इंग्लैंड का ट्यूडर वंश
फ्रांस और इंग्लैंड के मध्य 1337 ई. से 1453 ई. तक चला दीर्घकालीन संघर्ष इतिहास में ‘शतवर्षीय युद्ध’ के नाम से प्रसिद्ध है। युद्ध के प्रारंभिक चरण में इंग्लैंड को उल्लेखनीय सफलताएँ प्राप्त हुईं, किंतु अंततः उसे पराजय का सामना करना पड़ा और कैलिस को छोड़कर फ्रांस में प्राप्त उसके अधिकांश प्रदेश उससे छिन गए। शतवर्षीय युद्ध के परिणामस्वरूप इंग्लैंड में राष्ट्रीय चेतना का विकास हुआ, किंतु युद्ध की समाप्ति के लगभग दो वर्ष बाद ही इंग्लैंड में यॉर्क और लैंकेस्टर राजवंशों के बीच राजसत्ता के लिए संघर्ष प्रारंभ हो गया, जिसे इतिहास में ‘गुलाबों का युद्ध’ (1455–1485 ई.) कहा जाता है। इसे ‘गुलाबों का युद्ध’ इसलिए कहा गया क्योंकि यॉर्क वंश का प्रतीक श्वेत गुलाब और लैंकेस्टर वंश का प्रतीक लाल गुलाब था। अंततः 1485 ई. में बोसवर्थ के युद्ध में हेनरी ट्यूडर ने रिचर्ड तृतीय को पराजित कर दिया। इसके बाद हेनरी ट्यूडर हेनरी सप्तम के नाम से इंग्लैंड के सिंहासन पर बैठा और ट्यूडर राजवंश की स्थापना की। बाद में हेनरी सप्तम ने यॉर्क वंश की एलिजाबेथ से विवाह किया, जिससे दोनों प्रतिद्वंद्वी राजवंशों का राजनीतिक एकीकरण हुआ और गुलाबों के युद्ध का अंत स्थायी रूप से सुनिश्चित हुआ।
हेनरी सप्तम (1485–1509 ई.)
हेनरी सप्तम (1485–1509 ई.) ट्यूडर वंश का संस्थापक और इंग्लैंड का पहला ट्यूडर शासक था। उसने 1485 ई. के बोसवर्थ के युद्ध में रिचर्ड तृतीय को पराजित करके इंग्लैंड की राजगद्दी प्राप्त की। 18 जनवरी 1486 ई. को उसने यॉर्क वंश की उत्तराधिकारी एलिजाबेथ ऑफ यॉर्क से वेस्टमिंस्टर एब्बे में विवाह किया। इस विवाह से यॉर्क और लैंकेस्टर दोनों राजवंशों के दावों का समन्वय हुआ और गुलाबों के युद्ध से उत्पन्न दीर्घकालीन राजनीतिक संघर्ष को समाप्त करने में सहायता मिली। हेनरी सप्तम को इंग्लैंड में ‘नवीन राजतंत्र’ की स्थापना का प्रमुख निर्माता माना जाता है। उसने सामंती कुलीनों की राजनीतिक एवं सैन्य शक्ति को नियंत्रित किया, राजसत्ता को सुदृढ़ बनाया, प्रशासन में अनुशासन स्थापित किया और वित्तीय संसाधनों को बढ़ाया। उसके शासनकाल में इंग्लैंड मध्ययुगीन सामंती अराजकता से निकलकर केंद्रीकृत राजतंत्र की दिशा में आगे बढ़ा। इसी कारण हेनरी सप्तम के शासन को इंग्लैंड में नवीन राजतंत्र के सुदृढ़ीकरण और राजनीतिक स्थिरता का काल माना जाता है।
इंग्लैंड की तत्कालीन स्थिति
आधुनिक युग के आरंभ के साथ इंग्लैंड की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होने लगे। हेनरी ट्यूडर के सिंहासनारूढ़ होने से पूर्व देश में लंबे समय से राजनीतिक अशांति, सामंती संघर्ष और प्रशासनिक अव्यवस्था व्याप्त थी। मध्ययुगीन सामंतवाद के कारण सामंत वर्ग अत्यधिक शक्तिशाली हो गया था और राजसत्ता को बार-बार चुनौती देता था। गुलाबों के युद्ध ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया था। अनेक सामंत अपनी निजी सेनाएँ रखते थे और अपने-अपने क्षेत्रों में लगभग स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति का प्रयोग करते थे। सामान्य जनता को भी लूटपाट, हिंसा और