कलचुरी राजवंश (Kalachuri Dynasty)

कालचुरी राजवंश, जिसे हैहयवंशी कालचुरी भी कहा जाता है, भारतीय इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण राजवंश […]

कालचुरी राजवंश, जिसे हैहयवंशी कालचुरी भी कहा जाता है, भारतीय इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण राजवंश है, जिसने छठी शताब्दी ईस्वी से लेकर अठारहवीं शताब्दी के मध्य तक मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में शासन किया। यह राजवंश अपनी सैन्य शक्ति, प्रशासनिक कुशलता और सांस्कृतिक योगदान के लिए प्रसिद्ध है। कलचुरियों के प्रभाव और प्रसिद्धि का सबसे बड़ा प्रमाण त्रैकूटक-कलचुरी-चेदि संवत् है, जिसे मूलतः 248-249 ई. में आभीर ईश्वरसेन ने पश्चिमी भारत में प्रवर्तित किया था। इस संवत् का प्रयोग प्रारंभिक गुर्जरों, प्रारंभिक कलचुरियों, चालुक्यों और सेंद्रकों ने मध्य भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में किया। बाद के कलचुरियों ने अपने लेखों में इसी संवत् का प्रयोग किया और यह संवत् कलचुरी संवत् के नाम से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार के क्षेत्रों में प्रचलित हो गया।
ऐतिहासिक स्रोत

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