सेवेरन वंश (Severan Dynasty)

सेवेरन वंश (Severan Dynasty)

सेवेरन वंश (193-235 ई.)

सेवेरेन वंश ने लगभग चार दशकों (193- 235 ई.) तक रोमन साम्राज्य पर शासन किया। इस वंश की स्थापना 193 ई. में सम्राट सेप्टिमियस सेवेरेस ने की थी। सेवरन राजवंश के काल में रोमन साम्राज्य का विस्तार हुआ, सेना की भूमिका बढ़ी और 212 में काराकल्ला ने साम्राज्य के सभी स्वतंत्र लोगों को नागरिकता प्रदान की। 235 ईस्वी में सम्राट अलेक्जेंडर सेवेरस की हत्या के साथ इस राजवंश का अंत हुआ और रोमन साम्राज्य ने ‘तीसरी शताब्दी के संकट’ नामक राजनीतिक एवं सैन्य अराजकता के दौर में प्रवेश किया।

सेप्टिमियस सेवेरस (193–211 ई.)

सेप्टिमियस सेवेरस रोम के सेवेरन वंश का संस्थापक था। उसका जन्म 145 ई. में उत्तरी अफ्रीका के लेप्टिस मैग्ना नगर में हुआ था। उसने अपनी सैन्य और प्रशासनिक योग्यता के बल पर उच्च पद प्राप्त किया। 187 ई. में उसने सीरियाई कुलीन महिला जूलिया डोम्ना से विवाह किया, जिसने राज्य-संचालन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। सेवेरस ने 193 ई. में गृहयुद्ध में अपने प्रतिद्वंद्वियों को पराजित कर रोमन सिंहासन प्राप्त किया। उसने पहले पेस्केनियस निगर को साइजिकस, निकाया और इस्सुस के युद्धों में हराया तथा बाद में क्लोडियस एल्बिनस को लुग्डुनम (ल्योन) के युद्ध में परास्त कर अपना प्रभुत्व स्थापित किया।

सिंहासन पर बैठने के बाद सेवेरस ने साम्राज्य की सीमाओं को सुरक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया। उसने 197–198 ई. में पार्थियनों को पराजित कर उनकी राजधानी टेसिफोन तक विजय प्राप्त की और मेसोपोटामिया का पुनर्गठन किया। बाद में, उसने ब्रिटेन और कैलेडोनिया (स्कॉटलैंड) में भी अभियान चलाया तथा उत्तरी सीमाओं को सुदृढ़ किया। उसकी सैन्य सफलताओं से कुछ समय के लिए रोमन साम्राज्य की प्रतिष्ठा पुनः स्थापित हो गई।

सेवेरस की सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धि सेना का पुनर्गठन थी। उसने सैनिकों का वेतन बढ़ाया, उन्हें विवाह करने की अनुमति दी और सेवा-निवृत्ति के बाद भूमि प्रदान करने की व्यवस्था की। इससे सेना की निष्ठा और शक्ति दोनों में वृद्धि हुई। किंतु आगे चलकर यही प्रवृत्ति रोमन राजनीति में अस्थिरता का कारण बनी।

प्रशासनिक क्षेत्र में सेवेरस ने इक्वेस्ट्रियन वर्ग के लोगों को उच्च प्रशासनिक और सैनिक पदों पर नियुक्त किया तथा सीनेट के प्रभाव को सीमित कर दिया। शासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रांतों का पुनर्गठन किया गया और न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया। उसके शासनकाल में सम्राट की शक्ति पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सुदृढ़ हो गई।

सेवेरस ने राजकोषीय व्यवस्था में भी परिवर्तन किए। उसने एक अतिरिक्त कोषागार की स्थापना की और शासकीय संपत्तियों पर सम्राट का नियंत्रण बढ़ाया।

सेप्टिमियस सेवेरस विद्या और संस्कृति का भी संरक्षक था। उसकी पत्नी जूलिया डोम्ना स्वयं विदुषी थी और उसके दरबार में अनेक दार्शनिक, साहित्यकार तथा विद्वान रहते थे। इस प्रकार उसका शासन केवल सैन्य सफलताओं तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र बना।

इस प्रकार सेप्टिमियस सेवेरस ने गृहयुद्धों और राजनीतिक अराजकता से ग्रस्त रोमन साम्राज्य को पुनः स्थिरता प्रदान की। उसके शासनकाल में सेना की शक्ति बढ़ी और सम्राट की स्थिति पहले की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ हुई। यही कारण है कि उसका शासन रोमन इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

211 ई. में ब्रिटेन (यॉर्क) में अभियान के दौरान सेवेरस की मृत्यु हो गई। किंतु मृत्यु से पूर्व उसने अपने दोनों पुत्रों- काराकल्ला तथा गेटा को संयुक्त रूप से साम्राज्य का उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था।

काराकल्ला और गेटा (211-217 ई.)

