पेरिक्लीज (Pericles)

पेरिक्लीज (Pericles)
पेरिक्लीज (लगभग 495–429 ई. पू.) मुख्य लेख : यूनानी सभ्यता पेरिक्लीज (लगभग 495–429 ई. पू.) […]

पेरिक्लीज (लगभग 495–429 ई. पू.)

मुख्य लेख : यूनानी सभ्यता

पेरिक्लीज (लगभग 495–429 ई. पू.) प्राचीन एथेंस के प्रमुख राजनेता, वक्ता और सेनापति थे। उनका राजनीतिक प्रभुत्व विशेष रूप से 461 से 429 ईसा पूर्व के बीच रहा। इस अवधि को सामान्यतः ‘पेरिक्लीज का युग’ कहा जाता है। उनके नेतृत्व में एथेंस ने राजनीति, लोकतंत्र, कला, साहित्य, दर्शन और स्थापत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उन्नति की। पेरिक्लीज का प्रभाव केवल उनके जीवनकाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के यूनानी इतिहास और बाद के राजनीतिक चिंतन पर भी पड़ा।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

पेरिक्लीज का जन्म लगभग 495 ईसा पूर्व में एथेंस के एक प्रतिष्ठित कुलीन परिवार में हुआ था। उनके पिता ज़ैंथिप्पस प्रमुख एथेनियाई राजनेता और सेनापति थे, जिन्होंने फारसी युद्धों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी माता एगारिस्ते प्रभावशाली एल्कमियोनिड परिवार से संबंधित थीं और क्लीस्थनीस की निकट संबंधी थीं।

पारिवारिक प्रतिष्ठा और संपन्नता के कारण पेरिक्लीज को उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त हुई। उन्होंने संगीत, दर्शन, गणित और वक्तृत्व का अध्ययन किया। उनके बौद्धिक विकास पर एनाक्सागोरस जैसे दार्शनिकों का प्रभाव माना जाता है। आगे चलकर दर्शन और तर्कशील चिंतन उनके राजनीतिक दृष्टिकोण के महत्त्वपूर्ण आधार बने। युवावस्था में पेरिक्लीज ने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करना आरंभ किया। 472 ईसा पूर्व में उन्होंने एस्खिलस के प्रसिद्ध नाटक द पर्सियंस के मंचन का आर्थिक प्रबंध किया। यह उनके प्रारंभिक सार्वजनिक जीवन की उल्लेखनीय घटनाओं में से एक थी।

राजनीतिक जीवन का प्रारंभ

पेरिक्लीज का राजनीतिक उदय 460 के दशक ईसा पूर्व में हुआ। उस समय एथेंस की राजनीति में दो प्रमुख प्रवृत्तियाँ थीं। सिमोन जैसे रूढ़िवादी नेता कुलीन परंपराओं और स्पार्टा के साथ सहयोग के समर्थक थे, जबकि एफियाल्टिस और पेरिक्लीज एथेनियाई जनसभा तथा जन-अदालतों की शक्ति बढ़ाने और एरिओपैगस परिषद के राजनीतिक प्रभाव को सीमित करने के पक्षधर थे।

463 ईसा पूर्व में पेरिक्लीज ने सिमोन पर कथित भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा चलाने में प्रमुख भूमिका निभाई, किंतु सिमोन आरोपों से मुक्त हो गए। दोनों के बीच राजनीतिक संघर्ष इसके बाद भी जारी रहा। इसी समय स्पार्टा में भूकंप के बाद हेलॉटों का विद्रोह हुआ। स्पार्टा ने एथेंस से सहायता माँगी और सिमोन के समर्थन से एथेंस ने सैनिक भेजे, किंतु स्पार्टा ने बाद में एथेनियाई सेना को वापस भेज दिया। इस घटना से एथेंस में सिमोन की स्पार्टा-समर्थक नीति के प्रति असंतोष बढ़ गया।

