प्रथम विश्व युद्ध से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on World War I)
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) 1.प्रथम विश्व युद्ध के कारण क्या थे? (A) गुटबंदी (B) सैन्यवाद […]
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प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) 1.प्रथम विश्व युद्ध के कारण क्या थे? (A) गुटबंदी (B) सैन्यवाद […]
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1.इटली और जर्मनी के एकीकरण की प्रारंभिक प्रेरणा का श्रेय किसे दिया जाता है? (A)
पेरिस शांति सम्मेलन 1.पेरिस शांति सम्मेलन कब आरम्भ हुआ? (A) 11 नवंबर 1918 (B)
पेरिस शांति सम्मेलन पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on the Paris Peace Conference) Read More »
HIS 101F B.A. Ist Semester Examination, 2025-26 History Ancient and Early Medieval India (Till 1206
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर HIS 106 Under graduate Examination, 2025-26 History (Introduction To Deen
दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Deen Dayal Upadhyay) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर HIS 301 B.A. Vth Semester Examination, 2025-26 (Nationalism in India)
भारत में राष्ट्रवाद पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Nationalism in India) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर B.A. Vth Semester Examination, 2025-26 History GROUP-3: HIS 304 –
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर B.A. Vth Semester Examination, 2025-26 History GROUP-2 : HIS 303-Modern
आधुनिक विश्व आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Modern World) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर B.A. Vth Semester Examination, 2025-26 History GROUP-1 : HIS 302
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर PHI 100 Under Graduate Examination, 2025-26 Minor Course (Introduction to
नाथ पंथ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Nath Panth) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर SE 1PHI Under Graduate Examination, 2025-26 (YOGA-I) Skill Enhancement Course
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर सेमेस्टर परीक्षा- 2025-26 राष्ट्रगौरव 1.समाजवाद का मुख्य उद्देश्य है— (A)
राष्ट्रगौरव पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on National Pride) Read More »
संयुक्त राष्ट्र संघ 1.संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब हुई? (A) 26 जून 1945 (B)
संयुक्त राष्ट्र संघ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (Mcqs on the United Nations) Read More »
पल्लव राजवंश 1.पल्लव राजवंश ने मुख्य रूप से किस क्षेत्र पर शासन किया? (A)
पल्लव राजवंश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Pallava Dynasty) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर HIS 201F B.A. IIIrd Semester Examination, 2025-26 (History of Modern
आधुनिक भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Modern Indian History) Read More »
इल्तुतमिश (1211-1236) शम्सुद्दीन इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत में गुलाम वंश का एक प्रमुख शासक था। ‘इल्तुतमिश’
कुतुबुद्दीन ऐबक (1210) कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान एवं गुलाम वंश का संस्थापक
कुतुबुद्दीन ऐबक (Qutubuddin Aibak, 1206-1210 AD) Read More »
यूनान में जिस पश्चिमी प्रजातंत्र की अवधारणा का जन्म हुआ था, वह धीरे-धीरे विकसित होता
इटली में फासीवाद और मुसोलिनी (Fascism and Mussolini in Italy) Read More »
क्लासिकी यूनानियों के आगमन से पूर्व यूरोप में ऐतिहासिक सभ्यता का आविर्भाव विस्तृत ईजियन प्रदेश
ब्रिटिश सत्ता का भारत में विस्तार 18वीं सदी के मध्य से 19वीं सदी के मध्य
ब्रिटिश सत्ता का विस्तार (Expansion of British Power, 1772–1857) Read More »
फ्रांसीसी क्रांति (1789) के समय फ्रांस का शासक कौन था? (A) लुई तेरहवाँ (B) लुई
फ्रांसीसी क्रांति (1789) पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on The French Revolution) Read More »
1935 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट ब्रिटिश शासन द्वारा भारत में प्रशासनिक और संवैधानिक ढाँचे
1935 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट (Government of India Act of 1935) Read More »
1789 ई. की फ्रांस की क्रांति फ्रांस की क्रांति यूरोप की ही नहीं, बल्कि विश्व
1789 ई. की फ्रांस की क्रांति (The French Revolution of 1789) Read More »
सैय्यद वंश (1414-1451 ई.) सुल्तान महमूद की मृत्यु के पश्चात् दिल्ली के सरदारों ने दौलत
भारत में नवपाषाण काल नवपाषाण काल में प्रागैतिहासिक मानव ने एक नए युग में प्रवेश
भारत में नवपाषाण काल (Neolithic Period in India) Read More »
1857 का भारतीय विद्रोह भारतीय इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण घटनाओं में से एक था। यह
ब्रिटिश शासन के दौरान (1757-1947) भारत में तकनीकी शिक्षा का विकास सीमित, लेकिन रणनीतिक महत्व
1.1917 की रूसी क्रांति का प्रथम चरण कब हुआ था? (A) जनवरी 1917 (B) फरवरी
देवी-देवताओं का मंडल बेबीलोनियन धर्म और आध्यात्मिकता प्राचीन मेसोपोटामिया की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना का
बेबीलोनियन सभ्यता में धार्मिक जीवन (Religious Life in the Babylonian Civilisation) Read More »
हम्मुराबी की विधि-संहिता बेबीलोनियन साम्राज्य के प्रशासन और सामाजिक व्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है,
हम्मुराबी की विधि-संहिता (Hammurabi’s Code of Law) Read More »
मेसोपोटामिया की सभ्यता का दूसरा अध्याय बेबीलोनिया की सभ्यता मेसोपोटामिया की सभ्यता का दूसरा और
बेबिलोनिया की सभ्यता, जो मेसोपोटामिया की उपजाऊ दजला और फरात नदियों की घाटी में विकसित
बेबिलोनिया का राजनीतिक संगठन (Political Organisation of Babylonia) Read More »
1.प्रथम विश्व युद्ध (1917) में किस देश ने जर्मनी के साथ शांति संधि पर हस्ताक्षर
विश्व इतिहास से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on World History) Read More »
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और मुस्लिम समुदाय की चुनौतियाँ राष्ट्रीय एकता की चुनौती और हिंदू राष्ट्रवाद
मुस्लिम राजनीति और मुस्लिम लीग (Muslim Politics and the Muslim League) Read More »
हित्ती सभ्यता, जिसे खत्ती सभ्यता भी कहा जाता है, प्राचीन अनातोलिया (आधुनिक तुर्की) में कांस्य
ब्रिटिश शासन की पृष्ठभूमि और प्रारंभिक विरोध भारत में ब्रिटिश राज्य की स्थापना कई चरणों
राजपूतों की पराजय और तुर्कों की सफलता के कारण 12वीं और 13वीं शताब्दी में तुर्कों
संस्कार भारतीय संस्कृति का आधारभूत तत्व हैं, जो मानव जीवन को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक
प्राचीन भारतीय समाज में पुरुषार्थों का विशेष महत्त्व रहा है। भारतीय दर्शन और संस्कृति में
भारतीय संस्कृति में आश्रम व्यवस्था का विशेष महत्त्व है। यह व्यवस्था मानव जीवन को जन्म
पूर्वी गंग वंश भारत के पूर्वी तट पर, मुख्य रूप से आधुनिक ओडिशा (उड़ीसा) और
काकतीय राजवंश एक तेलुगु राजवंश था, जिसने 12वीं से 14वीं शताब्दी के बीच पूर्वी दक्कन
छत्तीसगढ़ में काकतीय छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में काकतीय वंश ने 1324 ई. से 1947
छत्तीसगढ़ में काकतीय वंश का इतिहास (History of Kakatiya dynasty in Chhattisgarh) Read More »
गणपतिदेव (1199–1262 ई.) प्रारंभिक संघर्ष गणपतिदेव काकतीय राजवंश के सबसे लंबे समय तक शासन करने
काकतीय साम्राज्य की महान शासिका रुद्रमा देवी, जिन्हें रुद्राम्बा या रुद्रदेव महाराज के नाम से
काकतीय राजवंश 1.काकतीय राजवंश की उत्पत्ति किससे जोड़ी गई है? (A) करिकाल चोल (B) राष्ट्रकूट
काकतीय राजवंश से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs related to Kakatiya Dynasty) Read More »
होयसलकालीन सांस्कृतिक उपलब्धियाँ होयसल वंश, जिसने 11वीं से 14वीं शताब्दी तक दक्षिण भारत के कर्नाटक,
होयसलकालीन सांस्कृतिक उपलब्धियाँ (Cultural Achievements of the Hoysala Period) Read More »
होयसल राजवंश (950-1343 ई.) होयसल राजवंश दक्षिण भारत के मध्यकालीन इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण शक्ति
भारत के प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास में गंग वंश दो अलग-अलग राजवंशों—पश्चिमी गंग और पूर्वी
पल्लव प्रशासन पल्लवों ने अपने लगभग 600 वर्षों के शासनकाल (लगभग 275-907 ई.) में दक्षिण
परमार भोज (1010-1055 ई.) राजा भोज परमार (1010-1055 ई.) की गणना प्राचीन भारत के सबसे
वाक्पति द्वितीय ‘मुंजराज’ (974-995 ई.) वाक्पति द्वितीय ‘मुंजराज’ (974-995 ई.) परमार वंश के शक्तिशाली शासक
नरसिंहवर्मन द्वितीय (695-722 ई.) परमेश्वरवर्मन प्रथम के पश्चात्, लगभग 695 ई. में उसके पुत्र नरसिंहवर्मन
परमेश्वरवर्मन प्रथम (670-695 ई.) परमेश्वरवर्मन प्रथम (670-695 ई.) महेंद्रवर्मन द्वितीय का पुत्र और पल्लव वंश
नंदिवर्मन तृतीय (846-869 ई.) नंदिवर्मन तृतीय (846-869 ई.) पल्लव वंश का अंतिम शक्तिशाली शासक था,
दंतिवर्मन (796-847 ई.) नंदिवर्मन द्वितीय का पुत्र दंतिवर्मन (796-847 ई.), जो राष्ट्रकूट राजकुमारी रेवा से
नंदिवर्मन द्वितीय (730–796 ई.) परमेश्वरवर्मन द्वितीय की मृत्यु के बाद पल्लव राज्य में राजनीतिक संकट
नरसिंहवर्मन प्रथम (630-668 ई.) नरसिंहवर्मन प्रथम (630-668 ई.) पल्लव वंश का एक महत्त्वपूर्ण शासक था,
महेंद्रवर्मन प्रथम (600-630 ई.) महेंद्रवर्मन प्रथम (600-630 ई.) पल्लव वंश का एक महान राजा था,
पल्लवकालीन सांस्कृतिक उपलब्धियाँ पल्लव राजवंश दक्षिण भारत का एक प्रमुख एवं शक्तिशाली राजवंश था, जिसने
पल्लवकालीन सांस्कृतिक उपलब्धियाँ (Cultural Achievements of the Pallava Period) Read More »
दक्कन क्षेत्र, विशेष रूप से कर्नाटक में, 1156 से 1181 ई. तक एक अन्य कलचुरि
कल्याणी के कलचुरि (Kalachuris of Kalyani, 1156-1181 A.D.) Read More »
त्रिपुरी के कलचुरि (675–1212 ई.) त्रिपुरी के कलचुरि राजवंश का भारत के इतिहास में महत्त्वपूर्ण
रायपुर के कलचुरि : लहुरी शाखा रायपुर की कलचुरि (लहुरी शाखा) का इतिहास छत्तीसगढ़ के
रतनपुर के कलचुरि (1000–1741 ई.) छत्तीसगढ़ में कलचुरि शासन की नींव त्रिपुरी के कलचुरि शासक
रतनपुर के कलचुरि (Kalachuris of Ratanpur, 1000–1741 AD) Read More »
छत्तीसगढ़ के कलचुरि : रतनपुर और रायपुर शाखा छत्तीसगढ़ भारत के इतिहास में एक समृद्ध
कलचुरि राजवंश (550-1850 ई.) कलचुरि राजवंश, जिसे हैहयवंशी कलचुरि भी कहा जाता है, भारतीय इतिहास
सरयूपार के कलचुरि कलचुरियों की सबसे प्राचीन शाखा मध्य भारत में नर्मदा नदी के ऊपरी
कलचुरियों का इतिहास : महिष्मती शाखा (575-620) कलचुरियों की सबसे प्राचीन शाखा मध्य भारत में
पुरातात्त्विक और साहित्यिक स्रोत उत्तर भारत का राजनीतिक इतिहास (550 ई. से 1200 ई.) एक
उत्तर भारत के ऐतिहासिक स्रोत (Historical Sources of North India, 550 AD to 1200 AD) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर HIS 309 इतिहास की व्यावसायिक उपयोगिता B.A. VIth Semester Examination,
