टाइटस (39–81 ई.) : फ्लेवियन वंश का लोकप्रिय रोमन सम्राट
टाइटस का पूरा नाम टाइटस फ्लावियस वेस्पासियानुस था। वह 79 से 81 ईस्वी तक रोमन साम्राज्य का सम्राट रहा। वह फ्लेवियन राजवंश का सदस्य तथा सम्राट वेस्पासियन का ज्येष्ठ पुत्र था। 23 जून 79 ईस्वी को वेस्पासियन की मृत्यु के बाद वह उसका उत्तराधिकारी बना। इस प्रकार वह रोमन इतिहास के उन आरंभिक सम्राटों में से एक था, जिन्होंने अपने जैविक पिता के पश्चात सीधे सत्ता प्राप्त की। आधुनिक इतिहासकार टाइटस को एक शिक्षित, कुशल सेनानायक तथा लोकप्रिय शासक मानते हैं, जिसने अपने संक्षिप्त शासनकाल में जन-कल्याण, निर्माण कार्यों और प्रशासनिक सुधारों को बढ़ावा दिया।
प्रारंभिक जीवन
टाइटस का जन्म 30 दिसंबर 39 ईस्वी को रोम में हुआ था। वह टाइटस फ्लावियस वेस्पासियानुस (वेस्पासियन) और डोमिटिला द एल्डर का ज्येष्ठ पुत्र था। उसकी एक छोटी बहन डोमिटिला द यंगर तथा एक छोटा भाई टाइटस फ्लावियस डोमिटियानुस (डोमिटियन) था।
टाइटस का पालन-पोषण शाही वातावरण में हुआ। उसने उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त की और सैन्य कला, प्रशासन, वक्तृत्व तथा साहित्य में दक्षता हासिल की। यूनानी और लैटिन दोनों भाषाओं पर उसकी अच्छी पकड़ थी। वह एक कुशल वक्ता तथा साहित्यिक रुचि रखने वाला व्यक्ति था।
टाइटस ने लगभग 57 से 59 ईस्वी के बीच सैन्य सेवा आरंभ की। 63 ईस्वी के आसपास उसका विवाह अरेसीना टेर्तुल्ला से हुआ, जो प्रेटोरियन गार्ड के पूर्व प्रीफेक्ट मार्कुस एरेसिनुस क्लेमेंस की पुत्री थी। कुछ वर्षों बाद उसकी मृत्यु हो गई। इसके पश्चात टाइटस ने मार्सिया फुर्निल्ला से विवाह किया। चूंकि मार्सिया का परिवार नीरो-विरोधी राजनीतिक समूहों से जुड़ा था, इसलिए 65 ईस्वी में पिसोनियन षड्यंत्र के बाद उसके परिवार के कुछ सदस्यों के राजनीतिक संकट में फँस जाने के कारण उसने फुर्निल्ला से तलाक ले लिया और पुनः विवाह नहीं किया।
जूडिया में सैन्य अभियान
ब्रिटेन तथा जर्मानिया में सेवा के बाद टाइटस एक सफल सैन्य अधिकारी के रूप में प्रसिद्ध हो चुका था। 66 ईस्वी में जूडिया प्रांत में रोमन शासन के विरुद्ध व्यापक यहूदी विद्रोह भड़क उठा। विद्रोह को दबाने के लिए सम्राट नीरो ने वेस्पासियन को नियुक्त किया। वेस्पासियन पाँचवीं और दसवीं सेना के साथ जूडिया पहुँचा, जबकि टाइटस 67 ईस्वी में पंद्रहवीं सेना के साथ अभियान में शामिल हुआ।
जून 68 ईस्वी में सम्राट नीरो की मृत्यु के बाद रोमन साम्राज्य उत्तराधिकार के संघर्ष में उलझ गया। 69 ई. में गाल्बा, ओथो, विटेलियस और अंततः वेस्पासियन ने सम्राट बनने का दावा किया, जिसके कारण इस वर्ष को रोमन इतिहास में ‘चार सम्राटों का वर्ष’ (ईयर ऑफ द फोर एम्परर्स) कहा जाता है। इस दौरान टाइटस ने अपने पिता की दावेदारी को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1 जुलाई 69 ईस्वी को मिस्र और पूर्वी प्रांतों की सेनाओं ने वेस्पासियन को सम्राट घोषित कर दिया। इसके बाद वेस्पासियन मिस्र चला गया, जबकि टाइटस को जूडिया में अभियान जारी रखने का दायित्व सौंपा गया। दिसंबर 69 ईस्वी में विटेलियस की पराजय के बाद रोमन सीनेट ने वेस्पासियन को आधिकारिक रूप से सम्राट स्वीकार कर लिया और फ्लेवियन राजवंश की स्थापना हुई।