स्थानीय संघर्षों का सामना करना पड़ता था। शिक्षा के सीमित प्रसार तथा धार्मिक अंधविश्वासों के कारण समाज का बौद्धिक विकास भी अपेक्षाकृत धीमा था। ऐसे वातावरण में हेनरी सप्तम का सत्ता में आना इंग्लैंड के राजनीतिक इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत था। उसने केंद्रीय राजसत्ता को मजबूत करने, कानून-व्यवस्था स्थापित करने और सामंती शक्तियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
हेनरी सप्तम की प्रमुख उपलब्धियाँ
ट्यूडर वंश की स्थापना के साथ इंग्लैंड में राजनीतिक स्थिरता स्थापित होने लगी। हेनरी सप्तम ने सामंतों की स्वायत्त शक्ति को सीमित किया और राजसत्ता को अधिक केंद्रीकृत बनाया। उसने आंतरिक विद्रोहों और राजसिंहासन के विरुद्ध षड्यंत्रों को दबाया, प्रशासन को व्यवस्थित किया, राजकोष को मजबूत किया और विदेश नीति में अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया। उसके शासन के प्रमुख उद्देश्य थे—राजसत्ता को सुदृढ़ करना, देश में शांति और कानून-व्यवस्था स्थापित करना, प्रशासन की कार्यकुशलता बढ़ाना, सामंती शक्तियों को नियंत्रित करना तथा राजकोष को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना।
विद्रोह तथा षड्यंत्रों का दमन
हेनरी सप्तम को सिंहासन पर बैठते ही अनेक विद्रोहों और राजवंशीय षड्यंत्रों का सामना करना पड़ा। यॉर्कवादी गुट अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था और उसके समर्थक नए ट्यूडर शासन को चुनौती देने के अवसर खोज रहे थे। हेनरी ने इन विद्रोहों को सैन्य तथा राजनीतिक दोनों साधनों से नियंत्रित किया।
1487 ई. का लैम्बर्ट सिमनल विद्रोह हेनरी के शासन का पहला प्रमुख संकट था। यॉर्कवादी समर्थकों ने लैम्बर्ट सिमनल नामक युवक को एडवर्ड प्लांटाजेनेट, अर्ल ऑफ वारविक के रूप में प्रस्तुत किया और उसे राजगद्दी का दावेदार बनाया। उसे आयरलैंड में राजा के रूप में मान्यता भी दिलाई गई। हेनरी ने वास्तविक अर्ल ऑफ वारविक को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत कर सिमनल के दावे की पोल खोल दी। इसके बाद 1487 ई. में स्टोक फील्ड के युद्ध में हेनरी ने विद्रोहियों को पराजित किया। लिंकन मारा गया और सिमनल को बंदी बना लिया गया। हेनरी ने उसे मृत्युदंड देने के बजाय क्षमा कर दिया और राजमहल में रसोई संबंधी कार्य पर नियुक्त कर दिया। इस प्रकार हेनरी ने एक ओर विद्रोह को कठोरता से दबाया और दूसरी ओर राजनीतिक उदारता का परिचय दिया।
इसके बाद पर्किन वॉरबेक का विद्रोह हेनरी के लिए अधिक गंभीर चुनौती बना। वॉरबेक ने स्वयं को एडवर्ड चतुर्थ का छोटा पुत्र रिचर्ड, ड्यूक ऑफ यॉर्क बताया। उसे यॉर्कवादी समर्थकों तथा बरगंडी की डचेस मार्गरेट का समर्थन मिला। उसने फ्रांस तथा अन्य यूरोपीय शक्तियों से भी सहायता प्राप्त करने का प्रयास किया। 1491 ई. से उसने हेनरी के विरुद्ध अभियान आरंभ किए। 1492 ई. में हेनरी ने फ्रांस के साथ एटाप्ल की संधि की, जिसके बाद फ्रांस ने वॉरबेक को अपना समर्थन समाप्त कर दिया। 1495 ई. में वॉरबेक ने इंग्लैंड पर आक्रमण किया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। 1497 ई. में उसने पुनः प्रयास किया, किंतु असफल रहा। अंततः वह पकड़ा गया और लंदन के टॉवर में बंद कर दिया गया। 1499 ई. में उसके भागने के षड्यंत्र के बाद उसे मृत्युदंड दिया गया।