इतिहास की व्यावसायिक उपयोगिता (Professional Utility of History) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर HIS 307 आधुनिक विश्व का इतिहास (1815-1945) B.A. VIth Semester
आधुनिक विश्व का इतिहास (History of Modern World) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर HIS 307 भारत का सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक इतिहास B.A.
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर HIS 306 गांधी और जन आंदोलन का युग B.A. VIth
(दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर) राष्ट्रगौरव, पर्यावरण एवं मानवाधिकार अध्ययन परीक्षा-2025 (भाग-I, II एवं III/IV)
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर PHI 100 (नाथपंथ) Under Gradduate (IInd & IVth Semester) Examination-2024-25
नाथपंथ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Nathpanth) Read More »
(दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर) HIS 203 आधुनिक विश्व का इतिहास (1453-1848) B.A. IVth Semester
आधुनिक विश्व का इतिहास (History of Modern World) Read More »
D.D.U. Gorakhpur University, Gorakhpur HIS 204 आधुनिक विश्व का इतिहास (1848-1950) B.A. IVth Semester Examination,
आधुनिक विश्व का इतिहास (History of Modern World) Read More »
(दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर) HIS 102 मध्यकालीन भारत का इतिहास (1206-1757) B.A. 2nd Semester
मध्यकालीन भारत का इतिहास (History of Medieval India) Read More »
भारत की स्वतंत्रता (15 अगस्त 1947 ई.) माउंटबेटन ने 3 जून 1947 ई. को रेडियो
माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) वायसरॉय वेवेल की 24 अगस्त की घोषणा के अनुसार 2
कैबिनेट मिशन योजना (1946) 1940 से लेकर 1946 में कैबिनेट मिशन के आगमन तक जिन्ना
मनसबदारी प्रथा मंगोल सरदार चंगेज खाँ द्वारा प्रतिपादित दशमलव प्रणाली पर आधारित थी। भारत में
1945 के आते-आते ब्रिटिश शासकों को आभास हो गया था कि अब साम्राज्यवादी खेल खत्म
वेवेल योजना और शिमला सम्मेलन (Wavell Plan and Shimla Conference) Read More »
क्रिप्स मिशन (1942) 1941 में विश्व की राजनीति में दो महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आए। पश्चिमी यूरोप
अक्टूबर घोषणा, अगस्त-प्रस्ताव और वैयक्तिक सत्याग्रह द्वितीय विश्व युद्ध का आरंभ सितंबर 1939 में जर्मन
नेहरू रिपोर्ट (1928) नवंबर 1927 में ब्रिटिश सरकार ने भारत सरकार अधिनियम 1919 के कामकाज
गदर आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है। इस आंदोलन की नींव संयुक्त
असहयोग आंदोलन 1920 में गांधीजी द्वारा ब्रिटिश शासन के विरूद्ध शुरू किया गया पहला राष्ट्रव्यापी
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर परीक्षा- 2024-25 HIS 106 (पं. दीनदयाल उपाध्यायः एक परिचय) 1.पं.
पं. दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-4 (MCQs on Pt. Deendayal Upadhyay-4) Read More »
मध्यकालीन भारतीय इतिहास (Medieval Indian History) से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया
नाथपंथ (संप्रदाय) पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (MCQs and Answers on Nathpanth) Read More »
मध्यकालीन भारतीय इतिहास (Medieval Indian History) से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया
मध्यकालीन भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Medieval Indian History) Read More »
आधुनिक विश्व (Modern World) से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है,
आधुनिक विश्व पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Modern World) Read More »
भारत में राष्ट्रवाद (Nationalism in India) से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया
भारत में राष्ट्रवाद पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (MCQs on Nationalism in India) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा आयोजित स्नातक प्रथम सेमेस्टर के (AE 1 HIN) राष्ट्रगौरव
राष्ट्रगौरव पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs based on National Pride) Read More »
आधुनिक भारत से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
आधुनिक भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Modern India, 1857–1947) Read More »
प्राचीन और आरंभिक भारत से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है,
आधुनिक भारतीय इतिहास से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो
आधुनिक भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Modern Indian History) Read More »
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक जीवन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों
मध्यकालीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 ई. को
भारत के मध्यकालीन इतिहास एवं संस्कृति (शाहजहाँ) से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन
शाहजहाँ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (MCQs on Shahjahan) Read More »
भारत के मध्यकालीन इतिहास एवं संस्कृति (जहाँगीर) से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन
जहाँगीर पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Jahangir) Read More »
अकबर से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय परीक्षाओं
अकबर पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Akbar) Read More »
भारत के मध्यकालीन इतिहास एवं संस्कृति (शेरशाह सूरी) से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का
शेरशाह सूरी पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Shershah Suri) Read More »
हुमायूँ से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय परीक्षाओं
हुमायूँ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Humayun) Read More »
बाबर से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय परीक्षाओं
बाबर पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Babur) Read More »
भारत के मध्यकालीन इतिहास एवं संस्कृति से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया
मध्यकालीन भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Medieval India-1) Read More »
आठवीं शताब्दी में अरबों की सिंध विजय (712 ई.) के बाद सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक घटना
हर्ष की मृत्यु के बाद की राजनीतिक स्थिति हर्ष की मृत्यु (647-648 ई.) के पश्चात्
मध्यकालीन भारतीय इतिहास भारतीय इतिहास को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संगठनों तथा विचारों और मान्यताओं
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत (Sources of Medieval Indian History) Read More »
विजयनगर प्रशासन विजयनगर साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिणी भाग में, मुख्यतः दक्कन क्षेत्र में स्थित
पुलकेशिन द्वितीय (609-642 ई.) पुलकेशिन द्वितीय बादामी के चालुक्य वंश का महानतम् शासक था। वह
उत्तम चोल (970-985 ई.) उत्तम चोल (मधुरांतक) परांतक द्वितीय का चचेरा भाई और शेंबियन महादेवी
भारत के मध्यकालीन इतिहास से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्नों की श्रृंखला में दिल्ली सल्तनत पर आधारित
दिल्ली सल्तनत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Delhi Sultanate) Read More »
शाकंभरी के चौहान चाहमान राजवंश पूर्वमध्यकालीन भारत का एक राजपूत राजवंश था, जिसने सातवीं शताब्दी
शाकंभरी का चाहमान राजवंश (Chahamana Dynasty of Shakambhari) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के बी.ए. पंचम सेमेस्टर परीक्षा 2023-24 में इतिहास विषय (HIS 301,
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए. की प्रथम सेमेस्टर
प्राचीन भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-5 (MCQs on Ancient Indian History-5) Read More »
आधुनिक भारत और राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
आधुनिक भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-12 (MCQs on Modern India-12) Read More »
आधुनिक भारत से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
आधुनिक भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-10 (MCQs on Modern India-10) Read More »
आधुनिक भारत से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
आधुनिक भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-9 (MCQs on Modern India-9) Read More »
आधुनिक भारत और राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
आधुनिक भारत और राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
आधुनिक भारत और राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
आधुनिक भारत में सुधार आंदोलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के बी.ए. तृतीय सेमेस्टर ‘आधुनिक
आधुनिक भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-3 (MCQs on Modern Indian History-3) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के बी.ए. तृतीय सेमेस्टर ‘आधुनिक
आधुनिक भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Modern Indian History-1) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के बी.ए. तृतीय सेमेस्टर ‘आधुनिक
आधुनिक भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Modern Indian History-2) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
पं. दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-3 (MCQs on Pt. Deendayal Upadhyay-3) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
पं. दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Pt. Deendayal Upadhyay-2) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
राष्ट्र गौरव पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on National Pride-2) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
राष्ट्र गौरव पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on National Pride-1) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम. की सेमेस्टर परीक्षाओं में ‘राष्ट्र
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
नाथपंथ (संप्रदाय) पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-6 (MCQs on Nathpanth-6) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए. की सेमेस्टर परीक्षाओं
प्राचीन भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-4 (MCQs on Ancient Indian History-4) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
पं. दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Pt. Deendayal Upadhyay-1) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
नाथपंथ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-3 (MCQs on Nathpanth-3) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
नाथपंथ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Nathpanth-2) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
नाथपंथ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-4 (MCQs on Nathpanth-4) Read More »
नई शिक्षा नीति-2020 के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की बी.ए., बी.एस-सी. एवं बी.काम.
