार्कोमनी राजा मारोबोडुस को निर्णायक रूप से पराजित करना था।

यह अभियान प्रारंभिक चरण में अत्यंत सफल रहा, किंतु इसी समय इलिरिक (पैनोनियन) महाविद्रोह (6–9 ई.) भड़क उठा, जिससे रोमन साम्राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो गया। परिणामस्वरूप टाइबेरियस को मार्कोमनी अभियान बीच में ही रोककर अपनी सेना के साथ तत्काल इलिरिक लौटना पड़ा। उसने मारोबोडुस के साथ संधि कर ली और अगले तीन वर्षों तक पैनोनिया तथा डालमाटिया में चले भीषण विद्रोह का सफलतापूर्वक दमन किया। इस विजय ने उसे रोम का सर्वाधिक अनुभवी और सफल सेनानायक बना दिया। इसी बीच 7 ईस्वी में ऑगस्टस ने अग्रिप्पा पोस्टुमस को उसके उग्र स्वभाव और अनुशासनहीन व्यवहार के कारण उत्तराधिकार से वंचित कर प्लानासिया द्वीप (वर्तमान पियानोसा) पर निर्वासित कर दिया, जिससे उसके उत्तराधिकारी के रूप में टाइबेरियस की स्थिति और अधिक सुदृढ़ हो गई।

ऑगस्टस की मृत्यु और टाइबेरियस का सत्ता-ग्रहण

रोड्स में रहते समय टाइबेरियस की अनेक प्रतिमाएँ नष्ट कर दी गई थीं अथवा उनका स्वरूप विकृत कर दिया गया था, किंतु रोम लौटने के बाद उन्हें पुनः स्थापित किया गया। इसके पश्चात उसे आर्मिनियस के विरुद्ध सेना की कमान सौंपी गई। आर्मिनियस वही जर्मनिक नेता था, जिसने 9 ईस्वी में ट्यूटोबर्ग वन के युद्ध में तीन रोमन सेनाओं का विनाश किया था। इस अभियान में टाइबेरियस सफल रहा और उसकी प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ गई। सुएटोनियस के अनुसार 10 से 12 ईस्वी तक जर्मेनिया में दो वर्षों के अभियान के बाद टाइबेरियस रोम लौटा और उसने अपनी विजय का उत्सव मनाया। उसके साथ वे सेनापति भी थे, जिन्हें विजय-चिह्न प्रदान किए गए थे। कैपिटोलियम जाने से पहले वह अपने रथ से उतरकर समारोह की अध्यक्षता कर रहे ऑगस्टस के चरणों में झुक गया।

ऑगस्टस के जीवन के अंतिम चरण में लगभग 13 ईस्वी में कॉन्सलों ने एक कानून पारित किया, जिसके द्वारा टाइबेरियस को ऑगस्टस के साथ संयुक्त रूप से साम्राज्य के प्रांतों का शासन करने तथा उसके साथ जनगणना कराने का अधिकार प्रदान किया गया। इस प्रकार टाइबेरियस को औपचारिक रूप से शासन-संबंधी अधिकारों में ऑगस्टस का सह-प्रिंसेप्स (सह-शासक) बना दिया गया, जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि ऑगस्टस की मृत्यु के बाद सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक संकट या अशांति के संपन्न होगा। धार्मिक अनुष्ठानों की समाप्ति के पश्चात वह पुनः इलिरिकम के लिए प्रस्थान कर गया।

कुछ ही समय बाद ऑगस्टस की बिगड़ती हुई स्वास्थ्य-स्थिति के कारण टाइबेरियस को तत्काल रोम वापस बुलाया गया। वहाँ पहुँचने पर उसने ऑगस्टस के साथ एक पूरा दिन एकांत में बिताया। इसके कुछ समय बाद 19 अगस्त 14 ईस्वी को अपने 76वें जन्मदिन से लगभग एक माह पूर्व ऑगस्टस का निधन हो गया। उसकी वसीयत के अनुसार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया और पूर्वनिर्धारित योजना के अनुरूप उसे देवत्व प्रदान किया गया। उत्तराधिकार की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित होने के कारण टाइबेरियस ने सीनेट के साथ औपचारिक राजनीतिक प्रक्रिया अपनाई और लगभग एक महीने तक स्वयं को सम्राट घोषित नहीं किया।

17 सितंबर 14 ईस्वी को टाइबेरियस ने अपनी स्थिति को वैधानिक रूप देने के लिए सीनेट की बैठक बुलाई। ऑगस्टस की भाँति उसने प्रिंसेप्स (प्रथम नागरिक) के रूप में शासन करने की स्वीकृति प्राप्त की और अपने पद की शक्तियों को स्वीकार किया। यद्यपि उसके पास पहले से ही प्रिंसेप्स की प्रशासनिक और राजनीतिक शक्तियाँ थीं, फिर भी उसने ऑगस्टस तथा पाटर पैट्रियाए (राष्ट्रपिता) की उपाधियाँ स्वीकार नहीं कीं और नागरिक मुकुट (सिविक क्राउन) धारण करने से भी इनकार कर दिया।

सम्राट के रूप में टाइबेरियस (14-37 ई.)

