पिसिस्ट्राटस (Pisistratus)

पिसिस्ट्राटस (Pisistratus)
पिसिस्ट्राटस मुख्य लेख : यूनानी सभ्यता पिसिस्ट्राटस, जिसे पेइसिस्ट्राटस या पेइसिस्ट्राटोस भी लिखा जाता है, […]

पिसिस्ट्राटस

Table of Contents

मुख्य लेख : यूनानी सभ्यता

पिसिस्ट्राटस, जिसे पेइसिस्ट्राटस या पेइसिस्ट्राटोस भी लिखा जाता है, प्राचीन एथेंस का प्रभावशाली राजनेता और शासक था। उसका जन्म लगभग 600 ईसा पूर्व हुआ था और मृत्यु 527 ईसा पूर्व में हुई। उसने तीन अलग-अलग अवसरों पर एथेंस की सत्ता प्राप्त की। 546 ईसा पूर्व में तीसरी बार सत्ता प्राप्त करने के बाद उसने अपनी मृत्यु तक शासन किया। उसके शासनकाल में एथेंस में राजनीतिक स्थिरता स्थापित हुई तथा कृषि, व्यापार, धार्मिक जीवन, सांस्कृतिक गतिविधियों और नगरीय विकास को प्रोत्साहन मिला।

पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जीवन

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में एथेंस की राजनीति पर प्रमुख कुलीन परिवारों का प्रभाव था। पिसिस्ट्राटस एक प्रतिष्ठित कुलीन परिवार से संबंधित था। उसका जन्म लगभग 600 ईसा पूर्व हुआ था। वह पूर्वी एटिका के ब्रॉरोन क्षेत्र के निकट स्थित फिलाइडे से संबंधित था और उसके पिता का नाम हिप्पोक्रेटस था। उसके प्रारंभिक जीवन के बारे में बहुत कम विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध है और उससे संबंधित कुछ विवरण बाद की परंपराओं पर आधारित हैं।

प्राचीन स्रोतों में हिप्पोक्रेटस से जुड़ी एक धार्मिक घटना का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि देवताओं को बलि देते समय मांस बिना आग के ही उबलने लगा। इस घटना को देखकर स्पार्टा के चिलोन ने हिप्पोक्रेटस को सावधान रहने की सलाह दी थी। हिप्पोक्रेटस ने उस सलाह की उपेक्षा की और बाद में पिसिस्ट्राटस का जन्म हुआ। यह कथा ऐतिहासिक तथ्य की अपेक्षा प्राचीन परंपरा का हिस्सा मानी जाती है।

पिसिस्ट्राटिड्स अपनी वंशावली को पाइलोस के नेलियस से जोड़ते थे, जिसे महाकाव्य परंपरा में नेस्टर का पिता माना जाता है। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में एल्कमियोनिड्स भी एथेंस के प्रभावशाली कुलीन परिवारों में उभरे। उनके प्रमुख नेता मेगकल्स ने कभी पिसिस्ट्राटस का विरोध किया तो कभी उसका समर्थन किया।

आर्काइक यूनान में ‘टायरान’ का अर्थ अनिवार्य रूप से क्रूर या अत्याचारी शासक नहीं था। यह शब्द सामान्यतः ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता था जिसने पारंपरिक संवैधानिक व्यवस्था के बाहर व्यक्तिगत सत्ता स्थापित की हो। एथेंस में काइलोन ने लगभग 636 या 632 ईसा पूर्व में एक्रोपोलिस पर अधिकार करने का प्रयास किया था, लेकिन वह असफल रहा। उसके समर्थकों की हत्या से जुड़ी घटना ने एल्कमियोनिड्स के विरुद्ध धार्मिक दोष की परंपरा को जन्म दिया।

पिसिस्ट्राटस का संबंध मातृपक्ष से सोलोन से बताया जाता है। सोलोन ने छठी शताब्दी ईसा पूर्व के प्रारंभ में एथेंस में महत्त्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक सुधार किए थे। उसने ऋण-दासता को समाप्त कर किसानों को राहत दी, लेकिन उसके सुधारों के बाद भी कुलीन परिवारों के बीच सत्ता-संघर्ष समाप्त नहीं हुआ। इसी राजनीतिक अस्थिरता ने पिसिस्ट्राटस जैसे नेताओं के लिए सत्ता प्राप्त करने का अवसर पैदा किया।

