गायस जूलियस सीज़र (49 ई. पू. -44 ई. पू.)
गायस जूलियस सीज़र विश्व इतिहास के उन विरल व्यक्तित्वों में से एक हैं, जिसके जीवन और कार्यों ने न केवल अपने युग की राजनीति को रूपांतरित किया, बल्कि आने वाली अनेक शताब्दियों के इतिहास, शासन-व्यवस्था और राजनीतिक चिंतन को भी गहराई से प्रभावित किया। वह एक महान रोमन सेनापति, दूरदर्शी राजनेता, कुशल प्रशासक, प्रभावशाली वक्ता तथा उत्कृष्ट लेखक था। 60 ईसा पूर्व में उसने मार्कस लिसिनियस क्रैसस और ग्नियस पॉम्पेयस मैग्नस (पॉम्पे) के साथ मिलकर प्रथम ट्रायम्विरेट का गठन किया। यद्यपि इस गठबंधन का सीनेट के अनेक प्रभावशाली सदस्यों—विशेषकर कैटो द यंगर तथा उनके समर्थकों—ने विरोध किया, फिर भी सीज़र ने इसका सफलतापूर्वक उपयोग अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया। 58–51 ईसा पूर्व के गैलिक युद्धों में उसकी लगातार विजयों ने उसे रोम का सर्वाधिक प्रतिष्ठित सेनानायक बना दिया। इन सफलताओं और अपनी सेना की अटूट निष्ठा के कारण उसका प्रभाव इतना बढ़ गया कि पॉम्पे की राजनीतिक स्थिति धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी।

क्रैसस की मृत्यु के बाद प्रथम ट्रायम्विरेट का संतुलन समाप्त हो गया और सीज़र तथा पॉम्पे के संबंध तेजी से बिगड़ गए। अंततः सीज़र ने पॉम्पे सहित अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों को पराजित कर रोम की सर्वोच्च सत्ता अपने हाथों में केंद्रित कर ली। 49 ईसा पूर्व से लेकर 44 ईसा पूर्व में अपनी हत्या तक वे लगभग निरंतर रोमन गणराज्य के अधिनायक (तानाशाह) रहे। उसकी राजनीतिक और सैन्य सफलताओं ने ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न कीं, जिन्होंने रोमन गणराज्य के अंत और रोमन साम्राज्य के उदय का मार्ग प्रशस्त किया।
सत्ता प्राप्त करने के पश्चात् सीज़र ने व्यापक प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक सुधार आरंभ किए। उन्होंने जूलियन पंचांग लागू किया, अनाज वितरण व्यवस्था में सुधार किए, पूर्व सैनिकों के लिए नई उपनिवेशों की स्थापना की, सीनेट की सदस्य संख्या में वृद्धि की तथा इटली और प्रांतों के अनेक समुदायों को रोमन नागरिकता प्रदान की। किंतु उसकी निरंतर बढ़ती शक्ति, आजीवन अधिनायक की उपाधि तथा संभावित राजतंत्र की आशंका ने रोमन अभिजात वर्ग के एक बड़े भाग को उनके विरुद्ध कर दिया। परिणामस्वरूप 15 मार्च 44 ईसा पूर्व को सीनेटरों के एक समूह ने उसकी हत्या कर दी। अंततः उसके दत्तक उत्तराधिकारी ऑक्टेवियन ने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पराजित कर ऑगस्टस के रूप में रोमन साम्राज्य की स्थापना की। आधुनिक इतिहासकार वह विश्व के महानतम सैन्य सेनापतियों, रणनीतिकारों और राजनीतिक नेताओं में से एक था।
आरंभिक जीवन
गायस जूलियस सीज़र का जन्म 12 या 13 जुलाई 100 ईसा पूर्व में एक पैट्रिशियन (कुलीन) परिवार जेंस जूलिया में हुआ था। परिवार का दावा था कि उनके पूर्वज सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व में अल्बा लोंगा से रोम आकर बसे थे, जब रोम के तीसरे राजा टुलस होस्टिलियस ने उस नगर पर अधिकार कर उसे नष्ट कर दिया था। परिवार स्वयं को जूलस का वंशज भी मानता था, जिसे ऐनीयस का पुत्र और अल्बा लोंगा का संस्थापक माना जाता था। चूँकि ऐनीयस को देवी वीनस का पुत्र माना जाता था, इसलिए इस वंश को दैवीय वंश का दर्जा प्राप्त था। यद्यपि यह परंपरा पहली शताब्दी ईसा पूर्व तक पूरी तरह स्थापित नहीं हुई थी, फिर भी वीनस से वंश होने का दावा रोमन समाज में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाने लगा था।
अपने प्राचीन कुलीन वंश के बावजूद जूलियस सीज़र का परिवार मध्य रोमन गणराज्य के अधिकांश काल में विशेष राजनीतिक प्रभाव नहीं रखता था। सीज़र नाम धारण करने वाला पहला व्यक्ति द्वितीय प्यूनिक युद्ध के दौरान 208 ईसा पूर्व में प्रेटर बना था। परिवार का पहला कौंसल 157 ईसा पूर्व में हुआ, जबकि पहली शताब्दी ईसा पूर्व के आरंभ तक परिवार की राजनीतिक स्थिति फिर से सुदृढ़ होने लगी और 91 तथा 90 ईसा पूर्व में उसके दो सदस्य कौंसल बने। सीज़र के पिता गायस जूलियस सीज़र राजनीतिक रूप से मध्यम स्तर तक सफल रहे और प्रभावशाली ऑरेलिया कोटा परिवार की सदस्य ऑरेलिया से विवाह किए, जिनसे सीज़र सहित दो पुत्रियाँ उत्पन्न हुईं। अपनी बहन का विवाह प्रभावशाली नेता गायस मारियस से कराने के बाद उसने 103 ईसा पूर्व में सैटर्निनस भूमि आयोग में कार्य किया तथा 92 से 85 ईसा पूर्व के बीच किसी समय प्रेटर चुने गए। इसके बाद उसने लगभग दो वर्षों तक संभवतः 91–90 ईसा पूर्व में एशिया के प्रोकॉन्सुलर गवर्नर के रूप में सेवा की।
राजनीतिक संघर्ष और सैन्य सेवा
सीज़र के पिता ने लुसियस कॉर्नेलियस सिन्ना के शासनकाल में कौंसल पद के लिए प्रयास नहीं किया और सार्वजनिक जीवन से अलग रहना ही उचित समझा। सिन्ना के शासनकाल में सीज़र को ‘फ्लामेन डियालिस’ (जुपिटर का प्रधान पुरोहित) नियुक्त किया गया, जिसके कारण उनका विवाह सिन्ना की पुत्री कॉर्नेलिया से हुआ। 84 ईसा पूर्व के आरंभ में उसके पिता का अचानक निधन हो गया।
82 ईसा पूर्व के गृहयुद्ध में सुल्ला की विजय के बाद सिन्ना के सभी आदेश निरस्त कर दिए गए। सुल्ला ने सीज़र को अपना पुरोहित पद छोड़ने और कॉर्नेलिया को तलाक देने का आदेश दिया, किंतु सीज़र ने इसे अस्वीकार कर दिया तथा सुल्ला के आदेश की वैधता पर प्रश्न उठाया। सीज़र कुछ समय तक छिपा रहा, जिसके बाद उसके रिश्तेदारों तथा वेस्टल कुँवारियों के हस्तक्षेप से समझौता हुआ। इसके अनुसार सीज़र ने फ्लामेन डियालिस का पद छोड़ दिया, किंतु अपनी पत्नी और संपत्ति अपने पास रख सका। सुल्ला द्वारा कथित रूप से कहा गया यह वाक्य कि उसने ‘इस युवक में अनेक मारियस देखे हैं’, आधुनिक इतिहासकारों के अनुसार संभवतः बाद की कल्पना है।
इसके बाद सीज़र इटली छोड़कर एशिया के गवर्नर मार्कस मिनूशियस थर्मुस के अधीन सेवा करने चला गया। वहीं रहते हुए वह नौसैनिक सहायता जुटाने के लिए बिथिनिया गया और कुछ समय तक वहाँ के राजा निकॉमीडीस चतुर्थ का अतिथि रहा। बाद में उसके विरोधियों ने उस पर निकॉमीडीस के साथ समलैंगिक संबंध होने का आरोप लगाया। इसके बाद उसने मिटिलीनी की घेराबंदी में भाग लिया, जहाँ युद्ध के दौरान एक रोमन नागरिक का जीवन बचाने के लिए उसे सिविक क्राउन (नागरिक मुकुट) प्रदान किया गया। इस सम्मान के साथ कुछ विशेष अधिकार भी प्राप्त हुए, जिनमें सीनेट में प्रवेश के समय सम्मानपूर्वक खड़े होकर उसका स्वागत करना तथा सार्वजनिक अवसरों पर यह मुकुट धारण करने की अनुमति शामिल थी। मिटिलीनी पर अधिकार होने के बाद सीज़र का स्थानांतरण सिलिसिया में पब्लियस सर्विलियस वाटिया के अधीन कर दिया गया। 78 ईसा पूर्व में सुल्ला की मृत्यु का समाचार मिलते ही वह तुरंत रोम लौट आया। बाद में उस पर यह आरोप लगाया गया कि वह उसी वर्ष कौंसल लेपिडस के विद्रोह में सम्मिलित होना चाहता था, किंतु आधुनिक इतिहासकार इसे उसकी युवावस्था को नाटकीय बनाने के लिए जोड़ी गई कथा मानते हैं।
इसके बाद सीज़र ने न्यायालय में सुल्ला के समर्थक कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमे चलाए। 77 ईसा पूर्व में वह हाल ही में मैसेडोनिया के प्रोकॉन्सुलर पद से लौटे ग्नियस कॉर्नेलियस डोलाबेला के विरुद्ध अभियोग चलाने में असफल रहा। अगले वर्ष उसने गायस एंटोनियस हाइब्रिडा (जो बाद में 63 ईसा पूर्व में कौंसल बना) के विरुद्ध प्रोस्क्रिप्शन से अनुचित लाभ उठाने का आरोप लगाया, किंतु एक ट्रिब्यून द्वारा एंटोनियस के पक्ष में हस्तक्षेप किए जाने पर यह मुकदमा भी आगे नहीं बढ़ सका। इन प्रयासों के बाद सीज़र रोम छोड़कर रोड्स चला गया, जहाँ उसने प्रसिद्ध वक्तृत्वाचार्य अपोलोनियस मोलोन से वक्तृत्व कला का प्रशिक्षण लिया। यात्रा के दौरान उसे समुद्री लुटेरों ने पकड़ लिया और फिरौती माँगी। प्लूटार्क और सुएटोनियस के अनुसार पचास टैलेंट की फिरौती मिलने के बाद उसे मुक्त कर दिया गया। इसके बाद उसने एक बेड़ा संगठित किया, समुद्री लुटेरों को पकड़ लिया और उन्हें दंडित किया। 75–74 ईसा पूर्व की सर्दियों में तृतीय मिथ्रिडेटिक युद्ध प्रारंभ होने से उसकी पढ़ाई बाधित हो गई। कहा जाता है कि सीज़र ने स्थानीय लोगों की सहायता से एक सेना संगठित की और मिथ्रिडेट्स की सेनाओं के विरुद्ध उसका सफलतापूर्वक नेतृत्व किया।