हेनरी सप्तम के शासनकाल में लॉर्ड लवेल से संबंधित यॉर्कवादी विद्रोह का भी सामना करना पड़ा। लवेल रिचर्ड तृतीय का समर्थक था और हेनरी को वैध राजा नहीं मानता था। हालांकि उसका विद्रोह व्यापक रूप नहीं ले सका और हेनरी ने उसे नियंत्रित कर लिया।
कॉर्निश विद्रोह भी हेनरी के शासनकाल की महत्त्वपूर्ण घटना थी। 1497 ई. में कॉर्नवाल के लोगों ने करों की अधिकता के विरोध में विद्रोह किया और विद्रोहियों ने लंदन की ओर मार्च किया। हेनरी की सेना ने ब्लैकहीथ के निकट विद्रोहियों को पराजित किया। इस प्रकार हेनरी सप्तम ने अपने शासन के प्रारंभिक वर्षों में राजवंशीय दावेदारों और आंतरिक विद्रोहों को नियंत्रित करके अपनी सत्ता को मजबूत किया।
सामंती व्यवस्था पर नियंत्रण
हेनरी सप्तम का सबसे महत्त्वपूर्ण राजनीतिक उद्देश्य सामंतों की अत्यधिक शक्ति को नियंत्रित करना था। गुलाबों के युद्ध के दौरान सामंतों ने अपनी निजी सेनाओं, विशाल संपत्तियों और राजनीतिक प्रभाव के बल पर राजसत्ता को चुनौती देने की क्षमता प्राप्त कर ली थी। हेनरी समझता था कि जब तक सामंतों की निजी शक्ति समाप्त नहीं की जाएगी, तब तक केंद्रीकृत राजतंत्र सुरक्षित नहीं हो सकता। इसलिए उसने कानून, न्यायालय, आर्थिक दंड और प्रशासनिक उपायों के माध्यम से सामंतों पर नियंत्रण स्थापित किया।
निजी सेनाओं पर नियंत्रण
हेनरी सप्तम ने सामंतों द्वारा निजी सैनिक दल रखने और अपने प्रभाव को प्रदर्शित करने के लिए लिवरी और मेंटेनेंस की प्रथा पर नियंत्रण लगाया। सामंतों को निजी सेनाएँ रखने से रोकने के लिए कानून बनाए गए। जो सामंत इन नियमों का उल्लंघन करते थे, उन पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाता था। इस नीति से सामंतों की सैन्य शक्ति कमजोर हुई और राजसत्ता का प्रभाव बढ़ा।
न्यायिक व्यवस्था
हेनरी सप्तम ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यायिक संस्थाओं का प्रभावी उपयोग किया। उसने सामंतों तथा शक्तिशाली व्यक्तियों द्वारा कानून की अवहेलना पर कठोर कार्रवाई की। स्थानीय न्यायाधिकारियों को भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिक सक्रिय किया गया। इससे इंग्लैंड में केंद्रीय राजसत्ता के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा।
कोर्ट ऑफ स्टार चैंबर
हेनरी सप्तम के शासनकाल में कोर्ट ऑफ स्टार चैंबर ने सामंतों और शक्तिशाली व्यक्तियों पर नियंत्रण स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह संस्था प्रारंभ में राजकीय परिषद की न्यायिक गतिविधियों से विकसित हुई थी और बाद में इसका उपयोग शक्तिशाली अपराधियों तथा सामंती कुलीनों के विरुद्ध किया गया। इसका उद्देश्य सामान्य न्यायालयों से अलग उन मामलों पर कार्रवाई करना था, जिनमें शक्तिशाली व्यक्ति स्थानीय न्याय व्यवस्था को प्रभावित कर सकते थे। इस न्यायिक व्यवस्था के माध्यम से हेनरी ने सामंतों की मनमानी को नियंत्रित किया और केंद्रीय सत्ता को मजबूत किया।
