कृष्ण द्वितीय (Krishna II, 880-914 AD)
अमोघवर्ष के पश्चात् उसका पुत्र कृष्ण द्वितीय 880 ई. के लगभग राष्ट्रकूट राजगद्दी पर बैठा। […]
कृष्ण द्वितीय (Krishna II, 880-914 AD) Read More »
अमोघवर्ष के पश्चात् उसका पुत्र कृष्ण द्वितीय 880 ई. के लगभग राष्ट्रकूट राजगद्दी पर बैठा। […]
कृष्ण द्वितीय (Krishna II, 880-914 AD) Read More »
अमोघवर्ष’ प्रथम (814 ई.-878 ई.) गोविंद तृतीय की मृत्यु के पश्चात् उसका अल्पवयस्क पुत्र शर्व
अमोघवर्ष प्रथम (Amoghvarsha I, 814-878 AD) Read More »
गोविंद तृतीय ध्रुव प्रथम के कई पुत्र थे, जिनमें स्तंभ रणावलोक, कर्कसुवर्णवर्ष, गोविंद तृतीय तथा
गोविंद तृतीय (Govind III, 793-814 AD) Read More »
अपने अग्रज गोविंद द्वितीय को अपदस्थ कर ध्रुव ने राष्ट्रकूट राजवंश की बागडोर सँभाली। ध्रुव
ध्रुव ‘धारावर्ष’ (Dhruva ‘Dharavarsha’, 780-793 AD) Read More »
चित्तलदुर्ग से प्राप्त एक लेख के अनुसार दंतिदुर्ग के कोई पुत्र नही था और उसकी
कृष्ण प्रथम (Krishna I, 756-774 AD) Read More »
इंद्र द्वितीय के बाद उसकी चालुक्यवंशीय पत्नी भवनागा से उत्पन पुत्र दंतिदुर्ग (735-756 ई.) राजा
दंतिदुर्ग (Dantidurga, 735-756 AD) Read More »
हर्षोत्तरकाल में गुर्जरात्रा प्रदेश में प्रतिहार राजवंश का उदय हुआ, जो गुर्जरों की एक राजपूत
गुर्जर प्रतिहार वंश (Gurjara Pratihara Dynasty) Read More »
प्रतिहार साम्राज्य के पतन के पश्चात् बुंदेलखंड के भूभाग पर चंदेल वंश के स्वतंत्र राज्य
जेजाकभुक्ति (बुंदेलखंड) के चंदेल (Chandelas of Jejakabhukti) Read More »
परमार वंश ने 9वीं से 14वीं शताब्दी के बीच पश्चिम-मध्य भारत में मालवा, उज्जैन, आबू
परमार राजवंश (Parmar Dynasty) Read More »