जैन चतुर्विध-संघ (Jain Chaturvidha Sangh)
जैन चतुर्विध-संघ:श्वेतांबर और दिगंबर अनुशासित समूह को ‘संघ’ कहते हैं। संघ के कुछ नियम-अनुबंध तथा
जैन चतुर्विध-संघ (Jain Chaturvidha Sangh) Read More »
जैन चतुर्विध-संघ:श्वेतांबर और दिगंबर अनुशासित समूह को ‘संघ’ कहते हैं। संघ के कुछ नियम-अनुबंध तथा
जैन चतुर्विध-संघ (Jain Chaturvidha Sangh) Read More »
जैन धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और दर्शन है। श्रमणों में कदाचित्
जैन तीर्थंकर (Jain Tirthankaras) Read More »
जैन दर्शन और न्याय धर्म, दर्शन और न्याय—इन तीनों के सुमेल से ही व्यक्ति के
जैन न्याय शास्त्र का विकास (Development of Jain Jurisprudence) Read More »
अकबर का राष्ट्रीय सम्राट के रूप में मूल्यांकन अकबर विश्व के महान् सम्राटों में से
अकबर राष्ट्रीय सम्राट के रूप में (Akbar as a National Emperor) Read More »
आधुनिक युग का प्रारंभ इतिहास एक सतत् प्रक्रिया है, घटनाओं और प्रवृत्तियों का क्रमिक विकास
यूरोप में आधुनिक युग का आविर्भाव (Emergence of Modern Age in Europe) Read More »
कन्फ्यूशियस ‘अगर आपको उत्कृष्ट भविष्य का निर्माण करना है, तो अतीत का अध्ययन करें।’—कन्फ्यूशियस छठी
कन्फ्यूशियस और उसकी शिक्षाएँ (Confucius and his Teachings) Read More »
सुमेरियन सभ्यता: प्राचीन विश्व का आश्चर्य मेसोपोटामिया में जिन सभ्यताओं का विकास हुआ, उनमें कालक्रम
सुमेरियन सभ्यता (Sumerian Civilisation) Read More »
शाक्त संप्रदाय शाक्त संप्रदाय भारत में अत्यंत प्राचीनकाल से प्रचलित रहा है। इस संप्रदाय का
पूर्व मध्यकाल में शाक्त संप्रदाय (Shakta Sect in the Early Medieval Period) Read More »
यूरोप में सामंतवाद मध्यकालीन यूरोप में सामंतवाद अपने चरमोत्कर्ष पर था। इन सामंतों की कई
यूरोप में सामंतवाद (Feudalism in Europe) Read More »