मंत्रियों की नियुक्ति
हेनरी सप्तम ने शासन में पुराने सामंती कुलीनों पर निर्भर रहने के बजाय अपेक्षाकृत योग्य और विश्वसनीय व्यक्तियों को महत्त्व दिया। जॉन मॉर्टन और रिचर्ड फॉक्स जैसे व्यक्तियों ने उसके शासन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी प्रकार एडमंड डडली और रिचर्ड एम्पसन ने राजस्व और वित्तीय मामलों में राजा की सहायता की। इस नीति से राजकीय प्रशासन अधिक प्रत्यक्ष रूप से राजा के नियंत्रण में आया।
मध्य वर्ग का सहयोग
हेनरी सप्तम ने बढ़ते हुए व्यापारी और मध्य वर्ग को भी राजसत्ता के समर्थन में संगठित किया। सामंतों की तुलना में व्यापारी और नगरवासी राजनीतिक स्थिरता और कानून-व्यवस्था को अधिक महत्त्व देते थे, क्योंकि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के लिए शांति आवश्यक थी। हेनरी ने इस वर्ग को संरक्षण देकर तथा व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करके राजसत्ता के लिए एक नया सामाजिक आधार तैयार किया। इस प्रकार ट्यूडर राजतंत्र को केवल सामंतों के बजाय मध्य वर्ग का भी समर्थन प्राप्त हुआ।
राजकोष को सुदृढ़ करने का प्रयास
हेनरी सप्तम यह समझता था कि मजबूत राजतंत्र के लिए मजबूत राजकोष आवश्यक है। वह संसद पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहता था। इसलिए उसने राजस्व बढ़ाने के लिए विभिन्न साधनों का उपयोग किया।
राजकीय भूमि से आय
हेनरी ने राजकीय भूमि से प्राप्त होने वाली आय को बढ़ाने का प्रयास किया। भूमि और उससे संबंधित अधिकारों से प्राप्त राजस्व उसकी व्यक्तिगत तथा राजकीय आय का महत्त्वपूर्ण स्रोत था।
सामंतों की संपत्ति पर नियंत्रण
गुलाबों के युद्ध में अनेक सामंतों की संपत्ति जब्त हुई थी। हेनरी ने राजद्रोह या उत्तराधिकार संबंधी विवादों के कारण प्राप्त संपत्तियों पर राजकीय नियंत्रण स्थापित किया और इससे राजकोष को लाभ हुआ।
शांतिपूर्ण विदेश नीति
हेनरी ने अनावश्यक युद्धों से बचने की नीति अपनाई। इससे युद्ध पर होने वाला भारी खर्च बचा और राजकोष पर दबाव कम हुआ। 1492 ई. में फ्रांस के साथ एटाप्ल की संधि के अंतर्गत उसे पर्याप्त धनराशि प्राप्त हुई। इस प्रकार कूटनीति और शांतिपूर्ण विदेश नीति को उसने आर्थिक हितों से भी जोड़ा।
आर्थिक दंड
हेनरी सप्तम के शासनकाल में आर्थिक दंड राजस्व का महत्त्वपूर्ण स्रोत बन गया। एम्पसन और डडली जैसे अधिकारियों ने आर्थिक दंडों और राजकीय देनदारियों की वसूली में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि इस नीति ने राजकोष को मजबूत किया, लेकिन इससे हेनरी की लोकप्रियता को नुकसान भी पहुँचा।
क्षमादान और विशेषाधिकार
हेनरी ने कुछ मामलों में क्षमादान तथा राजकीय विशेषाधिकारों से भी आय प्राप्त की। राजकीय संरक्षण और विशेषाधिकारों का उपयोग वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए किया गया।
व्यक्तिगत व्यापार
हेनरी सप्तम ने राजकीय हितों के साथ-साथ व्यक्तिगत व्यापार में भी रुचि दिखाई। ऊन, कपड़ा, टिन और अन्य व्यापारिक वस्तुओं से उसे आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। इससे राजसत्ता की वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ाने में सहायता मिली।