मेगारा के विरुद्ध सफलता

पिसिस्ट्राटस ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक सैन्य नेता के रूप में की। लगभग 565 ईसा पूर्व में उसने एथेंस के प्रतिद्वंद्वी नगर-राज्य मेगारा के बंदरगाह निसाया पर अधिकार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सफलता से उसकी सैन्य प्रतिष्ठा बढ़ी और वह सामान्य नागरिकों के बीच लोकप्रिय हुआ। इससे एथेंस की सामरिक स्थिति मजबूत हुई तथा व्यापार और खाद्य आपूर्ति से जुड़े हितों की रक्षा में भी सहायता मिली।

इस समय एथेंस की राजनीति को परंपरागत रूप से तीन प्रमुख गुटों में बाँटा जाता था—मैदानी क्षेत्र के लोग (पेडिईस), तटीय क्षेत्र के लोग (पैरालियोई) और पहाड़ी क्षेत्र के लोग (हाइपेराक्रियोई या डियाक्रिया)। मैदानी गुट का नेतृत्व लाइकरगस, तटीय गुट का नेतृत्व मेगकल्स और पहाड़ी गुट का नेतृत्व पिसिस्ट्राटस से जोड़ा जाता था। पहाड़ी क्षेत्रों के अपेक्षाकृत गरीब किसान और सामान्य लोग उसके प्रमुख समर्थक बने। आधुनिक इतिहासकार इन गुटों को केवल भौगोलिक समूह न मानकर उनके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हितों से जुड़े समूहों के रूप में भी देखते हैं।

पहली बार सत्ता प्राप्ति और निर्वासन

पिसिस्ट्राटस ने लगभग 561/560 ईसा पूर्व में सत्ता प्राप्त करने का प्रयास किया। हेरोडोटस के अनुसार, उसने स्वयं को घायल दिखाकर दावा किया कि उसके विरोधियों ने उस पर हमला किया है। इसके बाद उसने अपनी सुरक्षा के लिए अंगरक्षकों की माँग की। अंगरक्षक मिलने के बाद उसने उनकी सहायता से एक्रोपोलिस पर अधिकार कर लिया और एथेंस की सत्ता अपने हाथ में ले ली।

उसका पहला शासन अधिक समय तक नहीं चला। लाइकरगस और मेगकल्स के नेतृत्व वाले विरोधी गुट उसके विरुद्ध एकजुट हो गए और लगभग 556 ईसा पूर्व में उसे एथेंस से निर्वासित कर दिया। अरस्तू के अनुसार, उसका पहला शासन लगभग पाँच वर्ष चला था।

निर्वासन और दूसरी बार सत्ता में वापसी

पिसिस्ट्राटस के निर्वासन के दौरान मैदानी और तटीय गुटों का गठबंधन टूट गया। इसके बाद मेगकल्स ने पिसिस्ट्राटस को एथेंस लौटने का प्रस्ताव दिया और अपनी पुत्री कोएसाइरा से उसके विवाह की शर्त रखी। हेरोडोटस के अनुसार, उसकी वापसी को प्रभावशाली बनाने के लिए फाई नामक एक लंबी महिला को देवी एथेना के रूप में सजाकर रथ पर बैठाया गया और नगर में लाया गया। लोगों के सामने यह संदेश दिया गया कि देवी एथेना स्वयं पिसिस्ट्राटस को एथेंस वापस ला रही हैं। इस घटना की ऐतिहासिक सत्यता निश्चित नहीं है और संभव है कि बाद की परंपरा में इसे बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया हो।

दूसरी बार निर्वासन

मेगकल्स के साथ पिसिस्ट्राटस का समझौता अधिक समय तक नहीं चला। हेरोडोटस के अनुसार, पिसिस्ट्राटस अपनी पहली पत्नी से हुए पुत्रों हिपार्कस और हिपियास के कारण मेगकल्स की पुत्री से संतान उत्पन्न नहीं करना चाहता था। इससे मेगकल्स नाराज हो गया और उसने अपने पुराने विरोधियों से हाथ मिला लिया। परिणामस्वरूप पिसिस्ट्राटस को दूसरी बार एथेंस से निर्वासित होना पड़ा।

