मार्कस लिवियस ड्रूसस (122 ई. पू. से पहले–91 ई. पू.)
मार्कस लिवियस ड्रूसस एक रोमन राजनेता और सुधारक थे। वे 91 ईसा पूर्व में प्लेब्स के ट्रिब्यून के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान प्रस्तुत किए गए अपने व्यापक विधायी सुधार कार्यक्रम के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं। अपने एक वर्षीय कार्यकाल में ड्रूसस ने अनेक महत्त्वपूर्ण विधायी सुधारों का प्रस्ताव रखा, जिनमें रोम के इतालवी सहयोगी राज्यों को रोमन नागरिकता प्रदान करना भी शामिल था। इन सुधारों की असफलता तथा 91 ईसा पूर्व के अंत में एक अज्ञात हत्यारे द्वारा ड्रूसस की हत्या को प्रायः सोशल वॉर का तात्कालिक कारण माना जाता है।
मार्कस लिवियस ड्रूसस का जन्म 122 अथवा 124 ईसा पूर्व से पहले हुआ था। वे कॉर्नेलिया तथा मार्कस लिवियस ड्रूसस के पुत्र थे। उनके पिता 122 ईसा पूर्व में ट्रिब्यून,112 ईसा पूर्व में कौंसल तथा 109 ईसा पूर्व में सेंसर रहे थे। 109 ईसा पूर्व में सेंसर के रूप में कार्य करते समय ही उनके पिता की पद पर रहते हुए मृत्यु हो गई थी।
सिसरो के अनुसार ड्रूसस सिद्धांतनिष्ठ और ईमानदार युवक था। एशिया में क्वेस्टर के रूप में कार्य करते समय, संभवतः 102 ईसा पूर्व में, उसने सम्मान और विनम्रता प्रदर्शित करने के उद्देश्य से अपने पद के आधिकारिक प्रतीक-चिह्न धारण करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था।
अपने पिता की मृत्यु के बाद ड्रूसस को विशाल संपत्ति विरासत में मिली। इसी धन के बल पर उसने अपने एडाइल पद के दौरान, संभवतः 94 ईसा पूर्व में अत्यंत भव्य ग्लैडियेटर प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया। उसकी उदारता प्राचीन काल में प्रसिद्ध थी। उसने एक बार कहा था कि उसने दूसरों पर इतना धन व्यय कर दिया है कि उसके पास ‘किसी को देने के लिए मिट्टी और हवा के अतिरिक्त कुछ भी नहीं बचा।’
ड्रूसस ने पैलेटाइन पहाड़ी पर एक भव्य नया भवन भी बनवाया। उसने वास्तुकार को निर्देश दिया कि भवन इस प्रकार बनाया जाए कि उसके सभी सहनागरिक उसके प्रत्येक कार्य को देख सकें। यह प्रसिद्ध भवन बाद में सिसरो, सेंसरिनस तथा रुटिलियस सिसेना के स्वामित्व में आया।
ट्रिब्यून का कार्यकाल
ड्रूसस 91 ईसा पूर्व के लिए प्लेब्स का ट्रिब्यून चुना गया था। बाद के विरोधी प्रचार ने उसे उसके ट्रिब्यून पद के प्रारंभ से ही एक जनोत्तेजक नेता (डेमागॉग) के रूप में चित्रित किया, किंतु सिसरो तथा अन्य लेखकों के अनुसार उसने अपने कार्यकाल की शुरुआत सीनेट के शासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की थी और उसे सीनेट का व्यापक समर्थन प्राप्त था। उसके समर्थकों में प्रिंसेप्स सेनेटस मार्कस एमिलियस स्कॉरस भी थे, जो 109 ईसा पूर्व में ड्रूसस के पिता के साथ सेंसर रह चुके थे, तथा उस समय के सबसे प्रभावशाली वक्ता लुसियस लिसिनियस क्रैसस भी उसके समर्थकों में सम्मिलित थे।