टाइबेरियस के शासन के प्रारंभिक वर्ष रोमन इतिहास में बुद्धिमत्तापूर्ण, संयमित और कुशल प्रशासन के लिए प्रसिद्ध हैं। यद्यपि उसने स्वयं को ऑगस्टस का उत्तराधिकारी स्वीकार करने में अनिच्छुक दिखाया, फिर भी सत्ता सँभालने के बाद उसने शीघ्र ही साम्राज्य पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। उसके सिंहासन का एकमात्र संभावित दावेदार अग्रिप्पा पोस्टुमस था, जिसकी उसके राज्यारोहण के तुरंत बाद हत्या कर दी गई। प्राचीन स्रोतों के अनुसार यह हत्या संभवतः टाइबेरियस के आदेश या उसकी मौन स्वीकृति से हुई थी। सत्ता की स्थिरता बनाए रखने में प्रेटोरियन गार्ड ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि राजनीतिक स्तर पर रोमन सीनेट उसके अधिकार के लिए सबसे बड़ा संभावित प्रतिद्वंद्वी बनी रही।

सत्ता को स्थिर करने के बाद टाइबेरियस ने व्यावहारिक और दूरदर्शी नीति अपनाई। उसने अनावश्यक विजय अभियानों से बचते हुए ऑगस्टस द्वारा स्थापित साम्राज्य की सीमाओं को सुरक्षित रखने पर अधिक ध्यान दिया। उसने सेना के अधिकारियों और प्रांतीय गवर्नरों का बिना कारण बार-बार स्थानांतरण नहीं किया, जिससे प्रशासन में स्थिरता बनी रही। उसने राजकोष के व्यय पर कठोर नियंत्रण रखा और वित्तीय अनुशासन बनाए रखा। परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु के समय शाही खजाना अत्यंत समृद्ध था। उसके शासनकाल में रोमन साम्राज्य की सीमाएँ सामान्यतः सुरक्षित रहीं, रोमन नौसेना को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया तथा आवश्यकता पड़ने पर विद्रोहों का कठोरता से दमन भी किया गया। 19 ईस्वी में रोम में हुई एक धोखाधड़ी की घटना के बाद उसने अनेक यहूदियों को राजधानी से निर्वासित कर दिया।

टाइबेरियस व्यक्तिगत सम्मान और राजकीय आडंबर से दूर रहना चाहता था। ऑगस्टस की तरह उसने स्वयं को राज्य का सेवक और प्रिंसेप्स (प्रथम नागरिक) के रूप में प्रस्तुत किया तथा अनेक अनावश्यक राजकीय सम्मानों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जैसे कि उसने अपने सम्मान में किसी नए महीने का नाम रखने की अनुमति नहीं दी। साथ ही, उसने यह भी प्रयास किया कि सीनेट स्वतंत्र रूप से कार्य करे और वह उसके कार्यों में न्यूनतम हस्तक्षेप करे। किंतु उसके आदेश प्रायः अस्पष्ट होते थे, जिससे सीनेट में लंबे समय तक बहस होती रहती थी और निर्णय लेने में विलंब होता था। दूसरी ओर, यद्यपि उसने औपचारिक सम्मान अस्वीकार किए, फिर भी शासन की वास्तविक शक्तियाँ अपने हाथों में बनाए रखीं। इस कारण सीनेट के अनेक अभिजात सदस्य उसकी नीति को विनम्रता के बजाय पाखंड मानते थे। रोमन इतिहासकार टैसिटस के अनुसार इसी कारण टाइबेरियस और सीनेट के बीच अविश्वास तथा राजनीतिक दूरी लगातार बढ़ती गई।

टाइबेरियस के शासनकाल में पैनोनिया और जर्मेनिया के विद्रोह

14 ईस्वी में ऑगस्टस की मृत्यु के तुरंत बाद पैनोनिया और जर्मेनिया में तैनात रोमन सेनाओं ने विद्रोह कर दिया। सैनिक लंबे समय से कम वेतन, लंबी सेवा अवधि, कठोर अनुशासन तथा ऑगस्टस द्वारा किए गए पुरस्कारों और बोनस के वादों को पूरा न किए जाने से असंतुष्ट थे। टाइबेरियस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अपने पुत्र ड्रूसस जूलियस सीज़र को पैनोनिया तथा अपने दत्तक पुत्र जर्मेनिकस को जर्मेनिया भेजा। ड्रूसस ने कठोर अनुशासन और राजनीतिक समझदारी से पैनोनिया का विद्रोह शांत किया, जबकि जर्मेनिकस ने सैनिकों का विश्वास पुनः प्राप्त करने के लिए उन्हें राइन नदी के पार जर्मनिक जनजातियों के विरुद्ध अभियान पर ले गया। उसने सैनिकों से आश्वासन दिया कि अभियान से प्राप्त युद्ध-लाभ उनके पुरस्कार के रूप में स्वीकार किए जाएँगे।