तीसरी बार सत्ता में वापसी

दूसरे निर्वासन के दौरान पिसिस्ट्राटस लगभग दस वर्ष एटिका से बाहर रहा। वह उत्तरी यूनान में स्ट्रायमोन नदी के क्षेत्र और बाद में माउंट पैंजियस के निकट रहा, जहाँ उसने सोने-चाँदी के संसाधनों से पर्याप्त धन अर्जित किया। इस धन से उसने सैनिकों की भर्ती की और अपनी शक्ति मजबूत की। उसे थीब्स तथा नैक्सोस के शासक लिग्डामिस जैसे सहयोगियों का भी समर्थन मिला।

546 ईसा पूर्व में एरेट्रिया को आधार बनाकर वह एटिका लौटा। वह मैराथन पहुँचा और वहाँ से एथेंस की ओर बढ़ा। पैलेन के निकट एथेनियाई सेना से उसका युद्ध हुआ। हेरोडोटस के अनुसार, पिसिस्ट्राटस ने उस समय आक्रमण किया जब एथेनियाई सैनिक भोजन के बाद विश्राम कर रहे थे। उसकी सेना ने उन्हें पराजित कर दिया।

इसके बाद पिसिस्ट्राटस ने अपने पुत्र हिपार्कस और हिपियास को पीछे हटती सेना के पास भेजकर उन्हें सुरक्षित घर लौटने का संदेश दिया। एथेनियाई सैनिकों ने प्रतिरोध छोड़ दिया और अपने घर लौट गए। इस प्रकार 546 ईसा पूर्व में पिसिस्ट्राटस ने तीसरी बार एथेंस की सत्ता प्राप्त की और 527 ईसा पूर्व में अपनी मृत्यु तक शासन किया।

तीसरा और अंतिम शासनकाल

पिसिस्ट्राटस ने बल और राजनीतिक कौशल के माध्यम से सत्ता प्राप्त की, इसलिए प्राचीन यूनानी राजनीतिक शब्दावली में उसे ‘टायरानोस’ कहा गया। उस समय इस शब्द का अर्थ आधुनिक अर्थ में क्रूर या अत्याचारी शासक नहीं था, बल्कि ऐसे व्यक्ति से था जिसने परंपरागत संवैधानिक व्यवस्था के बाहर व्यक्तिगत सत्ता स्थापित की हो।

पिसिस्ट्राटस ने अपनी सुरक्षा के लिए भाड़े के सैनिकों का अंगरक्षक दल रखा, जिसमें सिथियन तीरंदाज भी शामिल बताए जाते हैं। इसके बावजूद उसने एथेंस की मौजूदा संवैधानिक संस्थाओं को समाप्त नहीं किया। प्रशासनिक ढाँचा और कानून काफी हद तक पहले की तरह बने रहे। कुछ कुलीन लोग उसके साथ सहयोग करते रहे और प्रशासनिक पदों पर बने रहे, जबकि उसके विरोधियों में से कुछ एथेंस छोड़कर चले गए।

पिसिस्ट्राटस के तीसरे और अंतिम शासनकाल में एथेंस ने राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक विकास, कृषि, व्यापार, धार्मिक जीवन, कला, स्थापत्य और नगरीय विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की। 546 ईसा पूर्व के बाद उसकी सत्ता पहले की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ थी। उसने पारंपरिक संस्थाओं को पूरी तरह समाप्त किए बिना वास्तविक राजनीतिक शक्ति अपने हाथों में केंद्रित रखी।

नगरीय विकास और सार्वजनिक निर्माण

पिसिस्ट्राटस के शासन में एथेंस एक अधिक संगठित नगर के रूप में विकसित हुआ। अगोरा को व्यवस्थित किया गया तथा जलापूर्ति में सुधार के लिए एनेक्रूनोस फव्वारे तक जल पहुँचाने की व्यवस्था की गई। सार्वजनिक निर्माण कार्यों से नगर की सुविधाओं में वृद्धि हुई और रोजगार के अवसर भी पैदा हुए।

