ग्नियस पोंपेयस ट्रोगस
मुख्य लेख : रोमन सभ्यता
ग्नियस पोंपेयस ट्रोगस पहली शताब्दी ईसा पूर्व के एक महत्त्वपूर्ण गैलो-रोमन इतिहासकार थे। वे नार्बोनेन्सिस गॉल में रहने वाली वोकोंटी जनजाति से संबंधित थे और उनका सक्रिय जीवन रोमन गणराज्य के अंतिम चरण तथा सम्राट ऑगस्टस के शासनकाल के आरंभिक दौर से जुड़ा था। इस दृष्टि से वे लिवी के समकालीन थे। ट्रोगस केवल इतिहासकार ही नहीं, बल्कि बहुविषयक विद्वान भी थे। उनकी रुचि इतिहास, भूगोल, राजनीति, विभिन्न सभ्यताओं, पशु-पक्षियों तथा वनस्पतियों जैसे विषयों में थी। उनकी प्रमुख ऐतिहासिक कृति मूल रूप में आज उपलब्ध नहीं है, फिर भी उसके संक्षिप्त रूप, प्रस्तावनाओं और बाद के लेखकों के उद्धरणों के माध्यम से उनका लेखन प्राचीन विश्व, विशेषकर पूर्वी साम्राज्यों और हेलेनिस्टिक राज्यों के इतिहास के अध्ययन के लिए महत्त्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
पोंपेयस ट्रोगस का परिवार रोमन सत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था से निकट रूप से जुड़ा हुआ था। उनके दादा ने संभवतः सर्टोरियस के विरुद्ध रोमन अभियानों में ग्नियस पोंपेयस मैग्नस अर्थात् पोम्पी के अधीन सेवा की थी। पोम्पी के प्रभाव और संरक्षण के कारण परिवार को रोमन नागरिकता प्राप्त हुई। रोमन प्रथा के अनुसार, नागरिकता प्रदान करने वाले संरक्षक के नाम को अपनाना सामान्य था; इसी कारण उनके परिवार ने पोंपेयस नाम धारण किया। आगे चलकर यही नाम ट्रोगस के नाम का प्रमुख हिस्सा बना।
ट्रोगस के पिता ने जूलियस सीज़र के अधीन सचिव और दुभाषिए के रूप में कार्य किया था। इस कारण उनका परिवार रोमन राजनीतिक और प्रशासनिक संसार से अच्छी तरह परिचित था। ऐसी पारिवारिक पृष्ठभूमि ने ट्रोगस को रोमन राजनीतिक संस्कृति के साथ-साथ यूनानी बौद्धिक परंपरा से परिचित होने का अवसर प्रदान किया होगा। उनके व्यापक ऐतिहासिक और प्राकृतिक ज्ञान से संकेत मिलता है कि उन्हें उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त थी और वे यूनानी तथा रोमन साहित्यिक परंपराओं से भली-भाँति परिचित थे।
प्राकृतिक इतिहास में रुचि
ट्रोगस की विद्वत्ता केवल इतिहास-लेखन तक सीमित नहीं थी। उनकी रुचि प्राकृतिक जगत के अध्ययन में भी थी। प्लिनी द एल्डर ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘नैचुरालिस हिस्टोरिया’ में ट्रोगस का उल्लेख किया है, जिससे ज्ञात होता है कि उन्होंने पशुओं और वनस्पतियों से संबंधित विषयों पर भी लेखन किया था। उनकी प्राकृतिक इतिहास संबंधी कृति को सामान्यतः दे एनिमालिबुस से जोड़ा जाता है, यद्यपि उसके स्वरूप और पुस्तकों की संख्या के संबंध में उपलब्ध प्रमाण सीमित हैं।
प्राकृतिक जगत के प्रति उनकी रुचि यूनानी विद्वानों, विशेषकर अरस्तू और थियोफ्रेस्टस की परंपरा से संबंधित थी। इससे स्पष्ट होता है कि ट्रोगस उस व्यापक विश्वकोशीय विद्वत्ता का प्रतिनिधित्व करते थे, जिसमें प्रकृति, मनुष्य, भूगोल और इतिहास को परस्पर संबंधित ज्ञान-क्षेत्रों के रूप में देखा जाता था। उनकी यह बहुविषयक दृष्टि उन्हें अपने समय के विशिष्ट विद्वानों में स्थान प्रदान करती है।
हिस्टोरिया फिलिपिका : प्रमुख ऐतिहासिक कृति
