गाइअस प्लिनिअस सेकुंडस (लगभग 23/24–79 ई.)
मुख्य लेख : रोमन सभ्यता
गाइअस प्लिनिअस सेकुंडस, जिन्हें सामान्यतः प्लिनी द एल्डर कहा जाता है, प्रारंभिक रोमन साम्राज्य के प्रमुख लेखक, प्रकृतिवेत्ता, विद्वान, सैन्य एवं नौसैनिक अधिकारी तथा प्रशासक थे। उनका जन्म लगभग 23 या 24 ईस्वी में नोवुम कोमुम (कोमो, इटली) में हुआ था। 79 ईस्वी में वेसुवियस ज्वालामुखी के विनाशकारी विस्फोट के दौरान स्टाबिए में उनकी मृत्यु हुई। वे सम्राट वेस्पासियन के निकट सहयोगी रहे और साम्राज्य के विभिन्न सैन्य तथा प्रशासनिक पदों पर कार्यरत रहे। उनकी प्रसिद्धि मुख्यतः उनके विशाल विश्वकोशीय ग्रंथ ‘नेचुरालिस हिस्टोरिया’ के कारण है।
परिवार और प्रारंभिक जीवन
प्लिनी एक समृद्ध रोमन अश्वारोही परिवार से संबंधित थे। उनके पिता का नाम गाइअस प्लिनिअस सेलर और माता का नाम मार्सेला बताया जाता है, यद्यपि उनके पारिवारिक जीवन के संबंध में उपलब्ध प्रमाण सीमित हैं। उनका परिवार कोमो क्षेत्र से घनिष्ठ रूप से जुड़ा था। प्लिनी के जन्मस्थान को लेकर वेरोना और कोमो दोनों के पक्ष में मत प्रस्तुत किए गए हैं, लेकिन आधुनिक विद्वान सामान्यतः कोमो को अधिक संभावित जन्मस्थान मानते हैं। स्वयं प्लिनी के लेखन में वेरोना के कवि कैटुलस को व्यापक क्षेत्र का हमवतन बताया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्लिनी स्वयं को वेरोना का नागरिक नहीं मानते थे। कोमो में उनके सम्मान में स्थापित स्मारक और अभिलेख भी उनके इस संबंध को पुष्ट करते हैं।
प्लिनी की एक बहन थी, जिनका विवाह कैसिली परिवार में हुआ था। उन्हीं से प्रसिद्ध प्लिनी द यंगर का जन्म हुआ, इसलिए प्लिनी द एल्डर उनके मामा थे। उन्होंने स्वयं विवाह नहीं किया और उनकी कोई संतान नहीं थी। उनकी मृत्यु के बाद उनके भतीजे ने उनकी संपत्ति और नाम दोनों प्राप्त किए।
शिक्षा और प्रारंभिक सार्वजनिक जीवन
प्लिनी ने रोम में कानून और वक्तृत्व-कला का अध्ययन किया। वहाँ उन्हें साहित्यकारों, विद्वानों और राजनेताओं के संपर्क में आने का अवसर मिला। यद्यपि विधि और वक्तृत्व उनके औपचारिक अध्ययन के प्रमुख विषय थे, उनकी बौद्धिक रुचि शीघ्र ही इतिहास, भूगोल, प्राकृतिक घटनाओं, चिकित्सा, कृषि, तकनीक और सैन्य विषयों तक विस्तृत हो गई। व्यापक ज्ञान को एकत्र करने और व्यवस्थित करने की यही प्रवृत्ति आगे चलकर उनकी प्रमुख कृति नेचुरालिस हिस्टोरिया की आधारभूमि बनी।
सैन्य सेवा
जर्मेनिया में प्रारंभिक सेवा
लगभग 46 ईस्वी में प्लिनी ने रोमन सेना में सैन्य सेवा आरंभ की। अश्वारोही वर्ग के युवाओं के लिए सैन्य सेवा सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक उन्नति का महत्त्वपूर्ण माध्यम थी। उनकी प्रारंभिक नियुक्ति जर्मेनिया इन्फीरियर में हुई, जहाँ उन्होंने सेनापति ग्नेअस डोमिटियस कोरबुलो के अधीन प्रिफेक्टस कोहोर्टिस के रूप में कार्य किया।