462–461 ईसा पूर्व के आसपास एफियाल्टिस और पेरिक्लीज ने ऐसे लोकतांत्रिक सुधारों को आगे बढ़ाया, जिनसे एरिओपैगस परिषद की पारंपरिक राजनीतिक शक्तियाँ काफी सीमित हो गईं और जनसभा तथा जन-अदालतों की भूमिका मजबूत हुई। 461 ईसा पूर्व में सिमोन को ऑस्ट्रासिज़्म के माध्यम से निर्वासित कर दिया गया। इसके कुछ समय बाद एफियाल्टिस की हत्या कर दी गई, और पेरिक्लीज एथेंस के प्रमुख लोकतांत्रिक नेता बनकर उभरे।

लोकतांत्रिक सुधार

पेरिक्लीज ने एथेनियाई लोकतंत्र में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी को मजबूत किया। सार्वजनिक पदों और विशेष रूप से न्यायिक सेवाओं के लिए पारिश्रमिक की व्यवस्था ने अपेक्षाकृत गरीब नागरिकों के लिए भी राजनीतिक संस्थाओं में भाग लेना आसान बना दिया। इससे राजनीतिक भागीदारी संपन्न वर्ग तक सीमित रहने के बजाय व्यापक नागरिक समुदाय तक पहुँची। किंतु एथेनियाई लोकतंत्र आधुनिक लोकतंत्र से भिन्न था। राजनीतिक अधिकार मुख्यतः स्वतंत्र पुरुष एथेनियाई नागरिकों तक सीमित थे; महिलाओं, दासों और विदेशी निवासियों को समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं थे।

451-450 ईसा पूर्व में पेरिक्लीज के प्रभाव में नागरिकता संबंधी कानून पारित हुआ, जिसके अनुसार एथेनियाई नागरिकता के लिए माता और पिता दोनों का एथेनियाई नागरिक होना आवश्यक कर दिया गया। इस कानून ने नागरिक समुदाय की सीमाओं को और अधिक स्पष्ट किया।

पेरिक्लीज के समय एथेंस की किलेबंदी को भी महत्त्व मिला। लॉन्ग वॉल्स ने एथेंस को उसके प्रमुख बंदरगाह पिराएस से जोड़ा, जिससे नगर को समुद्री आपूर्ति बनाए रखने और अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रभावी उपयोग करने में सामरिक लाभ मिला। इन दीवारों का निर्माण पेरिक्लीज के राजनीतिक प्रभुत्व से पहले आरंभ हो चुका था, लेकिन उनके समय में उनका महत्त्व और बढ़ा।

डेलियन लीग से एथेनियाई साम्राज्य तक

फारसी युद्धों के बाद गठित डेलियन लीग का उद्देश्य प्रारंभ में फारसी साम्राज्य के विरुद्ध सामूहिक सुरक्षा और सैन्य सहयोग था। समय के साथ एथेंस ने इस गठबंधन पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया। अनेक सहयोगी नगर-राज्य सैनिक भेजने के बजाय धन देने लगे, जिससे एथेंस की आर्थिक और नौसैनिक शक्ति निरंतर बढ़ती गई। 454 ईसा पूर्व में लीग का कोष डेलोस से एथेंस लाया गया, जिसके बाद एथेंस का प्रभुत्व और अधिक स्पष्ट हो गया। पेरिक्लीज ने उपलब्ध संसाधनों का उपयोग एथेंस की सुरक्षा, नौसैनिक शक्ति और सार्वजनिक निर्माणों को सुदृढ़ करने में किया। सहयोगी नगर-राज्यों के विद्रोहों को दबाने के लिए एथेंस ने सैन्य शक्ति का भी प्रयोग किया। इस प्रकार डेलियन लीग धीरे-धीरे एथेनियाई साम्राज्य का रूप लेने लगी।

स्पार्टा से संघर्ष और प्रथम पेलोपोनेशियन युद्ध

पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के मध्य तक एथेंस और स्पार्टा यूनान की दो प्रमुख शक्तियाँ बन चुके थे। एथेंस के नेतृत्व में डेलियन लीग और स्पार्टा के नेतृत्व में पेलोपोनेशियन लीग दो प्रमुख शक्ति-समूहों के रूप में विकसित हुए। एथेंस की बढ़ती नौसैनिक शक्ति और साम्राज्यवादी विस्तार से स्पार्टा तथा उसके सहयोगी चिंतित थे। विशेष रूप से कोरिंथ एथेंस के बढ़ते प्रभाव का विरोध करता था।