राजनीति में प्रवेश
73 ईसा पूर्व में रोम से अनुपस्थित रहने के दौरान सीज़र को अपने दिवंगत संबंधी गायस ऑरेलियस कोटा के स्थान पर पोंटिफ़ों के महाविद्यालय का सदस्य चुना गया। इस नियुक्ति ने उसे रोमन अभिजात वर्ग के एक प्रतिष्ठित सदस्य के रूप में स्थापित किया और उसके राजनीतिक भविष्य की संभावनाओं को और सुदृढ़ किया। इसके तुरंत बाद उसने रोम लौटने का निर्णय लिया और अपनी वापसी पर 71 ईसा पूर्व के लिए सैन्य ट्रिब्यून चुना गया। इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि उसने अपने कार्यकाल के दौरान, जबकि स्पार्टाकस का युद्ध चल रहा था, किसी सैन्य अभियान में भाग लिया हो। हालाँकि, उसने प्लेबियन ट्रिब्यूनों के अधिकारों पर सुल्ला द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने तथा लेपिडस के विद्रोह का समर्थन करने वालों को क्षमा देने का समर्थन किया।
अगले वर्ष, 70 ईसा पूर्व में पॉम्पे और क्रैसस के कौंसल बनने के बाद राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल गईं। 69 ईसा पूर्व के लिए क्वेस्टर चुने जाने पर सीज़र को हिस्पानिया उल्तेरियोर में गायस एंटिस्टियस वेटुस के अधीन कार्य करने के लिए नियुक्त किया गया। इस पद पर उसके निर्वाचन के साथ ही उसे आजीवन सीनेट की सदस्यता भी प्राप्त हो गई। किंतु प्रांत के लिए प्रस्थान करने से पहले उसकी बुआ जूलिया, जो गायस मारियस की विधवा थीं, की मृत्यु हो गई। इसके कुछ समय बाद उसकी पत्नी कॉर्नेलिया का भी निधन हो गया। कॉर्नेलिया ने उसकी एकमात्र वैध संतान जूलिया को जन्म दिया था। सीज़र ने दोनों के सार्वजनिक अंतिम संस्कार में श्रद्धांजलि दी।
अपनी बुआ जूलिया के अंतिम संस्कार के अवसर पर सीज़र ने मारियस के चित्र प्रदर्शित कराए, जिसकी स्मृति सुल्ला की गृहयुद्ध में विजय के बाद दबा दी गई थी। क्विंटस लुटाटियस कैटुलस सहित कुछ सुल्ला समर्थक अभिजातों ने इसका विरोध किया, क्योंकि उन्होंने मारियस के शासनकाल में कष्ट झेले थे। किंतु उस समय प्रतिष्ठित महिलाओं की अंतिम यात्रा में उनके पतियों के चित्र प्रदर्शित करना सामान्य प्रथा बन चुकी थी। प्लूटार्क के वर्णन की तुलना में आधुनिक इतिहासकारों का मत है कि सीज़र का यह कदम राजनीतिक गुटबाज़ी को पुनर्जीवित करने के बजाय मेल-मिलाप और राजनीतिक सामान्यीकरण की उस समय की प्रवृत्ति के अनुरूप था। इसके कुछ समय बाद सीज़र ने सुल्ला की पौत्री पॉम्पेया से दूसरा विवाह कर लिया।
एडिलशिप और पोंटिफ़ेक्स मैक्सिमस के रूप में चुनाव
इस अवधि के अधिकांश समय में सीज़र पॉम्पे के समर्थकों में से एक था। 70 के दशक ईसा पूर्व के उत्तरार्ध में वह ट्रिब्यूनों के अधिकारों की पुनर्स्थापना के समर्थन में पॉम्पे के साथ था। लेपिडस के समर्थकों को निर्वासन से वापस बुलाने वाले कानून के प्रति उसका समर्थन संभवतः उसी ट्रिब्यून द्वारा प्रस्तुत उस विधेयक से भी जुड़ा था, जिसके माध्यम से पॉम्पे के पूर्व सैनिकों को भूमि प्रदान की जानी थी। सीज़र ने 67 ईसा पूर्व में लेक्स गैबिनिया का समर्थन किया, जिसके द्वारा पॉम्पे को भूमध्यसागर में समुद्री डाकुओं के विरुद्ध असाधारण सैन्य अधिकार प्रदान किए गए। इसके बाद 66 ईसा पूर्व में उसने लेक्स मैनिलिया का भी समर्थन किया, जिसके अंतर्गत तृतीय मिथ्रिडेटिक युद्ध का सर्वोच्च सैन्य नेतृत्व तत्कालीन सेनापति ल्यूकुलस से लेकर पॉम्पे को सौंप दिया गया।
अपनी बुआ जूलिया के अंतिम संस्कार के चार वर्ष बाद 65 ईसा पूर्व में सीज़र ‘क्यूरूल एडाइल’ के पद पर नियुक्त हुआ। इस पद पर रहते हुए उसने भव्य सार्वजनिक खेलों और समारोहों का आयोजन किया, जिससे उसकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई। उसने मारियस द्वारा स्थापित तथा सुल्ला द्वारा हटाई गई जुगुर्था और सिम्ब्री पर विजय की स्मारक ट्रॉफियों को भी पुनः स्थापित कराया। प्लूटार्क के अनुसार ये ट्रॉफियाँ एक ही रात में लोगों की तालियों और भावुक स्वागत के बीच पुनः स्थापित कर दी गई थीं, किंतु आधुनिक इतिहासकार इसे असंभव मानते हैं, क्योंकि ऐसे कार्य के लिए वास्तुकारों, शिल्पकारों और अन्य कर्मचारियों की आवश्यकता होती थी तथा इसे एक ही रात में पूरा करना संभव नहीं था। संभवतः सीज़र ने अपने परिवार से संबंधित सार्वजनिक स्मारकों का जीर्णोद्धार कराया, जो उस समय की परंपरा और पिएतास (पारिवारिक एवं धार्मिक कर्तव्य) की भावना के अनुरूप था। कैटुलस के विरोध के बावजूद इन कार्यों को सीनेट का पर्याप्त समर्थन प्राप्त था।
63 ईसा पूर्व में सीज़र ने प्रेटर तथा पोंटिफ़ेक्स मैक्सिमस (प्रधान पुरोहित) के पद के लिए भी चुनाव लड़ा। यह पोंटिफ़ों के महाविद्यालय का सर्वोच्च पद और रोमन राज्य का सबसे उच्च धार्मिक पद था। जनजातीय सभाओं में हुए चुनाव में उसका मुकाबला दो प्रभावशाली सीनेटरों—क्विंटस लुटाटियस कैटुलस और पब्लियस सर्विलियस इसॉरिकस से हुआ, जिसमें सीज़र विजयी रहा। अनेक इतिहासकारों ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया है कि उसकी उम्मीदवारी को इतनी गंभीरता से लिया गया, किंतु ऐसी घटना रोमन इतिहास में अभूतपूर्व नहीं थी। प्राचीन स्रोतों में उल्लेख मिलता है कि सीज़र ने चुनाव में भारी धनराशि खर्च की अथवा व्यापक रूप से समर्थन जुटाया। किंतु उसके विरुद्ध कभी कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केवल रिश्वत को उसकी विजय का कारण नहीं माना जा सकता। यदि चुनाव में बड़े पैमाने पर धन की आवश्यकता पड़ी भी हो, तो संभवतः उसका प्रबंध पॉम्पे ने किया होगा, जिसका उस समय सीज़र समर्थन कर रहा था और जो कैटुलस की उम्मीदवारी का विरोधी था।
कुछ स्रोत यह भी दावा करते हैं कि उसी वर्ष सीज़र ने पब्लियस सर्विलियस रुलस द्वारा प्रस्तुत भूमि सुधार प्रस्ताव का समर्थन किया था, किंतु इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई समकालीन प्राचीन स्रोत उपलब्ध नहीं है। इसी वर्ष उसने लगभग चालीस वर्ष पूर्व सेनातुस कंसल्टुम अल्टीमुम के आधार पर सैटर्निनस की हत्या के मामले में टाइटस लैबिएनस द्वारा गायस रैबिरियस के विरुद्ध चलाए गए मुकदमे में भी परोक्ष रूप से भाग लिया। उसी वर्ष की सबसे प्रसिद्ध घटना कैटिलाइन षड्यंत्र थी। यद्यपि सीज़र के कुछ राजनीतिक विरोधियों, जिनमें कैटुलस भी शामिल था, ने उस पर इस षड्यंत्र में सम्मिलित होने का आरोप लगाया, फिर भी अधिकांश इतिहासकारों का मत है कि उसके इसमें शामिल होने की संभावना अत्यंत कम थी।
प्रेटोरशिप
सीज़र ने 63 ईसा पूर्व में प्रेटर का चुनाव आसानी से जीत लिया। प्रेटर-निर्वाचित के रूप में उसी वर्ष दिसंबर में उसने सीनेट में उन नागरिकों को मृत्युदंड दिए जाने का विरोध किया, जिन्हें नगर में गॉलों के साथ मिलकर कैटिलाइन षड्यंत्र को आगे बढ़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय सीज़र के प्रस्ताव के विषय में प्राचीन स्रोतों में मतभेद है। प्रारंभिक स्रोतों के अनुसार उसने बिना मुकदमे के मृत्युदंड देने के स्थान पर आजीवन कारावास का समर्थन किया, जबकि बाद के स्रोतों के अनुसार वह षड्यंत्रकारियों को मुकदमे तक कारावास में रखने के पक्ष में था। अधिकांश स्रोत इस बात पर सहमत हैं कि सीज़र ने षड्यंत्रकारियों की संपत्ति जब्त करने का समर्थन किया था। संभवतः उसका पहला प्रस्ताव एक समझौते का मार्ग था, जिससे सीनेट लेक्स सेम्प्रोनिया दे कापिते सिविस (रोमन नागरिक के प्राणदंड से संबंधित सेम्प्रोनियाई कानून) के दायरे में रहती। प्रारंभ में उसके विचारों को कुछ समर्थन भी मिला, किंतु बाद में कैटो के हस्तक्षेप के बाद सीनेट ने अंततः षड्यंत्रकारियों को मृत्युदंड देने का निर्णय लिया।