47 ईस्वी में उन्होंने चौसी लोगों के विरुद्ध सैन्य अभियान में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने मास और राइन नदियों के बीच नहर-निर्माण जैसी सैन्य-अभियांत्रिकी गतिविधियों को भी देखा। इसके बाद उनका स्थानांतरण जर्मेनिया सुपीरियर में हुआ, जहाँ वे पब्लियस पोंपोनियस सेकुंडस के अधीन सैन्य ट्रिब्यून बने। पोंपोनियस स्वयं साहित्य और विद्या में रुचि रखते थे और उनके साथ प्लिनी के घनिष्ठ संबंध बने। इस संबंध ने प्लिनी के बौद्धिक जीवन को भी प्रभावित किया।
लगभग 50 ईस्वी में उन्होंने चैट्टी जनजाति के विरुद्ध अभियान में भाग लिया। बाद में जर्मेनिया इन्फीरियर लौटने पर उन्हें प्रिफेक्टस आले के पद पर नियुक्त किया गया। वे लगभग 480 सैनिकों वाली घुड़सवार इकाई के कमांडर थे। उनकी सेवा का प्रमुख केंद्र राइन के निकट स्थित कास्ट्रा वेटेरा था। वहाँ से प्राप्त एक अलंकृत सैन्य पदक (फलेरा) पर उनका नाम अंकित है, जो उनकी सैन्य सेवा का महत्त्वपूर्ण अभिलेखीय प्रमाण है।
जर्मेनिया में बिताए वर्षों ने प्लिनी को सैन्य जीवन के साथ-साथ वहाँ के भूगोल, प्राकृतिक पर्यावरण, जनजातीय समाज और तकनीकी गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किया। बाद में उन्होंने इन अनुभवों का उपयोग अपने ऐतिहासिक और प्राकृतिक-विज्ञान संबंधी लेखन में किया।
नीरो के शासनकाल में अध्ययन और लेखन
सैन्य सेवा के बाद प्लिनी ने कुछ समय सक्रिय प्रशासनिक जीवन से दूरी बनाए रखी और अध्ययन, वकालत, लेखन तथा अनुसंधान में ध्यान लगाया। नीरो के शासनकाल के राजनीतिक वातावरण में उन्होंने अपेक्षाकृत सुरक्षित विषयों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। इस अवधि में उन्होंने कई रचनाएँ लिखीं। डे इयाकुलेशियोने एक्वेस्ट्रि घुड़सवार सेना द्वारा भाला-प्रयोग की तकनीक से संबंधित कृति थी। पोंपोनियस सेकुंडस की जीवनी में उनके पूर्व सैन्य कमांडर के जीवन और सेवाओं का वर्णन था। बेल्ला जर्मेनिए बीस पुस्तकों में रचित जर्मेनिया के युद्धों का इतिहास था। स्टूडियोसस छह पुस्तकों में वक्तृत्व-कला के प्रशिक्षण से संबंधित थी, जबकि डुबिई सेर्मोनिस आठ पुस्तकों में भाषा के उचित और शुद्ध प्रयोग पर केंद्रित थी। इनमें से अधिकांश रचनाएँ अब उपलब्ध नहीं हैं और उनके विषय में जानकारी बाद के लेखकों के उद्धरणों तथा संदर्भों से प्राप्त होती है।
वेस्पासियन के अधीन प्रशासनिक सेवा
68 ईस्वी में नीरो के पतन और 69 ईस्वी के राजनीतिक संघर्ष के बाद वेस्पासियन सत्ता में आए। उनके शासनकाल में प्लिनी पुनः सक्रिय प्रशासनिक सेवा में लौटे और साम्राज्य के विभिन्न प्रांतों में सम्राट के प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया।
गैलिया नारबोनेंसिस
लगभग 70 ईस्वी के आसपास प्लिनी ने गैलिया नारबोनेंसिस में प्रोक्यूरेटर के रूप में सेवा की। इस समृद्ध पश्चिमी प्रांत की कृषि, आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय परिस्थितियों का उल्लेख उनकी नेचुरालिस हिस्टोरिया में मिलता है।