ड्रूसस का सुधार कार्यक्रम प्रमुख सीनेटरों के एक प्रभावशाली समूह के सहयोग से तैयार किया गया था। उसका उद्देश्य सीनेट के अधिकार को सुदृढ़ करना और उसे पुनर्स्थापित करना था। इसके लिए उसने लगभग 300 इक्विट्स (अश्वारोही वर्ग) को सीनेटर वर्ग में सम्मिलित करने तथा स्थायी न्यायालयों की जूरी का नियंत्रण पुनः सीनेटरों को सौंपने का प्रस्ताव रखा। यह वास्तव में वही अंतिम उद्देश्य था जिसकी ओर ड्रूसस की समस्त विधायी गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से निर्देशित थीं।
अपने सुधार कार्यक्रम में उसने इतालवी सहयोगियों को रोमन नागरिकता प्रदान करने के साथ-साथ एक कृषि विधेयक भी सम्मिलित किया। नागरिकता के विस्तार का उद्देश्य रोमन शासक वर्ग के भीतर उदार राजनीतिक शक्ति को और अधिक सुदृढ़ करना था। किंतु सीनेट के उसके सभी सहयोगी इन प्रस्तावों से सहमत नहीं थे। उनके अनुसार ड्रूसस के विधायी कार्यक्रम का सबसे स्पष्ट नकारात्मक पक्ष यह था कि इससे उनके हाथों में अस्वीकार्य स्तर की व्यक्तिगत शक्ति केंद्रित हो जाती।
क्वेस्टियो डे रेपेटुंडिस
अश्वारोही वर्ग की जूरी का इतिहास
ड्रूसस और उनके समर्थकों ने जिस सबसे महत्त्वपूर्ण समस्या का समाधान करने का प्रयास किया, वह था ज़बरन वसूली (रेपेटुंडे) से संबंधित मुकदमों की जूरी की संरचना। 122 ईसा पूर्व में गेयस ग्रैकस ने इन न्यायालयों (क्वेस्टियो डे रेपेटुंडिस) की जूरी को सीनेटरों के स्थान पर पूरी तरह समृद्ध इक्विट्स (अश्वारोही वर्ग) के सदस्यों से गठित कर दिया था। इससे अश्वारोही वर्ग को न्यायिक मामलों में अत्यधिक अधिकार प्राप्त हो गए, जिससे अनेक सीनेटर असंतुष्ट हो गए। उन्हें यह भी महसूस हुआ कि न्यायिक प्रक्रिया में उनकी पारंपरिक भूमिका समाप्त होना उनके सम्मान के विरुद्ध था।
106 ईसा पूर्व में क्विंटस सर्विलियस कैपियो ने एक कानून प्रस्तुत किया, जिसके माध्यम से सीनेटरों और अश्वारोही वर्ग के सदस्यों की संयुक्त जूरी स्थापित करने का प्रयास किया गया, ताकि अश्वारोही वर्ग का एकाधिकार समाप्त किया जा सके। यद्यपि इस लेक्स सर्विलिया को लुसियस लिसिनियस क्रैसस का प्रसिद्ध समर्थन प्राप्त था, फिर भी केवल दो वर्ष बाद गाइयस सर्विलियस ग्लौसिया द्वारा पारित एक नए कानून ने इसे निरस्त कर दिया और अश्वारोही वर्ग का एकाधिकार पुनः स्थापित कर दिया।