प्रेटर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सीज़र ने सबसे पहले अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी क्विंटस लुटाटियस कैटुलस को ज्यूपिटर ऑप्टिमस मैक्सिमस के पुनर्निर्मित मंदिर को पूर्ण कराने का श्रेय मिलने से रोकने का प्रयास किया। उसने कैटुलस पर धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया और यह प्रस्ताव रखा कि इस कार्य का दायित्व पॉम्पे को सौंप दिया जाए। व्यापक विरोध के कारण उसे यह प्रस्ताव तुरंत वापस लेना पड़ा। इसके बाद उसने प्लेबियन ट्रिब्यून मेटेलस नेपोस द्वारा 63 ईसा पूर्व के कौंसल गायस एंटोनियस हाइब्रिडा से कैटिलाइन के विरुद्ध सैन्य कमान लेकर उसे पॉम्पे को सौंपने के प्रयास का समर्थन किया। कोमितिया ट्रिब्यूटा की एक हिंसक सभा में मेटेलस की अपने सह-ट्रिब्यून कैटो और क्विंटस मिनूशियस थर्मुस से झड़प हो गई। इसके बाद सीनेट ने मेटेलस के विरुद्ध निर्णय पारित किया। सुएटोनियस का दावा है कि मेटेलस नेपोस और सीज़र दोनों को उनके पदों से हटा दिया गया था, किंतु आधुनिक इतिहासकार इसे संवैधानिक रूप से असंभव मानते हैं। इसके बाद सीज़र ने स्वयं को इस विवाद से अलग कर लिया, क्योंकि वह एक प्रांतीय कमान प्राप्त करना चाहता था और अभिजात वर्ग के साथ अपने संबंध सुधारना उसके लिए अधिक महत्त्वपूर्ण था। इसी अवधि में वह बोना देआ प्रकरण से भी जुड़ा। इस विवाद से स्वयं को अलग रखने के लिए उसने अपनी पत्नी पॉम्पेया को तलाक दे दिया और यह कहा कि ‘सीज़र की पत्नी संदेह से परे होनी चाहिए।‘ किंतु इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि उसने किसी भी प्रकार से क्लोडियस का समर्थन किया हो।
प्रेटोरशिप के बाद सीज़र को हिस्पानिया उल्तेरियोर का प्रो-कौंसल नियुक्त किया गया। प्रेटोर तथा पोंटिफ़ेक्स मैक्सिमस के चुनाव अभियानों के कारण वह भारी ऋण में डूब चुका था। इसलिए ऋण चुकाने के लिए उसे सामान्य प्रांतीय आय से अधिक सैन्य सफलताओं की आवश्यकता थी। उसने कैलाइसी और लुसितानी के विरुद्ध अभियान चलाया, उत्तर-पश्चिमी स्पेन में कैलाइसी की राजधानी पर अधिकार किया और रोमन सेना को अटलांटिक महासागर तक पहुँचा दिया। इन अभियानों से प्राप्त युद्ध-लाभ ने उसके अधिकांश ऋण चुकाने में सहायता की। प्रायद्वीप में अपनी विजयों के बाद उसे इम्पेरेटर की उपाधि प्रदान की गई और वह रोम लौट आया।
60 ईसा पूर्व की गर्मियों में रोम पहुँचने पर उसे विजय-उत्सव (ट्रायम्फ) और कौंसल पद के चुनाव में से किसी एक का चयन करना पड़ा। यदि वह विजय-उत्सव चाहता, तो उसे पोमेरियम (रोम की पवित्र सीमा) के बाहर रहना पड़ता; जबकि चुनाव लड़ने के लिए उसे पोमेरियम के भीतर प्रवेश कर अपनी सैन्य कमान और विजय-उत्सव के अधिकार का त्याग करना आवश्यक था। सीज़र के विरोधी कैटो ने सीनेट में उस प्रस्ताव का विरोध किया, जिसके अनुसार सीज़र को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए बिना अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की अनुमति दी जा सकती थी, यद्यपि अधिकांश सीनेटर इस छूट के पक्ष में दिखाई देते थे। अंततः सीज़र ने विजय-उत्सव का त्याग कर कौंसल पद के चुनाव को प्राथमिकता दी।
पहली कौंसलशिप और गैलिक युद्ध
सीज़र 59 ईसा पूर्व में दो अन्य उम्मीदवारों के साथ कौंसल पद के लिए खड़ा हुआ। उस समय उसकी राजनीतिक स्थिति अत्यंत मजबूत थी। उसे उन परिवारों का समर्थन प्राप्त था जिन्होंने पहले मारियस या सिन्ना का साथ दिया था। साथ ही, सुल्ला समर्थक अनेक अभिजातों से भी उसके अच्छे संबंध थे। पॉम्पे का समर्थन करने के कारण उसे उसका भी सहयोग प्राप्त था। गृहयुद्धों के बाद मेल-मिलाप और राष्ट्रीय सुलह की उसकी नीति समाज के विभिन्न वर्गों में लोकप्रिय थी। क्रैसस के समर्थन से, जिसने लुसियस लुक्सियस के साथ सीज़र के संयुक्त उम्मीदवार होने का समर्थन किया, सीज़र चुनाव जीत गया। किंतु लुक्सियस विजयी नहीं हो सका और मतदाताओं ने उसके स्थान पर मार्कस कैलपुर्नियस बिबुलस को चुना, जो सीज़र के पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों में से एक था।
चुनाव के बाद सीज़र ने अपने दो प्रमुख राजनीतिक सहयोगियों पॉम्पे और क्रैसस के बीच समझौता किया। इस त्रिपक्षीय राजनीतिक गठबंधन को आधुनिक इतिहास में ‘प्रथम ट्रायम्विरेट’ कहा जाता है। सीज़र ने 60 ईसा पूर्व के अंत तक अपने कौंसल पद के लिए राजनीतिक समर्थन जुटाने का प्रयास जारी रखा और गठबंधन शीघ्र ही अंतिम रूप ले चुका था। पॉम्पे और क्रैसस अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इस गठबंधन में शामिल हुए। पॉम्पे अपनी पूर्वी व्यवस्थाओं को सीनेट से स्वीकृति दिलाना चाहता था, जबकि क्रैसस एशिया के कर-ठेकेदारों के हितों की रक्षा करना चाहता था, जिनमें से अनेक उसके समर्थक थे। तीनों नेताओं ने भूमि वितरण का भी समर्थन किया, विशेषकर पॉम्पे अपने पूर्व सैनिकों के लिए वादा की गई भूमि दिलाना चाहता था।
कौंसल बनने के बाद सीज़र का पहला कदम सीनेट और जनसभाओं की कार्यवाही को सार्वजनिक कराना था, जिससे सीनेट की जनता के प्रति जवाबदेही बढ़े। इसके बाद उसने सीनेट में एक भूमि विधेयक प्रस्तुत किया। यह विधेयक पहले के भूमि सुधार प्रस्तावों की कमियों और अतिवादी प्रावधानों से बचते हुए तैयार किया गया था। इसके अनुसार इच्छुक विक्रेताओं से भूमि खरीदकर उसे पॉम्पे के पूर्व सैनिकों और शहरी निर्धनों में वितरित किया जाना था। इस योजना का संचालन बीस सदस्यों के एक आयोग द्वारा किया जाना था, जिसमें स्वयं सीज़र शामिल नहीं था तथा इसका वित्तपोषण पॉम्पे की विजयों से प्राप्त धन और नए अधिग्रहित क्षेत्रों की आय से किया जाना था। सीज़र ने यह विधेयक पहले सीनेट के समक्ष रखा, ताकि वह जनता के हित में इसका समर्थन करे। प्रारंभ में इसका विशेष विरोध नहीं हुआ, किंतु कैटो ने मुख्यतः सीज़र की राजनीतिक उन्नति का विरोध करने के उद्देश्य से इसका कड़ा प्रतिरोध किया। जब कैटो के लंबे भाषणों के कारण सीनेट में विधेयक पारित कराना संभव नहीं हुआ, तब सीज़र इसे सीधे जनसभा के समक्ष ले गया। वहाँ हुई सार्वजनिक सभा में तीखी झड़प हुई, जिसमें बिबुलस के फासेस टूट गए, जो उसके मजिस्ट्रेटीय अधिकार की सार्वजनिक अवमानना का प्रतीक था। अंततः विधेयक जनमत से पारित हो गया। बाद में बिबुलस ने सीनेट से यह आग्रह किया कि हिंसा के कारण इस कानून को अमान्य घोषित किया जाए, किंतु सीनेट ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
सीज़र ने क्रैसस के समर्थन में एशिया के कर-ठेकेदारों (टैक्स किसानों) के बकाया कर में एक-तिहाई की कटौती का प्रस्ताव रखा और उसे पारित कराया। साथ ही, उसने पॉम्पे द्वारा पूर्वी क्षेत्रों में किए गए प्रशासनिक प्रबंधों को भी विधिक स्वीकृति दिला दी। ये दोनों विधेयक सीनेट में बहुत कम या बिना किसी बहस के पारित हो गए। इसके बाद, संभवतः मई 59 ईसा पूर्व में जब बिबुलस सार्वजनिक जीवन से लगभग अलग हो चुके थे, सीज़र ने अपने भूमि-वितरण कानून का विस्तार कैंपानिया तक करने का प्रस्ताव रखा। शीघ्र ही पॉम्पे ने सीज़र की पुत्री जूलिया से विवाह करके इस राजनीतिक गठबंधन को पारिवारिक संबंध में भी बदल दिया।
सीज़र के सहयोगी प्लेबियन ट्रिब्यून पब्लियस वेटिनियस ने लेक्स वेटिनिया प्रस्तुत किया, जिसके द्वारा इलीरिकम और सिसाल्पाइन गॉल के प्रांत पाँच वर्षों के लिए सीज़र को सौंप दिए गए। सुएटोनियस का दावा है कि सीनेट ने प्रारंभ में सीज़र को केवल ‘वन और चरागाह’ जैसे महत्त्वहीन क्षेत्र देने का विचार किया था, किंतु अधिकांश आधुनिक इतिहासकार इसे अतिशयोक्ति मानते हैं। अधिक संभावना यही है कि सीज़र को इटली की उत्तरी सीमा की रक्षा के उद्देश्य से सिसाल्पाइन गॉल दिया गया था। इसके बाद सीनेट ने वार्षिक नवीकरण की शर्त पर ट्रांसाल्पाइन गॉल भी उसके अधिकार में दे दिया, संभवतः इसलिए कि आल्प्स के पार उसके सैन्य अभियानों पर कुछ नियंत्रण रखा जा सके।