प्रथम पेलोपोनेशियन युद्ध (लगभग 460–446 ई. पू.) इसी व्यापक शक्ति-संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुआ। इस संघर्ष में एथेंस का मुख्य प्रतिद्वंद्वी केवल स्पार्टा ही नहीं, बल्कि उसके सहयोगी नगर-राज्य भी थे। पेरिक्लीज ने इस अवधि में एथेनियाई सैन्य और राजनीतिक नीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

451 ईसा पूर्व में सिमोन निर्वासन से लौटे और एथेंस तथा स्पार्टा के बीच समझौते की दिशा में भूमिका निभाई। अंततः 446 ईसा पूर्व में एथेंस और स्पार्टा के बीच शांति स्थापित हुई। एथेंस को अपने कुछ विजय-क्षेत्रों से पीछे हटना पड़ा, लेकिन उसका समुद्री साम्राज्य कायम रहा। 443 ईसा पूर्व में पेरिक्लीज के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी थ्यूसीडाइड्स (मेलिसियास के पुत्र) को ऑस्ट्रासिज़्म द्वारा निर्वासित कर दिया गया। इसके बाद पेरिक्लीज का राजनीतिक प्रभुत्व और अधिक मजबूत हो गया।

एथेंस का सांस्कृतिक और स्थापत्य उत्कर्ष

पेरिक्लीज के नेतृत्व में एथेंस कला, साहित्य, दर्शन और स्थापत्य का प्रमुख केंद्र बन गया। एक्रोपोलिस के पुनर्निर्माण की व्यापक योजना इसी युग में आगे बढ़ी। 447 ईसा पूर्व में पार्थेनन का निर्माण आरंभ हुआ। देवी एथेना को समर्पित यह मंदिर एथेनियाई धार्मिक पहचान और राजनीतिक शक्ति का प्रमुख प्रतीक बना।

एक्रोपोलिस के निर्माण कार्यक्रम में प्रसिद्ध मूर्तिकार फिडियास की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। बाद में प्रोपिलाया सहित एक्रोपोलिस के अन्य प्रमुख स्थापत्य कार्य भी विकसित हुए। इन निर्माण परियोजनाओं ने एथेंस की स्थापत्य और कलात्मक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई दी।

पेरिक्लीज के युग में नाट्यकला का भी असाधारण विकास हुआ। एस्खिलस, सोफोक्लीज, यूरिपिडीज और एरिस्टोफेनीज जैसे नाटककारों ने यूनानी रंगमंच को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। इतिहास-लेखन के क्षेत्र में हेरोडोटस और थ्यूसीडाइड्स का कार्य इसी व्यापक बौद्धिक वातावरण में विकसित हुआ। दर्शन के क्षेत्र में एनाक्सागोरस, प्रोतागोरस और ज़ेनो जैसे विचारकों की उपस्थिति ने एथेंस को बौद्धिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बना दिया। इसी काल में सुकरात भी एथेंस में सक्रिय थे।

पेरिक्लीज और एस्पेशिया

पेरिक्लीज के निजी और बौद्धिक जीवन में माइलेटस की एस्पेशिया का विशेष उल्लेख मिलता है। लगभग 445 ईसा पूर्व के आसपास पेरिक्लीज अपनी पत्नी से अलग होने के बाद एस्पेशिया के साथ रहने लगे। एस्पेशिया शिक्षित और बौद्धिक रूप से सक्रिय महिला थीं तथा एथेंस के अनेक प्रमुख बुद्धिजीवियों और राजनेताओं से उनका संपर्क था।

पेरिक्लीज के राजनीतिक विरोधियों ने उनके संबंध का उपयोग उनके विरुद्ध किया और यह आरोप लगाया कि एस्पेशिया उनके भाषण तैयार करती थीं या उनकी राजनीतिक नीतियों को प्रभावित करती थीं। इन दावों के ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। एस्पेशिया का पेरिक्लीज के बौद्धिक जीवन पर प्रभाव संभव है, लेकिन उसकी वास्तविक सीमा निश्चित रूप से निर्धारित नहीं की जा सकती।