नाथपंथ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Nathpanth-1) Read More »
सिंधुघाटी की सभ्यता से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो
सिंधुघाटी की सभ्यता पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs on Indus Valley Civilisation) Read More »
देवगिरि के यादव दक्कन में देवगिरि के यादव (सेउण) वंश का राजनीतिक उत्कर्ष बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी
देवगिरि का सेउण राजवंश (Seuna Dynasty of Devagiri) Read More »
वर्धन राजवंश पाँचवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उत्तर-पश्चिमी भारत पर होने वाले हूण आक्रमण शक्तिशाली
अरब आक्रमण शक्तिशाली गुप्तों के पतन के बाद हर्षवर्धन (606-647 ई.) ने एक बार पुनः
सिंध और मुल्तान पर अरब आक्रमण (Arab Invasion of Sindh and Multan) Read More »
यूरोप में पुनर्जागरण से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो
यूरोप में पुनर्जागरण पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Renaissance in Europe-2) Read More »
यूरोप में पुनर्जागरण से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो
यूरोप में पुनर्जागरण पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Renaissance in Europe-1) Read More »
जैन धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
जैन धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Jainism-2) Read More »
जैन धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
जैन धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Jainism-1) Read More »
बौद्ध धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
बौद्ध धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-3 (MCQs on Buddhism- 3) Read More »
बौद्ध धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
बौद्ध धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Buddhism- 2) Read More »
बौद्ध धर्म से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
बौद्ध धर्म पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Buddhism- 1) Read More »
प्राचीन भारतीय इतिहास से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो
प्राचीन भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-2 (MCQs on Ancient Indian History-2) Read More »
प्राचीन भारतीय इतिहास से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो
प्राचीन भारतीय इतिहास पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-3 (MCQs on Ancient Indian History-3) Read More »
आधुनिक भारत और राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
आधुनिक भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न भाग-5 (MCQs on Modern India-5) Read More »
आधुनिक भारत से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया है, जो विश्वविद्यालयीय
आधुनिक भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न भाग-4 (MCQs on Modern India-4) Read More »
आधुनिक भारत और राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
आधुनिक भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न भाग- 3 (MCQs on Modern India -3) Read More »
आधुनिक भारत और राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
आधुनिक भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न भाग-2 (MCQs on Modern India-2) Read More »
आधुनिक भारत और राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
आधुनिक भारत पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न-1 (MCQs on Modern India -1) Read More »
प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति से संबंधित महत्त्वपूर्ण और उपयोगी प्रश्नों का चयन किया गया
शाहजहाँ की मध्य एशियाई नीति मुगलों का मूल निवास-स्थान मध्य एशिया में ट्रांस-ऑक्सियाना में था।
शाहजहाँ की मध्य एशियाई नीति (Shah Jahan’s Central Asian Policy) Read More »
मुगल बादशाह जहाँगीर (1605-1627 ई.) जहाँगीर भारत में मुगल साम्राज्य का चौथा प्रमुख बादशाह था।
अकबर का प्रशासन मध्यकालीन मुस्लिम शासकों की भाँति अकबर का प्रशासन भी स्वेच्छाचारी एवं निरंकुशवादी
अठारहवीं शताब्दी में यूरोप की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था न्याय और समानता के सिद्धांतों पर
फ्रांस में क्रांति क्यों हुई? (Why did the Revolution happen in France?) Read More »
यूरोपीय इतिहास में अठारहवीं शताब्दी का अंतिम चरण एक युग की समाधि और दूसरे युग
फ्रांस की क्रांति के पूर्व यूरोप (Europe before the French Revolution) Read More »
बादशाह जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर (1556-1605 ई.) मुगल साम्राज्य के संस्थापक जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर का पौत्र
सैयद बंधु ‘सैयद बंधु’ से आशय अब्दुल्ला खाँ और सैयद हुसैनअली खाँ बारहा नामक दो
सैयद बंधु और परवर्ती मुगल बादशाह (Sayyid Brothers and Later Mughal Emperors) Read More »
बहादुर शाह प्रथम ( 1707-1712 ई.) बहादुर शाह प्रथम दिल्ली का सातवाँ मुगल बादशाह था,
बंधन और मोक्ष प्रायः सभी भारतीय दर्शनों में बंधन का अर्थ निरंतर जन्म ग्रहण करना
जैन दर्शन में बंधन और मोक्ष (Bondage and Moksha in Jain Philosophy) Read More »
जैन चतुर्विध-संघ:श्वेतांबर और दिगंबर अनुशासित समूह को ‘संघ’ कहते हैं। संघ के कुछ नियम-अनुबंध तथा
जैन धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और दर्शन है। श्रमणों में कदाचित्
जैन दर्शन और न्याय धर्म, दर्शन और न्याय—इन तीनों के सुमेल से ही व्यक्ति के
जैन न्याय शास्त्र का विकास (Development of Jain Jurisprudence) Read More »
अकबर का राष्ट्रीय सम्राट के रूप में मूल्यांकन अकबर विश्व के महान् सम्राटों में से
अकबर राष्ट्रीय सम्राट के रूप में (Akbar as a National Emperor) Read More »
आधुनिक युग का प्रारंभ इतिहास एक सतत् प्रक्रिया है, घटनाओं और प्रवृत्तियों का क्रमिक विकास
यूरोप में आधुनिक युग का आविर्भाव (Emergence of Modern Age in Europe) Read More »
कन्फ्यूशियस ‘अगर आपको उत्कृष्ट भविष्य का निर्माण करना है, तो अतीत का अध्ययन करें।’—कन्फ्यूशियस छठी
कन्फ्यूशियस और उसकी शिक्षाएँ (Confucius and his Teachings) Read More »
मेसोपोटामिया में जिन सभ्यताओं का विकास हुआ, उनमें कालक्रम की दृष्टि से सुमेरियन सभ्यता प्रथम
शाक्त संप्रदाय शाक्त संप्रदाय भारत में अत्यंत प्राचीनकाल से प्रचलित रहा है। इस संप्रदाय का
पूर्व मध्यकाल में शाक्त संप्रदाय (Shakta Sect in the Early Medieval Period) Read More »
यूरोप में सामंतवाद मध्यकालीन यूरोप में सामंतवाद अपने चरमोत्कर्ष पर था। इन सामंतों की कई
इंग्लैंड की गौरवशाली क्रांति (1688) इंग्लैंड की गौरवशाली क्रांति को इतिहास में ‘रक्तहीन क्रांति’ या
जेम्स द्वितीय (1685–1688 ई.) स्टुअर्ट राजा चार्ल्स द्वितीय की 1685 ई. में मृत्यु हो गई।
‘कुरु-धम्म’ की नसीहत लेखक: प्रो. गोरखनाथ अवकाश प्राप्त आचार्य एवं अध्यक्ष प्राचीन इतिहास, पुरातत्त्व एवं
‘कुरु-धम्म’ की नसीहत (The Advices of the ‘Kuru-Dhamma’) Read More »
इंग्लैंड का चार्ल्स प्रथम (1625-1649) जेम्स प्रथम की 1625 में मृत्यु के बाद उसका दूसरा
इंग्लैंड का चार्ल्स प्रथम (Charles I of England) Read More »
इंग्लैंड में राजतंत्र की पुनर्स्थापना (1660-1685) 1642 में राजा चार्ल्स प्रथम के अत्याचारों से परेशान
राजतंत्र की पुनर्स्थापना और चार्ल्स द्वितीय (Restoration and Charles II) Read More »
अंग्रेजी गृहयुद्ध (1642-1649) इंग्लैंड में 1642 से 1649 तक अंग्रेजी गृहयुद्ध चला, जिसने राजाओं की
जेम्स प्रथम (1603–1625 AD) जेम्स प्रथम स्टुअर्ट वंश का प्रथम शासक था। उसका जन्म 1566
ट्यूडर वंश ( 1485–1603) इंग्लैंड में हेनरी षष्ठ के शासनकाल में 1455 में लंकास्टर एवं
इंग्लैंड का ट्यूडर राजवंश (Tudor Dynasty of England) Read More »
एलिजाबेथ प्रथम (1558–1603) इंग्लैंड की क्रूर शासिका मेरी ट्यूडर की मृत्यु (17 नवंबर 1558) के
मदुरा के पांड्य सुदूर दक्षिण भारत में तमिल प्रदेश के प्रारंभिक राजवंशों में चेरों और
मारवर्मन् कुलशेखर पांड्य प्रथम (1268-1308 ई.) मारवर्मन् कुलशेखर पांड्य प्रथम (1268-1308 ई.) पांड्य राजवंश का
मारवर्मन् कुलशेखर पांड्य प्रथम (Maravarman Kulasekara Pandyan I) Read More »
जटावर्मन् सुंदरपांड्य प्रथम (1251-1270 ई.) मारवर्मन् सुंदरपांड्य के बाद पांड्य राजगद्दी पर जटावर्मन् सुंदरपांड्य प्रथम
जटावर्मन् सुंदरपांड्य प्रथम (Jatavarman Sundara Pandyan I) Read More »
चीन की सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन और सतत सभ्यताओं में से एक है, जो
लॉर्ड डलहौजी: आधुनिक भारत का निर्माता लॉर्ड हार्डिंग के पश्चात् लॉर्ड डलहौजी, जिसे ‘अर्ल ऑफ़
चोल राजवंश का राजनीतिक इतिहास (850-1279 ई.) सुदूर दक्षिण भारत के तमिल प्रदेश में प्राचीनकाल
राजेंद्र तृतीय (1252-1279 ई.) राजराज तृतीय के बाद 1252 ई. में राजेंद्र तृतीय चोल सिंहासन
राजराज तृतीय (1216-1256 ई.) कुलोत्तुंग तृतीय की मृत्यु के पश्चात् राजराज तृतीय 1216 ई. में
कुलोत्तुंग तृतीय (1178–1218 ई.) कुलोत्तुंग तृतीय ‘परकेशरिवर्मन’ चोल राजवंश का अंतिम महान शासक था, जिसने
राजराज द्वितीय (1146-1173 ई.) कुलोत्तुंग द्वितीय के पश्चात् उसका पुत्र राजराज द्वितीय 1150 ई. में
कुलोत्तुंग द्वितीय (1135-1152 ई.) 1135 ई. में विक्रमचोल की मृत्यु के बाद कुलोत्तुंग द्वितीय चोल
राजेंद्र चोल द्वितीय (1052-1064 ई.) राजेंद्र द्वितीय (1052-1064 ई.), जिन्हें राजेंद्रदेव चोल भी कहा जाता
विक्रम चोल (1122-1135 ई.) कुलोत्तुंग प्रथम की मृत्यु के बाद 1122 ई. में विक्रम चोल
परांतक द्वितीय (957-973 ई.) अरिंजय की मृत्यु (957 ई.) के बाद अन्विल ताम्रपत्र में उल्लिखित
कुलोत्तुंग चोल प्रथम (1070-1122 ई.) कुलोत्तुंग प्रथम के सिंहासनारोहण से चोल इतिहास में एक नये
वीरराजेंद्र चोल (1063-1070 ई.) राजेंद्र द्वितीय की मृत्यु के बाद उसका अनुज वीरराजेंद्र 1063 ई.
