उत्तर कॉन्स्टेंटाइनकालीन रोम
कॉन्स्टेंटाइन महान के बाद रोमन साम्राज्य का इतिहास विभाजन, ईसाईकरण और अंततः पतन की कहानी है। इस काल में साम्राज्य दो भागों—पश्चिमी रोमन साम्राज्य और पूर्वी रोमन साम्राज्य—में विभाजित हो गया।
कॉन्स्टेंटाइन महान ने अपने जीवनकाल में ही रोमन साम्राज्य को अपने पुत्रों और भतीजों के बीच विभाजित करने की व्यवस्था कर दी थी। किंतु 337 ईस्वी में उसकी मृत्यु के पश्चात उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष आरंभ हो गया। 350 ईस्वी में सिंहासन के एक अन्य दावेदार मैग्नेन्टियस ने कॉन्स्टेंटाइन के पुत्र कॉन्स्टान्स की हत्या कर दी। इसके बाद कॉन्स्टान्स के भाई कॉन्स्टैन्टियस द्वितीय ने स्थिति पर नियंत्रण किया और 351 ईस्वी में मुरसा के युद्ध में मैग्नेन्टियस को पराजित कर संपूर्ण साम्राज्य पर अपना अधिकार कर लिया।
चौथी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में रोमन साम्राज्य निरंतर राजनीतिक संघर्षों और षड्यंत्रों से घिरा रहा। 376–382 ईस्वी के बीच रोमन साम्राज्य ने आक्रमणकारी गोथों के विरुद्ध अनेक युद्ध लड़े, जिन्हें सामूहिक रूप से गोथिक युद्ध कहा जाता है। 9 अगस्त 378 ईस्वी को हुए एड्रियानोपल के युद्ध में रोमन सम्राट वैलेंस पराजित हुए। इतिहासकार इस घटना को पश्चिमी रोमन साम्राज्य के पतन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ मानते हैं।
392 ईस्वी में फ्रैंक सेनापति अर्बोगास्ट ने सम्राट वैलेन्टिनियन द्वितीय की हत्या करवा दी और युजेनियस को सम्राट घोषित कर दिया। किंतु 394 ईस्वी में सम्राट थियोडोसियस प्रथम ने फ्रिगिडस के युद्ध में अर्बोगास्ट और युजेनियस को पराजित कर समाप्त कर दिया। इससे कुछ समय के लिए संपूर्ण रोमन साम्राज्य पुनः एकीकृत हो गया।
395 ईस्वी में थियोडोसियस प्रथम की मृत्यु के बाद साम्राज्य स्थायी रूप से उसके दो पुत्रों के बीच विभाजित हो गया। पूर्वी रोमन साम्राज्य, जिसकी राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल थी, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध था; जबकि पश्चिमी रोमन साम्राज्य, जिसकी राजधानी प्रारंभ में रोम और बाद में रावेन्ना बनी, लगातार आर्थिक संकटों तथा बाहरी आक्रमणों से जूझता रहा। थियोडोसियस प्रथम का पुत्र अर्केडियस पूर्वी रोमन साम्राज्य तथा होनोरियस पश्चिमी रोमन साम्राज्य का शासक बना। यह विभाजन आगे चलकर स्थायी सिद्ध हुआ।
थियोडोसियस प्रथम की मृत्यु के तुरंत बाद विसिगोथों ने बाल्कन क्षेत्र में उपद्रव आरंभ कर दिया। पूर्वी साम्राज्य के शक्तिशाली अधिकारी रुफिनस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, किंतु 395 ईस्वी में उसकी हत्या कर दी गई। दूसरी ओर, पश्चिमी साम्राज्य में होनोरियस (393–423 ईस्वी) अपने योग्य सेनापति स्टिलिको के प्रभाव में था। स्टिलिको ने 396–397 ईस्वी में एलरिक के नेतृत्व में आए विसिगोथों को यूनान से खदेड़ दिया तथा 406 ईस्वी में इटली में घुसी बर्बर जातियों को भी पराजित किया। यद्यपि वह साम्राज्य का सबसे सक्षम रक्षक था, फिर भी 408 ईस्वी में होनोरियस ने उसकी हत्या करवा दी, जो पश्चिमी रोमन साम्राज्य के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हुई।
