डोमिटियन (Domitian)

डोमिटियन (Domitian)

डोमिटियन (51–96 ई.)

डोमिटियन 81 से 96 ईस्वी तक रोमन साम्राज्य का सम्राट था। वह सम्राट वेस्पासियन का पुत्र, टाइटस का छोटा भाई तथा फ्लेवियन राजवंश का तीसरा और अंतिम शासक था। इतिहासकारों के अनुसार वह एक कठोर किंतु अत्यंत सक्षम शासक था, जिसने साम्राज्य की प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसका शासन टिबेरियस के बाद पहली शताब्दी का सबसे लंबा शासनकाल था और तीनों फ्लेवियन सम्राटों में सबसे अधिक समय तक उसने शासन किया।

आरंभिक जीवन

24 अक्टूबर 51 ईस्वी को रोम में जन्मे डोमिटियन का बचपन अपेक्षाकृत एकाकी वातावरण में व्यतीत हुआ। उसकी माता डोमिटिला तथा बहन फ्लाविया डोमिटिला का प्रारंभिक काल में ही निधन हो गया था, जबकि उसके पिता और भाई अधिकांश समय सैन्य अभियानों में व्यस्त रहते थे। उसे उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त हुई और उसने वक्तृत्व-कला, साहित्य, दर्शन तथा इतिहास का अध्ययन किया। सुएटोनियस के अनुसार वह शिक्षित, प्रभावशाली वक्ता और शास्त्रीय साहित्य का अच्छा ज्ञाता था। यद्यपि उसे अपने भाई टाइटस की तरह व्यापक सैन्य अनुभव प्राप्त नहीं हुआ, फिर भी उसने एक रोमन कुलीन युवक के अनुरूप युद्धक प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

70 ईस्वी में उसने अपनी प्रेयसी डोमिटिया लोंगिना से विवाह किया, जो प्रसिद्ध सेनानायक ग्नायस डोमिटियस कोर्बुलो की पुत्री थी। यह विवाह राजनीतिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण था, क्योंकि इससे फ्लेवियन राजवंश के संबंध पुराने सेनेटोरियल अभिजात वर्ग से मजबूत हुए। 80 ईस्वी में उसके यहाँ एक पुत्र का जन्म हुआ, किंतु अल्पायु में ही उसकी मृत्यु हो गई।

रोमन सम्राट (81-96 ई.)

वेस्पासियन और टाइटस के शासनकाल में डोमिटियन की भूमिका मुख्यतः औपचारिक रही। यद्यपि उसने कई बार कौंसल का पद सँभाला और प्रशासनिक अनुभव प्राप्त किया, किंतु वास्तविक सत्ता उसके पिता और भाई के हाथों में थी। 13 सितंबर 81 ईस्वी को टाइटस की मृत्यु के बाद प्रेटोरियन गार्ड ने उसे सम्राट घोषित किया और अगले दिन सीनेट ने उसकी सत्ता को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी।

डोमिटियन की उपलब्धियाँ

सम्राट बनने के बाद डोमिटियन ने शासन को अधिक केंद्रीकृत बनाया और प्रशासन के प्रत्येक क्षेत्र में व्यक्तिगत रुचि ली। उसने मुद्रा प्रणाली में सुधार कर कर-संग्रह व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए कठोर कदम उठाए तथा योग्य अधिकारियों को प्रोत्साहित किया। उसने स्वयं को ‘स्थायी सेंसर’ (सेंसर पेर्पेतुअस) घोषित किया और सार्वजनिक नैतिकता तथा सामाजिक अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया। उसने रोमन साम्राज्य की सीमाओं की सुरक्षा का विशेष व्यवस्था की और बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य करवाया।

अर्थव्यवस्था में सुधार

आर्थिक क्षेत्र में डोमिटियन ने रोमन मुद्रा प्रणाली का पुनर्मूल्यांकन कर उसकी गुणवत्ता में सुधार किया और दीनार की चाँदी की शुद्धता बढ़ाई, जिससे साम्राज्य की वित्तीय स्थिरता मजबूत हुई। कठोर वित्तीय अनुशासन और प्रभावी कर-व्यवस्था के कारण उसकी आर्थिक नीतियाँ सामान्यतः सफल मानी जाती हैं।