14 से 16 ईस्वी के बीच जर्मेनिकस ने जर्मानिया में कई सफल सैन्य अभियान चलाए। वह ट्यूटोबर्ग वन के उस युद्धस्थल तक पहुँचा जहाँ 9 ईस्वी में पब्लियस क्विंटिलियस वारस के नेतृत्व वाली तीन रोमन सेनाएँ नष्ट हो गई थीं। वहाँ उसने मृत रोमन सैनिकों के अवशेषों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया और जर्मनिक जनजातियों के विरुद्ध अभियान जारी रखा। इन अभियानों के दौरान उसने वारस द्वारा खोए गए तीन रोमन सैन्य ध्वजों (ईगल) में से दो को पुनः प्राप्त कर लिया, जबकि तीसरा ध्वज बाद में सम्राट क्लॉडियस के शासनकाल में प्राप्त हुआ।

जर्मेनिकस की इन सफलताओं से उसकी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता पूरे रोमन साम्राज्य में अत्यधिक बढ़ गई। यद्यपि टाइबेरियस ने अंततः जर्मानिया में आगे के अभियानों को रोककर राइन नदी को ही साम्राज्य की स्थायी सीमा बनाए रखने का निर्णय लिया, फिर भी जर्मेनिकस की सैन्य उपलब्धियों के सम्मान में 17 ईस्वी में रोम में उसे पूर्ण विजय-उत्सव (ट्रायम्फ) मनाने का अधिकार प्रदान किया गया। यह ऑगस्टस के शासनकाल के बाद रोम में आयोजित सबसे महत्त्वपूर्ण विजय-उत्सवों में से एक था।

टाइबेरियस के शासन में डेलाटोरेस (सूचनादाताओं) की प्रथा

टाइबेरियस के शासनकाल की सबसे विवादास्पद विशेषताओं में ‘डेलाटोरेस’ अर्थात् पेशेवर अभियोगकर्ताओं या सूचनादाताओं की प्रथा का विस्तार था। रोमन कानून के अनुसार धनी नागरिकों के अनेक अपराधों में भारी जुर्माना तथा संपत्ति की जब्ती का प्रावधान था। जब्त की गई संपत्ति का एक भाग उस व्यक्ति को भी मिलता था, जिसने अपराध की सूचना देकर अभियोग चलाया हो।

चूँकि राज्य की ओर से कोई स्थायी अभियोजक नियुक्त नहीं होता था, इसलिए कोई भी नागरिक स्वेच्छा से अभियोगकर्ता बन सकता था। परिणामस्वरूप अनेक लोगों ने इसे लाभदायक व्यवसाय बना लिया। अनेक मुकदमे अफवाहों या संदिग्ध प्रमाणों के आधार पर चलाए गए। ऐसी स्थिति में रोम का शायद ही कोई प्रतिष्ठित अथवा प्रभावशाली व्यक्ति ऐसा था, जिसे किसी भी समय इन अभियोगकर्ताओं के आरोपों का भय न हो।

जर्मेनिकस की मृत्यु और उसका प्रभाव

18 ईस्वी में जर्मेनिकस को साम्राज्य के पूर्वी भाग का सर्वोच्च अधिकार सौंपा गया। इससे पहले यही अधिकार मार्कस विप्सानियस अग्रिप्पा और टाइबेरियस को मिला था। इस नियुक्ति से लगा कि जर्मेनिकस ही टाइबेरियस का उत्तराधिकारी होगा। किंतु एक वर्ष के बाद ही उसकी मृत्यु हो गई। मरने पहले उसने सीरिया के गवर्नर ग्नेयस कैल्पुर्नियस पिसो पर उसे विष देने का आरोप लगाया था। पिसो लंबे समय से क्लॉडियन परिवार का समर्थक था और लिविया से विवाह के बाद युवा ऑक्टेवियन का सहयोगी बन गया था।  जर्मेनिकस की मृत्यु के बाद लगाए गए आरोपों ने नए प्रिंसेप्स टाइबेरियस को भी संदेह के घेरे में ला दिया। पिसो पर मुकदमा चलाया गया, किंतु मुकदमे के पूरा होने से पहले ही उसने आत्महत्या कर ली।

टाइबेरियस (Tiberius)
टाइबेरियस के समय रोमन साम्राज्य का विस्तार
ड्रूसस की मृत्यु और टाइबेरियस का कैप्री प्रस्थान

22 ईस्वी में टाइबेरियस ने अपने पुत्र ड्रूसस जूलियस सीज़र के साथ अपनी ट्रिब्यूनिसिया पोतेस्तास (ट्रिब्यूनीय शक्ति) साझा की। किंतु 23 ईस्वी में ड्रूसस की भी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। यद्यपि प्राचीन स्रोतों के अनुसार टाइबेरियस अपने पुत्र के अत्यधिक निकट नहीं था, फिर भी इस घटना से उसे गहरा आघात पहुँचा। इसके बाद टाइबेरियस की शासन-कार्य में रुचि कम हो गई और प्रशासन का अधिकांश दायित्व प्रेटोरियन गार्ड के प्रीफेक्ट लुसियस एलियस सेजानस को सौंप दिया। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी हो गई कि टाइबेरियस केवल नाममात्र का सम्राट रह गया और वास्तविक प्रशासन में सेजानस का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया। 26 ईस्वी में वह कैप्री द्वीप पर स्थित उस शाही विला-समूह में रहने चला गया, जो उसे ऑगस्टस से विरासत में मिला था।