अफ्रीका प्रांत
प्लिनी ने अफ्रीका प्रांत में भी प्रशासनिक पद पर कार्य किया। उन्होंने उत्तरी अफ्रीका के भूगोल, कृषि और प्राकृतिक पर्यावरण का निरीक्षण किया। उन्होंने टकापे (आधुनिक गैबेस) के उपजाऊ तटीय क्षेत्र और वहाँ की कृषि-व्यवस्था का विशेष उल्लेख किया।
हिस्पानिया टैराकोनेन्सिस
हिस्पानिया टैराकोनेन्सिस में प्लिनी की सेवा अपेक्षाकृत अधिक प्रमाणित है। यहाँ उन्होंने विभिन्न जनसमुदायों, नागरिक अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित सूचनाएँ एकत्र कीं। उन्होंने एस्टुरिया और गैलेसिया के क्षेत्रों तथा वहाँ स्थित स्वर्ण-खानों का निरीक्षण किया।
विशेष रूप से लास मेडुलास की स्वर्ण-खनन प्रणाली का उनका विवरण प्राचीन तकनीकी इतिहास के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने जल के दबाव से चट्टानों को तोड़ने, भूमिगत सुरंगों के निर्माण तथा खनन की अन्य तकनीकों का विस्तृत वर्णन किया।
गैलिया बेल्जिका
गैलिया बेल्जिका को प्लिनी की संभावित अंतिम प्रांतीय नियुक्तियों में माना जाता है। इसकी राजधानी ऑगस्टा ट्रेवेरोरम (आधुनिक ट्रायर) थी। उन्होंने इस क्षेत्र की जलवायु, कृषि और प्राकृतिक परिस्थितियों का उल्लेख किया तथा अत्यधिक ठंड से फसलों को होने वाली क्षति और पुनः बुवाई से प्राप्त उपज का वर्णन किया।
वेस्पासियन से संबंध और दिनचर्या
प्लिनी का सम्राट वेस्पासियन के साथ निकट संबंध था। उनके भतीजे प्लिनी द यंगर के अनुसार, वे अत्यंत अनुशासित जीवन जीते थे। वे प्रातः बहुत जल्दी उठते, सम्राट से मिलते, प्रशासनिक कार्य करते और शेष समय अध्ययन तथा लेखन में लगाते थे। वे बहुत कम सोते थे और भोजन, यात्रा तथा विश्राम के समय को भी अध्ययन के लिए उपयोग करते थे।
रोम वापसी और मिसेनम में नियुक्ति
लगभग 75–76 ईस्वी के आसपास प्लिनी रोम लौटे। 77 ईस्वी में उनकी प्रमुख कृति नेचुरालिस हिस्टोरिया की प्रथम पुस्तक सम्राट टाइटस को समर्पित की गई। इसके बाद उन्हें मिसेनम स्थित रोमन नौसैनिक बेड़े का कमांडर नियुक्त किया गया। उनकी बहन और भतीजा भी इसी क्षेत्र में रहते थे। नौसैनिक दायित्वों के बावजूद उन्होंने अध्ययन और लेखन जारी रखा। 23 जून 79 ईस्वी को वेस्पासियन की मृत्यु हुई। इसके लगभग दो महीने बाद वेसुवियस के विनाशकारी विस्फोट में प्लिनी की मृत्यु हो गई।
वेसुवियस का विस्फोट और मृत्यु
अगस्त 79 ईस्वी में वेसुवियस ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट हुआ। मिसेनम से प्लिनी ने आकाश में उठता हुआ विशाल बादल देखा। प्राकृतिक घटना को समझने की वैज्ञानिक जिज्ञासा और संकटग्रस्त लोगों की सहायता करने की इच्छा—दोनों से प्रेरित होकर उन्होंने प्रभावित क्षेत्र की ओर जाने का निर्णय लिया। उन्होंने नौसैनिक जहाजों के साथ नेपल्स की खाड़ी पार की और स्टाबिए पहुँचे। वहाँ उन्होंने संकट में फँसे लोगों की सहायता तथा उन्हें सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। इस दौरान ज्वालामुखीय राख, प्यूमिस और विषैली गैसों के कारण परिस्थितियाँ अत्यंत खतरनाक हो गईं। अंततः स्टाबिए में ही उनकी मृत्यु हो गई।