निर्माण कार्य

डोमिटियन की प्रमुख उपलब्धियों में उसका विशाल निर्माण कार्यक्रम उल्लेखनीय था। उसने रोम तथा अन्य क्षेत्रों में अनेक भव्य निर्माण परियोजनाएँ आरंभ की, जिनमें 69 ईस्वी के गृहयुद्ध और 80 ईस्वी की भीषण आग से क्षतिग्रस्त रोम का व्यापक पुनर्निर्माण कराया गया। उसके शासनकाल में अनेक मंदिरों, सार्वजनिक भवनों, स्टेडियमों और महलों का निर्माण या पुनर्निर्माण हुआ। पैलेटाइन पहाड़ी पर स्थित फ्लेवियन महल तथा रोम का पहला स्थायी एथलेटिक स्टेडियम इसके काल की प्रमुख उपलब्धियाँ थीं। उसने कोलोसियम के निर्माण कार्य को भी पूर्ण कराया और उसका विस्तार करवाया। उसके निर्माण कार्यों ने रोम के पुनर्निर्माण और सौंदर्य-वृद्धि में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

धार्मिक और सामाजिक नीतियाँ

डोमिटियन ने सार्वजनिक नैतिकता और पारंपरिक रोमन धार्मिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया। उसने सम्राट की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए सम्राट पूजा को प्रोत्साहित किया। कुछ प्राचीन स्रोतों के अनुसार वह स्वयं को ‘प्रभु और देवता’ (डोमिनुस एत देउस) कहलाना पसंद करता था, यद्यपि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। उसके शासनकाल में कुछ ईसाइयों और अन्य धार्मिक समूहों के विरुद्ध कार्रवाई का उल्लेख मिलता है, किंतु व्यापक और संगठित उत्पीड़न के प्रमाण बहुत कम हैं।

सैन्य अभियान और सीमा सुरक्षा

डोमिटियन की सैन्य नीति मुख्यतः रक्षात्मक थी। उसने रोमन साम्राज्य की सीमाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया और और राइन और डैन्यूब नदियों के बीच रोमन साम्राज्य की सीमा पर ‘जर्मन सीमा-रक्षा रेखा’ (लाइमेस जर्मैनिकुस) नामक प्राचीरों, सड़कों और प्रहरी-दुर्गों की विशाल श्रृंखला विकसित की। उसके शासनकाल में ब्रिटेन में सेनापति ग्नायस जूलियस एग्रीकोला ने कैलेडोनिया (स्कॉटलैंड) में महत्त्वपूर्ण सफलताएँ प्राप्त कीं। उसने डेशिया (रोमानिया) के के राजा डेसेबालुस के विरुद्ध  महत्त्वपूर्ण सैन्य अभियान संचालित किए, किंतु निर्णायक विजय नहीं मिल सकी। सैनिकों के वेतन में वृद्धि और सीमांत क्षेत्रों में उसकी सक्रिय उपस्थिति के कारण सेना में वह अत्यंत लोकप्रिय था।

अंतिम वर्षों का दमन और हत्या

डोमिटियन के शासनकाल में रोमन सीनेट के साथ उसके संबंध लगातार तनावपूर्ण बने रहे। 89 ईस्वी में सैटर्निनस के विद्रोह तथा बाद के राजनीतिक षड्यंत्रों ने उसके स्वभाव को अधिक संदेही बना दिया, जिसके परिणामस्वरूप राजनीतिक मुकदमों, राजद्रोह के आरोपों और दमनात्मक कार्रवाइयों में वृद्धि हुई। प्राचीन स्रोतों, विशेषकर टैसिटस, सुएटोनियस और प्लिनी द यंगर के अनुसार इस काल में अनेक सीनेटरों और कुलीन व्यक्तियों पर षड्यंत्र अथवा राजद्रोह के आरोप लगाए गए और उन्हें कठोर दंड दिया गया। इस अवधि में कई प्रमुख व्यक्तियों को मृत्युदंड दिया गया या निर्वासित कर दिया गया। इनमें लुसियस एलियस लामिया प्लॉटियस एलियानुस, टाइटस फ्लावियस सबिनुस, टाइटस फ्लावियस क्लेमेंस तथा मार्कस एरेसिनस क्लेमेंस जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। यद्यपि इन घटनाओं को कुछ बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है, फिर भी इतना निश्चित है कि उसके शासन के अंतिम वर्षों में साम्राज्य में भय और अविश्वास का वातावरण व्याप्त था।