कैप्री में टाइबेरियस का जीवन

27 ईस्वी में लगभग 67 वर्ष की आयु में टाइबेरियस रोम छोड़कर दक्षिणी इटली की यात्रा पर निकला। यात्रा के दौरान वह कैप्री द्वीप पहुँचा। प्रारंभ में उसका उद्देश्य वहाँ कुछ समय के लिए ठहरना था, किंतु वह फिर कभी रोम वापस नहीं लौटा। टाइबेरियस के जीवन के अंतिम वर्षों से ही उसके बारे में अनेक भयावह कथाएँ प्रचलित हुईं। प्राचीन स्रोतों के अनुसार इस समय तक उसका स्वास्थ्य भी गिर चुका था और उसके चेहरे पर चर्मरोग के कारण अनेक घाव हो गए थे। कैप्री में उसने अनेक भव्य विला बनवाए, जिनमें शाही निवास, सेवकों, सैनिकों तथा अन्य अधिकारियों की व्यवस्था थी। वहाँ उसके साथ दार्शनिक, ज्योतिषी, संगीतज्ञ, कलाकार, सेवक तथा अनेक दरबारी भी रहते थे।

टाइबेरियस (Tiberius)
कैपरी द्वीप पर स्थित विला जोविस के खंडहर, जहाँ टाइबेरियस ने अपने जीवन के आखिरी साल बिताए और साम्राज्य का नियंत्रण प्रीफ़ेक्ट लूसियस एलीयस सेजानस के हाथों में सौंप दिया था।

विशेषकर सुएटोनियस और कुछ अन्य प्राचीन लेखकों ने कैप्री में उसके जीवन का अत्यंत सनसनीपूर्ण और क्रूर चित्रण प्रस्तुत किया है। इन विवरणों में अनेक प्रकार की कठोर सजाओं, हत्याओं तथा विलासपूर्ण जीवन का वर्णन मिलता है। आधुनिक इतिहासकारों के अनुसार इन कथाओं के अनेक विवरण अतिरंजित अथवा विरोधी लेखकों के दृष्टिकोण से प्रभावित हो सकते हैं।

सेजानस का उत्थान और टाइबेरियस

लुसियस एलियस सेजानस लगभग दो दशकों तक शाही परिवार की सेवा से जुड़ा रहा। 15 ईस्वी में वह प्रेटोरियन गार्ड का प्रीफेक्ट नियुक्त किया गया था। 17 या 18 ईस्वी के आसपास टाइबेरियस ने नगर की सुरक्षा के लिए नियुक्त प्रेटोरियन गार्ड को एक ही शिविर में संगठित कर रोम नगर के भीतर स्थापित कर दिया था, जिससे सेजानस के प्रत्यक्ष नियंत्रण में लगभग 6,000 से 9,000 सैनिक आ गए थे। समय के साथ टाइबेरियस शासन-कार्य और सार्वजनिक जीवन से दूर होता गया और प्रशासन के संचालन के लिए ऑगस्टस द्वारा स्थापित सीमित शाही सचिवालय, विशेष रूप से सेजानस और प्रेटोरियन गार्ड पर निर्भर होता गया। ड्रूसस की मृत्यु के बाद टाइबेरियस की दृष्टि में सेजानस का महत्त्व और बढ़ गया। वह उसे अपना ‘सोशियस लेबोरुम’ (मेरे कार्यों का सहयोगी) कहकर संबोधित करता था। जैसे-जैसे टाइबेरियस रोम के सार्वजनिक जीवन से दूर होता गया, सेजानस की शक्ति और प्रतिष्ठा बढ़ती गई। टाइबेरियस के कैप्री चले जाने के बाद राज्य-प्रशासन तथा रोम नगर का वास्तविक नियंत्रण सेजानस के हाथों में आ गया।

यद्यपि सेजानस की स्थिति औपचारिक रूप से उत्तराधिकारी की नहीं थी, फिर भी 25 ईस्वी में उसने टाइबेरियस की भतीजी लिविल्ला से विवाह की अनुमति माँगी। किंतु विरोध के कारण उसने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया। प्रेटोरियन गार्ड के साथ-साथ शाही डाक-व्यवस्था भी सेजानस के नियंत्रण में थी। परिणामस्वरूप रोम से टाइबेरियस तक तथा टाइबेरियस से रोम तक पहुँचने वाली अधिकांश सूचनाएँ उसी के माध्यम से गुजरती थीं।