मृत्यु के कारण पर मतभेद
प्लिनी की मृत्यु का सबसे विश्वसनीय विवरण उनके भतीजे प्लिनी द यंगर द्वारा टैसिटस को लिखे गए दो पत्रों में मिलता है। इनमें मृत्यु का कोई निश्चित चिकित्सकीय कारण नहीं बताया गया है।
आधुनिक विद्वान सामान्यतः ज्वालामुखीय गैसों, राख और अत्यधिक गर्म वातावरण के कारण उत्पन्न श्वसन संबंधी कठिनाइयों को संभावित कारण मानते हैं। कुछ व्याख्याओं में हृदयाघात या श्वसन-विफलता की संभावना भी व्यक्त की गई है। 1859 ईस्वी में जैकब बिगेलो ने मस्तिष्काघात की संभावना पर विचार किया था। सुएटोनियस ने एक अफवाह का उल्लेख किया कि अत्यधिक गर्मी से बचने में असमर्थ होने पर प्लिनी ने किसी दास से अपनी हत्या करने को कहा था, लेकिन इसे विश्वसनीय ऐतिहासिक प्रमाण नहीं माना जाता। अतः उनकी मृत्यु का सटीक चिकित्सकीय कारण आज भी निश्चित नहीं है।
नेचुरालिस हिस्टोरिया
नेचुरालिस हिस्टोरिया प्लिनी द एल्डर की सर्वाधिक प्रसिद्ध और एकमात्र पूर्ण रूप से उपलब्ध कृति है। यह 37 पुस्तकों में विभाजित एक विशाल विश्वकोशीय ग्रंथ है। इसमें प्रकृति, मानव जीवन, भूगोल, वनस्पति, प्राणी-जगत, चिकित्सा, कृषि, खनिज, धातु, कला और तकनीक से संबंधित तत्कालीन ज्ञान को व्यवस्थित किया गया है।
विषय-वस्तु
| पुस्तकें | प्रमुख विषय |
| पुस्तक 1 | प्रस्तावना, विषय-सूची और स्रोत |
| पुस्तक 2 | ब्रह्मांड, खगोल-विज्ञान और प्राकृतिक घटनाएँ |
| पुस्तक 3–6 | भूगोल, यूरोप, एशिया और अफ्रीका; नदियाँ, समुद्र, द्वीप और नगर |
| पुस्तक 7–11 | मनुष्य, पशु, पक्षी, मछलियाँ और अन्य जीव |
| पुस्तक 12–19 | वृक्ष, वनस्पति, कृषि और उद्यान-विज्ञान |
| पुस्तक 20–32 | औषधीय पदार्थ और चिकित्सा |
| पुस्तक 33–37 | खनिज, धातु, रत्न, चित्रकला, मूर्तिकला और कला |
इस प्रकार नेचुरालिस हिस्टोरिया केवल प्राकृतिक विज्ञान का ग्रंथ नहीं है, बल्कि प्राचीन कृषि, चिकित्सा, तकनीक, कला, अर्थव्यवस्था और समाज के अध्ययन का भी महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
अध्ययन-पद्धति और स्रोत
प्लिनी ने व्यक्तिगत अनुभवों और यात्राओं से प्राप्त सूचनाओं के साथ-साथ अनेक यूनानी और रोमन लेखकों की रचनाओं से सामग्री संकलित की। वे विभिन्न ग्रंथों को पढ़वाकर या स्वयं पढ़कर आवश्यक सूचनाएँ नोट करते थे। इस व्यापक संकलन-पद्धति के कारण उनकी कृति में अनेक ऐसे प्राचीन लेखकों और ग्रंथों की सामग्री सुरक्षित रह गई, जो बाद में नष्ट हो गए। उनकी पद्धति आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से भिन्न थी। वे प्रत्यक्ष निरीक्षण और विश्वसनीय स्रोतों के साथ-साथ लोकविश्वास, किंवदंतियों और प्रचलित धारणाओं को भी संकलित करते थे। इसलिए नेचुरालिस हिस्टोरिया में तथ्यात्मक सूचनाओं के साथ ऐसी धारणाएँ भी मिलती हैं जिन्हें आधुनिक विज्ञान स्वीकार नहीं करता।