डोमिटियन की सबसे बड़ी राजनीतिक समस्या यह थी कि वह सीनेट के पारंपरिक विशेषाधिकारों को सीमित करना चाहता था तथा प्रशासन में सम्राट की सर्वोच्चता स्थापित करने का पक्षधर था। उसने शासन के अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर अश्वारोही वर्ग के अधिकारियों और अपने विश्वसनीय सहयोगियों को नियुक्त किया, जिससे सीनेट का प्रभाव और कम हो गया। परिणामस्वरूप रोमन अभिजात वर्ग के अनेक सदस्य स्वयं को उपेक्षित और अपमानित महसूस करने लगे। इस प्रकार डोमिटियन के शासन के अंतिम वर्षों में सम्राट और सीनेट के बीच अविश्वास तथा शत्रुता लगातार बढ़ती गई। अंततः 18 सितंबर 96 ईस्वी को शाही दरबार के कुछ अधिकारियों द्वारा रचे गए षड्यंत्र के परिणामस्वरूप डोमिटियन की हत्या कर दी गई और फ्लेवियन राजवंश का अंत हो गया। डोमिटियन की मृत्यु के तुरंत उसी दिन सीनेट ने किसी संभावित गृहयुद्ध को रोकने और सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए मार्कस कोक्केयुस नर्वा को नया सम्राट घोषित किया और इस प्रकार नर्वा-एंटोनाइन वंश की स्थापना हुई।

प्राचीन लेखक सुएटोनियस के अनुसार इस षड्यंत्र में सम्राट के चेम्बरलेन (मुख्य महल अधिकारी) पार्थेनियस की प्रमुख भूमिका थी। इतिहासकार जॉन ग्रेंजर का मत है कि पार्थेनियस को यह भय था कि डोमिटियन हाल ही में नीरो के पूर्व सचिव एपाफ्रोडिटस को मृत्युदंड देने के बाद उसके विरुद्ध भी कार्रवाई कर सकता है। यही आशंका उसके षड्यंत्र में शामिल होने का एक प्रमुख कारण बनी।

हत्या का प्रत्यक्ष कार्य पार्थेनियस के मुक्तदास मैक्सिमस तथा डोमिटियन की भतीजी फ्लाविया डोमिटिला के प्रबंधक स्टेफानुस ने किया। सुएटोनियस के अनुसार डोमिटियन अत्यंत अंधविश्वासी था और देवी मिनर्वा को अपना संरक्षक मानता था। कहा जाता है कि हत्या से कुछ समय पहले उसे एक स्वप्न आया था जिसमें मिनर्वा ने उसका साथ छोड़ दिया था। इस कारण वह अपनी सुरक्षा को लेकर अत्यधिक चिंतित रहने लगा था।

एक भविष्यवाणी के अनुसार डोमिटियन को विश्वास था कि उसकी मृत्यु दोपहर के समय होगी। इसलिए वह प्रतिदिन उस समय विशेष रूप से बेचैन रहता था। हत्या वाले दिन भी उसने कई बार अपने एक सेवक से समय पूछा। वह सेवक स्वयं षड्यंत्रकारियों में शामिल था। उसने सम्राट को झूठा आश्वासन दिया कि दोपहर बीत चुकी है। इससे डोमिटियन कुछ निश्चिंत हो गया और अपने कक्ष में लौटकर सरकारी दस्तावेज़ों पर काम करने लगा।