राजाधिराज प्रथम (1044-1054 ई.) राजेंद्र चोल प्रथम की मृत्यु के बाद उसका पुत्र राजाधिराज राजकेशरी
राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ई.) राजराज की मृत्यु के बाद उसकी कोडंबलुर की राजकुमारी थिरिपुवना
राजराज (अरुमोलिवर्मन) (985-1015 ई.) चोल राजवंश की महत्ता का वास्तविक संस्थापक परांतक द्वितीय (सुंदर चोल)
परांतक प्रथम (907-955 ई.) आदित्य प्रथम की मृत्यु के अनंतर 907 ई. में उसका पुत्र
संगमकालीन चोल सुदूर दक्षिण भारत के तमिल प्रदेश में प्राचीनकाल में जिन राजवंशों का उत्कर्ष
संगम युग में चोल राजवंश (Chola Dynasty in Sangam Age) Read More »
पल्लव राजवंश (275-897 ई.) पल्लव राजवंश प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली एवं गौरवशाली राजवंश था,
पल्लव राजवंश का राजनीतिक इतिहास (Political History of the Pallava Dynasty) Read More »
अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम, जिसे ‘अमेरिकी क्रांति’ भी कहा जाता है, यूरोपीय उपनिवेशवाद के इतिहास
अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम (America’s War of Independence) Read More »
जर्मनी में नाजीवाद और एडोल्फ हिटलर बीसवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में जर्मनी एक ताकतवर
महाराजा रणजीतसिंह एक प्रबल और निरंकुश शासक था। उन्होंने अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व के बल पर
आंग्ल-सिख युद्ध और पंजाब की विजय (Anglo-Sikh War and Conquest of Punjab) Read More »
ब्रिटिश अफगान नीति : लॉरेंस से रिपन तक उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में रूस द्वारा
काकोरी ट्रेन एक्शन (9 अगस्त 1925) ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन (कार्यवाही) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के
लॉर्ड लिटन (1876-1880 ई.) लॉर्ड नॉर्थब्रुक के त्यागपत्र देने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री बेंजामिन डिजरायली
लॉर्ड रिपन (1880-1884 AD) लॉर्ड रिपन को भारत का सर्वाधिक लोकप्रिय वायसरॉय माना जाता है।
पाल राजवंश (750-1200 ई.) आठवीं शती के मध्य में भारत के पूर्वी भाग में जिस
हेनरी अष्टम (1509-1547) हेनरी सप्तम की मृत्यु (1509) के पश्चात् उसका पुत्र हेनरी अष्टम (1509-1547)
इंग्लैंड का ट्यूडर वंश फ्रांस एवं इंग्लैंड के मध्य होने वाले दीर्घकालीन युद्धों (1337 ई.
सिंध का ब्रिटिश अधिग्रहण सिंधु नदी की निचली घाटी में समुद्र तक विस्तृत सिंध प्रदेश
लॉर्ड ऑकलैंड (1836-1842) लॉर्ड ऑकलैंड (जॉर्ज ईडन, ऑकलैंड के अर्ल) 1836 में भारत का गवर्नर
लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1828-1835 ई.) लॉर्ड विलियम बेंटिंक का पूरा नाम विलियम हेनरी कैवेंडिश बेंटिंक
कदंब राजवंश (345-540 ई.) कदंब राजवंश प्राचीन भारत का एक राजवंशी ब्राह्मण परिवार था, जिसने
बनवासी का कदंब राजवंश (Kadamba Dynasty of Banavasi) Read More »
भारत-विभाजन भारत के राष्ट्रीय आंदोलन की चरम परिणति भारत की स्वतंत्रता के साथ-साथ इस उपमहाद्वीप
भारत-विभाजन के कारण (Reasons for Partition of India) Read More »
सेन वंश 12वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत के बंगाल में सेन राजवंश ने अपना
राष्ट्रकूट राजवंश राष्ट्रकूट राजवंश ने लगभग दो सौ वर्षों से अधिक समय तक भारतीय उपमहाद्वीप
राष्ट्रकूट राजवंश का राजनीतिक इतिहास (Political History of Rashtrakuta Dynasty) Read More »
राष्ट्रकूट राजवंश का पतन खोट्टिग (967-972 ई.) कृष्ण तृतीय निःसन्तान मर गया था। करहद अभिलेख
राष्ट्रकूट राजवंश का पतन (Fall of Rashtrakuta Dynasty) Read More »
कृष्ण तृतीय (939-967 ई.) अमोघवर्ष तृतीय के बाद उसका ज्येष्ठ पुत्र और युवराज कृष्ण तृतीय
अमोघवर्ष द्वितीय, गोविंद चतुर्थ और अमोघवर्ष तृतीय (929-939 ई.) अमोघवर्ष द्वितीय (929-930 ई.) इंद्र तृतीय
इंद्र तृतीय (914-929 ई.) कृष्ण द्वितीय के पश्चात् उसका पौत्र इंद्र तृतीय (914-929 ई.) राजा
कृष्ण द्वितीय (880-914 ई.) अमोघवर्ष के पश्चात् उसका पुत्र कृष्ण द्वितीय 880 ई. के लगभग
अमोघवर्ष प्रथम (814-878 ई.) गोविंद तृतीय की मृत्यु के पश्चात् उसका अल्पवयस्क पुत्र शर्व ‘अमोघवर्ष’
गोविंद तृतीय (793-814) ध्रुव प्रथम के कई पुत्र थे, जिनमें स्तंभ रणावलोक, कर्कसुवर्णवर्ष, गोविंद तृतीय
ध्रुव ‘धारावर्ष’ ( 780-793 ई.) अपने अग्रज गोविंद द्वितीय को अपदस्थ कर ध्रुव ने राष्ट्रकूट
कृष्ण प्रथम (756-774 ई.) चित्तलदुर्ग से प्राप्त एक लेख के अनुसार दंतिदुर्ग के कोई पुत्र
दंतिदुर्ग (735-756 ई.) इंद्र द्वितीय के बाद उसकी चालुक्यवंशीय पत्नी भवनागा से उत्पन्न पुत्र दंतिदुर्ग
गुर्जर प्रतिहार राजवंश हर्षोत्तर काल में गुर्जरात्रा प्रदेश में प्रतिहार राजवंश का उदय हुआ, जो
गुर्जर प्रतिहार राजवंश (The Gurjara Pratihara Dynasty) Read More »
सुधार आंदोलन उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक रूस एक पिछड़ा हुआ देश बना रहा। रूस
रूस में सुधार आंदोलन (Reform Movement in Russia) Read More »
मेसोपोटामिया की सभ्यताएँ मानव सभ्यता के इतिहास में पाषाणकाल के अनंतर क्रमशः ताम्रकाल एवं काँस्यकाल
मेसोपोटामिया की सभ्यताएँ (Mesopotamian Civilisations) Read More »
दीनदयाल उपाध्याय भारत की आजादी से पहले और आजादी के बाद कई ऐसे महापुरुष हुए,
पं. दीनदयाल उपाध्याय: एक परिचय (Pt. Deendayal Upadhyay: An Introduction) Read More »
बुंदेलखंड के चंदेल प्रतिहार साम्राज्य के पतन के पश्चात् बुंदेलखंड के भूभाग पर चंदेल वंश
जेजाकभुक्ति के चंदेल (Chandelas of Jejakabhukti) Read More »
परमार वंश भारतीय इतिहास में एक प्रमुख राजपूत राजवंश था, जिसने आठवीं से चौदहवीं शताब्दी
गुजरात के चौलुक्य (सोलंकी) वंश का इतिहास हर्ष की मृत्यु के उपरांत प्रतिहारों ने संपूर्ण
गुजरात का चौलुक्य राजवंश (Chaulukya Dynasty of Gujarat ) Read More »
भारत में यूरोपीयों का आगमन यूरोपीय देशों के साथ भारत का अत्यंत प्राचीन काल से
भारत में यूरोपीयों का आगमन (The Arrival of Europeans in India) Read More »
परिवर्तन की गति अबाध होती है जो स्वतः धीरे-धीरे होती रहती है। जब उसमें व्यवधान
फ्रांस की पुरातन व्यवस्था (Ancien Regime or Old Regime of France) Read More »
मध्ययुगीन यूरोप के अधिकांश देशों में सामंती व्यवस्था विद्यमान थी। फ्रांस भी इन्हीं देशों में
फ्रांस: 1715 से 1789 ई. की क्रांति तक (France: From 1715 to the Revolution of 1789 AD) Read More »
नर्मदा नदी के दक्षिण में भारत का प्रायद्वीपीय क्षेत्र, जिसे दक्कन क्षेत्र कहा जाता है,
विजयनगर साम्राज्य चौदहवीं सदी में दक्षिण भारत में दो बड़े शक्तिशाली साम्राज्यों का उद्भव हुआ—एक
विजयनगर साम्राज्य का उत्थान और पतन (Rise and Fall of Vijayanagara Empire) Read More »
पूर्वी चालुक्य राज्य वेंगी का पूर्वी चालुक्य राज्य मुख्यतः कृष्णा और गोदावरी नदियों के बीच
वेंगी के पूर्वी चालुक्य (Eastern Chalukyas of Vengi) Read More »
प्रतिहार साम्राज्य के पतन के बाद कन्नौज और वाराणसी में गहड़वाल वंश की स्थापना हुई।
कल्याणी का चालुक्य राजवंश 10वीं शताब्दी के अंतिम चरण में कल्याणी या कल्याण में भी
पश्चिमी चालुक्य राजवंश (Western Chalukya Dynasty) Read More »
1871 ई. के पेरिस कम्यून के पश्चात् पश्चिमी यूरोप में कोई शक्तिशाली जनव्यापी क्रांतिकारी विस्फोट
1905 ई. की रूसी क्रांति (Russian Revolution of 1905 AD) Read More »
नूरजहाँ (1577-1645) नूरजहाँ मुगल काल की एक महारानी थीं, जिन्हें भारत के इतिहास में मुगल
नूरजहाँ : मुगल राजनीति पर उसका प्रभाव (Nur Jahan: Her Influence on Mughal Politics) Read More »
भारत में शहरीकरण इस आलेख में औपनिवेशिक भारत में शहरीकरण की प्रक्रिया, औपनिवेशिक शहरों की
वर्ण व्यवस्था का उद्भव उत्तर-पूर्व से पशुचारक आर्य जनजातियों के भारत में प्रवेश का सिलसिला