इसी वर्ष बिबुलस ने अपने घर से आदेश जारी कर यह घोषित किया कि जिन दिनों सीज़र या उसके समर्थकों ने धार्मिक निषेधों की उपेक्षा कर मतदान कराया था, वे सभी अमान्य हैं। दूसरी ओर कैटो ने भी सीज़र के विरुद्ध प्रतीकात्मक विरोध जारी रखा, जिससे सीज़र और उसके सहयोगियों को स्वयं को राजनीतिक उत्पीड़न का शिकार बताने का अवसर मिला। इन विरोधों ने पूरे वर्ष सीज़र और उसके साथियों के लिए राजनीतिक कठिनाइयाँ उत्पन्न कीं और यह स्पष्ट किया कि उसका राजनीतिक प्रभुत्व उतना निर्विरोध नहीं था, जितना बाद के वर्णनों में दिखाई देता है। इसके बावजूद वर्ष के अंत में सीज़र ने, अपने विरोधियों के समर्थन से प्रांतीय भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए लेक्स जूलिया दे रेपेटुंडिस प्रस्तुत किया और उसे पारित कराया। कौंसल पद का कार्यकाल समाप्त होने पर सीज़र के कानूनों को दो नए प्रेटरों ने चुनौती देने का प्रयास किया, किंतु सीनेट में चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी और मामला वहीं समाप्त हो गया। सीज़र मार्च के मध्य तक रोम के निकट ही रहा।
गॉल में अभियान
58 ईसा पूर्व में गॉल राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा था। कुछ जनजातियाँ ट्रांसाल्पाइन गॉल पर दबाव बना रही थीं और मध्य गॉल में विभिन्न जनजातियों के बीच संघर्ष चल रहा था, जिनमें रोमन राजनीति और गठबंधनों का भी प्रभाव था। गॉल की जनजातियाँ एकजुट नहीं थीं और सीज़र ने आने वाले वर्षों में इसी विभाजन का लाभ उठाया। पहला बड़ा अभियान अप्रैल 58 ईसा पूर्व में हुआ, जब उसने पलायन कर रहे हेल्वेटी लोगों को रोमन क्षेत्र से आगे बढ़ने से रोक दिया। उसका तर्क था कि यदि वे आगे बढ़े, तो रोम के एक सहयोगी राज्य के लिए खतरा उत्पन्न हो जाएगा। जिनेवा के निकट एक विशाल दीवार बनाकर उसने उनके मार्ग को अवरुद्ध किया और दो नई सेनाएँ संगठित करने के बाद बिब्राक्टे के युद्ध में उन्हें पराजित कर उनके मूल निवास-स्थान लौटने के लिए विवश कर दिया।
इसके बाद एदुई सहित कई गैलिक जनजातियों के अनुरोध पर सीज़र ने सुएबी के राजा एरियोविस्टस के विरुद्ध अभियान चलाया। एरियोविस्टस को स्वयं सीज़र की कौंसलशिप के दौरान सीनेट ने रोम का मित्र घोषित किया था, किंतु बाद में सीज़र ने उसे वोज़ पर्वतों के युद्ध में पराजित कर दिया। 58–57 ईसा पूर्व की सर्दियाँ उसने उत्तर-पूर्वी गॉल में बेल्गे जनजातियों के निकट बिताईं। उसकी बढ़ती सैन्य उपस्थिति के कारण बेल्गे जनजातियों ने विद्रोह कर दिया, किंतु सीज़र ने साबिस के युद्ध में उन्हें पराजित कर दिया। 56 ईसा पूर्व का अधिकांश समय उसने बेल्गे को अधीन करने तथा अपनी सेनाओं को गॉल के विभिन्न भागों में भेजने में बिताया। इसी दौरान उसने वर्तमान ब्रिटनी के वेनेती लोगों के विरुद्ध भी अभियान चलाया। इस समय तक मध्य गॉल के कुछ भागों को छोड़कर लगभग पूरा गॉल रोमन नियंत्रण में आ चुका था।
अपनी सैन्य प्रतिष्ठा को और बढ़ाने के लिए सीज़र ने राइन नदी पार करने का निश्चय किया। उसने इंजीनियरिंग कौशल का परिचय देते हुए राइन पर एक विशाल पुल बनवाया, जिसका उद्देश्य रोमन शक्ति और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करना था। इसके बाद उसने 55 और 54 ईसा पूर्व में दक्षिणी ब्रिटेन पर दो अभियान चलाए। इन अभियानों का उद्देश्य संभवतः गैलिक जनजातियों को मिलने वाली ब्रिटिश सहायता रोकना, नई विजय प्राप्त करना तथा रोम में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाना था। उस समय ब्रिटेन रोमनों के लिए रहस्यमय और अद्भुत भूमि माना जाता था।
54 ईसा पूर्व के अंत में गॉल लौटने पर उसे एबुरोन्स और बेल्गे के नेतृत्व में व्यापक विद्रोह का सामना करना पड़ा। इस विद्रोह में एक रोमन सेना-दल, जिसमें एक लीजन और पाँच कोहोर्ट थीं, घात लगाकर लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। इसके बावजूद सीज़र ने विद्रोहियों को कठिन भूभाग से बाहर निकालकर निर्णायक युद्ध में पराजित कर दिया। अगले वर्ष एवर्नी के नेता वेरसिंगेटोरिक्स के नेतृत्व में मध्य गॉल के अधिकांश भाग में एक और बड़ा विद्रोह हुआ। प्रारंभ में सीज़र गेर्गोविया में पराजित हुआ, किंतु बाद में उसने अलेसिया में वेरसिंगेटोरिक्स को घेर लिया, जिसके परिणामस्वरूप वेरसिंगेटोरिक्स को आत्मसमर्पण करना पड़ा। इसके बाद 51 ईसा पूर्व तक सीज़र ने गॉल में शेष सभी प्रतिरोधों का दमन कर रोमन शासन स्थापित कर दिया।

गॉल की विजय का महत्त्व
गॉल की विजय ने रोम और यूरोप दोनों के इतिहास को गहराई से प्रभावित किया। इस विजय से रोम को इटली से भी बड़े क्षेत्र पर अधिकार प्राप्त हुआ। लाखों नए निवासी और विशाल आर्थिक संसाधन रोमन साम्राज्य का हिस्सा बन गए। रोमन व्यापार का विस्तार हुआ और रोम की शक्ति में अत्यधिक वृद्धि हुई।
गॉल की विजय से रोमन भाषा, कानून, प्रशासन और सभ्यता का पश्चिमी यूरोप में प्रसार हुआ। अगले लगभग तीन शताब्दियों तक गॉल रोमन साम्राज्य का अभिन्न अंग बना रहा। इसी प्रक्रिया ने आगे चलकर फ्रांस और पश्चिमी यूरोप की सांस्कृतिक पहचान के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गॉल अभियान के दौरान रोमन राजनीति
59 ईसा पूर्व में सीज़र की कौंसलशिप समाप्त होने के बाद के प्रारंभिक वर्षों में तथाकथित प्रथम ट्रायम्विरेट के तीनों नेताओं ने अत्यंत लोकप्रिय पब्लियस क्लोडियस पुल्खर का समर्थन बनाए रखने का प्रयास किया। 58 ईसा पूर्व में क्लोडियस प्लेबियन ट्रिब्यून चुना गया और उसी वर्ष उसने सिसरो को सफलतापूर्वक निर्वासन भेज दिया। किंतु बाद में उसी वर्ष क्लोडियस ने पॉम्पे के विरुद्ध रुख अपना लिया। उसने पॉम्पे की पूर्वी व्यवस्थाओं को चुनौती दी, सीज़र के कौंसलकालीन कानूनों की वैधता पर प्रश्न उठाने शुरू किए और 58 ईसा पूर्व के अगस्त तक पॉम्पे को राजनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया। इसके उत्तर में सीज़र और पॉम्पे ने उन मजिस्ट्रेटों के चुनाव का समर्थन किया जिन्होंने सिसरो की निर्वासन से वापसी सुनिश्चित की, इस शर्त पर कि सिसरो उनके गठबंधन की आलोचना या उसके कार्यों में बाधा नहीं डालेगा।
रोम की राजनीति धीरे-धीरे क्लोडियस और सिसरो के समर्थकों के बीच हिंसक सड़क संघर्षों में बदल गई। अब जब सिसरो सीज़र और पॉम्पे के पक्ष में था, तब सीज़र ने गॉल से रोम समाचार भेजे, जिनमें उसने पूर्ण विजय और शांति स्थापित होने का दावा किया। सिसरो के प्रस्ताव पर सीनेट ने सीज़र के सम्मान में अभूतपूर्व पंद्रह दिनों का धन्यवाद-उत्सव घोषित किया। सीज़र के लिए इस प्रकार की रिपोर्टें अत्यंत महत्त्वपूर्ण थीं, क्योंकि उसके सीनेटीय विरोधी ट्रांसाल्पाइन गॉल में उसकी कमान का नवीनीकरण रोकना चाहते थे, जबकि सिसाल्पाइन गॉल और इलीरिकम पर उसका अधिकार लेक्स वेटिनिया के अंतर्गत 54 ईसा पूर्व तक सुरक्षित था। उसकी सफलताओं को और भी स्पष्ट मान्यता तब मिली, जब सीनेट ने उसकी कुछ सेनाओं के वेतन के लिए पहली बार राजकोष से धन स्वीकृत किया, जिसका व्यय अब तक स्वयं सीज़र करता आया था।
57 ईसा पूर्व तक तीनों सहयोगियों के संबंधों में तनाव उत्पन्न हो गया। पॉम्पे के एक समर्थक ने सीज़र के भूमि-वितरण कानून को चुनौती दी और उस वर्ष के चुनावों में भी गठबंधन का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। 56 ईसा पूर्व में सीज़र की प्रांतीय कमान वास्तविक संकट में पड़ गई और उसके विरोधी कौंसलों के कारण उसके अधिकारों पर खतरा उत्पन्न हो गया। ऐसी स्थिति में उसे अपने सहयोगियों के राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता थी। लूका सम्मेलन के बाद यह निर्णय लिया गया कि 55 ईसा पूर्व में पॉम्पे और क्रैसस पुनः कौंसल बनेंगे तथा उनके कार्यकाल के बाद उन्हें क्रमशः हिस्पानिया और सीरिया के प्रांत प्राप्त होंगे। बदले में सीज़र की गॉल में कमान को पाँच वर्ष के लिए और बढ़ा दिया जाएगा।