उसी समय स्टेफानुस, जिसने कई दिनों से अपने हाथ में चोट का बहाना बना रखा था और पट्टियों के भीतर एक खंजर छिपा रखा था, सम्राट के समक्ष उपस्थित हुआ। उसने दावा किया कि उसे एक महत्त्वपूर्ण षड्यंत्र की जानकारी मिली है और वह सम्राट को गोपनीय सूचना देना चाहता है। जब डोमिटियन उसके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ पढ़ने लगा, तभी स्टेफानुस ने अचानक उन पर हमला कर दिया और उसकी कमर में खंजर घोंप दिया।

घायल होने के बावजूद डोमिटियन ने प्रतिरोध किया और हमलावर से संघर्ष किया। किंतु शीघ्र ही अन्य षड्यंत्रकारी भी वहाँ पहुँच गए। उनमें क्लोडियनस नामक एक अधीनस्थ अधिकारी, पार्थेनियस का मुक्तदास मैक्सिमस, सैटूर नामक एक प्रमुख कक्षपाल तथा शाही ग्लैडिएटर दल का एक सदस्य शामिल था। इन लोगों ने मिलकर सम्राट पर कई वार किए, जिससे डोमिटियन की मृत्यु हो गई।

हत्या के बाद डोमिटियन के शव को किसी राजकीय सम्मान के बिना एक साधारण अर्थी पर ले जाया गया। उसकी वृद्ध धाय (नर्स) फिलिस ने गुप्त रूप से उसका अंतिम संस्कार कराया। बाद में उसने उसकी अस्थियाँ फ्लेवियन मंदिर में ले जाकर उसकी भतीजी जूलिया फ्लाविया की अस्थियों के साथ रख दीं।

डोमिटियन की हत्या कितनी पूर्व-नियोजित थी, इस विषय में प्राचीन स्रोतों में कुछ मतभेद हैं। सुएटोनियस का वर्णन संकेत देता है कि यह एक सुविचारित षड्यंत्र था। षड्यंत्रकारियों ने पहले से महल के कुछ मार्ग बंद कर दिए थे और डोमिटियन के कक्ष में रखी वह तलवार भी हटा दी थी, जिसे वह आत्मरक्षा के लिए अपने तकिए के नीचे रखता थे। कैसियस डियो ने यह भी आरोप लगाया कि डोमिटिया लोंगीना इस षड्यंत्र से परिचित थीं, किंतु अधिकांश आधुनिक इतिहासकार इस दावे को संदिग्ध मानते हैं।

प्रेटोरियन गार्ड की भूमिका भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उनके एक प्रीफेक्ट टाइटस पेट्रोनियस सेकुंडस को षड्यंत्र की जानकारी होने की संभावना व्यक्त की जाती है, जबकि दूसरे प्रीफेक्ट टाइटस फ्लावियस नॉरबानुस, जो डोमिटियन के परिवार से जुड़े थे, के बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

डोमिटियन की मृत्यु की मृत्यु के बाद सीनेट ने उसके विरुद्ध स्मृति-निषेध (दाम्नातियो मेमोरिये) की नीति अपनाई, जिसके अंतर्गत उसके नाम को सार्वजनिक अभिलेखों से मिटाने, उसकी मूर्तियों को हटाने तथा उसके सम्मान में निर्मित स्मारकों को नष्ट करने का प्रयास किया गया। उसके सिक्कों को गलाया गया और अनेक शिलालेखों से उसका नाम मिटा दिया गया।

फिर भी, यह आदेश पूरे साम्राज्य में समान रूप से लागू नहीं हुआ। रोम और इटली में इसका प्रभाव अधिक दिखाई दिया, जबकि अधिकांश प्रांतों में डोमिटियन की स्मृति बनी रही। कई मूर्तियों को नष्ट करने के बजाय केवल उनका चेहरा बदलकर नर्वा जैसा बना दिया गया, जिससे नई मूर्तियाँ बनाने का खर्च बचाया जा सके।