मॉर्टन का फोर्क
हेनरी सप्तम के वित्तीय प्रशासन से संबंधित प्रसिद्ध नीति ‘मॉर्टन का फोर्क’ थी। इसका संबंध आर्कबिशप जॉन मॉर्टन से था। इसके अनुसार जो व्यक्ति अधिक खर्च करता दिखाई देता था, उससे यह माना जाता था कि उसके पास पर्याप्त धन है और उससे कर या आर्थिक योगदान माँगा जा सकता था; वहीं जो व्यक्ति कम खर्च करता था, उसके बारे में माना जाता था कि उसने पर्याप्त धन बचा रखा है और उससे भी आर्थिक योगदान लिया जा सकता है। इस प्रकार दोनों स्थितियों में राजस्व प्राप्त करने का रास्ता निकाला जाता था।
हेनरी सप्तम की विदेश नीति
हेनरी सप्तम की विदेश नीति मुख्यतः शांति, कूटनीति और राजवंशीय विवाहों पर आधारित थी। वह महंगे युद्धों से बचना चाहता था क्योंकि उसका प्रमुख उद्देश्य इंग्लैंड की आंतरिक स्थिरता और राजकोष को मजबूत करना था। फ्रांस के साथ 1492 ई. में एटाप्ल की संधि इसका प्रमुख उदाहरण है। उसने स्पेन के साथ भी मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित किए और अपने पुत्र आर्थर का विवाह स्पेन के शासक फर्डिनेंड तथा इसाबेला की पुत्री कैथरीन ऑफ एरागॉन से किया। यह विवाह इंग्लैंड और स्पेन के संबंधों को मजबूत करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण था। आर्थर की मृत्यु के बाद कैथरीन का विवाह बाद में हेनरी सप्तम के दूसरे पुत्र हेनरी से हुआ, जो आगे चलकर हेनरी अष्टम बना।
हेनरी सप्तम का मूल्यांकन
हेनरी सप्तम ने ऐसे समय में इंग्लैंड की सत्ता संभाली जब देश लंबे गृहयुद्ध, सामंती संघर्ष और राजवंशीय विवादों से कमजोर हो चुका था। उसने सबसे पहले अपनी सत्ता को सुरक्षित किया और फिर राजसत्ता के केंद्रीकरण पर ध्यान दिया। यॉर्कवादी विद्रोहों का दमन, सामंतों की निजी सेनाओं पर नियंत्रण, न्यायिक संस्थाओं का उपयोग, राजकोष को मजबूत करना, मध्य वर्ग का समर्थन प्राप्त करना और शांतिपूर्ण विदेश नीति अपनाना उसकी प्रमुख उपलब्धियाँ थीं। उसके शासनकाल में इंग्लैंड में नवीन राजतंत्र की नींव मजबूत हुई और सामंती अराजकता के स्थान पर केंद्रीकृत राजसत्ता का विकास हुआ। हालांकि उसकी वित्तीय नीतियाँ कठोर थीं और कर तथा आर्थिक दंडों के कारण उसकी लोकप्रियता सीमित रही, फिर भी राजनीतिक स्थिरता स्थापित करने में उसकी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण थी।
हेनरी सप्तम लगभग 24 वर्षों तक इंग्लैंड का शासक रहा। 21 अप्रैल 1509 ई. को रिचमंड पैलेस में उसकी मृत्यु हुई। उसके बाद उसका पुत्र हेनरी अष्टम इंग्लैंड के सिंहासन पर बैठा। हेनरी सप्तम की मृत्यु तक इंग्लैंड आंतरिक रूप से अधिक स्थिर, राजसत्ता की दृष्टि से अधिक केंद्रीकृत और यूरोपीय राजनीति में अधिक प्रभावशाली बन चुका था। इस प्रकार हेनरी सप्तम ने ट्यूडर राजवंश को केवल स्थापित ही नहीं किया, बल्कि उसकी ऐसी राजनीतिक और आर्थिक नींव तैयार की, जिस पर उसके उत्तराधिकारी हेनरी अष्टम और एलिजाबेथ प्रथम के समय इंग्लैंड की शक्ति का आगे विस्तार हुआ।
महत्त्वपूर्ण FAQ
1. ट्यूडर वंश की स्थापना किसने और कब की थी?