सिसरो को सीज़र के प्रांतों के कार्यकाल-विस्तार का विरोध करने तथा उसके अनेक सहयोगी राज्यों के हितों का समर्थन करने के लिए प्रेरित किया गया। उसने लंबे समय तक इस त्रिगुट के पतन की भविष्यवाणी की, किंतु 55 ईसा पूर्व के कौंसल चुनाव में अंततः पॉम्पे और क्रैसस रिश्वत, दबाव, धमकी और हिंसा जैसी राजनीतिक रणनीतियों के सहारे विजयी हुए। अपने कौंसलकाल में उन्होंने कुछ ट्रिब्यूनों के समर्थन से लेक्स पोम्पेया लिसिनिया पारित कराया, जिसके द्वारा सीज़र की गॉल में कमान पाँच वर्ष के लिए बढ़ा दी गई। साथ ही लेक्स ट्रेबोनिया के माध्यम से पॉम्पे और क्रैसस को क्रमशः हिस्पानिया और सीरिया की प्रांतीय कमानें प्रदान की गईं। यद्यपि पॉम्पे कभी अपने प्रांत में नहीं गया और रोम में रहकर सक्रिय राजनीति करता रहा। इसके बाद भी विपक्ष उनके कठोर राजनीतिक तरीकों के विरुद्ध संगठित रहा, यद्यपि उसने गॉल में सीज़र के सैन्य अभियानों का विशेष विरोध नहीं किया। उसी वर्ष हुए चुनावों में भी विपक्ष ने गठबंधन के उम्मीदवारों के विरुद्ध प्रभावी चुनौती प्रस्तुत की।
55–54 ईसा पूर्व की सर्दियों में गॉल में एक रोमन सेना और पाँच कोहोर्टों पर हुए घातक आक्रमण तथा उनके विनाश ने रोम में सीज़र की कमान और उसकी क्षमता को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर दीं। लगभग अगस्त 54 ईसा पूर्व के अंत में सीज़र की पुत्री और पॉम्पे की पत्नी जूलिया की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई, किंतु इससे तत्काल सीज़र और पॉम्पे के संबंधों में कोई स्पष्ट दरार नहीं आई। 53 ईसा पूर्व की शुरुआत में सीज़र ने गैलिक विद्रोहियों के विरुद्ध अभियान चलाने के लिए नई भर्ती की तथा पॉम्पे के साथ निजी समझौते के माध्यम से अतिरिक्त सैनिक प्राप्त किए। इसके बाद उसने गॉल में विद्रोहों को दबाने के लिए दो वर्षों तक व्यापक अभियान चलाया। उसी वर्ष क्रैसस का पार्थिया अभियान कर्रहे के युद्ध में विनाशकारी रूप से समाप्त हुआ। 52 ईसा पूर्व में रोम में व्यवस्था बहाल करने के लिए पॉम्पे को एकमात्र कौंसल (Sole Consul) नियुक्त किया गया, जबकि सीज़र गॉल में विद्रोहों का दमन करने में लगा रहा। अलेसिया में उसकी विजय के बाद पॉम्पे के समर्थन से सीनेट ने उसके सम्मान में बीस दिनों का धन्यवाद-उत्सव घोषित किया तथा दस ट्रिब्यूनों के कानून के अनुसार उसे अनुपस्थिति में ही कौंसल पद के लिए उम्मीदवार बनने का अधिकार प्रदान किया।
गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि
52 से 49 ईसा पूर्व के बीच सीज़र और पॉम्पे के बीच विश्वास लगातार कम होता गया। 51 ईसा पूर्व में कौंसल मार्सेलस ने यह तर्क देते हुए सीज़र को वापस बुलाने का प्रस्ताव रखा कि गॉल में उसका प्रोविन्सिया (दायित्व) 52 ईसा पूर्व में वेरसिंगेटोरिक्स की पराजय के साथ पूरा हो चुका है। वास्तव में यह दावा सही नहीं था, क्योंकि उस समय सीज़र अभी भी बेलोवासी जनजाति के विरुद्ध अभियान चला रहा था। अंततः इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया गया। उसी वर्ष सीनेट में कैटो के नेतृत्व वाले रूढ़िवादी समूह ने पॉम्पे को अपने पक्ष में लाने का प्रयास किया, ताकि सीज़र को बिना विजय-उत्सव और बिना दूसरी कौंसलशिप के गॉल से वापस लौटने के लिए विवश किया जा सके। अंततः कैटो, बिबुलस और उनके सहयोगी पॉम्पे को सीज़र की निरंतर कमान का विरोध करने के लिए राज़ी करने में सफल रहे।
जैसे-जैसे 50 ईसा पूर्व आगे बढ़ा, गृहयुद्ध की आशंका बढ़ती गई। सीज़र और उसके विरोधियों ने क्रमशः दक्षिणी गॉल और उत्तरी इटली में अपनी-अपनी सेनाएँ एकत्र करनी शुरू कर दीं। उसी वर्ष शरद ऋतु में सिसरो और अन्य नेताओं ने प्रस्ताव रखा कि सीज़र और पॉम्पे दोनों अपनी-अपनी सेनाएँ भंग कर दें। 1 दिसंबर 50 ईसा पूर्व को यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से सीनेट में प्रस्तुत किया गया और 370 के मुकाबले 22 मतों से इसे व्यापक समर्थन मिला, किंतु एक कौंसल द्वारा सभा स्थगित कर दिए जाने के कारण यह पारित नहीं हो सका। उसी वर्ष रोम में यह अफवाह फैल गई कि सीज़र इटली पर चढ़ाई करने वाला है। इसके बाद दोनों कौंसलों ने पॉम्पे को इटली की रक्षा का दायित्व सौंपा, जिसे उसने अंतिम उपाय के रूप में स्वीकार किया।
49 ईसा पूर्व की शुरुआत में सीज़र का नया प्रस्ताव, जिसमें उसने स्वयं और पॉम्पे दोनों के एक साथ शस्त्र त्यागने की बात कही थी, सीनेट में पढ़ा गया, किंतु कट्टरपंथी गुट ने उसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद पॉम्पे को निजी रूप से भेजा गया एक समझौता-प्रस्ताव भी उसके आग्रह पर ठुकरा दिया गया। 7 जनवरी 49 ईसा पूर्व को सीज़र के समर्थक ट्रिब्यूनों को रोम छोड़ने पर विवश कर दिया गया। इसके बाद सीनेट ने सीज़र को राज्य का शत्रु घोषित कर दिया और उसके विरुद्ध ‘सीनेट का अंतिम आदेश’ (सेनाटुस कंसल्टुम अल्टिमुम) जारी कर दिया।
सीज़र द्वारा रोम की ओर कूच करने के कारणों को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। एक प्रचलित मत के अनुसार यदि वह अपनी प्रोकौंसल अवधि समाप्त होने पर रोम लौटता, तो उसकी न्यायिक प्रतिरक्षा समाप्त हो जाती और उसे अभियोजन, दोषसिद्धि तथा निर्वासन का सामना करना पड़ सकता था; इसलिए उसने गृहयुद्ध का मार्ग चुना। किंतु इस बात पर विवाद है कि वास्तव में उसके विरुद्ध सफल अभियोजन संभव था या नहीं। अनेक इतिहासकारों का मत है कि उसके दोषी सिद्ध होने की संभावना बहुत कम थी। सीज़र का मुख्य उद्देश्य दूसरी बार कौंसल बनना और विजय-उत्सव (ट्रायम्फ) प्राप्त करना था। उसे आशंका थी कि उसके राजनीतिक विरोधी, जो 50 ईसा पूर्व से कौंसल पद पर प्रभावी थे, उसकी उम्मीदवारी अस्वीकार कर देंगे या उसके निर्वाचन को मान्यता नहीं देंगे। यही तर्क उसने अपने युद्ध को उचित ठहराने के लिए भी प्रस्तुत किया। उसके अनुसार पॉम्पे और उसके सहयोगी आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग करके, जिसका संकेत ट्रिब्यूनों को रोम से निष्कासित किए जाने से मिलता है, रोमन जनता के उस अधिकार को दबाना चाहते थे, जिसके अंतर्गत वे सीज़र को चुन सकते थे और उसकी उपलब्धियों का सम्मान कर सकते थे।
गृहयुद्ध का आरंभ
लगभग 10 या 11 जनवरी 49 ईसा पूर्व को सीनेट के ‘अंतिम आदेश’ (सेनाटुस कंसल्टुम अल्टिमुम) के उत्तर में सीज़र ने रूबिकॉन नदी को अपनी एकमात्र सेना लेगियो XIII जेमिना के साथ पार किया और इस प्रकार रोमन गृहयुद्ध का आरंभ हुआ। प्लूटार्क और सुएटोनियस के अनुसार रूबिकॉन पार करते समय सीज़र ने यूनानी भाषा में मेनांडर के एक कथन का उल्लेख किया, जिसका प्रसिद्ध लैटिन रूप ‘आलेआ इआक्टा एस्ट’ (पासा फेंका जा चुका है) के रूप में जाना जाता है। पॉम्पे और अनेक सीनेटर यह मानकर दक्षिण की ओर चले गए कि सीज़र सीधे रोम की ओर बढ़ रहा है। रोम जाने वाले मार्गों पर अधिकार करने के बाद सीज़र ने पहले वार्ता का प्रयास किया, किंतु आपसी अविश्वास के कारण बातचीत सफल नहीं हो सकी। इसके बाद वह पॉम्पे का पीछा करते हुए दक्षिण की ओर बढ़ा, ताकि उसे समझौते के लिए विवश किया जा सके।
पॉम्पे ब्रुंडिसियम पहुँच गया और सीज़र के पहुँचने से पहले ही इटली छोड़कर ग्रीस भागने में सफल हो गया। उसके पास अधिक शक्तिशाली सेना थी और वह सीज़र की पकड़ से बच निकला। सीज़र लगभग दो सप्ताह तक रोम के निकट रुका रहा। इसी दौरान उसने ट्रिब्यूनों के वीटो के बावजूद राजकोष से धन अपने अधिकार में ले लिया, जिससे उसके समर्थकों द्वारा प्रस्तुत युद्ध के औचित्य पर प्रश्न उठे। इसके बाद उसने लेपिडस को इटली का प्रभारी नियुक्त किया और स्वयं पॉम्पे के स्पेनी प्रांतों पर चढ़ाई कर दी। इलेरडा के युद्ध में उसने पॉम्पे के दो प्रमुख सेनापतियों को पराजित किया और अंततः उन्हें आत्मसमर्पण के लिए विवश कर दिया। इस बीच पॉम्पे के अन्य समर्थक सिसिली और अफ्रीका चले गए, यद्यपि अफ्रीका में उनका अभियान सफल नहीं हुआ। शरद ऋतु में रोम लौटकर सीज़र ने लेपिडस, जो उस समय प्रेटर था, के माध्यम से स्वयं को तानाशाह (डिक्टेटर) नियुक्त कराने वाला कानून पारित कराया। इसके बाद हुए चुनाव में वह पब्लियस सर्विलियस इसौरिकस के साथ 48 ईसा पूर्व के लिए कौंसल निर्वाचित हुआ। मात्र ग्यारह दिन बाद उसने तानाशाह का पद छोड़ दिया और पॉम्पे की तैयारियों को रोकने के लिए ग्रीस रवाना हो गया, जहाँ वह 48 ईसा पूर्व के प्रारंभ में अपनी पूरी सेना के साथ पहुँचा।