एथेनियाई विदेश नीति

पेरिक्लीज की विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य एथेनियाई साम्राज्य को बनाए रखना, नौसैनिक शक्ति को मजबूत करना और स्पार्टा के प्रभाव का सामना करना था। उन्होंने एजियन सागर में एथेंस के प्रभुत्व को बनाए रखा तथा सहयोगी नगर-राज्यों के विद्रोहों को दबाया। सामोस के विद्रोह के समय पेरिक्लीज ने एथेनियाई सेना का नेतृत्व किया और विद्रोह को दबाने में सफलता प्राप्त की। सामोस पर की गई कठोर कार्रवाई का उद्देश्य अन्य सहयोगी नगर-राज्यों को एथेंस के विरुद्ध विद्रोह से रोकना था।

लगभग 437–436 ईसा पूर्व में पेरिक्लीज ने काला सागर क्षेत्र की ओर अभियान चलाया। इस क्षेत्र का एथेंस के लिए विशेष आर्थिक महत्त्व था, क्योंकि वहाँ से अनाज की आपूर्ति होती थी। एथेंस ने पश्चिमी यूनान की महत्त्वपूर्ण नौसैनिक शक्ति कोरसीरा (कोर्फू) के साथ भी संबंध मजबूत किए। इन घटनाओं और अन्य क्षेत्रीय विवादों ने एथेंस तथा स्पार्टा के बीच तनाव को और बढ़ा दिया।

द्वितीय पेलोपोनेशियन युद्ध

431 ईसा पूर्व में एथेंस और स्पार्टा के बीच द्वितीय पेलोपोनेशियन युद्ध आरंभ हुआ। युद्ध से पहले दोनों शक्तियों और उनके सहयोगी गुटों के बीच राजनीतिक, आर्थिक तथा सामरिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही थी। पेरिक्लीज ने युद्ध के प्रारंभिक चरण में ऐसी रणनीति अपनाई जिसमें स्पार्टा की शक्तिशाली स्थलसेना से सीधे निर्णायक युद्ध से बचना और एथेंस की नौसैनिक शक्ति तथा किलेबंदी का उपयोग करना प्रमुख था। उन्होंने एटिका के ग्रामीण निवासियों को नगर की सुरक्षित दीवारों के भीतर लाने की नीति अपनाई, जबकि एथेनियाई नौसेना के माध्यम से शत्रु के तटीय क्षेत्रों पर आक्रमण करने की योजना बनाई गई।

यह रणनीति एथेंस की परिस्थितियों के अनुकूल थी, लेकिन इससे नगर के भीतर जनसंख्या का अत्यधिक संकेंद्रण हो गया। 430 ईसा पूर्व में एथेंस में भयंकर महामारी फैल गई, जिसने बड़ी संख्या में लोगों की जान ली और एथेंस की नागरिक तथा सैन्य शक्ति को गंभीर क्षति पहुँचाई।

महामारी और पेरिक्लीज की मृत्यु

महामारी में पेरिक्लीज के दोनों वैध पुत्र, ज़ैंथिप्पस और पैरालोस, की मृत्यु हो गई। स्वयं पेरिक्लीज भी महामारी से संक्रमित हुए। युद्ध और महामारी के कारण उनका राजनीतिक प्रभाव कुछ समय के लिए कमजोर हुआ तथा उन पर आर्थिक दंड भी लगाया गया, किंतु बाद में उन्हें पुनः सेनापति चुना गया। 429 ईसा पूर्व में पेरिक्लीज की महामारी के कारण मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु ऐसे समय हुई जब पेलोपोनेशियन युद्ध जारी था और एथेंस युद्ध तथा महामारी दोनों से गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका था।

अंतिम संस्कार का भाषण

पेरिक्लीज का प्रसिद्ध अंतिम संस्कार का भाषण थ्यूसीडाइड्स ने अपनी कृति पेलोपोनेशियन युद्ध का इतिहास में दर्ज किया है। यह भाषण युद्ध के प्रथम वर्ष में मारे गए एथेनियाई सैनिकों के सम्मान में दिया गया था। इस भाषण में पेरिक्लीज ने एथेंस की राजनीतिक व्यवस्था, नागरिक स्वतंत्रता, कानून के समक्ष समानता, सार्वजनिक जीवन में योग्यता और नागरिक कर्तव्य की चर्चा की। उन्होंने एथेंस की महानता को उसके नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, साहस और सार्वजनिक उत्तरदायित्व से जोड़ा।