सेजानस ने रोम में अनेक सीनेटरों तथा समृद्ध अश्वारोही वर्ग (इक्वेस्ट्रियन वर्ग) के सदस्यों के विरुद्ध राजद्रोह के मुकदमों की एक श्रृंखला आरंभ की और अभियोगों के माध्यम से अपने राजनीतिक विरोधियों को हटाना शुरू किया। 30 ईस्वी में जर्मेनिकस की विधवा एग्रीपिना द एल्डर तथा उसके दोनों पुत्रों—नीरो जूलियस सीज़र और ड्रूसस सीज़र को गिरफ्तार कर निर्वासित कर दिया गया। बाद में तीनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। सेजानस द्वारा जर्मेनिकस के परिवार के इस दमन के बाद केवल कैलिगुला, एग्रीपिना द यंगर, जूलिया ड्रूसिल्ला और जूलिया लिविल्ला ही जीवित बचे।

31 ईस्वी में टाइबेरियस की अनुपस्थिति में सेजानस ने कॉन्सल का पद सँभाला और सत्ता प्राप्त करने के लिए अपना प्रयास तेज कर दिया। ऐसा प्रतीत होता है कि उसने गुप्त रूप से जूलियन परिवार से जुड़े प्रभावशाली कुलों का समर्थन प्राप्त करने का प्रयास किया। उसका उद्देश्य स्वयं को जूलियन वंश से जोड़कर दत्तक जूलियन के रूप में प्रिंसेप्स अथवा संभावित संरक्षक (रीजेंट) के पद तक पहुँचना था। बाद में लिविल्ला भी इस षड्यंत्र में सम्मिलित हो गई, जो कई वर्षों से सेजानस की प्रेमिका थी।

सेजानस का पतन

ऐसा प्रतीत होता है कि एक षड्यंत्र के अंतर्गत सेजानस और लिविल्ला ने जूलियन गुट के समर्थन से टाइबेरियस को सत्ता से हटाने की योजना बनाई। उनका उद्देश्य या तो स्वयं प्रिंसिपेट पर अधिकार करना था अथवा युवा टाइबेरियस गेमेलस या संभवतः कैलिगुला के संरक्षक (रीजेंट) के रूप में शासन करना था। जो भी उनके रास्ते में आया, उस पर देशद्रोह का आरोप लगाया कर दंडित किया गया।

31 ईस्वी में सेजानस को सीनेट की एक बैठक में बुलाया गया। वहाँ टाइबेरियस का एक पत्र पढ़कर सुनाया गया, जिसमें सेजानस की कठोर आलोचना की गई थी और उसे तत्काल मृत्युदंड देने का आदेश दिया गया था। सेजानस पर मुकदमा चलाया गया और एक सप्ताह के भीतर उसे तथा उसके कई सहयोगियों को मृत्युदंड दे दिया गया। प्रेटोरियन गार्ड के प्रधान के रूप में उसकी जगह नेवियस सुतोरियस मैक्रो को नियुक्त किया गया।

टाइबेरियस के शासनकाल में देशद्रोह के मुकदमे

टैसिटस के अनुसार सेजानस की मृत्यु के बाद भी देशद्रोह के मुकदमों का क्रम जारी रहा। इन अभियोगों का सबसे अधिक प्रभाव उन परिवारों पर पड़ा, जिनके जूलियन वंश से राजनीतिक संबंध थे। यहाँ तक कि शाही अधिकारियों को भी नहीं छोड़ा गया। जो भी सेजानस का समर्थक था अथवा उसकी योजनाओं से किसी भी प्रकार जुड़ा हुआ समझा गया, उसके विरुद्ध तत्काल मुकदमा चलाकर उसे मृत्युदंड दिया गया और उसकी संपत्ति जब्त कर ली गई।

टैसिटस के अनुसार ‘फाँसियाँ उसके क्रोध को और अधिक भड़का रही थीं। उसने उन सभी व्यक्तियों को मृत्युदंड देने का आदेश दिया, जो सेजानस के साथ मिलीभगत के आरोप में कारागार में बंद थे। वहाँ अकेले या समूहों में, प्रत्येक आयु और वर्ग के असंख्य लोग मृत पड़े थे। उनके संबंधियों और मित्रों को उनके पास जाने, उनके लिए शोक मनाने या उन्हें अधिक देर तक देखने तक की अनुमति नहीं थी। चारों ओर जासूस नियुक्त थे, जो शोक व्यक्त करने वालों पर निगरानी रखते थे। अंततः शवों को टाइबर नदी में फेंक दिया जाता था, जहाँ उन्हें जलाने अथवा स्पर्श करने का कोई साहस भी नहीं करता था।’

सेजानस के साथ उसके संबंधों तथा शासन के अंतिम वर्षों में चले देशद्रोह के मुकदमों ने टाइबेरियस की छवि और प्रतिष्ठा को स्थायी रूप से क्षति पहुँचाई। सेजानस के पतन के बाद टाइबेरियस का रोम लौटना लगभग समाप्त हो गया। सुएटोनियस के अनुसार वह अत्यधिक संदेहग्रस्त और मानसिक रूप से अस्थिर हो गया तथा अपने पुत्र की मृत्यु के शोक में समय बिताने लगा। इसी दौरान पार्थिया ने सीमित आक्रमण किया तथा डैसियन और जर्मनिक जनजातियों ने भी रोमन सीमावर्ती क्षेत्रों पर आक्रमण किए।