समय के साथ अश्वारोही वर्ग की जूरी दोषसिद्धि करने में अत्यधिक संकोच करने लगी। 99 से 92 ईसा पूर्व के बीच चले अनेक राजनीतिक मुकदमों में उनकी अदालतों ने किसी भी अभियुक्त को दोषी नहीं ठहराया। इससे सीनेट में गहरी निराशा उत्पन्न हुई, क्योंकि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध कार्रवाई का एक प्रमुख माध्यम लगभग निष्प्रभावी हो गया था। परिणामस्वरूप, अनेक प्रतिष्ठित सीनेटर इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि अश्वारोही वर्ग का न्यायिक एकाधिकार समाप्त किया जाना चाहिए।
यह असंतोष लगभग 92 ईसा पूर्व में प्रतिष्ठित पूर्व कौंसल पब्लियस रुटिलियस रूफस के मुकदमे और निर्वासन के बाद और भी बढ़ गया। रुटिलियस रूफस ने एशिया प्रांत में क्विंटस म्यूसियस स्केवोला पोंटिफेक्स के शासनकाल में उनके लेगेट के रूप में कार्य किया था। उन्होंने वहाँ सक्रिय अश्वारोही वर्ग के कर-ठेकेदारों और व्यापारियों के लालच तथा शोषण का दृढ़ता से विरोध किया था। इसके कारण उन्हें प्रांत के निवासियों और सीनेट की प्रशंसा मिली, किंतु अश्वारोही वर्ग की शत्रुता भी मोल लेनी पड़ी।
प्रतिशोधस्वरूप, रोम लौटने पर अश्वारोही वर्ग के नियंत्रण वाली उसी अदालत में उन पर मुकदमा चलाया गया। यद्यपि रुटिलियस रूफस को सामान्यतः निर्दोष माना जाता था, फिर भी जूरी ने उन्हें दोषी ठहराया और एशिया के स्मिर्ना नगर में निर्वासित कर दिया। इस निर्णय को और भी अन्यायपूर्ण इसलिए माना गया क्योंकि रुटिलियस रूफस ने अपने निर्वासन को अत्यंत शांतचित्त और स्टोइक दर्शन के अनुरूप स्वीकार किया। परिणामस्वरूप उनका मुकदमा लंबे समय तक अन्यायपूर्ण न्याय का प्रतीक बना रहा। चूँकि रुटिलियस रूफस, ड्रूसस के मामा थे, इसलिए उनका कुख्यात निर्वासन संभवतः ड्रूसस के न्यायिक सुधारों की तत्काल प्रेरणा बना।
ड्रूसस का सुधार
ड्रूसस ने इस समस्या का समाधान किस प्रकार प्रस्तावित किया था, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अप्पियन के अनुसार ड्रूसस ने लगभग 300 नए इक्विट्स को सीनेट में सम्मिलित करने का प्रस्ताव रखा था, जिसके बाद जूरी के सदस्यों का चयन विस्तारित सीनेट से किया जाना था। दूसरी ओर, लिवी के अनुसार ड्रूसस ने सीनेट का विस्तार किए बिना सीनेटरों और अश्वारोही वर्ग के सदस्यों की संयुक्त जूरी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। चूँकि इस कालखंड के संबंध में अप्पियन का विवरण पूर्णतः विश्वसनीय नहीं माना जाता, इसलिए कुछ आधुनिक इतिहासकारों का मत है कि उन्होंने ड्रूसस के प्रस्ताव को लगभग दस वर्ष बाद लुसियस कॉर्नेलियस सुल्ला द्वारा किए गए वास्तविक सीनेट-विस्तार के साथ मिश्रित कर दिया है।
सहायक (पूरक) कानून