यह भाषण एथेनियाई लोकतंत्र की एक आदर्श छवि प्रस्तुत करता है। यद्यपि उस समय राजनीतिक अधिकार केवल स्वतंत्र पुरुष एथेनियाई नागरिकों तक सीमित थे, फिर भी यह भाषण नागरिकता, स्वतंत्रता और सार्वजनिक जीवन के संबंध में प्राचीन राजनीतिक चिंतन का अत्यंत प्रभावशाली उदाहरण है।

पेरिक्लीज की राजनीतिक दृष्टि

पेरिक्लीज लोकतांत्रिक संस्थाओं के समर्थक थे, लेकिन उनका नेतृत्व केवल जनमत का अनुसरण करने पर आधारित नहीं था। थ्यूसीडाइड्स ने उन्हें एथेंस का ‘प्रथम नागरिक’ कहा। उनके अनुसार पेरिक्लीज आवश्यकता पड़ने पर जनता का विरोध सहकर भी अपनी नीति पर कायम रह सकते थे। उनके नेतृत्व में जनसभा, जन-अदालतों और नागरिक भागीदारी की भूमिका मजबूत हुई। सार्वजनिक सेवाओं के लिए पारिश्रमिक की व्यवस्था ने अपेक्षाकृत गरीब नागरिकों के लिए भी राजनीतिक जीवन में भाग लेना संभव बनाया। इस प्रकार पेरिक्लीज के समय एथेनियाई लोकतंत्र अधिक प्रत्यक्ष और व्यापक नागरिक भागीदारी वाला बना, यद्यपि उसकी नागरिकता सीमित बनी रही।

पेरिक्लीज की विरासत

पेरिक्लीज की विरासत के दो प्रमुख पक्ष थे। एक ओर उन्होंने एथेंस की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया, नागरिक भागीदारी को बढ़ाया और नगर को कला, साहित्य, दर्शन तथा स्थापत्य का प्रमुख केंद्र बनाया। दूसरी ओर, उनके नेतृत्व में एथेनियाई साम्राज्यवादी शक्ति भी मजबूत हुई और सहयोगी नगर-राज्यों पर एथेंस का नियंत्रण कठोर बना रहा। पेरिक्लीज के युग का सांस्कृतिक उत्कर्ष केवल उनके व्यक्तिगत नेतृत्व का परिणाम नहीं था। इसके पीछे क्लीस्थनीस के पूर्ववर्ती लोकतांत्रिक सुधार, फारसी युद्धों के बाद एथेंस की बढ़ती शक्ति, डेलियन लीग से प्राप्त संसाधन और एथेनियाई नौसैनिक प्रभुत्व भी महत्त्वपूर्ण थे। पेरिक्लीज ने इन परिस्थितियों को संगठित करके एथेंस को एक प्रभावशाली राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति के रूप में विकसित किया। उनकी युद्धनीति की भी आलोचना की गई है। पेलोपोनेशियन युद्ध के प्रारंभिक चरण में उनकी रणनीति एथेंस की नौसैनिक शक्ति और किलेबंदी पर आधारित थी, लेकिन दीर्घकालीन युद्ध और महामारी ने नगर को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया। पेरिक्लीज की मृत्यु के बाद एथेंस को उनके समान प्रभावशाली नेतृत्व नहीं मिला और युद्ध का संचालन अधिक कठिन होता गया। अंततः 404 ईसा पूर्व में एथेंस की पराजय हुई और उसका साम्राज्य समाप्त हो गया।

फिर भी पेरिक्लीज के समय विकसित एथेनियाई राजनीतिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराओं का प्रभाव अत्यंत दीर्घकालीन रहा। लोकतांत्रिक संस्थाएँ, नागरिक भागीदारी, नाट्यकला, इतिहास-लेखन, दर्शन, मूर्तिकला और स्थापत्य की उपलब्धियाँ प्राचीन एथेंस की स्थायी विरासत बनीं। इसी कारण पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व का एथेंस इतिहास में ‘पेरिक्लीज का युग’ के नाम से प्रसिद्ध है।

error: Content is protected !!
Scroll to Top