वातापी का चालुक्य राजवंश छठी शताब्दी ईस्वी के मध्यकाल में संपूर्ण भारतीय प्रायद्वीप में राजनीतिक
वातापी का चालुक्य राजवंश (Chalukya Dynasty of Vatapi) Read More »
भारत में सती प्रथा भारत में सती प्रथा के उद्भव एवं विकास को प्रायः मध्य
भारत में ‘सती’ की अवधारणा (Concept of ‘Sati’ in India) Read More »
छठी शताब्दी ईस्वी के मध्यकाल में संपूर्ण भारतीय प्रायद्वीप में राजनीतिक विकेंद्रीकरण का एक महत्त्वपूर्ण
सल्तनत काल में भारत में एक नई प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत हुई, जो मुख्य रूप
दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक व्यवस्था (Administrative System of Delhi Sultanate) Read More »
अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस की क्रांति से पूर्व इंग्लैंड में उत्पादन के क्षेत्रों में यांत्रिक
शेरशाह सूरी शेरशाह सूरी मध्यकालीन भारत के इतिहास का एक असाधारण व्यक्तित्व है, जिसका प्रारंभिक
शेरशाह सूरी और सूर साम्राज्य (Sher Shah Suri and Sur Empire) Read More »
बाबर जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर भारतीय इतिहास में बाबर के नाम से प्रसिद्ध है। मुगल वंश
जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर (Zahir-ud-din Muhammad Babur) Read More »
नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ बाबर के चार पुत्रों—हुमायूँ, कामरान, अस्करी और हिंदाल में हुमायूँ सबसे बड़ा
नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ (Nasiruddin Muhammad Humayun) Read More »
सांप्रदायिकता के विकास के विभिन्न चरण भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को सांप्रदायिकता के विकास से गहरा
भारत में सांप्रदायिकता का विकास (Development of Communalism in India) Read More »
1833 का चार्टर एक्ट 1833 का चार्टर एक्ट ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन और भारतीय
1853 का चार्टर एक्ट 1853 का चार्टर एक्ट ब्रिटिशकालीन भारतीय शासन के इतिहास में अंतिम
1813 का चार्टर ऐक्ट जब 1813 में कंपनी के चार्टर ऐक्ट की अवधि समाप्त होने
1793 के चार्टर एक्ट 1773 में ईस्ट इंडिया कंपनी को बीस वर्ष के लिए पूर्वी
फरवरी 1922 में असहयोग आंदोलन की अचानक वापसी से जनता में कुंठा की भावना भर
बौद्ध धर्म-दर्शन का उदय वैदिक धर्म की प्रतिक्रिया में ही हुआ था। वैदिक साहित्य में
बौद्ध धर्म-दर्शन में समाजवादी चेतना (Socialist Consciousness in Buddhist Philosophy) Read More »
आस्ट्रिया यूरोप में डेन्यूब नदी के दोनों ओर का भू-भाग, जो कि ऑस्ट्रिया के नाम
आस्ट्रिया और हैब्सबर्ग राजवंश (Austria and Habsburg Dynasty) Read More »
लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813-1823) लॉर्ड मिंटो के 1813 में त्यागपत्र देने के बाद लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813-1823)
सत्रहवीं एवं अठारहवीं सदी में ब्रैंडेनबर्ग की डची के आधार पर प्रशा का उत्थान हुआ।
सर जॉन शोर और लॉर्ड वेलेजली का शासन सर जॉन शोर (1793-1798 ई.) 1793 ई.
अठारहवीं शताब्दी में यूरोप में एक नवीन बौद्धिक लहर चली, जिसके फलस्वरूप जागृति के एक
भारत में संवैधानिक विकास किसी भी शासन प्रणाली का यह प्रमुख कार्य होता है कि
टीपू सुल्तान 18वीं शताब्दी के अंतिम चरण में दूसरे आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान हैदर अली
टीपू सुल्तान और आंग्ल-मैसूर युद्ध (Tipu Sultan and the Anglo-Mysore Wars) Read More »
हैदरअली दक्षिण भारत में हैदराबाद के पास हैदरअली के अधीन मैसूर में एक महत्त्वपूर्ण सत्ता
हैदरअली और आंग्ल-मैसूर संबंध (Hyder Ali and Anglo-Mysore Relations) Read More »
मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार भारत सरकार अधिनियम 1909 भारतीयों के स्वशासन की माँग की पूर्ति करने में
1919 का भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act of 1919) Read More »
मार्ले-मिंटो सुधार भारत सरकार अधिनियम 1909 भारतीयों के स्वशासन की माँग की पूर्ति करने में
1909 का भारतीय परिषद् अधिनियम (Indian Council Act of 1909) Read More »
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाएँ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की प्रकृति मूलतः पुरुष-प्रधान थी और संभवतः
भारत में दलित आंदोलन उन्नीसवीं सदी के अंतिम और बीसवीं सदी के आरंभिक वर्षों में
ब्रिटिश भारत में दलित-आंदोलन (Dalit Movement in British India) Read More »
धन निष्कासन का सिद्धांत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के आरंभिक उदारपंथी नेताओं को इस बात का
धन-निकास का सिद्धांत (Theory of the Drain of Wealth) Read More »
द्वितीय विश्व युद्ध ( 1939-1945) 27 अगस्त 1939 ई. को हिटलर ने ओबर्साल्जबर्ग में अपने
प्रथम विश्व युद्ध : एक वैश्विक विपदा प्रथम विश्व युद्ध विश्व इतिहास में लड़ा गया
लॉर्ड कॉर्नवालिस (1786–1793 ई.) : भारत का द्वितीय गवर्नर-जनरल फरवरी 1785 ई. में हेस्टिंग्स इंग्लैंड
वारेन हेस्टिंग्स: भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल क्लाइव 1767 ई. में इंग्लैंड वापस चला गया और
बाबर के आक्रमण के समय भारतवर्ष बाबर के आक्रमण के समय भारतवर्ष की लगभग वही
महाराजा रणजीत सिंह और सिख साम्राज्य की स्थापना महाराजा रणजीत सिंह ने उत्तर-पश्चिम भारत के
नादिरशाह अठारहवीं शताब्दी में, जिस समय परवर्ती मुगलों की अयोग्यता तथा अमीरों की स्वार्थपरता के
1858 का अधिनियम : भारत के संवैधानिक विकास का महत्त्वपूर्ण चरण ब्रिटिश उपनिवेशवाद का अंतिम
1858 का भारतीय प्रशासन-सुधार अधिनियम (Indian Administration-Reform Act of 1858) Read More »
1892 ई. का भारतीय परिषद् अधिनियम 1861 ई. के बाद भारतीयों में राजनीतिक चेतना तथा
1892 का भारतीय परिषद् अधिनियम (Indian Council Act of 1892) Read More »
1858 ई. के अधिनियम द्वारा भारतीय प्रदेशों को अपने प्रत्यक्ष अधिकार में लेने के बाद
1861 का भारतीय परिषद् अधिनियम (Indian Council Act of 1861) Read More »
गुप्तकालीन भारत का चित्रण भारत प्राचीन काल से ही धर्म, कला, राजनीति, सभ्यता एवं संस्कृति
चीनी यात्री फाह्यान का यात्रा-विवरण (Travel details of Chinese traveler Fahien) Read More »
इटली के एकीकरण के समानांतर जर्मनी का एकीकरण भी उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोपीय इतिहास की
यूरोपीय राष्ट्रों में सुरक्षा समस्याएँ यूरोपीय राष्ट्रों में शताब्दियों से पारस्परिक ईर्ष्या और संदेह की
फ्रांस की शांति और सुरक्षा की खोज (France’s quest for peace and security) Read More »
वाइमार गणतंत्र जर्मनी की उस प्रतिनिधिक लोकतांत्रिक संसदीय सरकार को कहा जाता है, जिसने प्रथम
जर्मनी में वाइमार गणतंत्र (Weimar Republic in Germany) Read More »
इटली राष्ट्रीयता एक ऐसी भावना है जो एक क्षेत्र विशेष के लोगों को सहज और
नेपोलियन महान् का भतीजा चार्ल्स लुई नेपोलियन 1848 ई. की क्रांति के बाद द्वितीय फ्रांसीसी
चौरी चौरा की घटना: एक ऐतिहासिक मोड़ चौरी चौरा की घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के
वियना कांग्रेस में संगठित प्रतिक्रियावाद यूरोप के सहज विकास के मार्ग में एक बाधा बनकर
मेटरनिख (1815-1848 ई.) उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में यूरोपीय इतिहास के प्रतिक्रियावादी युग का मुख्य
1830 ई. की जुलाई क्रांति मेटरनिख और उसके सहयोगियों ने सोचा था कि पेरिस और
1784 का पिट्स इंडिया एक्ट 1772 और 1781 में ईस्ट इंडिया कंपनी के मामलों की
1784 का पिट्स इंडिया एक्ट (Pitt’s India Act of 1784) Read More »
थियोसोफिकल सोसायटी थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना 7 सितंबर 1875 को अमेरिका
थियोसोफिकल सोसायटी और ऐनी बेसेंट (Theosophical Society and Anne Besant) Read More »