अपने जूरी संबंधी कानून के लिए जनसमर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से ड्रूसस ने कई पूरक विधेयक प्रस्तुत किए। सामान्य जनता का समर्थन प्राप्त करने के लिए उन्होंने एक भूमि कानून प्रस्तावित किया, जिसके अंतर्गत सार्वजनिक भूमि (एगर पब्लिकस) को निर्धनों में वितरित करने तथा इटली और सिसिली में नई उपनिवेशों (कॉलोनियों) की स्थापना का प्रावधान था। इसके बाद उन्होंने स्वयं को उन दस आयुक्तों के बोर्ड में सम्मिलित कराया, जिन्हें इस भूमि-वितरण का दायित्व सौंपा गया था। जनसमर्थन बढ़ाने के लिए संभवतः उन्होंने अनाज के मूल्य में कमी करने संबंधी एक कानून भी प्रस्तुत किया।
इन लोकप्रिय विधेयकों के साथ-साथ ड्रूसस ने एक ऐसा कानून भी पारित कराया, जिसके अंतर्गत अश्वारोही वर्ग (इक्विट्स) के सदस्यों पर रिश्वत लेने के आरोप में मुकदमा चलाया जा सकता था। यह भी संभव है कि उन्होंने जानबूझकर चाँदी के सिक्कों में आठवाँ भाग काँसा मिलाकर उनकी धातु-शुद्धता घटा दी हो, ताकि भूमि-वितरण कार्यक्रम के लिए आवश्यक धन की व्यवस्था की जा सके। ये सभी विधेयक संभवतः 91 ईसा पूर्व के प्रारंभिक महीनों में पारित हुए थे।
कानूनों का विरोध
सीनेट का विरोध
प्रभावशाली समर्थकों का सहयोग प्राप्त होने के बावजूद ड्रूसस के विधेयकों का कौंसल लुसियस मार्सियस फिलिपस सहित अनेक प्रभावशाली व्यक्तियों ने तीव्र विरोध किया। ड्रूसस के विरोधियों में उसका पूर्व बहनोई, प्रेटर सर्विलियस कैपियो भी सम्मिलित था। मतदान के दिन फिलिपस ने कार्यवाही को रोकने का प्रयास किया, किंतु वह तभी रुका जब ड्रूसस के एक समर्थक ने उसका गला इतनी ज़ोर से दबा दिया कि उसके मुँह से खून निकलने लगा।
जब कैपियो ने विधेयकों का विरोध जारी रखा, तब ड्रूसस ने उसे टार्पियन शिला (टार्पियन रॉक) से नीचे फेंक देने की धमकी दी। यह देशद्रोह के दोषी मजिस्ट्रेटों के लिए प्राचीन रोमन दंड माना जाता था। अंततः ड्रूसस ने अपने सभी अलग-अलग विधेयकों को एक ही कानून में सम्मिलित करके पारित करा लिया, जबकि कुछ वर्ष पूर्व लेक्स सेसिलिया डिडिया के अंतर्गत इस प्रकार की विधायी प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाया जा चुका था।
सितंबर तक ड्रूसस और उसके समर्थकों के विरुद्ध विरोध की लहर तेज़ हो गई। रोमन गणराज्य में सीनेटर किसी भी व्यक्ति के हाथों में अत्यधिक व्यक्तिगत शक्ति केंद्रित होने के प्रति अत्यंत सतर्क रहते थे। परिणामस्वरूप जनता के बीच ड्रूसस की बढ़ती लोकप्रियता के कारण उसे स्वयं सीनेट के भीतर समर्थन खोना पड़ा, क्योंकि अनेक सीनेटरों को आशंका होने लगी थी कि वह ग्रैक्की बंधुओं अथवा लुसियस अप्पुलेयस सैटर्निनस की भाँति अत्यधिक प्रभावशाली और संभावित रूप से खतरनाक राजनीतिक नेता बन सकता है।