यरूशलेम की घेराबंदी (70 ईस्वी)
69 ईस्वी में वेस्पासियन के सम्राट घोषित होने के बाद टाइटस को प्रथम यहूदी-रोमन युद्ध का संपूर्ण दायित्व सौंपा गया। 70 ईस्वी में उसने यरूशलेम के विरुद्ध निर्णायक अभियान चलाया। उस समय यहूदी प्रतिरोध आंतरिक संघर्षों से कमजोर हो चुका था। ज़ीलॉटों, सिकारियों तथा अन्य यहूदी विद्रोही गुटों के बीच सत्ता संघर्ष चल रहा था। जॉन ऑफ़ गिशाला और साइमन बार गियोरा जैसे नेताओं के नेतृत्व में विभिन्न यहूदी विद्रोही गुट आपस में सत्ता और नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे थे।
टाइटस ने यरूशलेम को चारों ओर से घेर लिया। उसकी सेना में पाँचवीं, दसवीं, बारहवीं और पंद्रहवीं सेनाएँ सम्मिलित थीं। मिस्र के प्रीफेक्ट टिबेरियस जूलियस अलेक्ज़ेंडर उसके प्रमुख सहयोगी थे। दीर्घ घेराबंदी के बाद रोमन सेना ने नगर पर अधिकार कर लिया। इस अभियान के दौरान यरूशलेम का दूसरा यहूदी मंदिर नष्ट हो गया, जो यहूदी इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण और दुखद घटनाओं में से एक है। इस विजय की स्मृति में बाद में रोम में प्रसिद्ध ‘टाइटस का मेहराब’ निर्मित किया गया। उसके शिल्पचित्रों में रोमन सैनिकों को मंदिर से सात शाखाओं वाला मेनोरा ले जाते हुए दर्शाया गया है।
विजय-उत्सव और उत्तराधिकारी
यरूशलेम की विजय के बाद टाइटस ने कैसरिया मेरिटिमा और बेरिटस में विजय-उत्सव आयोजित किए। 71 ईस्वी में रोम लौटने पर उसने अपने पिता वेस्पासियन के साथ संयुक्त विजय-उत्सव मनाया। इस अवसर पर युद्ध से प्राप्त धन-संपत्ति, बंदी बनाए गए विद्रोही तथा मंदिर से प्राप्त अवशेष प्रदर्शित किए गए।
वेस्पासियन के शासनकाल में टाइटस और उसके भाई डोमिटियन को ‘सीज़र’ की उपाधि प्रदान की गई। टाइटस ने प्रेटोरियन गार्ड के प्रीफेक्ट के रूप में कार्य किया तथा कई बार कौंसल पद धारण किया। वह व्यवहारतः साम्राज्य का उत्तराधिकारी और सह-शासक बन चुका था, यद्यपि उसे औपचारिक रूप से सह-सम्राट नहीं बनाया गया था। रोमन लेखक सुएटोनियस ने उसे ‘साम्राज्य का सहभागी और संरक्षक’ (पार्टिसेप्स आत्क्वे एतिआम ट्यूटर इम्पेरीई) कहा है।
बेरेनिस के साथ संबंध
यहूदी युद्ध के दौरान टाइटस का संबंध यहूदी राजकुमारी बेरेनिस से स्थापित हुआ, जो राजा हेरोद अग्रिप्पा द्वितीय की बहन थी। बाद में वह रोम आई और कुछ समय तक टाइटस के साथ रही। किंतु रोमवासियों में क्लियोपेट्रा एवं मार्क एंटनी की स्मृतियाँ अभी भी शेष थीं और वे किसी पूर्वी रानी को भावी सम्राज्ञी के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। फलतः रोमन जनता और अभिजात वर्ग के राजनीतिक दबाव के कारण टाइटस को दो बार बेरेनिस को रोम छोड़ने के लिए विवश करना पड़ा।
रोमन सम्राट के रूप में शासन (79–81 ई.)