स्वामी रामकृष्ण परमहंस (1836-1886) रामकृष्ण मिशन की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस
रामकृष्ण आंदोलन और स्वामी विवेकानंद (Ram Krishna Movement and Swami Vivekananda) Read More »
नौसेना के जहाजियों का विद्रोह (18 फरवरी 1946) आजाद हिंद फौज के कैदियों पर चलाए
शाही भारतीय नौसेना के विद्रोह (Royal Indian Navy Mutiny) Read More »
बर्मा की पोपा पहाड़ी पर समर्पण के बाद आजाद हिंद फौज के 20,000 सैनिकों को
आजाद हिंद फौज के कैदियों के मुक़दमे (The Trials of the Prisoners of INA) Read More »
नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आजाद हिंद फौज द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के
सुभाषचंद्र बोस और आजाद हिंद फौज (Subhash Chandra Bose and I.N.A.) Read More »
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक दंतकथा द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान क्रिप्स मिशन की विफलता के
अंग्रेजों की औपनिवेशिक नीतियाँ और भारतीय रियासतें अंग्रेजों ने भारत पर औपनिवेशिक सत्ता स्थापित करने
देसी रियासतों में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement in Princely States) Read More »
वियेना कांग्रेस में यूरोप की संयुक्त व्यवस्था की स्थापना उन्नीसवीं शताब्दी के विश्व इतिहास की
मौखरि गुप्त राजवंश के सामंत थे और गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद उन्होंने अपनी
उत्तर-गुप्त राजवंश सम्राट गुप्त वंश के अवनति काल में उनके अधीन उत्तर भारत के विभिन्न
औलिकर राजवंश पाँचवीं शताब्दी के मध्य में मालवा पर औलिकर राजवंश के लोग गुप्त साम्राज्य
मालवा का औलिकार वंश और यशोधर्मन (Aulikar Dynasty of Malwa and Yashodharman) Read More »
गुप्त युग : भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल गुप्त युग भारतीय इतिहास का एक ऐसा युग
गुप्त युग का मूल्यांकन (Evaluation of Gupta Age) Read More »
गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर भारत में राजनीतिक रिक्तता, अस्थिरता और अराजकता का
हूण हूण मध्य एशिया की एक खानाबदोश (यायावर) बर्बर जाति थी। इसने 165 ई.पू. में
भारत में हूण सत्ता का उत्थान-पतन (Rise and Fall of Huna Power in India) Read More »
गुप्तकाल साहित्यिक विकास साहित्यिक विकास की दृष्टि से गुप्तकाल बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इस काल
गुप्तकालीन कला कला अभीष्ट दिव्यता की प्राप्ति और उसके साथ एकाकार होने का पवित्रतम साधन
गुप्तकालीन कला और स्थापत्य (Art and Architecture in Gupta Period) Read More »
गुप्तकालीन धर्म गुप्तकाल को प्रायः ब्राह्मण धर्म के पुनरुत्थान का चरमोत्कर्ष माना जाता है। गुप्त
गुप्तकालीन धर्म और धार्मिक जीवन (Religion and Religious Life in Gupta Period) Read More »
गुप्तकालीन भारतीय समाज गुप्तकालीन भारतीय समाज परंपरागत चार वर्णों—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में विभाजित
गुप्तकालीन सामाजिक जीवन (Social Life in Gupta Period) Read More »
गुप्तकाल में भारत ने राजनैतिक, सामाजिक एवं भौतिक उन्नति के चरमोत्कर्ष का साक्षात्कार किया। अपने
गुप्तकालीन प्रशासन और आर्थिक जीवन (Gupta Administration and Economic Life) Read More »
द्वितीय विश्व युद्ध और भारतीय राजनीति सितंबर 1939 में हिटलर की जर्मन प्रसारवादी नीति के
पाकिस्तान की माँग और राजाजी सूत्र (Pakistan’s Demand and Rajaji Formula) Read More »
सुभाषचंद्र बोस महात्मा गांधी के आशीर्वाद से सुभाषचंद्र बोस फरवरी 1938 में हरिपुरा (गुजरात) कांग्रेस
त्रिपुरी संकट : सुभाष बनाम गांधी (Tripuri Crisis: Subhash Vs Gandhi) Read More »
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में किसानों की भूमिका प्रायः माना जाता है कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन
ब्रिटिश भारत में किसान आंदोलन (Peasant Movements in British India) Read More »
भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद रॉबर्ट क्लाइव ने अपने कार्यकाल के दौरान बंगाल में अंग्रेजों की
रॉबर्ट क्लाइव और बंगाल में द्वैध शासन (Robert Clive and Diarchy in Bengal) Read More »
भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद का बीजारोपण भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद का बीजारोपण बंगाल से ही
बंगाल में अंग्रेजी शक्ति की स्थापना (Establishment of English Power in Bengal) Read More »
परवर्ती गुप्त शासक स्कंदगुप्त की मृत्यु के बाद गुप्त राजवंश का सूरज अस्ताचल की ओर
स्कंदगुप्त (455-467 ई.) कुमारगुप्त की मृत्यु के पश्चात गुप्त शासन की बागडोर उनके सुयोग्य पुत्र
स्कंदगुप्त ‘क्रमादित्य’ (Skandagupta ‘Kramaditya’) Read More »
कुमारगुप्त महेंद्रादित्य (415-455 ई.) चंद्रगुप्त द्वितीय के बाद उनके पुत्र कुमारगुप्त 415 ई. में सत्तारूढ़
कुमारगुप्त प्रथम ‘महेंद्रादित्य’ (Kumaragupta I ‘Mahendraditya’) Read More »
चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ समुद्रगुप्त की प्रधान महिषी दत्तदेवी से उत्पन्न पुत्र चंद्रगुप्त द्वितीय असाधारण प्रतिभा,
चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ (Chandragupta II ‘Vikramaditya’) Read More »
रामगुप्त की ऐतिहासिकता गुप्त अभिलेखों में उल्लिखित वंश-तालिका में समुद्रगुप्त के बाद चंद्रगुप्त द्वितीय का
रामगुप्त की ऐतिहासिकता (Historicity of Ramgupta) Read More »
‘पराक्रमांक’ समुद्रगुप्त (335-375 ई.) चंद्रगुप्त प्रथम के बाद 335 ई. में लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से
प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत भारतवर्ष विश्व के प्राचीनतम एवं महानतम देशों में अग्रणी है।
प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत (Sources of Ancient Indian History) Read More »
गोर प्रदेश की स्थिति गोर का भौगोलिक और सांस्कृतिक परिदृश्य गोर, गज़नवी साम्राज्य और हेरात
मुहम्मद गोरी के आक्रमण (Muhammad Ghori’s Invasions) Read More »
औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीय पूँजीपति वर्ग का विकास औपनिवेशिक शासन के दौरान 19वीं सदी
कांग्रेस के मतभेद (1934) सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) की समाप्ति के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
महमूद गजनवी के आक्रमण आठवीं शताब्दी के प्रारंभ में मुहम्मद-बिन-कासिम के नेतृत्व में अरबों ने
भारत पर तुर्क आक्रमण: महमूद गजनवी (Turk Invasion of India: Mahmud Ghaznavi) Read More »
गुप्तों का आदि-स्थान गुप्तों की जाति की तरह उनके आदि-स्थान के विषय में भी इतिहासकारों
गुप्तों की उत्पत्ति-विषयक समस्या गुप्तों की उत्पत्ति-विषयक समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो सका
गुप्त राजवंश भारतीय इतिहास में सर्वांगीण विकास और समृद्धि के लिए गौरवपूर्ण स्थान रखता है।
गुप्त राजवंश के ऐतिहासिक स्रोत (Historical Sources of Gupta Dynasty) Read More »
उत्तरी भारत में कुषाणों के पतन और गुप्तों के उदय से पूर्व के काल को
तीसरी शताब्दी ई. में सातवाहनों की शक्ति के नष्ट होने पर दक्षिण भारत में कई
मौर्योत्तरकालीन समाज मौर्योत्तर काल के शुंग और संभवतः सातवाहन वंश के शासक ब्राह्मण थे। अतः
मौर्योत्तरकालीन राज्य-व्यवस्था मौर्य साम्राज्य के पतन के साथ ही भारतीय इतिहास की राजनीतिक एकता कुछ
मौर्योत्तरकालीन राज्य-व्यवस्था एवं आर्थिक जीवन (Post-Mauryan Polity and Economic Life) Read More »
मौर्यकालीन सामाजिक जीवन पूर्ववर्ती धर्मशास्त्रों की भाँति कौटिल्य ने भी वर्णाश्रम व्यवस्था को सामाजिक संगठन
मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था, समाज, धर्म और कला-संबंधी जानकारी के लिए कौटिल्य का अर्थशास्त्र, मेगस्थनीज-कृत