स्टिलिको की मृत्यु के बाद पश्चिमी साम्राज्य की स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। 409 ईस्वी में एलरिक ने पुनः इटली पर आक्रमण किया और एक कठपुतली शासक प्रिस्कस अत्तालुस को गद्दी पर बैठाया, किंतु बाद में उसे पदच्युत् कर दिया गया। 410 ईस्वी में एलरिक की मृत्यु हो गई, किंतु उसके उत्तराधिकारी अताउल्फ के नेतृत्व में विसिगोथों ने गॉल और स्पेन में अपना प्रभाव बढ़ाना जारी रखा। अताउल्फ के उत्तराधिकारी वलिया ने पश्चिमी यूरोप में विसिगोथों के प्रथम स्थायी राज्य की नींव रखी। इसी काल में वंडल, एलन, स्यूवी तथा बर्गंडियन जातियों ने भी गॉल और स्पेन में प्रवेश कर अपने-अपने राज्य स्थापित करने आरंभ कर दिए।
423 ईस्वी में होनोरियस की मृत्यु के पश्चात जोहैन्स ने सत्ता पर अधिकार कर लिया, किंतु पूर्वी सम्राट थियोडोसियस द्वितीय की सेनाओं ने उसे पराजित कर मृत्युदंड दे दिया। इसके बाद वैलेन्टिनियन तृतीय (425–455 ईस्वी) पश्चिमी साम्राज्य का शासक बना। इस काल में साम्राज्य का वास्तविक संचालन उसके सेनानायक एटियस के हाथों में था। उसी समय पूर्वी साम्राज्य में मार्कियन (450–457 ईस्वी) का शासन स्थापित हुआ।
पाँचवीं शताब्दी के मध्य में हूणों के महान नेता अत्तिला ने संपूर्ण यूरोप को आतंकित कर दिया। 451 ईस्वी में उसने गॉल पर आक्रमण किया और अनेक नगरों को नष्ट कर दिया। किंतु विसिगोथ राजा थियोडोरिक प्रथम, फ्रैंकों तथा रोमन सेनानायक एटियस की संयुक्त सेना ने कैटालोनियन मैदानों (चालोंस के युद्ध) में उसे पराजित कर दिया। यद्यपि इससे अत्तिला की शक्ति पूर्णतः समाप्त नहीं हुई, फिर भी गॉल की रक्षा हो गई।
452 ईस्वी में अत्तिला ने पुनः इटली पर आक्रमण किया। उसने एक्विलिया, पडुआ तथा अन्य नगरों को नष्ट कर दिया और मिलान तक पहुँच गया। किंतु शीघ्र ही वह अज्ञात कारणों से लौट गया। 453 ईस्वी में अत्तिला की अचानक मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के साथ ही हूणों का विशाल महासंघ टूट गया, किंतु उसके आक्रमणों ने पश्चिमी रोमन साम्राज्य को गंभीर क्षति पहुँचाई।
अत्तिला की मृत्यु के बाद पश्चिमी रोमन साम्राज्य तेजी से पतन की ओर बढ़ा। 455 से 476 ईस्वी के बीच अनेक अल्पकालिक सम्राट सत्ता में आए, किंतु कोई भी साम्राज्य को स्थिरता प्रदान नहीं कर सका। वास्तविक शक्ति जर्मन मूल के सेनानायकों और भाड़े के सैनिकों के हाथों में चली गई। अंततः रोमुलस ऑगस्टुलस (475–476 ईस्वी) पश्चिमी रोमन साम्राज्य का अंतिम सम्राट बना।
पश्चिमी रोमन साम्राज्य का औपचारिक अंत 4 सितंबर 476 ईस्वी को माना जाता है, जब जर्मन मूल के सेनानायक ओडोएकर ने अंतिम पश्चिमी रोमन सम्राट रोमुलस ऑगस्टुलस को पदच्युत् कर दिया। यद्यपि कुछ इतिहासकार पश्चिमी रोमन साम्राज्य का वास्तविक अंत 480 ईस्वी में जूलियस नेपोस की मृत्यु के साथ मानते हैं।
इसके विपरीत, पूर्वी रोमन साम्राज्य लगभग एक हजार वर्षों तक जीवित रहा और आगे चलकर बाइज़ेंटाइन साम्राज्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ। छठी शताब्दी में सम्राट जस्टिनियन प्रथम के नेतृत्व में पूर्वी साम्राज्य ने अपने पुराने गौरव को पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के अनेक भागों पर पुनः अधिकार स्थापित किया। अंततः 1453 ईस्वी में ऑटोमन तुर्क सुल्तान मेहमेद द्वितीय ने कॉन्स्टेंटिनोपल पर विजय प्राप्त कर बाइज़ेंटाइन साम्राज्य का अंत कर दिया।
यद्यपि पूर्वी साम्राज्य स्वयं को निरंतर ‘रोमन साम्राज्य’ ही कहता रहा, फिर भी उसकी राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना प्राचीन रोम से काफी भिन्न हो चुकी थी। बाद के मध्यकाल में स्थापित पवित्र रोमन साम्राज्य भी नाममात्र का ही रोमन साम्राज्य था और उसका प्राचीन रोमन साम्राज्य से केवल सीमित वैचारिक संबंध था।