प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी विवरण
प्लिनी ने गॉल में बैलों द्वारा चलाए जाने वाले अनाज काटने के यंत्र का उल्लेख किया है। लंबे समय तक इस विवरण को संदिग्ध माना गया, किंतु बाद में प्राप्त पुरातात्त्विक प्रमाणों ने इस प्रकार की तकनीक के अस्तित्व की पुष्टि की। लास मेडुलास की स्वर्ण-खनन तकनीक का उनका विवरण प्राचीन तकनीकी इतिहास के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने जल के दबाव से चट्टानों को तोड़ने, भूमिगत सुरंगों के निर्माण और खनिज निकालने की प्रक्रियाओं का वर्णन किया। इसी प्रकार प्राचीन चित्रकला, मूर्तिकला और कलाकारों के संबंध में उनका विवरण प्राचीन कला-इतिहास के अध्ययन का महत्त्वपूर्ण आधार है।
सीमाएँ और पुनर्मूल्यांकन
नेचुरालिस हिस्टोरिया में विश्वसनीय प्रत्यक्ष निरीक्षणों के साथ-साथ अनेक लोकविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण धारणाएँ भी मिलती हैं। 1492 ईस्वी में निकोलो लियोनिचेनो ने इसकी कुछ वैज्ञानिक त्रुटियों की आलोचना की। बाद में आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति के विकास के साथ प्लिनी द्वारा संकलित अनेक धारणाओं का पुनर्मूल्यांकन हुआ। इसके बावजूद प्रथम शताब्दी के रोमन समाज, भूगोल, कृषि, चिकित्सा, तकनीक, कला और दैनिक जीवन के अध्ययन के लिए यह ग्रंथ अत्यंत महत्त्वपूर्ण बना हुआ है।
अन्य प्रमुख कृतियाँ
प्लिनी द एल्डर ने विभिन्न विषयों पर लगभग 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की थी। नेचुरालिस हिस्टोरिया को छोड़कर उनकी अधिकांश प्रमुख रचनाएँ कालांतर में लुप्त हो गईं। इनके संबंध में जानकारी मुख्यतः बाद के लेखकों के उद्धरणों और संदर्भों से प्राप्त होती है।
डे इयाकुलेशियोने एक्वेस्ट्रि
डे इयाकुलेशियोने एक्वेस्ट्रि घुड़सवार सेना द्वारा भाला-प्रयोग की तकनीक से संबंधित कृति थी। इसमें घोड़े की गति, सैनिक के संतुलन और युद्ध में भाले के प्रभावी उपयोग का विवेचन किया गया था। यह रचना अब उपलब्ध नहीं है, लेकिन इससे प्लिनी की सैन्य और व्यावहारिक ज्ञान में रुचि का पता चलता है।
पोंपोनियस सेकुंडस की जीवनी
प्लिनी ने अपने पूर्व सैन्य कमांडर पब्लियस पोंपोनियस सेकुंडस की जीवनी दो पुस्तकों में लिखी थी। इसमें उनके जीवन, सैन्य सेवाओं और व्यक्तित्व का वर्णन किया गया था। मूल कृति अब उपलब्ध नहीं है।
बेल्ला जर्मेनिए
बेल्ला जर्मेनिए बीस पुस्तकों में रचित ऐतिहासिक ग्रंथ था। इसमें जर्मेनिया में रोमन सैन्य अभियानों तथा रोमन और जर्मनिक जनजातियों के बीच संघर्षों का वर्णन किया गया था। जर्मेनिया में प्लिनी की अपनी सैन्य सेवा इस कृति का महत्त्वपूर्ण आधार रही होगी। प्लिनी ने उल्लेख किया है कि एक स्वप्न में उन्हें नीरो क्लॉडियस ड्रूसस की आत्मा दिखाई दी, जिसने अपनी स्मृति को विस्मृत होने से बचाने का आग्रह किया। संभवतः इसी प्रकार के अनुभवों ने उन्हें ड्रूसस और जर्मेनिया में उसके अभियानों का इतिहास लिखने के लिए प्रेरित किया।