वियना कांग्रेस (1815) नेपोलियन बोनापार्ट ने अपने विजय अभियानों से समस्त यूरोपीय मानचित्र को परिवर्तित
उत्तरकालीन मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु के बाद जिन ग्यारह मुगल सम्राटों ने भारत पर
परवर्ती मुगल शासकों का इतिहास (History of the Later Mughal Rulers) Read More »
9वीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के प्रभाव सामाजिक सुधार उन्नीसवीं सदी के सांस्कृतिक जागरण का
मुस्लिम सुधार आंदोलन उन्नीसवीं शताब्दी में न केवल हिंदू समाज में जागरण लाने के लिए
दयानंद सरस्वती (1824-1883) दयानंद सरस्वती आधुनिक भारत के महान चिंतक और ‘आर्य समाज’ के संस्थापक
दयानंद सरस्वती और आर्य समाज (Dayanand Saraswati and Arya Samaj) Read More »
पश्चिमी भारत में सुधार आंदोलन पश्चिमी भारत में सुधारों की शुरुआत उन्नीसवीं सदी के प्रारंभिक
अठारहवीं शताब्दी में यूरोप में एक नवीन बौद्धिक लहर चली, जिसके फलस्वरूप जागृति के एक
19वीं सदी में बंगाल में सुधार आंदोलन ( Reform Movement in Bengal in the 19th Century) Read More »
आधुनिक काल की पूर्व संध्या पर रूस आधुनिक काल की पूर्व संध्या पर रूस एक
लुई चौदहवें का युग लुई XIV का शासन काल फ्रांस के चरमोत्कर्ष का काल था।
लुई XIV : फ्रांस के चरमोत्कर्ष का काल (Louis XIV : The Climax Period of France) Read More »
कुषाण राजवंश भारत के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास में कुषाण राजवंश एक सीमा चिन्ह है।
शकों के आरंभिक इतिहास मगध के विशाल मौर्य साम्राज्य की शक्ति के क्षीण होने पर
भारत में शक (सीथियन) और पार्थियन शासन (Shaka (Scythian) and Parthian Rule in India) Read More »
प्राचीन भारत में कलिंग राज्य : खारवेल प्राचीन भारत में कलिंग एक समृद्ध राज्य था।
कलिंग का खारवेल वंश (Kharavela Dynasty of Kalinga) Read More »
सातवाहन वंश सातवाहन वंश भारत का एक प्राचीन राजवंश था, जिसने दूसरी शताब्दी ई.पू. के
सातवाहन राजवंश और गौतमीपुत्र सातकर्णि (Satavahana Dynasty and Gautamiputra Satakarni) Read More »
मौर्य साम्राज्य के पतन के साथ ही विकेंद्रीकरण की प्रवृत्तियाँ क्रियाशील हो उठीं और भारत
भारत में हिंद-यवन शासन (Indo-Greek Rule in India) Read More »
शुंग राजवंश : पुष्यमित्र शुंग चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य द्वारा स्थापित विशाल मौर्य साम्राज्य की
शुंग राजवंश : पुष्यमित्र शुंग (Shunga Dynasty : Pushyamitra Shunga) Read More »
सांप्रदायिक निर्णय गोलमेज सम्मेलन में मुसलमानों और सिखों के साथ-साथ अनुसूचित जातियों के प्रमुख राजनीतिज्ञ
सविनय अवज्ञा आंदोलन : नमक सत्याग्रह गांधीजी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर चलाया गया
सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) Read More »
कांग्रेस में समाजवादी विचारधारा और राष्ट्रीय आंदोलन भारत में कांग्रेस के समाजवादी विचारधारा के सर्वप्रमुख
कांग्रेस समाजवादी पार्टी (Congress Socialist Party) Read More »
विश्व इतिहास का महान् सम्राट अशोक न केवल भारतीय इतिहास, बल्कि विश्व इतिहास के महानतम
अशोक महान् का मूल्यांकन (Evaluation of Asoka the Great) Read More »
भारतीय प्रायद्वीप का तमिलकम् प्रदेश सुदूर दक्षिण में भारतीय प्रायद्वीप त्रिभुजाकार रूप में कन्याकुमारी तक
अशोक के उत्तराधिकारी अशोक के बाद मौर्य साम्राज्य का पतन आरंभ हो गया और लगभग
अशोक का शासन-संगठन अशोक के शासन-संगठन का प्रारूप लगभग वही था, जो चंद्रगुप्त मौर्य के
मौर्य सम्राट अशोक अशोक महान की गणना प्राचीन विश्व के महानतम शासकों में की जाती
मौर्य सम्राट अशोक महान् (Mauryan Emperor Asoka the Great) Read More »
चंद्रगुप्त मौर्य महान् विजेता और साम्राज्य-निर्माता ही नहीं, अपितु योग्य प्रशासक भी थे। उन्होंने अपने मंत्री
चंद्रगुप्त मौर्य की शासन-व्यवस्था (Chandragupta Maurya’s Administration) Read More »
बिंदुसार (ई.पू. 298- ई.पू. 273) चंद्रगुप्त की मृत्यु के पश्चात् उनका पुत्र बिंदुसार ई.पू. 298
मौर्य सम्राट बिंदुसार (Mauryan Emperor Bindusara) Read More »
भारतीय प्रायद्वीप प्रागैतिहासिक काल से ही विभिन्न धर्मों के उद्भव, विकास और स्थायित्व का आश्रयदाता
श्रमण परंपरा की प्राचीनता (Antiquity of the Shramana Tradition) Read More »
जिस समय मगध के नेतृत्व में पूर्वी भारत में एकीकरण की प्रक्रिया चल रही थी,
भारत पर ईरानी और यूनानी आक्रमण ( Iranian and Greek Invasions of India) Read More »
जैन परंपरा में लोक विश्व, जगत् अथवा संसार के लिए जैन परंपरा में सामान्यरूप से
जैन परंपरा में लोक और ईश्वर (Folk and God in Jain Tradition) Read More »
चंद्रगुप्त मौर्य के आगमन से भारतीय इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात हुआ और
मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य (Maurya Emperor Chandragupta Maurya) Read More »
व्यवहार की दृष्टि से ज्ञान का अर्थ जानना, समझना या परिचित होना होता है। प्रत्येक
जैन दर्शन में ज्ञान मीमांसा (Epistemology in Jain Philosophy) Read More »
जैन परंपरा में आचार जैन परंपरा में आचार के स्तर पर श्रावक और श्रमण- ये
मौर्यों के इतिहास-निर्माण के साधन 326 ई.पू. में जब सिकंदर की सेनाएँ पंजाब के विभिन्न
पंद्रहवीं शताब्दी में फ्रांस में निरंकुश राजतंत्र की स्थापना हुई थी, लेकिन सोलहवीं शताब्दी में
शाहजहाँ के पुत्र शाहजहाँ के मुमताज महल से उत्पन्न चौदह संतानों में चार पुत्र और
शाहजहाँ के पुत्रों में उत्तराधिकार युद्ध (War of Succession Among Shah Jahan’s Sons) Read More »
18वीं सदी में जब मुगल सत्ता क्षीण हो रही थी, अंग्रेजों और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया
कर्नाटक में आंग्ल-फ्रांसीसी प्रतिद्वंद्विता (Anglo-French Rivalry in Karnataka) Read More »
उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जब आधुनिक उद्योग धीरे-धीरे शुरू हो रहा था और रेलवे,
अठारहवीं सदी में भारत अभी हाल तक भारतीय इतिहास में अठारहवीं सदी को एक ‘अंधकार
अठारहवीं शताब्दी में भारत (India in the Eighteenth Century) Read More »
बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियाँ बीसवीं सदी के तीसरे दशक में बंगाल में कांग्रेसी नेतृत्व दो
बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियाँ (Revolutionary Activities in Bengal) Read More »
एच.आर.ए., एच.एस.आर.ए. और भगतसिंह प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान क्रांतिकारी आंदोलनकारियों को बुरी तरह कुचल दिया
क्रांतिकारी आंदोलन का पुनरोदय (Revival of the Revolutionary Movement) Read More »
सांप्रदायिकता का अर्थ ‘सांप्रदायिकता’ से तात्पर्य उस संकीर्ण मानसिकता से है, जो धर्म और संप्रदाय
भारत में सांप्रदायिकता के उदय के कारण (Reasons for the Rise of Communalism in India) Read More »
आदिवासी विद्रोह आदिवासी विद्रोह का आरंभ अंग्रेजी साम्राज्य की स्थापना के साथ शुरू हो गया
1857 के बाद आदिवासी विद्रोह (Tribal Rebellion After 1857) Read More »
स्वराज पार्टी ( मार्च 1923) फरवरी 1922 में असहयोग आंदोलन की वापसी के बाद कांग्रेस
वामपंथी राजनीति वामपंथी राजनीति उस पक्ष या विचारधारा को कहते हैं जो समाज को बदलकर
भारत में वामपंथ का उदय और विकास (The Rise and Development of the Left in India) Read More »
1919 से 1922 के बीच अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध दो सशक्त जन-आंदोलन चलाये गये- खिलाफत
मगध मगध महाजनपद प्राचीन भारत में एक प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक जागृति का केंद्र
गणराज्य आरंभ में साम्राज्यवादी इतिहासकारों की धारणा थी कि भारत में सदैव निरंकुश राजाओं का
प्राचीन भारत में गणराज्य (Republics in Ancient India) Read More »