टाइबेरियस ने अपने उत्तराधिकार की व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए बहुत कम प्रयास किए। सेजानस के प्रभाव के कारण जूलियन वंश और उसके समर्थकों की राजनीतिक शक्ति पहले ही कमज़ोर हो चुकी थी तथा उसके संभावित उत्तराधिकारियों की मृत्यु हो चुकी थी। ऐसी स्थिति में जर्मेनिकस का एकमात्र जीवित पुत्र कैलिगुला तथा टाइबेरियस का अपना पौत्र टाइबेरियस गेमेलस ही सम्राट पद के प्रमुख दावेदार थे। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में टाइबेरियस ने कैलिगुला को क्वेस्टर नियुक्त करने का प्रयास किया, जिससे उसे संभावित उत्तराधिकारी के रूप में कुछ वैधानिक आधार मिल सके। दूसरी ओर, टाइबेरियस गेमेलस अभी किशोर था और तत्काल शासन करने के योग्य नहीं था।

टाइबेरियस के निर्माण कार्य

टाइबेरियस ने अपने शासनकाल में भव्य निर्माणों की अपेक्षा उपयोगी एवं सीमित निर्माण कार्यों को अधिक महत्त्व दिया। रोम और नेपल्स के मध्य समुद्री तट पर स्थित स्पर्लोंगा में निर्मित उसका विशाल विला आज भी उसके स्थापत्य संरक्षण का प्रमुख उदाहरण है, जहाँ की प्राकृतिक गुफा से प्रसिद्ध स्पर्लोंगा मूर्तियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। रोम के पैलेटाइन पर्वत पर स्थित उसका राजमहल तथा मैकेनास के उद्यानों में उसके द्वारा कराए गए जीर्णोद्धार के प्रमाण भी प्राप्त होते हैं। उसने दिव्य घोषित किए गए ऑगस्टस के सम्मान में एक मंदिर का निर्माण आरंभ कराया और पोम्पी के रंगमंच के पुनर्निर्माण का कार्य भी प्रारंभ किया, यद्यपि ये दोनों निर्माण उसके जीवनकाल में पूर्ण नहीं हो सके और बाद में कैलिगुला के शासनकाल में संपन्न हुए। इसके अतिरिक्त, कैप्री द्वीप पर स्थित विला जोविस उसका सबसे प्रसिद्ध निवास था। प्राचीन इतिहासकार टैसिटस के अनुसार कैप्री में उसके कुल बारह विला थे, जिनमें विला जोविस सबसे विशाल और भव्य था। धार्मिक क्षेत्र में भी उसने दिव्य ऑगस्टस की उपासना के लिए ‘सोडालेस ऑगस्टालेस’ नामक पुरोहित-मंडल की स्थापना की तथा केवल स्मिर्ना में उसके जीनियस (संरक्षक आत्मा) और रोमन सीनेट के संयुक्त सम्मान में एक मंदिर के निर्माण की अनुमति प्रदान की।

टाइबेरियस (Tiberius)
रोम और नेपल्स के बीच तट पर स्थित स्पर्लोंगा में टाइबेरियस के विला के अवशेष
टाइबेरियस की मृत्यु और अंतिम संस्कार

टाइबेरियस की मृत्यु 78वें जन्मदिन से कुछ महीने पहले 16 मार्च 37 ईस्वी को मिसेनम में हुई। यद्यपि प्राचीन स्रोत उसकी मृत्यु की तिथि और स्थान पर सहमत हैं, किंतु उसकी मृत्यु की परिस्थितियों के समबंध में उनके विवरण अलग-अलग हैं। टैसिटस के अनुसार एक समय ऐसा प्रतीत हुआ कि सम्राट की मृत्यु हो चुकी है और उसके उत्तराधिकारी के रूप में कैलिगुला को बधाइयाँ दी जाने लगीं। तभी यह समाचार मिला कि टाइबेरियस को पुनः चेतना आ गई है और उसकी शक्ति लौट रही है। यह सुनकर उपस्थित लोग सम्राट के क्रोध के भय से वहाँ से भाग गए। टैसिटस आगे लिखता है कि इस अवसर का लाभ उठाकर प्रेटोरियन प्रीफेक्ट नेवियस सुतोरियस मैक्रो ने टाइबेरियस का उसके बिस्तर से गला घोंट दिया।

सुएटोनियस के अनुसार बीमारी से कुछ स्वस्थ होने के बाद टाइबेरियस ने अपने सेवकों को अपने पास न पाकर उठने का प्रयास किया, किंतु उसी समय उसकी मृत्यु हो गई। सुएटोनियस ने अन्य प्रचलित अफवाहों का भी उल्लेख किया है, जिनमें यह कहा गया कि कैलिगुला ने उसे विष दिया, उसे भोजन से वंचित रखा अथवा तकिए से उसका गला घोंट दिया। इसके विपरीत, सेनेका द एल्डर का मत था कि टाइबेरियस की मृत्यु स्वाभाविक थी।