सुएटोनियस के अनुसार रोम की सामान्य जनता ने डोमिटियन की मृत्यु की खबर को अपेक्षाकृत उदासीनता से स्वीकार किया, लेकिन सेना ने गहरा शोक व्यक्त किया। सैनिकों ने तत्काल उसे देवत्व प्रदान करने की माँग की और कई प्रांतों में अशांति भी उत्पन्न हुई। प्रेटोरियन गार्ड विशेष रूप से क्रोधित था। उसने डोमिटियन के हत्यारों को दंडित करने की माँग की, किंतु नर्वा ने प्रारंभ में इसे अस्वीकार कर दिया। परिणामस्वरूप उसके शासन की शुरुआत से ही सेना और सम्राट के बीच तनाव बना रहा। अंततः अक्टूबर 97 ईस्वी में एक संकटपूर्ण स्थिति में नर्वा को विवश होकर टाइटस पेट्रोनियस सेकुंडस और पार्थेनियस को पकड़कर मार डाला गया।

डोमिटियन का मूल्यांकन

डोमिटियन के बारे में पारंपरिक ऐतिहासिक दृष्टिकोण लंबे समय तक नकारात्मक रहा, क्योंकि उसकी मृत्यु के बाद सीनेट-समर्थक लेखकों—विशेषकर सुएटोनियस, टैसिटस और प्लिनी द यंगर ने उसे प्रायः एक निरंकुश और कठोर शासक के रूप में चित्रित किया। इसके विपरीत, उसके समकालीन दरबारी कवियों मार्शल और स्टेटियस ने उसकी उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए उसे लगभग देवतुल्य शासक के रूप में प्रस्तुत किया।

बीसवीं शताब्दी में पुरातात्त्विक खोजों, अभिलेखीय साक्ष्यों और सिक्कों के अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि प्राचीन साहित्यिक स्रोतों में प्रस्तुत उसकी छवि पूरी तरह निष्पक्ष नहीं थी। फ्रांसीसी विद्वान स्तेफ़ान ग्सेल (1894 ई.) और  1992 में ब्रायन डब्ल्यू. जोन्स (1992 ई.) ने उसके शासन का व्यापक पुनर्मूल्यांकन करते हुए लिखा हाई कि डोमिटियन निस्संदेह कठोर और सत्तावादी शासक था, किंतु वह एक अत्यंत सक्षम प्रशासक भी था। उसके शासनकाल में साम्राज्य सामान्यतः स्थिर और समृद्ध रहा, प्रशासनिक दक्षता बढ़ी, सीमाओं की सुरक्षा सुदृढ़ हुई और वित्तीय व्यवस्था मजबूत बनी रही। उसकी विदेश नीति भी व्यावहारिक थी, जिसमें अनावश्यक विस्तार के बजाय सीमा-सुरक्षा, सैन्य पुनर्गठन और कूटनीतिक समझौतों को प्राथमिकता दी गई।

फिर भी आधुनिक इतिहासकार यह स्वीकार करते हैं कि डोमिटियन की शासन-शैली में अधिनायकवादी तत्व मौजूद थे। उसने सम्राट की सत्ता और प्रतिष्ठा को असाधारण महत्त्व दिया, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया, विशाल निर्माण योजनाएँ संचालित कीं तथा प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर नियंत्रण स्थापित किया। दूसरी ओर उसकी सेंसरशिप नीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नियंत्रण और सीनेट के प्रति कठोर व्यवहार आलोचना के विषय बने रहे।  डोमिटियन को न तो पूर्णतः अत्याचारी मानता है और न ही आदर्श शासक। अधिकांश आधुनिक इतिहासकार उसे एक सक्षम, परिश्रमी और प्रभावी सम्राट के रूप में देखते हैं, जिसकी अधिनायकवादी प्रवृत्तियों ने उसे रोमन अभिजात वर्ग से टकराव की स्थिति में खड़ा कर दिया। इसके बावजूद उसकी प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य नीतियों ने दूसरी शताब्दी के रोमन साम्राज्य की स्थिरता और समृद्धि के लिए महत्त्वपूर्ण आधार तैयार किया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Scroll to Top