छठी शताब्दी ईसापूर्व में भारत आरंभिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई.पू. को एक महत्त्वपूर्ण
थेरवाद (स्थविरवाद) बौद्ध धर्म का प्रमुख स्वरूप थेरवाद (स्थविरवाद) है। थेरवादी प्राचीन बौद्ध धर्म के
बुद्ध ने कोई ग्रंथ नहीं लिखा और न अपने शिष्यों को अपना उपदेश किसी विशिष्ट,
गौतम बुद्ध की शिक्षाएँ (Teachings of Gautam Buddha) Read More »
दक्षिण-पूर्वी यूरोप के बाल्कन प्रायद्वीप की भौगोलिक तथा ऐतिहासिक दृष्टि से अपनी अलग पहचान है। पंद्रहवीं सदी के प्रारंभ से लेकर सोलहवीं सदी के अंत तक पूर्वी यूरोपीय राज्यों पर आटोमन तुर्कों के निरंतर आक्रमणों एवं साम्राज्य-विस्तार के फलस्वरूप यूरोपीय राज्यों की राजनीतिक सुरक्षा, प्रभुता, प्रादेशिक अखंडता, सामुद्रिक व व्यापारिक हितों को बड़ा खतरा उत्पन्न … Read more क्रीमिया का युद्ध (1853-1856 ई.) (War of Crimea (1853–1856 AD)
नेपोलियन युग 19वीं शताब्दी के प्रारंभिक 15 वर्ष विश्व इतिहास में ‘नेपोलियन युग’ के नाम
पेरिस शांति सम्मेलन जर्मनी के आत्म-समर्पण के बाद 11 नवंबर 1918 ई. को प्रथम विश्वयुद्ध
पेरिस शांति-सम्मेलन और वर्साय की संधि (Paris Peace Conference and Treaty of Versailles) Read More »
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) प्रथम विश्व युद्ध, जो मुख्य रूप से यूरोप में केंद्रित था
प्रथम विश्व युद्ध: कारण और परिणाम (World War I: Causes and Consequences) Read More »
लोदी वंश (1451-1526 ई.) लोदी वंश दिल्ली सल्तनत का पाँचवाँ और अंतिम राजवंश था, जिसने
गौतम बुद्ध और बौद्ध धर्म का उदय बौद्ध धर्म का उदय ई.पू. छठी शताब्दी में
बौद्ध धर्म और गौतम बुद्ध (Buddhism and Gautama Buddha) Read More »
जैन धर्म का उद्भव और प्राचीनता छठी शताब्दी ई.पू. के संप्रदायों में सबसे प्राचीन संप्रदाय
भगवान महावीर और उनकी शिक्षाएँ (Lord Mahavira and his Teachings) Read More »
बौद्धिक आंदोलन ई.पू. छठी शताब्दी प्राचीन भारत के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण सीमा-चिह्न है। इस
ई.पू. छठी शताब्दी में बौद्धिक आंदोलन (Intellectual Movement in the Sixth Century BC) Read More »
भौगोलिक विस्तार ऋक्-संहिता से इतर संहिता ग्रंथों, ब्राह्मणों, आरण्यकों और उपनिषदों का रचनाकाल लगभग ई.पू.
उत्तर वैदिककालीन संस्कृति (Post Vedic Culture, 1000–500 BC) Read More »
वैदिक काल और वैदिक साहित्य वैदिक काल प्राचीन भारतीय संस्कृति का वह कालखंड माना जाता
पत्थर से धातु के प्रयोग तक का संक्रमण धातुओं की खोज और प्रारंभिक प्रयोग मानव
मराठों का उत्थान मध्यकालीन भारतीय इतिहास में मराठों का उत्थान एक महत्त्वपूर्ण घटना है। पंद्रहवीं
मराठों का उत्थान : शिवाजी (Rise of the Marathas: Shivaji) Read More »
गांधीजी 46 वर्ष की आयु में जनवरी 1915 में भारत वापस आए। उन्होंने पूरे एक
गांधीजी के आरंभिक आंदोलन (Gandhi’s Early Movements) Read More »
ताम्र-पाषाणिक संस्कृतियाँ हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद लगभग दूसरी सहस्राब्दी ई.पू. में, सिंधु क्षेत्र
ताम्र-पाषाणिक पशुचारी-कृषक संस्कृतियाँ (Copper-Stone Cattle Cultivator Cultures) Read More »
प्रथम विश्वयुद्ध और भारतीय राजनीति प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान भारत के राजनीतिक जीवन एवं सामाजिक-आर्थिक
होमरूल आंदोलन और लखनऊ समझौता (Home Rule Movement and Lucknow Pact) Read More »
स्वदेशी आंदोलन गरमपंथी राजनीति की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति बंगाल विभाजन-विरोधी स्वदेशी आंदोलन में हुई, जो भारतीय
बंग-भंग और स्वदेशी आंदोलन (Partition of Bengal and Swadeshi Movement) Read More »
भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में गांधीवादी राष्ट्रवाद भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में मोहनदास करमचंद गांधी
भारत में उग्र राष्ट्रवाद का उदय बीसवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में कांग्रेस की कतारों
उग्र राष्ट्रवाद का उदय और विकास(The Rise and Development of Radical Nationalism) Read More »
भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाले अनेक राष्ट्रवादी क्रांतिकारी शरण की खोज, प्रेस कानूनों
भारत के बाहर क्रांतिकारी गतिविधियाँ (Revolutionary Activities Outside India) Read More »
क्रांतिकारी आंदोलन क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास का स्वर्णयुग है। बीसवीं शताब्दी के
तीसवर्षीय युद्ध (1618-1648) यूरोप के इतिहास में तीसवर्षीय युद्ध एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है,
धर्मसुधार आंदोलन यूरोपीय धर्मसुधार का ऐतिहासिक परिदृश्य 16वीं शताब्दी में यूरोप में धर्मसुधार आंदोलन एक
यूरोप में धर्मसुधार आंदोलन (The Reformation Movement in Europe) Read More »
स्पेन के उत्थान के कारण पिरेनीज पहाड़ों के दक्षिण में भूमध्य सागर, अटलांटिक महासागर और
यूरोप में राष्ट्र-राज्यों का उदय मध्ययुग में यूरोप में सर्वत्र सामंतवाद का प्रभुत्व था और
यूरोप में राष्ट्र-राज्यों का उदय (Rise of Nation-States in Europe) Read More »
यूरोप में प्रति-धर्मसुधार आंदोलन 16वीं शताब्दी के विद्रोहात्मक धर्मसुधार आंदोलन के कारण नवीन प्रोटेस्टेंट धर्म
यूरोप में प्रति सुधार आंदोलन (The Counter Reformation in Europe) Read More »
उदारवादी राजनीति भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास में उसके पहले बीस वर्षों की राजनीति को
उदारवादी राष्ट्रीयता का युग (The Era of Liberal Nationalism, 1885-1905) Read More »
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अखिल भारतीय स्तर पर राष्ट्रीय आंदोलन की पहली संगठित अभिव्यक्ति भारतीय राष्ट्रीय
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (Establishment of Indian National Congress) Read More »
उन्नीसवीं सदी में भारतीय राष्ट्रवादी संगठनों का उदय प्रारंभिक राष्ट्रवादी संगठन उन्नीसवीं सदी के चौथे
पुनर्जागरण पुनर्जागरण का अर्थ पुनर्जागरण (Renaissance) का शाब्दिक अर्थ है: पुनर्जनन, पुनर्जागृति इत्यादि। इस रूप
1857 की क्रांति का स्वरूप और चरित्र 1857 की क्रांति के स्वरूप और चरित्र को
1857 की महान क्रांति की असफलता के बाद भारत में कंपनी के शासन का अंत
भारत में राष्ट्रवाद का उदय (Rise of Nationalism in India) Read More »
ब्रिटिश राज के विरुद्ध भारतीय जनता के असंतोष और प्रतिरोध की पहली बड़ी अभिव्यक्ति 1857
1857 की क्रांति : कारण और प्रसार (Revolution of 1857: Causes and Dissemination) Read More »
भारत में ब्रिटिश राज की स्थापना और आरंभिक प्रतिरोध भारत में ब्रिटिश राज की स्थापना
तैमूरलंग का जीवन तैमूरलंग, जिसे तिमुर (1336–1405 ई.) के नाम से भी जाना जाता है,
तुगलक वंश (1320-1412 ई.) 1320 ई. में ‘गाजी मलिक’ (गयासुद्दीन तुगलक) ने तुगलक वंश की
खिलजी वंश (1290-1320) दिल्ली सल्तनत का दूसरा शासक परिवार खिलजी वंश था। इस वंश की
सल्तनत की स्थापना भारतीय इतिहास में युगांतकारी घटना थी। इस्लाम की स्थापना के परिणामस्वरूप अरब
सिंधुघाटी की सभ्यता विश्व की प्राचीनतम नदी घाटी सभ्यताओं में से एक हड़प्पा सभ्यता का
मध्यपाषाण काल मध्यपाषाण काल, जो यूनानी शब्द ‘मेसोस’ (मध्य) और ‘लिथोस’ (पत्थर) से व्युत्पन्न है,
भारत में मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period in India) Read More »
भारत में प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ मानव सभ्यता का विकास अकस्मात् अथवा त्वरित नहीं, वरन् क्रमिक और
भारत में पुरापाषाण काल (Palaeolithic Period in India) Read More »
भारत का भौगोलिक परिचय भारत गणराज्य दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा
भारत का भौगोलिक परिचय (Geographical Introduction of India) Read More »