सेवेरस के बाद उसके दोनों पुत्रों- काराकल्ला और गेटा ने संयुक्त रूप से सत्ता सँभाली, किंतु उनके बीच तीखे मतभेद थे। प्रारंभ में उनकी माता जूलिया डोम्ना ने दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया, परंतु अंततः 211 ई. में काराकल्ला ने अपने भाई गेटा की हत्या करवा दी और स्वयं को सम्राट घोषित कर दिया। इसके बाद उसने गेटा के समर्थकों का दमन किया और सेना का समर्थन बनाए रखने के लिए सैनिकों के वेतन में वृद्धि की।

काराकल्ला का शासनकाल कई दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण था। 212 ई. में उसने ‘कॉन्स्टिट्यूटियो एंटोनिनियाना’, जिसे ‘एंटोनिनाइन एडिक्ट’ भी कहा जाता है, जारी किया। इसके द्वारा रोमन साम्राज्य के लगभग सभी स्वतंत्र निवासियों को रोमन नागरिकता प्रदान कर दी गई।

काराकल्ला ने जर्मनिक और डेन्यूब क्षेत्र की जनजातियों के विरुद्ध भी सैन्य अभियान चलाया। किंतु उसके शासनकाल की प्रमुख उपलब्धि रोम में निर्मित विशाल ‘काराकल्ला के स्नानागार’ हैं। 217 ई. में पार्थियनों के विरुद्ध अभियान के दौरान उसकी हत्या कर दी गई।

सेवेरन राजवंश के परवर्ती शासक (217-235 ई.)

काराकल्ला की मृत्यु के बाद प्रेटोरियन प्रीफेक्ट मैक्रिनस (217-218 ई.) ने सत्ता पर अधिकार कर लिया। वह सेवेरेन परिवार का सदस्य नहीं था और रोमन इतिहास का पहला ऐसा सम्राट था, जो किसी सीनेटर परिवार से संबंधित नहीं था। उसने पार्थियनों के साथ शांति स्थापित की, किंतु उसकी नीतियाँ सैनिकों को पसंद नहीं आईं, जिसके परिणामस्वरूप 218 ई. में उसे अपदस्थ कर दिया गया।

मैक्रिनस के पतन के बाद जूलिया डोम्ना की बहन जूलिया मैसा के सहयोग से उसका नाती एलागाबालस (218-222 ई.) सम्राट बना, जो मूलतः सीरिया के सूर्य देवता एलागाबाल का पुजारी था। उसने रोमन धार्मिक परंपराओं में परिवर्तन करने का प्रयास किया, जिससे जनता और सेना में असंतोष उत्पन्न हो गया और अंततः 222 ई. में उसकी हत्या कर दी गई।

एलागाबालस के बाद उसका चचेरा भाई सेवेरेस अलेक्ज़ेंडर (222-235 ईस्वी) रोमन सम्राट बना, जो सेवेरन वंश का अंतिम शासक सिद्ध हुआ। सम्राट बनने के समय उसकी आयु केवल चौदह वर्ष थी, इसलिए शासन संचालन में उसकी माता जूलिया ममाया का अत्यधिक प्रभाव था। यद्यपि प्राचीन लेखकों ने उसके शासनकाल को अपेक्षाकृत कुशल और व्यवस्थित बताया है, किंतु 235 ई. में जर्मनी में अभियान के दौरान विद्रोही सैनिकों ने उसकी तथा उसकी माता की हत्या कर दी और सेवेरन राजवंश का अंत हो गया।

सेवेरन राजवंश की समाप्ति के बाद रोमन साम्राज्य में राजनीतिक अस्थिरता, गृहयुद्ध और बाह्य आक्रमणों का दौर शुरू हुआ, जिसे इतिहास में ‘तीसरी शताब्दी के संकट’ के नाम से जाना जाता है।

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