उसके शासनकाल में एक्रोपोलिस पर धार्मिक निर्माण कार्यों को प्रोत्साहन मिला। ओलंपियन ज़्यूस के मंदिर के निर्माण की शुरुआत भी इसी काल में हुई, जिसे कई शताब्दियों बाद रोमन सम्राट हैड्रियन के शासनकाल में 131 ईस्वी में पूरा किया गया। इन निर्माण परियोजनाओं से एथेंस के नगरीय स्वरूप में परिवर्तन आया।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

पिसिस्ट्राटस की आर्थिक नीति का प्रमुख आधार कृषि थी। उसने सोलोन की नीतियों को आगे बढ़ाते हुए छोटे किसानों को ऋण और कृषि सहायता उपलब्ध कराई। जैतून और अंगूर जैसी लाभकारी फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिला।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय न्यायाधीशों की व्यवस्था की गई, जो गाँवों में जाकर विवादों का निपटारा करते थे। इससे किसानों को छोटे मामलों के लिए एथेंस आने की आवश्यकता कम हुई और केंद्रीय प्रशासन का प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचा।

कृषि कर की दर के संबंध में प्राचीन स्रोतों में मतभेद है। अरस्तू लगभग दस प्रतिशत कर का उल्लेख करता है, जबकि अन्य परंपराओं में लगभग पाँच प्रतिशत की दर बताई गई है। इसलिए निश्चित कर-दर निर्धारित करना कठिन है।

व्यापार और आर्थिक विस्तार

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में एथेंस के व्यापार और उद्योग का विस्तार हुआ। पिसिस्ट्राटस ने आंतरिक शांति तथा व्यापारिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण बनाया। एथेंस का समुद्री संपर्क एजियन सागर और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों से मजबूत हुआ।

एथेनियाई मिट्टी के बर्तनों का निर्यात आयोनिया, साइप्रस, सीरिया, काला सागर क्षेत्र और पश्चिमी भूमध्यसागर तक होने लगा। विशेष रूप से काला-चित्रित शैली के बर्तनों ने विदेशी बाजारों में लोकप्रियता प्राप्त की। व्यापार के विस्तार से कारीगरों, व्यापारियों और जहाजरानी से जुड़े वर्गों को लाभ हुआ।

खनिज संसाधन और राजस्व

पिसिस्ट्राटस ने अपने शासन को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए खनिज संसाधनों से प्राप्त आय का उपयोग किया। माउंट पैंजियस के संसाधनों तथा एटिका की लॉरियन चाँदी की खानों से होने वाली आय का उल्लेख मिलता है। हालाँकि, उसके शासनकाल में लॉरियन की खानों से प्राप्त वास्तविक आय के संबंध में प्रमाण निश्चित नहीं हैं। इसलिए उसकी आर्थिक शक्ति का पूरा श्रेय केवल चाँदी की खानों को देना उचित नहीं होगा।

धार्मिक और सांस्कृतिक विकास

पिसिस्ट्राटस की आंतरिक नीतियों का एक प्रमुख उद्देश्य एथेंस की राजनीतिक एकता और प्रतिष्ठा को बढ़ाना था। उसने धार्मिक उत्सवों और सांस्कृतिक गतिविधियों को राजकीय संरक्षण दिया तथा एथेंस के विभिन्न स्थानीय धार्मिक केंद्रों को व्यापक नागरिक व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया।

पैनाथेनिया उत्सव को अधिक भव्य और व्यवस्थित बनाया गया। प्रत्येक चार वर्ष में होने वाले महान पैनाथेनिया में एथलेटिक प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती थीं तथा होमर के महाकाव्यों के पाठ के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई। इलियड और ओडिसी के पाठों को व्यवस्थित करने की परंपरा पिसिस्ट्राटस से जोड़ी जाती है, हालाँकि इसके ऐतिहासिक विवरणों को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं।

डायोनिसस की पूजा को भी राजकीय संरक्षण प्राप्त हुआ। सिटी डायोनिसिया उत्सव के अंतर्गत संगीत, नृत्य और डिथिरैम्ब गायन की प्रतियोगिताएँ आयोजित होने लगीं तथा लगभग 534 ईसा पूर्व से दुखांत नाटकों की प्रतियोगिताओं को भी स्थान मिला। इससे एथेनियाई रंगमंच के विकास की आधारभूमि तैयार हुई।