स्टूडियोसस
स्टूडियोसस छह पुस्तकों में रचित वक्तृत्व-कला संबंधी कृति थी। इसमें विद्यार्थियों को प्रभावी वक्ता बनाने के लिए आवश्यक क्रमिक प्रशिक्षण और अभ्यास का विवेचन किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि प्लिनी की रुचि शिक्षा और वक्तृत्व-कला में भी गहरी थी।
डुबिई सेर्मोनिस
डुबिई सेर्मोनिस आठ पुस्तकों में रचित भाषाशास्त्रीय कृति थी। इसमें भाषा के शुद्ध, उचित और प्रभावी प्रयोग से संबंधित विषयों पर विचार किया गया था। यह रचना रोमन साहित्यिक और भाषिक परंपरा के प्रति प्लिनी की सजगता का परिचायक है।
आ फिने ऑफिडिई बासी
आ फिने ऑफिडिई बासी इकतीस पुस्तकों में रचित ऐतिहासिक कृति थी। इसमें इतिहासकार ऑफिडियस बासस द्वारा आरंभ किए गए ऐतिहासिक वृत्तांत को आगे बढ़ाते हुए नीरो के शासनकाल और उसके बाद की समकालीन रोमन राजनीतिक तथा सैन्य घटनाओं का वर्णन किया गया था। यह रचना भी कालांतर में लुप्त हो गई, किंतु बाद के लेखकों के उल्लेखों से इसके अस्तित्व और विषय-वस्तु की जानकारी मिलती है। इन रचनाओं से स्पष्ट होता है कि प्लिनी की बौद्धिक रुचि प्राकृतिक विज्ञान तक सीमित नहीं थी। वे सैन्य इतिहास, राजनीतिक घटनाओं, जीवनी, भाषा, शिक्षा और वक्तृत्व-कला में भी गंभीर रुचि रखते थे।
ऐतिहासिक महत्त्व
प्लिनी द एल्डर का महत्त्व केवल एक लेखक या प्रकृतिवेत्ता के रूप में नहीं, बल्कि प्राचीन विश्व के विविध और बिखरे हुए ज्ञान को एकत्रित, व्यवस्थित और संरक्षित करने वाले विद्वान के रूप में है। नेचुरालिस हिस्टोरिया मध्ययुगीन यूरोप के मठों और पुस्तकालयों में संरक्षित रही तथा इसके विभिन्न संक्षिप्त रूप भी प्रचलित हुए। पुनर्जागरण काल में प्राचीन कला और साहित्य के प्रति बढ़ती रुचि के साथ इस ग्रंथ का महत्त्व और बढ़ गया। लोरेंजो घिबेर्ती तथा जियोर्जियो वसारी जैसे कलाकारों और विद्वानों ने प्राचीन कला-परंपराओं के अध्ययन में इसकी सामग्री का उपयोग किया।
आधुनिक इतिहासकार भी उन अनेक प्राचीन ग्रंथों, परंपराओं और ज्ञान-स्रोतों के पुनर्निर्माण के लिए नेचुरालिस हिस्टोरिया पर निर्भर करते हैं, जो स्वतंत्र रूप से अब उपलब्ध नहीं हैं। प्राचीन भूगोल, खनन, कृषि, चिकित्सा, वनस्पति, प्राणी-विज्ञान, कला और तकनीक से संबंधित अनेक सूचनाओं के लिए यह आज भी एक महत्त्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत है।
79 ईस्वी में वेसुवियस के विस्फोट के दौरान वैज्ञानिक जिज्ञासा और सार्वजनिक कर्तव्य-बोध के साथ संकटग्रस्त क्षेत्र की ओर जाने वाले प्लिनी द एल्डर ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी निरीक्षण और ज्ञान-संग्रह की प्रवृत्ति को बनाए रखा। उनकी नेचुरालिस हिस्टोरिया ने उन्हें प्राचीन विश्व के सबसे महत्त्वपूर्ण विश्वकोशीय लेखकों और ज्ञान-संग्राहकों में स्थायी स्थान प्रदान किया।