सीज़र ने डिर्राकियम में पॉम्पे को घेर लिया, किंतु पॉम्पे वहाँ से निकल भागने में सफल रहा और उसने सीज़र की सेना को पीछे हटने पर विवश कर दिया। इसके बाद सीज़र ने उसका पीछा करते हुए दक्षिण-पूर्वी ग्रीस की ओर प्रस्थान किया और 9 अगस्त 48 ईसा पूर्व को फार्सलस के युद्ध में पॉम्पे को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया। पराजय के बाद पॉम्पे मिस्र भाग गया, जबकि कैटो अफ्रीका चला गया। दूसरी ओर सिसरो, मार्कस जूनियस ब्रूटस तथा अन्य अनेक नेताओं ने सीज़र से क्षमा माँग ली।
एलेक्जेंड्रिया का युद्ध और एशिया माइनर
पोम्पे की मिस्र की राजधानी एलेक्जेंड्रिया पहुँचने पर हत्या कर दी गई। सीज़र 2 अक्टूबर 48 ईसा पूर्व को तीन दिन बाद, वहाँ पहुँचा। एटेशियन हवाओं के कारण वह तुरंत मिस्र छोड़ नहीं सका। इस बीच उसने बाल-राजा टॉलेमी तेरहवें और उसकी बहन, पत्नी तथा सह-शासिका क्लियोपेट्रा के बीच चल रहे मिस्र के गृहयुद्ध में मध्यस्थता करने का निर्णय लिया। अक्टूबर 48 ईसा पूर्व के अंत में उसकी अनुपस्थिति में उसे एक वर्ष के लिए पुनः तानाशाह नियुक्त किया गया, जब फार्सलस में उसकी विजय का समाचार रोम पहुँच चुका था।
एलेक्जेंड्रिया में रहते हुए सीज़र का क्लियोपेट्रा के साथ संबंध स्थापित हुआ। मार्च 47 ईसा पूर्व तक उसे टॉलेमी तेरहवें तथा उसकी दूसरी बहन आर्सिनोए की सेनाओं द्वारा घेराबंदी का सामना करना पड़ा। बाद में पर्गामुम के मिथ्रिडेट्स के नेतृत्व में पूर्वी सहयोगी शासकों की सहायता मिलने पर सीज़र ने नील नदी के युद्ध में टॉलेमी को पराजित किया और क्लियोपेट्रा को मिस्र की शासिका बना दिया। विजय के बाद सीज़र और क्लियोपेट्रा ने नील नदी पर विजयोत्सव मनाया। सीज़र उसी वर्ष जून या जुलाई तक मिस्र में रहा। जून 47 ईसा पूर्व के अंत के आसपास क्लियोपेट्रा ने सीज़र के पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम सीज़ेरियन रखा गया।
जब सीज़र एंटिओक पहुँचा, तब उसे ज्ञात हुआ कि उसके मिस्र में रहने के दौरान पोंटस के शासक फार्नाकेस द्वितीय ने उत्तरी अनातोलिया में अपने पिता के राज्य को पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया था। उसके आक्रमण से सीज़र के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय सहयोगी राजाओं को पराजय का सामना करना पड़ा था। सीज़र ने तत्काल ज़ेला के युद्ध में फार्नाकेस का सामना किया और उसे शीघ्र ही पराजित कर दिया। इसी विजय के बाद उसने अपना प्रसिद्ध संदेश भेजा—‘वेनी, वीदी, वीची” (मैं आया, मैंने देखा, मैंने विजय प्राप्त की)। इसके बाद वह शीघ्र ही इटली लौट गया।

कानून-व्यवस्था की स्थापना और गृहयुद्ध का अंत
सीज़र की इटली से अनुपस्थिति के दौरान मार्क ऐंटनी ने मैजिस्टर इक्विटम के रूप में शासन की जिम्मेदारी सँभाली। उसका प्रशासन अलोकप्रिय सिद्ध हुआ। 47 ईसा पूर्व में प्लेबियन ट्रिब्यून पब्लियस कॉर्नेलियस डोलाबेला ने ऋण-राहत के लिए आंदोलन शुरू किया। जब यह आंदोलन नियंत्रण से बाहर हो गया, तब सीनेट ने व्यवस्था बहाल करने का दायित्व ऐंटनी को सौंपा। दक्षिणी इटली में विद्रोह के कारण विलंब होने के बाद ऐंटनी रोम लौटा और उसने बलपूर्वक दंगों का दमन किया, जिसमें अनेक लोग मारे गए। इस घटना से उसकी लोकप्रियता को भी गंभीर आघात पहुँचा। इस बीच कैटो अफ़्रीका चला गया था, जहाँ मेटेलस स्किपियो शेष रिपब्लिकन दल का नेतृत्व कर रहा था। उसने न्यूमिडिया के राजा जूबा प्रथम के साथ गठबंधन कर लिया। उधर, पूर्व पॉम्पेयन नौसेना ने मध्य भूमध्यसागर के द्वीपों पर छापे मारने शुरू कर दिए। साथ ही, स्पेन में सीज़र का गवर्नर इतना अलोकप्रिय हो गया कि वहाँ भी विद्रोह हो गया और प्रांत रिपब्लिकन पक्ष में चला गया।
इटली लौटने पर सीज़र ने ऐंटनी को पद से हटा दिया और 47 ईसा पूर्व के मजिस्ट्रेटों के चुनाव की देखरेख करने से पहले बिना अधिक हिंसा के विद्रोहियों को शांत किया। उसने युद्ध के लिए धन जुटाने हेतु ऋण लिया और अपने विरोधियों की संपत्तियाँ जब्त कर उन्हें उचित मूल्य पर बेच दिया। इसके बाद 25 दिसंबर 47 ईसा पूर्व को वह अफ़्रीका के लिए रवाना हुआ। अफ़्रीका में उतरने के समय उसे रसद संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। 4 जनवरी 46 ईसा पूर्व को रुस्पीना के निकट उसका सामना टाइटस लेबिएनस से हुआ और पराजय का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उसने अत्यंत सावधानी से अभियान चलाया। कुछ रिपब्लिकन सैनिकों को अपनी ओर मिलाने के बाद उसने थैप्सस के युद्ध में निर्णायक विजय प्राप्त की। 6 अप्रैल 46 ईसा पूर्व को हुए इस युद्ध में उसकी सेना ने समय से पहले आक्रमण कर दिया, किंतु अंततः रिपब्लिकन सेना पर पूर्ण विजय प्राप्त की और पीछे हटती शत्रु सेना का व्यापक संहार किया। इसके बाद सीज़र यूटिका पहुँचा, जहाँ उसे ज्ञात हुआ कि कैटो ने उसकी क्षमा स्वीकार करने के बजाय आत्महत्या कर ली थी। मेटेलस स्किपियो, जूबा प्रथम तथा अन्य प्रमुख रिपब्लिकन नेताओं ने भी शीघ्र ही आत्महत्या कर ली। लेबिएनस और पॉम्पे के दो पुत्र स्पेन भाग गए, जहाँ उन्होंने पुनः विद्रोह संगठित किया। सीज़र ने न्यूमिडिया के कुछ भागों को रोमन राज्य में मिला लिया और जून 46 ईसा पूर्व में सार्डिनिया होते हुए इटली लौट आया।
सीज़र सितंबर 46 ईसा पूर्व के अंत में चार विजयों का उत्सव मनाने के लिए इटली में रुका। ये विजय क्रमशः गॉल, मिस्र, फार्नाकेस द्वितीय (पोंटस) और जूबा प्रथम (अफ़्रीका) पर प्राप्त सफलताओं के प्रतीक थीं। विजय-यात्रा में उसने क्लियोपेट्रा की छोटी बहन आर्सिनोए तथा वेरसिंगेटोरिक्स को अपने रथ के आगे चलवाया। बाद में वेरसिंगेटोरिक्स को मृत्युदंड दे दिया गया। एपियन के अनुसार इन विजय-उत्सवों में सीज़र ने गृहयुद्ध में साथी रोमनों पर अपनी जीत के चित्र और प्रतिरूप भी प्रदर्शित किए, जिससे अनेक लोग अप्रसन्न हुए। प्रत्येक सैनिक को 24,000 सेस्टर्स का पुरस्कार दिया गया, जो लगभग जीवनभर के वेतन के बराबर था। सामान्य जनता के लिए भी भव्य खेलों और उत्सवों का आयोजन किया गया। वर्ष के अंत में स्पेन से विद्रोह का समाचार मिलने पर सीज़र एक नई सेना के साथ वहाँ रवाना हुआ और लेपिडस को मैजिस्टर इक्विटम के रूप में रोम का दायित्व सौंप दिया।
17 मार्च 45 ईसा पूर्व को मुंडा के युद्ध में एक अत्यंत भीषण संघर्ष के बाद सीज़र को कठिन विजय प्राप्त हुई। उसके विरोधियों को विद्रोही घोषित किया गया और उनका व्यापक संहार किया गया। टाइटस लेबिएनस युद्धभूमि में ही मारा गया। यद्यपि सेक्स्टस पॉम्पियस बच निकलने में सफल रहा, फिर भी इस युद्ध के साथ गृहयुद्ध वस्तुतः समाप्त हो गया। सीज़र जून 45 ईसा पूर्व तक स्पेन में रहा और फिर रोम लौट गया, जहाँ वह उसी वर्ष अक्टूबर में पहुँचा। वहाँ उसने अपने ही रोमन विरोधियों पर विजय का एक असामान्य विजय-उत्सव मनाया।
आजीवन तानाशाह और सम्मान
फ़रवरी 44 ईसा पूर्व में सीज़र ने ‘आजीवन तानाशाह’ (डिक्टेटर पेर्पेतुओ) की उपाधि ग्रहण की। इससे पहले 49 ईसा पूर्व में अपनी पहली तानाशाही के बाद उन्हें लगभग चार बार तानाशाह नियुक्त किया गया था। रोम पर अधिकार करने के बाद उसकी पहली तानाशाही का मुख्य उद्देश्य चुनाव कराना था; उसने 11 दिनों बाद ही पद छोड़ दिया। इसके बाद उसकी अन्य तानाशाहियाँ अधिक समय तक चलीं और अप्रैल 46 ईसा पूर्व तक उसे प्रतिवर्ष नई तानाशाही प्रदान की जाती रही। उसे जो अधिकार और सम्मान दिए गए, वे मुख्यतः राज्य में उसकी सर्वोच्च स्थिति को प्रदर्शित करते थे। साहित्यिक स्रोतों के अनुसार उसकी वास्तविक शक्ति किसी असाधारण संवैधानिक पद से अधिक, अन्य रोमन नेताओं पर विजेता के रूप में उसकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर आधारित थी।