कौंसल फिलिपस ने ड्रूसस के कानूनों को निरस्त करने की माँग की। 13 सितंबर को सीनेट भवन में फिलिपस और लुसियस लिसिनियस क्रैसस के बीच तीखी बहस हुई। फिलिपस ने कहा कि वह वर्तमान सीनेट के साथ अब कार्य नहीं कर सकता। इस पर क्रैसस ने उसके कौंसल पद की वैधता पर प्रश्न उठाते हुए उत्तर दिया, ‘यदि तुम मुझे सीनेटर मानने को तैयार नहीं हो, तो क्या मुझे तुम्हें कौंसल मानना चाहिए?’ किंतु सिसरो के अनुसार यह क्रैसस का अंतिम सार्वजनिक भाषण सिद्ध हुआ, क्योंकि लगभग एक सप्ताह बाद उसकी अचानक मृत्यु हो गई।
क्रैसस की मृत्यु के साथ ही ड्रूसस ने अपना सबसे प्रभावशाली समर्थक खो दिया। इसके बाद 91 ईसा पूर्व के अंतिम महीनों में उसने इतालवी सहयोगी राज्यों का समर्थन प्राप्त करने का प्रयास किया। ऐसा प्रतीत होता है कि ड्रूसस के इतालवी नेताओं से पहले से ही घनिष्ठ संबंध थे, क्योंकि प्रमुख मार्सी अभिजात क्विंटस पोपेडियस सिलो, जो बाद में सोशल वॉर के दौरान इतालवी सेनाओं का प्रमुख सेनापति बना, उसके घर का नियमित अतिथि था।
किंतु ड्रूसस के इस प्रस्ताव का भी कड़ा विरोध हुआ, क्योंकि अनेक सीनेटरों को भय था कि इतालवी सहयोगियों को नागरिकता मिलने के बाद उनके विशाल मताधिकार के माध्यम से ड्रूसस को अत्यधिक व्यक्तिगत राजनीतिक शक्ति प्राप्त हो जाएगी।इसी समय यह अफ़वाह भी फैल गई कि इतालवी सहयोगियों ने केवल ड्रूसस के प्रति निष्ठा की एक पवित्र शपथ ली थी, जिसका एक रूप डायोडोरस सिकुलस की रचनाओं में सुरक्षित है। इसी समय संभवतः ड्रूसस को हल्का पक्षाघात अथवा मिर्गी का दौरा पड़ा, जिसके बाद इटली के अनेक नगरों से उसके समर्थन में संदेशों की बाढ़ आ गई।
रोम में विरोध और इतालवी सहयोगियों की प्रतिक्रिया
रोम में इस विधेयक के बढ़ते विरोध को देखकर अनेक इतालवी सहयोगी और अधिक चिंतित हो गए। डायोडोरस सिकुलस के अनुसार क्विंटस पोपेडियस सिलो ने लगभग 10,000 इतालवी सहयोगियों का नेतृत्व करते हुए रोम में एक विरोध-प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, फ्लोरस लिखते हैं कि ड्रूसस की सार्वजनिक सभाओं में इतनी विशाल भीड़ एकत्र होती थी कि ऐसा प्रतीत होता था मानो पूरा रोम घेर लिया गया हो।
अंततः कुछ इतालवी नेताओं ने अल्बान पर्वत पर कौंसल की हत्या करने का षड्यंत्र रचा। यह योजना तभी विफल हो गई जब स्वयं ड्रूसस को इसकी जानकारी मिल गई और उसने कौंसल फिलिपस को इसकी चेतावनी दे दी। इसी दौरान इतालवी सहयोगियों ने गुप्त रूप से सशस्त्र संघर्ष की तैयारियाँ भी आरंभ कर दीं, जिनमें बंधकों का आदान-प्रदान तथा हथियारों का संग्रह शामिल था।
राजनीतिक संघर्ष, कथित हत्या-षड्यंत्रों तथा इटली में बढ़ते असंतोष के इस तनावपूर्ण वातावरण में अंततः फिलिपस सीनेट को ड्रूसस के सभी कानूनों को निरस्त करने के लिए राज़ी करने में सफल हो गया। इसके दो प्रमुख कारण बताए गए। पहला, ये कानून धार्मिक विधानों (औस्पिस) की उपेक्षा करते हुए पारित किए गए थे और इसलिए उन्हें देवताओं की इच्छा के विरुद्ध माना गया। दूसरा, ये 98 ईसा पूर्व के लेक्स सेसिलिया डिडिया का उल्लंघन करते थे।