ट्रोगस की सबसे प्रसिद्ध रचना 44 पुस्तकों में लिखी गई ‘हिस्तोरियाए फिलिप्पिकाए एत तोतियुस मुंडी ओरिगिनेस एत तेराए सितुस’ थी। इसका अर्थ लगभग ‘फिलिपिक इतिहास तथा समस्त विश्व की उत्पत्ति और प्रदेशों का विवरण’ किया जा सकता है। मूल ग्रंथ अब उपलब्ध नहीं है, किंतु इसकी विषय-वस्तु का महत्त्व बाद की सामग्री से स्पष्ट होता है। इस कृति का शीर्षक और व्यापक ऐतिहासिक दृष्टिकोण संभवतः यूनानी इतिहासकार थियोपोंपस की ‘फिलिप्पिका’ से प्रभावित था।
यद्यपि ग्रंथ का नाम मैसेडोनिया के राजा फिलिप द्वितीय की परंपरा से जुड़ा था, इसकी विषय-वस्तु केवल मैसेडोनिया तक सीमित नहीं थी। ट्रोगस ने प्राचीन पूर्वी साम्राज्यों, असीरिया, मीडिया और फारस से लेकर मैसेडोनिया, सिकंदर महान के साम्राज्य तथा उसके उत्तराधिकारी हेलेनिस्टिक राज्यों तक का इतिहास प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त पार्थिया, गॉल, इबेरिया और रोम से संबंधित घटनाओं को भी स्थान दिया गया।
ट्रोगस ने अपने इतिहास की शुरुआत निनवे के पौराणिक संस्थापक निनस से की और घटनाओं को अपने समकालीन रोमन संसार तक पहुँचाया। इस प्रकार उनकी कृति का विस्तार अत्यंत व्यापक था। उन्होंने इतिहास को केवल रोम के राजनीतिक विकास के रूप में नहीं देखा, बल्कि विभिन्न साम्राज्यों, राज्यों और जातीय समूहों की पारस्परिक गतिविधियों को विश्व-इतिहास की व्यापक प्रक्रिया में प्रस्तुत किया।
यूनानी स्रोतों का प्रभाव
ट्रोगस के इतिहास पर यूनानी इतिहास-लेखन की गहरी छाप थी। थियोपोम्पस, एफोरस, टिमेयस और पॉलीबियस जैसे इतिहासकार उनके संभावित प्रमुख स्रोतों में माने जाते हैं। विशेष रूप से थियोपोम्पस की फिलिप्पिका और ट्रोगस की हिस्तोरियाए फिलिप्पिकाए के बीच विषयगत समानता उल्लेखनीय है।
यह निश्चित नहीं है कि ट्रोगस ने इन सभी लेखकों की मूल रचनाओं का प्रत्यक्ष उपयोग किया था। विद्वानों का मत है कि उन्होंने संभवतः किसी पूर्ववर्ती यूनानी सार्वभौमिक इतिहास या संकलन को मध्यवर्ती स्रोत के रूप में अपनाया होगा। इस संदर्भ में अलेक्जेंड्रिया के टिमाजेनेस का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ट्रोगस रोमन इतिहास-लेखन में यूनानी ऐतिहासिक परंपरा को अपनाने और उसे लैटिन पाठकों के लिए प्रस्तुत करने वाले महत्त्वपूर्ण लेखकों में थे।
इतिहास-लेखन की शैली और दृष्टिकोण
ट्रोगस की इतिहास-दृष्टि सैलस्ट और लिवी जैसे रोमन इतिहासकारों से कुछ भिन्न थी। उनका उद्देश्य केवल रोम की राजनीतिक उपलब्धियों का गौरवगान करना नहीं था। उन्होंने विभिन्न सभ्यताओं और राज्यों के इतिहास को व्यापक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। उनकी दृष्टि में रोम विश्व-इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण शक्ति था, लेकिन इतिहास का केंद्र केवल रोम नहीं था।
ट्रोगस के बारे में उपलब्ध प्रमाण यह संकेत देते हैं कि उन्होंने घटनाओं को अपेक्षाकृत संक्षिप्त और तथ्यपरक ढंग से प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति अपनाई। प्राचीन इतिहासकारों की सामान्य शैली के विपरीत वे लंबे काल्पनिक भाषणों पर अपेक्षाकृत कम निर्भर दिखाई देते हैं। उनकी कृति में विभिन्न राज्यों के उत्थान-पतन, राजवंशों के संघर्ष, राजनीतिक परिवर्तन और साम्राज्यवादी विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया।
उनकी दृष्टि में नैतिकता का भी महत्त्व था। वे सत्ता, विलासिता, महत्वाकांक्षा और नैतिक पतन के संबंधों पर विचार करते दिखाई देते हैं। इस प्रकार उनका इतिहास केवल घटनाओं का संकलन नहीं था, बल्कि राजनीतिक शक्ति और मानवीय आचरण के संबंधों को समझने का प्रयास भी था।