फ़ार्सालस की विजय के बाद सीनेट ने सीज़र को अनेक सम्मान प्रदान किए, जिनमें ‘प्रेफेक्टुस मोरिबुस’ की उपाधि भी शामिल थी, जो परंपरागत रूप से सेंसर के उन अधिकारों से संबंधित थी, जिनके द्वारा सीनेट की सदस्य-सूची का पुनरीक्षण किया जाता था। उसे युद्ध और शांति संबंधी निर्णयों का अधिकार भी प्रदान किया गया, जो सामान्यतः कोमितिया सेंचुरियाता के अधिकार-क्षेत्र में आता था। ये अधिकार व्यक्तिगत रूप से सीज़र से जुड़े हुए थे। उसे अनेक प्रतीकात्मक सम्मान भी दिए गए। रोमन पंचांग के क्विंटिलिस महीने, जिसमें उनका जन्म हुआ था, का नाम बदलकर जूलियस (वर्तमान जुलाई) कर दिया गया। इन सम्मानों में राजसत्तात्मक प्रतीकों की झलक दिखाई देती थी और आगे चलकर यही असंतोष का एक कारण भी बने।
राज्य के सामान्य कार्य—न्याय, कानून, प्रशासन तथा सार्वजनिक निर्माण—के निर्णय अब मुख्यतः सीज़र के हाथों में केंद्रित हो गए थे। वह रोमन गणराज्य की पारंपरिक संस्थाओं की परवाह किए बिना अथवा उन्हें सीमित करते हुए शासन चलाने लगा। सार्वजनिक मामलों पर उसका बढ़ता नियंत्रण और अन्य नेताओं की भूमिका को सीमित करने की प्रवृत्ति ने राजनीतिक अभिजात वर्ग को उनसे दूर कर दिया और अंततः उसके विरुद्ध षड्यंत्र का मार्ग प्रशस्त किया।
राजनीतिक एवं प्रशासनिक कार्य
उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट नहीं होता कि सीज़र का उद्देश्य रोमन समाज की मूल संरचना को पूरी तरह बदलना था। अर्न्स्ट बैडियन ने लिखा है कि यद्यपि सीज़र ने अनेक सुधार किए, फिर भी उसने गणतांत्रिक व्यवस्था की मूल संरचना को नहीं बदला। उसके अनुसार सीज़र के पास ‘मौलिक सामाजिक अथवा संवैधानिक परिवर्तन की कोई व्यापक योजना नहीं थी’ और उसे प्राप्त विशेष सम्मान पारंपरिक गणतांत्रिक ढाँचे पर आरोपित प्रतीत होते हैं।
सीज़र के सुधारों में सबसे महत्त्वपूर्ण सुधार पंचांग का था। उसने परंपरागत रोमन चंद्र-सौर पंचांग को समाप्त कर उसकी जगह जूलियन पंचांग लागू किया। प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने और अपने समर्थकों को पद प्रदान करने के उद्देश्य से उसने सीनेट के सदस्यों की संख्या 600 से बढ़ाकर 900 कर दी। इटली के बाहर भी अनेक उपनिवेश स्थापित किए गए, विशेषकर कार्थेज और कोरिंथ के स्थान पर, जिन्हें दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में रोम ने नष्ट कर दिया था। इसका उद्देश्य इटली की जनसंख्या का एक भाग प्रांतों में बसाना तथा सामाजिक तनाव को कम करना था। उसने नए पैट्रिशियन नियुक्त करने का अधिकार पुनः आरंभ किया तथा स्थायी न्यायालयों की जूरी व्यवस्था में परिवर्तन करते हुए ट्रिब्यूनी एरारी को हटाकर केवल अश्वारोही और सीनेटर वर्ग को ही रखा।
सीज़र ने शासन को अधिक स्थिर बनाने के लिए कई प्रशासनिक सुधार भी किए। पात्रता की शर्तें कड़ी करके उन्होंने अनाज पाने वालों की संख्या लगभग 3,20,000 से घटाकर लगभग 1,50,000 कर दी। जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक बच्चों वाले परिवारों को विशेष प्रोत्साहन दिए गए। उसने जनगणना कराने की योजना बनाई तथा सिसाल्पाइन गॉल और कैडिज़ की अनेक बस्तियों को रोमन नागरिकता प्रदान की। गृहयुद्ध के दौरान उने ऋण-भुगतान की नई व्यवस्था लागू की। ऋण माफ़ नहीं किए गए, किंतु उनका भुगतान संपत्ति के रूप में किया जा सकता था। एक निश्चित सीमा तक किराया भी माफ़ किया गया तथा जनता के लिए अन्न-वितरण और सार्वजनिक खेलों का आयोजन कराया गया। गृहयुद्ध के दौरान उसने अपने अनेक विरोधियों को क्षमा कर दिया। उसकी इस क्लेमेंशिया (दया) का उसके प्रचार और सार्वजनिक स्मारकों में विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जिससे उसे सुल्ला की प्रतिशोधात्मक तानाशाही से भिन्न सिद्ध किया जा सके।
स्पेन अभियान से पहले आरंभ की गई निर्माण योजनाएँ आगे भी जारी रहीं। उसने सीज़र फ़ोरम तथा वहाँ वीनस जेनेट्रिक्स के मंदिर का निर्माण कराया। इसके अतिरिक्त, ओस्टिया के बंदरगाह का विस्तार तथा कोरिंथ की स्थलडमरूमध्य (में नहर निर्माण जैसी सार्वजनिक योजनाएँ भी प्रस्तावित की गईं। किंतु इन कार्यों में अत्यधिक व्यस्त रहने और सीनेट, मजिस्ट्रेटों तथा मिलने आने वाले लोगों की उपेक्षा करने के कारण रोम के अनेक प्रभावशाली व्यक्ति उनसे विमुख हो गए।
कॉलेजिया (नागरिक संघ), जिसे 58 ईसा पूर्व में क्लोडियस ने पुनः स्थापित किया था, सीज़र ने फिर से समाप्त कर दिया। अपने समर्थकों को पुरस्कृत करने के लिए उसने अपने अधीनस्थों को नियमों के विरुद्ध विजय-जुलूस निकालने की अनुमति दी तथा स्वयं कौंसल पद से त्यागपत्र देकर वर्ष के शेष भाग के लिए अपने सहयोगियों को उस पद पर नियुक्त कराया। 45 ईसा पूर्व के अंतिम दिनों में जब एक कौंसल की मृत्यु हो गई, तब सीज़र ने अपने एक समर्थक को केवल एक दिन के लिए उसका उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया। अपने समर्थकों का समर्थन बनाए रखने के लिए उसने उनके भ्रष्टाचार की भी अनदेखी की तथा कई अवसरों पर अपने व्ययों की पूर्ति के लिए प्रांतीय नगरों और आश्रित राज्यों से धन एकत्र किया।
षड्यंत्र और हत्या (15 मार्च 44 ईसा पूर्व)
जनवरी 44 ईसा पूर्व में जब कुछ लोगों ने सीज़र को रेक्स (राजा) कहकर संबोधित करने का प्रयास किया, तो दो ट्रिब्यूनों ने इसका सार्वजनिक रूप से विरोध किया। सीज़र ने इसे अपना अपमान मानते हुए दोनों ट्रिब्यूनों को पद से हटवा दिया और सीनेट से निष्कासित करा दिया। इससे जनता में असंतोष फैल गया, क्योंकि रोमन लोग ट्रिब्यूनों को अपनी स्वतंत्रता का रक्षक मानते थे। इसके कुछ समय बाद, 15 फ़रवरी 44 ईसा पूर्व के बाद सीज़र ने आजीवन तानाशाह (डिक्तातोर पेर्पेतुओ) की उपाधि ग्रहण कर ली। इससे यह स्पष्ट हो गया कि उसकी असाधारण शक्तियाँ अस्थायी नहीं रहीं और स्वतंत्र गणराज्य की पुनर्स्थापना की संभावना लगभग समाप्त हो गई। लुपरकालिया उत्सव में मार्क एंटनी द्वारा प्रस्तुत राजमुकुट (डायडेम) को सीज़र ने सार्वजनिक रूप से अस्वीकार कर दिया, किंतु इससे यह आशंका दूर नहीं हुई कि वह अंततः राजसत्ता स्थापित करना चाहता था। इसी बीच 45 ईसा पूर्व की गर्मियों से उसके विरुद्ध षड्यंत्र आकार लेने लगा और फ़रवरी 44 ईसा पूर्व तक लगभग साठ षड्यंत्रकारी इसमें शामिल हो चुके थे। इनमें अधिकांश पूर्व पोम्पेयन थे, किंतु अनेक सीज़ेरियन भी सम्मिलित थे। षड्यंत्र के प्रमुख नेताओं में गायस ट्रेबोनियस, डेसीमस ब्रूटस, मार्कस जूनियस ब्रूटस, गायस कैसियस लॉन्गिनस, सर्वियस सुल्पिसियस गाल्बा, लुसियस मिनुसियस बेसिलुस, लुसियस टिलियस सिंबर तथा गायस सर्विलियस कास्का प्रमुख थे। अनेक षड्यंत्रकारी सीज़र द्वारा पहले से घोषित कौंसल नियुक्तियों तथा सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण से असंतुष्ट थे। जनता में भी उसकी ऋण-नीति, अनाज-भत्ते में कटौती, स्वतंत्र चुनावों के अंत तथा अन्य निर्णयों के कारण असंतोष बढ़ रहा था, जबकि ब्रूटस जैसे नेताओं को गणतंत्रीय आदर्शों और अत्याचार-विरोधी परंपरा से प्रेरणा मिल रही थी।
यद्यपि षड्यंत्र की कुछ सूचनाएँ सीज़र तक पहुँच गई थीं, फिर भी उसने कोई विशेष सावधानी नहीं बरती और अंगरक्षकों के साथ जाने से भी इनकार कर दिया। षड्यंत्रकारियों ने हत्या के लिए 15 मार्च 44 ईसा पूर्व (आइड्स ऑफ़ मार्च) का दिन चुना, क्योंकि यह उसके पार्थियन अभियान पर प्रस्थान से पहले होने वाली अंतिम सीनेट बैठक थी। उन्होंने सीनेट भवन को इसलिए चुना ताकि हत्या राजनीतिक कार्रवाई के रूप में दिखाई दे और वहाँ केवल षड्यंत्रकारी ही हथियारबंद हों। 15 मार्च को सीज़र पोम्पी की क्यूरिया में आयोजित सीनेट की बैठक में पहुँचा। जैसे ही वह पोम्पी की प्रतिमा के निकट अपनी स्वर्णमंडित आसंदी पर बैठा, षड्यंत्रकारियों ने उस पर खंजरों से हमला कर दिया। प्राचीन स्रोतों में यह भिन्न-भिन्न रूप से वर्णित है कि वह बिना कुछ कहे गिर पड़ा या ब्रूटस को देखकर यूनानी में ‘काई सु, टेक्नोन?’ (तुम भी, पुत्र?) कहा। उस पर कम-से-कम तेईस बार वार किए गए और वहीं उसकी मृत्यु हो गई।

हत्या के बाद की स्थिति