ड्रूसस की हत्या
यद्यपि ड्रूसस ने सार्वजनिक रूप से सीनेट के इस निर्णय की निंदा की, फिर भी उसने इसे रोकने के लिए अपने वीटो के अधिकार का प्रयोग नहीं किया। उस समय अल्बान पर्वत के कथित षड्यंत्र में संलिप्तता के आरोप में उसके विरुद्ध पहले से ही मुकदमा चल रहा था। ऐसा प्रतीत होता है कि उसने यह समझ लिया था कि अब विरोध करना व्यर्थ होगा।
इसी समय लगभग सितंबर 91 ईसा पूर्व में ड्रूसस की हत्या कर दी गई। कुछ प्राचीन स्रोतों के अनुसार उसकी हत्या उसके अपने घर के एट्रियम में हुई थी। अन्य स्रोतों का कहना है कि फोरम से लौटते समय उसे छुरा घोंपा गया। कुछ लेखकों ने इस हत्या के लिए फिलिपस और सर्विलियस कैपियो को उत्तरदायी ठहराया है, जबकि कुछ ने 90 ईसा पूर्व के ट्रिब्यून क्विंटस वैरियस हाइब्रिडा पर भी संदेह व्यक्त किया है, जिसने बाद में ड्रूसस के समर्थकों पर मुकदमा चलाने के लिए एक विशेष न्यायालय की स्थापना की थी।
ड्रूसस के वंशज
मार्कस लिवियस ड्रूसस के अनेक प्रसिद्ध वंशज हुए। अपने दत्तक पुत्र के माध्यम से वे आगे चलकर शाही जूलियो-क्लाउडियन राजवंश के पूर्वज बने, जबकि अपनी बहन लिविया के दो विवाहों के कारण वे कैटो द यंगर के मामा तथा मार्कस जूनियस ब्रूटस के पर-मामा थे। उनके भाई मैमरकस एमिलियस लेपिडस लिवियानुस ने 77 ईसा पूर्व में कौंसल का पद संभाला। लगभग 100 ईसा पूर्व में ड्रूसस ने अपने मित्र क्विंटस सर्विलियस कैपियो की बहन सर्विलिया से विवाह किया, किंतु लगभग 97 ईसा पूर्व में दोनों का तलाक हो गया और उनकी कोई संतान नहीं हुई। उपलब्ध प्रमाणों के अनुसार ड्रूसस ने अपनी 91 ईसा पूर्व की मृत्यु से पहले पुनः विवाह नहीं किया, यद्यपि कुछ इतिहासकार रोमन गणराज्य के उत्तरकाल की लिविया नामक महिला को उनकी पुत्री मानते हैं। ड्रूसस ने एपियस क्लॉडियस पुल्खर को गोद लेकर मार्कस लिवियस ड्रूसस क्लॉडियानुस बनाया। क्लॉडियानुस ने अल्फिडिया से विवाह किया, जिनसे लिविया का जन्म हुआ, जो आगे चलकर सम्राट ऑगस्टस की पत्नी तथा सम्राट टिबेरियस की माता बनीं। ड्रूसस की बहन लिविया का पहला विवाह क्विंटस सर्विलियस कैपियो से हुआ, जिनसे उनकी तीन संतानें हुईं—प्रसिद्ध सर्विलिया, जो बाद में जूलियस सीज़र की प्रेमिका तथा मार्कस जूनियस ब्रूटस की माता बनीं; दूसरी सर्विलिया, जिसका विवाह सेनानायक लुसियस लिसिनियस ल्यूकुलस से हुआ; तथा ग्नियस सर्विलियस कैपियो। बाद में ड्रूसस और कैपियो के बीच एक नीलामी में अंगूठी की बिक्री को लेकर विवाद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप दोनों परिवारों के वैवाहिक संबंध टूट