टाइबेरियस (Tiberius)
टाइबेरियस की मृत्यु

कैसियस डियो के अनुसार कैलिगुला को भय था कि टाइबेरियस पुनः स्वस्थ हो जाएगा। इसलिए उसने सम्राट की भोजन की इच्छा को अस्वीकार कर यह कहा कि उसे भोजन नहीं, बल्कि गर्मी की आवश्यकता है। इसके बाद मैक्रो की सहायता से उसने बिस्तर से उसका गला घोंट दिया।

टाइबेरियस की मृत्यु के बाद सीनेट ने उसे वह दिव्य सम्मान प्रदान करने से इनकार कर दिया, जो ऑगस्टस को दिए गए थे। उस समय रोम की जनता सड़कों पर ‘टाइबेरियस को टाइबर नदी में फेंक दो’ के नारे लगा रही थी। यह उस प्रथा की ओर संकेत था, जिसके अनुसार अपराधियों के शवों को दफनाने या उनका दाह संस्कार करने के स्थान पर टाइबर नदी में फेंक दिया जाता था। फिर भी, टाइबेरियस का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया और उसकी अस्थियाँ ऑगस्टस के मकबरे में रखी गईं।

अपनी वसीयत में टाइबेरियस ने कैलिगुला और टाइबेरियस गेमेलस को संयुक्त उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। किंतु प्रिंसेप्स बनने के बाद कैलिगुला ने सबसे पहले टाइबेरियस की इस वसीयत को निरस्त कर दिया।

टाइबेरियस का व्यक्तित्व

टाइबेरियस स्वभाव से गंभीर, संयमी, संकोची और आत्मनियंत्रित व्यक्ति था। उसमें परिस्थितियों का व्यावहारिक ढंग से आकलन करने और उनके अनुसार निर्णय लेने की असाधारण क्षमता थी। शाही वातावरण में उसका पालन-पोषण हुआ तथा साम्राज्य के श्रेष्ठ शिक्षकों से उसे शिक्षा प्राप्त हुई। परिणामस्वरूप उसने कम आयु में ही प्रशासन, राजनीति, सैन्य संगठन और कूटनीति की गहरी समझ विकसित कर ली। किशोरावस्था तक वह विदेशी शासकों के साथ राजकीय समारोहों में भाग लेने, धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करने तथा सार्वजनिक जीवन की औपचारिकताओं का अभ्यस्त हो चुका था। यद्यपि उसे यह निश्चित नहीं था कि वह कभी सम्राट बनेगा, फिर भी वह स्वयं को एक सफल सेनापति और उच्च प्रशासनिक अधिकारी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहा।

प्राचीन लेखक सुएटोनियस और वेल्लेयस पैटरकुलस के अनुसार युवावस्था में टाइबेरियस लंबी कद-काठी, चौड़े कंधों और सुदृढ़ शरीर वाला प्रभावशाली व्यक्ति था। उसका रंग गोरा, आँखें बड़ी तथा शरीर बलिष्ठ था। वह बाएँ हाथ से कार्य करता था और आयु बढ़ने पर उसके सिर के आगे का भाग गंजा होने लगा। सुएटोनियस के अनुसार वह सिर के आगे और दोनों ओर के बाल छोटे तथा पीछे के बाल अपेक्षाकृत लंबे रखता था, जो क्लॉडियन वंश की पारिवारिक परंपरा मानी जाती थी। उसकी वाणी धीमी, गंभीर और विचारपूर्ण थी, जबकि बोलते समय वह हाथों की मुद्राओं का अधिक प्रयोग करता था। सुएटोनियस ने यह भी उल्लेख किया है कि युवावस्था से ही उसके चेहरे पर मुहाँसे निकलते रहते थे।

टाइबेरियस के स्वास्थ्य और रूप-रंग के संबंध में प्राचीन स्रोतों में भिन्न-भिन्न विवरण मिलते हैं। टैसिटस और कैसियस डियो के अनुसार सम्राट बनने तक वह काफी गंजा हो चुका था तथा उसके चेहरे पर एक गंभीर त्वचा-रोग के लक्षण दिखाई देते थे। टैसिटस का मत है कि इसी कारण उसने सार्वजनिक समारोहों में चुंबन देने की प्रथा पर रोक लगा दी और संभवतः अपने जीवन के उत्तरार्ध में कैप्री में एकांतवास को प्राथमिकता दी। इसके विपरीत सुएटोनियस का कहना है कि टाइबेरियस सामान्यतः स्वस्थ और शारीरिक रूप से सक्षम था। इसलिए उसके स्वास्थ्य के संबंध में उपलब्ध विवरणों को सावधानी से देखना चाहिए, क्योंकि वे प्राचीन लेखकों के व्यक्तिगत दृष्टिकोण और पूर्वाग्रहों से भी प्रभावित हो सकते हैं। समग्र रूप से टाइबेरियस एक अनुशासित, गंभीर, व्यावहारिक और आत्मसंयमी व्यक्तित्व का धनी था, जिसकी सबसे बड़ी विशेषता उसकी प्रशासनिक दक्षता, सैन्य नेतृत्व और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता थी।