सीज़र की हत्या के बाद षड्यंत्रकारियों ने कैपिटोलाइन पहाड़ी पर अधिकार कर लिया और फ़ोरम में एक सार्वजनिक सभा बुलाई, किंतु जनता का उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। वे शहर पर भी पूर्ण नियंत्रण स्थापित नहीं कर सके, क्योंकि लेपिडस सैनिकों को लेकर रोम में प्रवेश कर गया। इसके बाद कौंसल मार्क एंटनी ने सीनेट में एक समझौता कराया, जिसके अनुसार सीज़र के सभी आदेश और निर्णय वैध माने गए तथा षड्यंत्रकारियों को तत्काल दंडित नहीं किया गया।
सीज़र का अंतिम संस्कार रोमन फ़ोरम में किया गया, जहाँ एंटनी के भावनात्मक भाषण ने जनता को षड्यंत्रकारियों के विरुद्ध भड़का दिया। परिणामस्वरूप उन्हें रोम छोड़कर भागना पड़ा। उसी वर्ष सात दिनों तक दिखाई देने वाले धूमकेतु को रोमनों ने सीज़र के देवत्व का प्रतीक माना और उसकी स्मृति में 42 ईसा पूर्व में रोमन फ़ोरम में सीज़र के मंदिर का निर्माण आरंभ किया गया। उसकी वसीयत में रोम के नागरिकों के लिए धनराशि का दान निर्धारित था तथा उसके परनाती-भतीजे और दत्तक उत्तराधिकारी गयुस ऑक्टावियस (ऑक्टेवियन) को मुख्य उत्तराधिकारी बनाया गया था।
सीज़र की मृत्यु के बाद गणराज्य की पुनर्स्थापना असंभव सिद्ध हुई और सत्ता-संघर्ष ने नए गृहयुद्धों को जन्म दिया। 43 ईसा पूर्व में ऑक्टेवियन ने एंटनी और लेपिडस के साथ मिलकर द्वितीय ट्रायम्विरेट की स्थापना की।
42 ईसा पूर्व में सीनेट ने सीज़र को आधिकारिक रूप से देवता घोषित किया और इसके बाद ट्रायमवीरों ने षड्यंत्रकारियों को पराजित कर दिया। अंततः 31 ईसा पूर्व तक ऑक्टेवियन ने अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को हराकर पूरे रोमन विश्व पर अधिकार स्थापित कर लिया और गणराज्य की औपचारिक संरचना बनाए रखते हुए ऐसी शासन-व्यवस्था स्थापित की, जिसने रोमन साम्राज्य और नई राजशाही के युग का मार्ग प्रशस्त किया।
सीज़र का स्वास्थ्य और निजी जीवन
सीज़र के स्वास्थ्य के बारे में विद्वानों में एकमत नहीं है। प्लूटार्क के आधार पर कुछ इतिहासकार मानते हैं कि उसे मिर्गी थी, जबकि अन्य विद्वानों के अनुसार वह मलेरिया, मस्तिष्क में परजीवी संक्रमण, रक्त में शर्करा की कमी (हाइपोग्लाइसीमिया) अथवा मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं से संबंधित किसी बीमारी से पीड़ित हो सकता था। उसके जीवन में चार ऐसे दौरों का उल्लेख मिलता है जिन्हें मिर्गी जैसे दौरे माना जाता है, किंतु इसका कोई निश्चित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। शेक्सपियर के नाटक में उसे एक कान से बहरा बताया गया है, परंतु किसी भी प्राचीन ऐतिहासिक स्रोत में इसका उल्लेख नहीं मिलता। सुएटोनियस के अनुसार सीज़र लंबे कद, गोरे रंग, सुडौल शरीर, कुछ भरे हुए चेहरे और तेज़ काली आँखों वाला व्यक्ति था। वह अपने गंजेपन को लेकर अत्यंत संवेदनशील था और बालों को आगे की ओर रखता था। उसे सदैव लॉरेल (विजय-माला) धारण करने का विशेष अधिकार भी अत्यंत प्रिय था। उसका मूल लैटिन नाम गायस जूलियस सीज़र था। आगे चलकर सीज़र केवल एक पारिवारिक नाम न रहकर सम्राट की उपाधि बन गया और इसी से जर्मन कैसर तथा स्लाव भाषाओं की ज़ार जैसी शाही उपाधियों का विकास हुआ।
सीज़र ने अपने जीवन में तीन विवाह किए। उसकी पहली पत्नी कॉर्नेलिया थीं, जिनसे उसका विवाह 84 ईसा पूर्व में हुआ और 69 ईसा पूर्व में उनकी मृत्यु तक यह संबंध बना रहा। दूसरी पत्नी पोम्पेया थी, जिनसे उसने 67 ईसा पूर्व में विवाह किया, किंतु लगभग 61 ईसा पूर्व में बोना देआ कांड के बाद उनका तलाक हो गया। तीसरी पत्नी कैलपुर्निया थी, जिनसे उसका विवाह 59 ईसा पूर्व में हुआ और उसकी मृत्यु तक यह संबंध बना रहा। कॉर्नेलिया से उसकी पुत्री जूलिया का जन्म हुआ, जबकि मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा सप्तम से उसके पुत्र सीज़ेरियन का जन्म 47 ईसा पूर्व में हुआ। बाद में ऑक्टेवियन ने लगभग 17 वर्ष की आयु में सीज़ेरियन की हत्या करवा दी।
सीज़र ने अपनी वसीयत में अपने भतीजे गायस जूलियस सीज़र ऑक्टेवियानुस (ऑक्टेवियन) को दत्तक उत्तराधिकारी बनाया, जो आगे चलकर सम्राट ऑगस्टस बना। कुछ प्राचीन स्रोतों में मार्कस जूनियस ब्रूटस को उसकी अवैध संतान बताया गया है, किंतु अधिकांश प्राचीन और आधुनिक इतिहासकार इस दावे को अस्वीकार करते हैं। उसकी पुत्री जूलिया और पॉम्पी का एक पुत्र हुआ था, जिसकी जन्म के कुछ दिनों बाद ही मृत्यु हो गई।
सीज़र के प्रेम संबंधों में क्लियोपेट्रा सप्तम, सर्विलिया और यूनोए के नाम प्रमुख हैं। उसके राजनीतिक विरोधियों ने यह भी प्रचार किया कि युवावस्था में उसका बिथिनिया के राजा निकोमेडीस चतुर्थ के साथ संबंध था, जिसके कारण उसे व्यंग्य में ‘बिथिनिया की रानी’ कहा गया। स्वयं सीज़र ने जीवनभर इन आरोपों का खंडन किया और बाद के इतिहासकारों ने इन्हें मुख्यतः राजनीतिक बदनामी का साधन माना है।
साहित्यिक रचनाएँ
जूलियस सीज़र अपने समय का श्रेष्ठ लैटिन गद्य-लेखक और वक्ता माना जाता था। सिसरो ने भी उसकी भाषण-कला और लेखन-शैली की प्रशंसा की थी। उसकी केवल युद्ध-वृत्तांत ही पूर्ण रूप से सुरक्षित है, जबकि उसकी अन्य रचनाएँ केवल प्राचीन लेखकों के उद्धरणों के माध्यम से ज्ञात होती हैं। उसकी लुप्त कृतियों में अपनी मौसी जूलिया के अंतिम संस्कार पर दिया गया भाषण तथा एंटीकाटो विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जिसमें उसने सिसरो द्वारा कैटो की प्रशंसा के उत्तर में उसकी आलोचना की थी। उसकी कविताओं का भी प्राचीन स्रोतों में उल्लेख मिलता है। उसकी सबसे प्रसिद्ध कृति ‘कॉमेंटारी दे बेलो गैलिको’ है, जिसे सामान्यतः ‘द गैलिक वॉर्स’ कहा जाता है। ‘कॉमेंटारी दे बेलो सिविली’ में मिस्र में पॉम्पी की मृत्यु तक के गृहयुद्ध का वर्णन सीज़र के दृष्टिकोण से किया गया है। ‘डी बेलो एलेक्ज़ेंड्रिनो’, ‘डी बेलो अफ़्रिको’ और ‘डी बेलो हिस्पानिएन्सी’ भी परंपरागत रूप से उसके नाम से संबद्ध हैं, यद्यपि अधिकांश विद्वान इससे सहमत नहीं हैं।
जूलियस सीज़र का मूल्यांकन
इस प्रकार गायस जूलियस सीज़र का जीवन रोमन इतिहास के उस निर्णायक संक्रमणकाल का प्रतिनिधित्व करता है, जब परंपरागत गणतांत्रिक व्यवस्था अपनी आंतरिक कमजोरियों, राजनीतिक संघर्षों और महत्त्वाकांक्षी सेनानायकों के उदय के कारण विघटन की ओर अग्रसर थी। अपनी असाधारण सैन्य प्रतिभा, राजनीतिक दूरदर्शिता और संगठनात्मक क्षमता के बल पर सीज़र ने न केवल गॉल पर रोमन प्रभुत्व स्थापित किया, बल्कि गृहयुद्ध में विजय प्राप्त कर रोम की सर्वोच्च सत्ता भी अपने हाथों में केंद्रित कर ली। उसके शासनकाल में किए गए प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक सुधारों ने रोमन राज्य को अधिक संगठित और प्रभावी स्वरूप प्रदान किया, जबकि जूलियन पंचांग जैसे सुधारों का प्रभाव आधुनिक युग तक बना रहा।

यद्यपि सीज़र स्वयं को रोमन राज्य का पुनर्गठक मानता था, परंतु उसकी निरंतर बढ़ती शक्ति, आजीवन अधिनायक की उपाधि और राजतंत्र की संभावित पुनर्स्थापना की आशंका ने रोमन अभिजात वर्ग के एक बड़े हिस्से को उसके विरुद्ध कर दिया। 15 मार्च 44 ईसा पूर्व को उनकी हत्या ने तत्कालीन राजनीतिक संकट का समाधान नहीं किया, बल्कि गृहयुद्धों के एक नए दौर को जन्म दिया। अंततः उसके दत्तक उत्तराधिकारी ऑक्टेवियन ने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पराजित कर ऑगस्टस के रूप में प्रथम रोमन सम्राट बना और रोमन साम्राज्य की स्थापना की।
जूलियस सीज़र की ऐतिहासिक विरासत बहुआयामी है। वह केवल विजेता और राजनीतिज्ञ ही नहीं, बल्कि एक कुशल लेखक, प्रभावशाली वक्ता और दूरदर्शी प्रशासक भी था। उसकी सैन्य रणनीतियों, राजनीतिक निर्णयों और साहित्यिक कृतियों का अध्ययन आज भी इतिहास, राजनीति, सैन्य विज्ञान और नेतृत्व अध्ययन के क्षेत्र में समान रूप से महत्त्वपूर्ण है। उसके व्यक्तित्व में असाधारण प्रतिभा, असीम महत्त्वाकांक्षा और व्यावहारिक राजनीतिक दृष्टि का अद्वितीय समन्वय था। इसी कारण जूलियस सीज़र का नाम उन महान ऐतिहासिक व्यक्तित्वों में याद किया जाता है, जिन्होंने अपने युग की दिशा बदलने के साथ-साथ विश्व इतिहास की धारा को भी स्थायी रूप से प्रभावित किया।