23 जून 79 ईस्वी को वेस्पासियन की मृत्यु के बाद टाइटस बिना किसी संघर्ष के सम्राट बन गया। यद्यपि उसके पूर्व जीवन तथा कठोर प्रशासनिक शैली को लेकर अनेक आशंकाएँ थीं, किंतु सम्राट बनने के बाद उसने स्वयं को एक उदार और न्यायप्रिय शासक सिद्ध किया।
टाइटस ने राजद्रोह के मुकदमों के दुरुपयोग को सीमित किया तथा मुखबिरों की गतिविधियों पर अंकुश लगाया। उसने घोषणा की कि व्यक्तिगत आलोचना या अपमानजनक टिप्पणियों के लिए के लिए किसी को दंडित नहीं किया जाएगा। सुएटोनियस के अनुसार टाइटस का मानना था कि एक आदर्श शासक को न्यायप्रिय और उदार होना चाहिए। उसकी प्रसिद्ध उक्ति थी : ‘मित्रों, मैंने एक दिन खो दिया है।’ कहा जाता है कि उसने यह वाक्य उस दिन कहा था जब उसे लगा कि पूरे दिन में वह किसी व्यक्ति का कोई उपकार नहीं कर सका।
कोलोसियम और जन-कल्याण
टाइटस के शासनकाल की सबसे प्रसिद्ध उपलब्धियों में से एक रोम के प्रसिद्ध कोलोसियम (फ्लेवियन एम्फीथिएटर) का उद्घाटन था। इसके उद्घाटन के अवसर पर सौ दिनों से अधिक समय तक भव्य खेलों और सार्वजनिक समारोहों का आयोजन किया गया।
79 ईस्वी में माउंट वेसुवियस के विनाशकारी ज्वालामुखी विस्फोट ने पोम्पेई और हरकुलेनियम जैसे नगरों को नष्ट कर दिया। टाइटस ने राहत और पुनर्वास के लिए व्यापक सहायता प्रदान की। 80 ईस्वी में रोम में लगी भीषण आग और उसके बाद फैली महामारी के समय भी उसने उदारतापूर्वक राहत कार्य संचालित किए।
मृत्यु और विरासत
टाइटस का शासनकाल अल्पकालिक था। 13 सितंबर 81 ईस्वी को मात्र 41 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के कारणों को लेकर प्राचीन स्रोतों में विभिन्न अटकलें लगाई हैं, किंतु उसके भाई डोमिटियन की संलिप्तता का कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। उसकी मृत्यु के बाद रोमन सीनेट ने उसे देवत्व प्रदान किया और डोमिटियन को नया सम्राट घोषित किया।
इतिहासकारों के अनुसार टाइटस फ्लेवियन वंश का सबसे लोकप्रिय शासक था। रोमन लेखक सुएटोनियस ने उसे ‘मानव जाति का प्रिय’ (डेलिकिए हूमानी गेनेरिस) कहा है। यरूशलेम की विजय, कोलोसियम का उद्घाटन तथा प्राकृतिक आपदाओं के समय उसकी उदार सहायता उसे रोमन इतिहास के सबसे स्मरणीय सम्राटों में स्थान दिलाती है।