गए। इसके पश्चात ड्रूसस ने लगभग 97–96 ईसा पूर्व में अपनी बहन लिविया का दूसरा विवाह कैटो द एल्डर के पौत्र मार्कस पोर्सियस कैटो से कराया। इस विवाह से मार्कस पोर्सियस कैटो यूटिकेंसिस (कैटो द यंगर) तथा पोर्शिया का जन्म हुआ। पोर्शिया का विवाह लुसियस डोमितियस अहेनोबार्बुस से हुआ। लिविया और कैटो की मृत्यु 90 ईसा पूर्व के दशक के मध्य अथवा उत्तरार्ध में हो जाने के कारण सर्विलिया, कैटो और पोर्शिया का पालन-पोषण ड्रूसस के घर में उसकी 91 ईसा पूर्व की मृत्यु से पहले हुआ।
ड्रूसस का योगदान
चूँकि ड्रूसस की हत्या के लगभग तुरंत बाद सोशल वॉर (91–87 ईसा पूर्व) प्रारंभ हो गया, इसलिए अनेक रोमन लेखकों ने इस युद्ध के लिए ड्रूसस को उत्तरदायी माना। ड्रूसस की मृत्यु के बाद लेक्स वारिया के अंतर्गत एक विशेष न्यायालय स्थापित किया गया, जिसका उद्देश्य उन व्यक्तियों पर मुकदमा चलाना था जिन पर ड्रूसस की भाँति इतालवी सहयोगियों को विद्रोह के लिए उकसाने का संदेह था। ड्रूसस के मित्र गयुस ऑरेलियस कोट्टा को निर्वासित कर दिया गया, जबकि उसके संरक्षक तथा प्रिंसेप्स सेनेटस मार्कस एमिलियस स्कॉरस पर भी अभियोग लगाया गया।
दीर्घकाल में रोमन इतिहासकारों की बाद की पीढ़ियों ने ड्रूसस के ट्रिब्यून पद के कार्यकाल को रोमन गणराज्य के संकट का एक महत्त्वपूर्ण मोड़ माना। अप्पियन, लिवी और फ्लोरस सभी ने ड्रूसस के ‘सेडिटियो’ (राजनीतिक अशांति) को एक निरंतर क्रम का भाग माना, जिसकी शुरुआत ग्रैक्की बंधुओं और सैटर्निनस से हुई तथा जिसके बाद गयुस मारियस और पब्लियस सुल्पिसियस रूफस के संघर्ष सामने आए। इस प्रकार इन लेखकों ने सीनेट के समर्थक के रूप में ड्रूसस की मूल राजनीतिक भूमिका की अपेक्षा उसके ट्रिब्यून काल की अशांति तथा सोशल वॉर के प्रारंभ में उसकी भूमिका पर अधिक बल दिया।
यद्यपि अधिकांश आधुनिक इतिहासकार यह स्वीकार करते हैं कि 91 ईसा पूर्व में इतालवी सहयोगियों से किए गए वादे सोशल वॉर के तत्काल कारणों में से एक थे, फिर भी वे ड्रूसस के प्रति अपेक्षाकृत अधिक सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाते हैं। थियोडोर मॉमज़ेन ने उसे एक वास्तविक सुधारक और प्रगतिशील राजनेता माना, जिसने ऐसे समय में रोमन राज्य की सबसे गंभीर समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया, जब बहुत कम लोग ऐसा करने का साहस रखते थे।
इतालवी इतिहासकार एमिलियो गब्बा के शब्दों में : ‘ड्रूसस की जटिल राजनीतिक योजना उस समय की ऐतिहासिक परिस्थितियों, सक्रिय राजनीतिक शक्तियों तथा उनके द्वारा व्यक्त आवश्यकताओं और हितों की गहन तथा सूक्ष्म समझ पर आधारित प्रतीत होती है। यह ऐसी राजनीतिक क्षमता का परिचय देती है जिसकी तुलना गेयस ग्रैकस से की जा सकती है।’