ट्यूडर वंश की स्थापना हेनरी ट्यूडर ने 1485 ई. में की थी। उसने बोसवर्थ के युद्ध में यॉर्क वंश के राजा रिचर्ड तृतीय को पराजित कर इंग्लैंड की गद्दी प्राप्त की और हेनरी सप्तम के नाम से शासन आरंभ किया। 1486 ई. में उसका विवाह यॉर्क वंश की एलिजाबेथ से हुआ, जिससे लंकास्टर और यॉर्क वंशों का वैवाहिक एकीकरण हुआ तथा गुलाबों के युद्ध के अंत को स्थायित्व मिला।
2. ट्यूडर वंश की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या थी?
ट्यूडर वंश के उदय की पृष्ठभूमि शतवर्षीय युद्ध (1337–1453 ई.) और उसके बाद हुए गुलाबों के युद्ध (1455–1485 ई.) में निहित थी। गुलाबों के युद्ध में लंकास्टर और यॉर्क राजघरानों के बीच इंग्लैंड के सिंहासन के लिए लंबे समय तक संघर्ष हुआ। इस संघर्ष से सामंती शक्तियाँ कमजोर हुईं और अंततः 1485 ई. के बोसवर्थ युद्ध में हेनरी ट्यूडर की विजय ने एक नए राजवंश के उदय का मार्ग प्रशस्त किया।
3. हेनरी सप्तम की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या थीं?
हेनरी सप्तम की सबसे बड़ी उपलब्धि शक्तिशाली केंद्रीकृत राजतंत्र की स्थापना थी। उसने यॉर्कवादी विद्रोहों और षड्यंत्रों का दमन किया, सामंतों की निजी सेनाओं पर नियंत्रण लगाया, कोर्ट ऑफ स्टार चैंबर का प्रभावी उपयोग किया, मध्य वर्ग का समर्थन प्राप्त किया तथा राजकीय आय में वृद्धि की। उसने फ्रांस के साथ 1492 ई. की एटेपल्स की संधि करके युद्ध से बचने की नीति अपनाई। इस प्रकार उसके शासनकाल में इंग्लैंड में राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक सुदृढ़ता और राजसत्ता के केंद्रीकरण को बढ़ावा मिला।
4. हेनरी सप्तम ने सामंतवाद को कमजोर करने के लिए क्या उपाय किए?
हेनरी सप्तम ने सामंतों की शक्ति सीमित करने के लिए उनकी निजी सेनाओं और अनुचरों पर नियंत्रण लगाया। उसने सामंतों द्वारा वर्दीधारी एवं सशस्त्र अनुचरों की बड़ी संख्या रखने पर प्रतिबंध लगाया और उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक दंड लगाया। उसने स्टार चैंबर के माध्यम से शक्तिशाली सामंतों पर नियंत्रण स्थापित किया तथा प्रिवी काउंसिल में पुराने सामंतों के स्थान पर योग्य एवं विश्वसनीय व्यक्तियों को नियुक्त किया। साथ ही, उसने मध्य वर्ग को प्रशासन में अधिक अवसर देकर राजसत्ता का सामाजिक आधार मजबूत किया।
5. हेनरी सप्तम का शासन इंग्लैंड के इतिहास में क्यों महत्त्वपूर्ण माना जाता है?
हेनरी सप्तम का शासन इंग्लैंड के मध्ययुगीन सामंती संघर्ष से आधुनिक केंद्रीकृत राजतंत्र की ओर संक्रमण का महत्त्वपूर्ण चरण माना जाता है। उसने लंबे समय से चले आ रहे राजवंशी संघर्षों के बाद देश में शांति और राजनीतिक स्थिरता स्थापित की, राजकीय वित्त को मजबूत किया, सामंतों की शक्ति सीमित की और राजसत्ता को केंद्रीकृत किया। उसकी विदेश नीति अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण थी और उसने व्यापार तथा राजकीय आय को बढ़ाने पर ध्यान दिया। इस प्रकार उसके शासन ने आगे चलकर ट्यूडर राजवंश के शक्तिशाली शासन तथा इंग्लैंड में आधुनिक राज्य-व्यवस्था के विकास की आधारभूमि तैयार की।