टाइबेरियस के शासन का इतिहास-लेखन

टाइबेरियस के शासनकाल के अध्ययन के लिए प्राचीन साहित्यिक स्रोतों में टैसिटस, सुएटोनियस, कैसियस डियो और वेल्लेयस पैटरकुलस सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। इनके अतिरिक्त प्लिनी द एल्डर, स्ट्रैबो, सेनेका द एल्डर तथा अलेक्ज़ान्द्रिया के फिलो की रचनाओं से भी उपयोगी जानकारी प्राप्त होती है। स्वयं टाइबेरियस ने भी एक आत्मकथा लिखी थी, किंतु वह अब उपलब्ध नहीं है। इन स्रोतों में टैसिटस की ‘एनल्स’ टाइबेरियस के शासन का सबसे विस्तृत और प्रभावशाली विवरण प्रस्तुत करती है, यद्यपि उसका दृष्टिकोण सीनेट समर्थक होने के कारण टाइबेरियस के प्रति प्रायः आलोचनात्मक है। इसके विपरीत, सुएटोनियस ने उसकी जीवनी में अनेक रोचक प्रसंगों, निजी जीवन और दरबारी घटनाओं का वर्णन किया है, जिनमें कई स्थानों पर अतिरंजना का भी समावेश है। वेल्लेयस पैटरकुलस, जो टाइबेरियस का समकालीन तथा उसके अधीन कार्य कर चुका था, उसका अपेक्षाकृत प्रशंसात्मक चित्र प्रस्तुत करता है, जबकि कैसियस डियो ने बाद के दृष्टिकोण से उसके शासन का संतुलित विवरण दिया है। प्लिनी द एल्डर ने टाइबेरियस के गंभीर और उदास स्वभाव के कारण उसे ‘सबसे अधिक उदास स्वभाव वाला व्यक्ति’ बताया है। इसके अतिरिक्त, सुसमाचारों, यहूदी-ईसाई ग्रंथों तथा फिलो के लेखों से टाइबेरियस के शासनकाल की धार्मिक और राजनीतिक परिस्थितियों की जानकारी मिलती है, विशेषकर यीशु मसीह के समय और जूदेआ के प्रशासन के संबंध में। इन सभी स्रोतों की प्रवृत्तियाँ और पूर्वाग्रह भिन्न-भिन्न होने के कारण आधुनिक इतिहासकारों ने टाइबेरियस के व्यक्तित्व और शासन का मूल्यांकन बड़ी सावधानी से करते हैं।

टाइबेरियस का ऐतिहासिक मूल्यांकन

यद्यपि प्राचीन रोमन इतिहासकारों ने टाइबेरियस की नकारात्मक छवि प्रस्तुत की है और उसे एक क्रूर और प्रतिशोधी सम्राट के रूप में चित्रित किया है, जबकि आधुनिक इतिहासकार एडवर्ड टोगो सैल्मन के अनुसार टाइबेरियस के पूरे 22 वर्ष के शासनकाल में देशद्रोह के आरोप में केवल लगभग 52 व्यक्तियों पर मुकदमे चलाए गए, जिनमें से लगभग आधे लोग दंड से बच गए। जिन कुछ निर्दोष व्यक्तियों को दंड मिला, वे सम्राट की व्यक्तिगत क्रूरता के नहीं, बल्कि सीनेट के शिकार थे। सुएटोनियस ने भी टाइबेरियस के शासन के प्रारंभिक वर्षों की उपलब्धियों, उसकी प्रशासनिक क्षमता, सादगी तथा मितव्ययिता की स्पष्ट रूप से प्रशंसा की है। टाइबेरियस के कैप्री द्वीप पर प्रवास के दौरान उसके निजी जीवन को लेकर अनेक अफवाहें फैलीं और सुएटोनियस ने उसके संबंध में यौन विकृतियों, बाल-उत्पीड़न, क्रूरता तथा विशेष रूप से व्यामोह (पैरानोइया) जैसी कथाओं का उल्लेख किया है, किंतु आधुनिक विद्वान इन विवरणों को अतिरंजित मानते हैं।

वास्तव में, टाइबेरियस ने महँगे और विस्तारवादी युद्धों के स्थान पर पहले से स्थापित साम्राज्य को सुदृढ़ करने की नीति अपनाई। उसकी मृत्यु के समय शाही कोष में लगभग तीन अरब सेस्टर्स संचित थे। उसने कूटनीति और सैन्य शक्ति के संतुलित उपयोग द्वारा सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की तथा छोटे-छोटे संघर्षों में अनावश्यक हस्तक्षेप से परहेज किया। परिणामस्वरूप रोमन साम्राज्य अधिक स्थिर और संगठित हुआ तथा ऑगस्टस द्वारा स्थापित साम्राज्यिक संस्थाएँ लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहीं। यदि टाइबेरियस ने इस शासन-व्यवस्था को स्थिर आधार न दिया होता, तो संभवतः रोम का बाद का इतिहास उतना विस्तृत और दीर्घकालिक न होता।

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