यहूदियों और यहूदिया का वर्णन
ट्रोगस ने सेल्यूसिड तथा पूर्वी भूमध्यसागरीय संसार के इतिहास के संदर्भ में यहूदियों और यहूदिया का भी उल्लेख किया। उनका विवरण शास्त्रीय लैटिन साहित्य में यहूदियों से संबंधित महत्त्वपूर्ण प्रारंभिक विवरणों में माना जाता है। बाद के रोमन इतिहासकारों, विशेषकर टैसिटस, के साथ इसकी तुलना करके प्राचीन रोमन दृष्टिकोण में यहूदियों की स्थिति को समझा जा सकता है।
ट्रोगस के विवरण में यहूदियों की उत्पत्ति, उनके प्राचीन इतिहास और यहूदिया के भौगोलिक स्वरूप से संबंधित सामग्री मिलती है। उनके कथन में यूनानी तथा पूर्वी परंपराओं का मिश्रण दिखाई देता है। संभवतः उन्होंने इस सामग्री के लिए यूनानी स्रोतों का सहारा लिया था। टिमाजेनेस और पोसिडोनियस जैसे लेखकों को उनके संभावित स्रोतों में शामिल किया गया है। इससे ट्रोगस की इतिहास-लेखन पद्धति की बहुस्रोतपरक प्रकृति स्पष्ट होती है।
कृति का संरक्षण और विरासत
ट्रोगस की हिस्तोरियाए फिलिप्पिकाए का मूल पाठ कालांतर में नष्ट हो गया। आज उनकी कृति का सबसे महत्त्वपूर्ण अवशेष मार्कस जुनियानस जस्टिनस अर्थात् जस्टिन द्वारा तैयार एपितोमे है। जस्टिन ने ट्रोगस की 44 पुस्तकों का संक्षिप्त रूप तैयार किया। उन्होंने मूल इतिहास के उन अंशों को विशेष रूप से सुरक्षित रखा जिन्हें वे शिक्षाप्रद, रोचक या महत्त्वपूर्ण मानते थे। यद्यपि जस्टिन का उद्देश्य ट्रोगस के मूल ग्रंथ को पूर्ण रूप से संरक्षित करना नहीं था, फिर भी उनकी Epitome के कारण ट्रोगस के इतिहास का एक बड़ा हिस्सा आधुनिक विद्वानों तक पहुँच सका।
इसके अतिरिक्त बाद के लेखकों के उद्धरणों से भी ट्रोगस के मूल ग्रंथ की कुछ सामग्री ज्ञात होती है। प्लिनी द एल्डर, जेरोम और ऑगस्टीन जैसे लेखकों के लेखन में उनके विचारों या सामग्री के संकेत मिलते हैं। जस्टिन की पांडुलिपियों में ट्रोगस की पुस्तकों से संबंधित प्रोलोगी अर्थात् संक्षिप्त सारांश भी सुरक्षित रहे हैं। इनसे मूल कृति की संरचना और विषय-वस्तु के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
जस्टिन के सार में वर्णित अंतिम प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं में 20 ईसा पूर्व में पार्थियनों द्वारा रोम को क्रैसस और अन्य अभियानों में खोए रोमन सैन्य मानकों की वापसी का प्रसंग विशेष महत्त्व रखता है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रोगस का इतिहास ऑगस्टस के प्रारंभिक शासनकाल तक की घटनाओं को समेटता था।
प्राकृतिक इतिहास से संबंधित ट्रोगस की रचनाएँ भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, किंतु प्लिनी द एल्डर द्वारा उनके उपयोग से उनके विद्वतापूर्ण योगदान का अनुमान लगाया जा सकता है। इस प्रकार ट्रोगस की विरासत केवल रोमन इतिहास तक सीमित नहीं है। वे ऐसे गैलो-रोमन विद्वान थे जिन्होंने यूनानी ऐतिहासिक परंपरा, रोमन राजनीतिक संसार और व्यापक भूमध्यसागरीय दृष्टिकोण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया। उनकी मूल कृति के लुप्त हो जाने के बावजूद जस्टिन के सार और बाद के लेखकों के उद्धरणों के माध्यम से उनका इतिहास आज भी हेलेनिस्टिक राज्यों, पूर्वी साम्राज्यों, पार्थिया और प्रारंभिक रोमन साम्राज्य के इतिहास के अध्ययन के लिए महत्त्वपूर्ण स्रोत है।