पिसिस्ट्राटस और उसके पुत्रों के दरबार में कवियों और विद्वानों को संरक्षण मिला। अनाक्रिओन जैसे कवि एथेंस आए। भविष्यवाणियों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े साहित्य को भी संरक्षण मिला तथा प्रसिद्ध भविष्यवक्ता ओनोमैक्रिटस का उल्लेख मिलता है।

एल्यूसिस और धार्मिक एकीकरण

पिसिस्ट्राटस ने एल्यूसिस के धार्मिक केंद्र को भी संरक्षण दिया। यहाँ देवी डेमेटर और पर्सेफोन से संबंधित एल्यूसिनियन रहस्य-परंपरा का आयोजन होता था। उसके शासनकाल के अंतिम वर्षों में टेलेस्टेरियन के पुनर्निर्माण और विस्तार का कार्य आरंभ हुआ, जिसे बाद के शासकों के समय आगे बढ़ाया गया।

पिसिस्ट्राटस के समय एल्यूसिस को एथेनियाई राजनीतिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से अधिक निकटता से जोड़ने की प्रक्रिया को बल मिला। इससे एटिका के विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच व्यापक एथेनियाई पहचान विकसित करने में सहायता मिली।

विदेश नीति और एथेनियाई प्रभाव

पिसिस्ट्राटस की विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य एथेंस के व्यापारिक और सामरिक हितों को सुरक्षित करना था। उसने मध्य एजियन क्षेत्र तथा महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास किया। नैक्सोस के शासक लिग्डामिस ने उसके पुनरागमन में सहायता की थी और सत्ता प्राप्त करने के बाद पिसिस्ट्राटस ने उसे नैक्सोस में शासन स्थापित करने में सहायता दी। उसने डेलोस के धार्मिक महत्त्व को बढ़ाने के लिए वहाँ शुद्धीकरण संबंधी कार्य भी कराए। सिगियम पर भी उसका प्रभाव स्थापित हुआ और वहाँ उसके पुत्र हेगेसिस्ट्राटस को नियुक्त किया गया। सिगियम का सामरिक और व्यापारिक महत्त्व था, क्योंकि यह हेलेस्पोंट की ओर जाने वाले समुद्री मार्गों के निकट स्थित था।

थ्रेसियन चेरसोनीज़ में प्रभाव

थ्रेसियन चेरसोनीज़, जो आधुनिक तुर्की के गैलीपोली प्रायद्वीप से संबंधित क्षेत्र है, हेलेस्पोंट के निकट होने के कारण महत्त्वपूर्ण था। यहाँ प्रभाव स्थापित करने से एथेंस को यूरोप और एशिया के बीच होने वाले व्यापारिक आवागमन तथा काला सागर क्षेत्र से आने वाले अनाज की आपूर्ति पर अधिक प्रभाव प्राप्त करने का अवसर मिला।

मिल्टियाडेस द एल्डर को इस क्षेत्र में एथेनियाई हितों का प्रतिनिधि माना जाता है। उसकी कुछ गतिविधियाँ पिसिस्ट्राटिड शासन के बाद के चरण से संबंधित थीं, इसलिए सभी घटनाओं को सीधे पिसिस्ट्राटस के शासनकाल से जोड़ना उचित नहीं है।

सिक्कों की ढलाई

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में यूनानी नगर-राज्यों में सिक्कों का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा था। एथेंस में उल्लू-चिह्नित चाँदी के सिक्के बाद में अत्यंत प्रसिद्ध हुए। उल्लू देवी एथेना का प्रतीक था और आगे चलकर एथेनियाई मुद्रा की विशिष्ट पहचान बन गया। इन सिक्कों की शुरुआत पिसिस्ट्राटस के शासनकाल में हुई या उसके पुत्रों के शासनकाल में, इस विषय में इतिहासकारों में पूर्ण सहमति नहीं है। इसलिए उन्हें निश्चित रूप से पिसिस्ट्राटस के शासन की उपलब्धि मानना उचित नहीं होगा। फिर भी पिसिस्ट्राटिड काल एथेंस में मुद्रा-व्यवस्था के विकास की महत्त्वपूर्ण अवस्था था।

शासन की प्रकृति और राजनीतिक स्थिरता

पिसिस्ट्राटस की महत्त्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि एथेंस में अपेक्षाकृत दीर्घकालीन स्थिरता स्थापित करना थी। उसने मौजूदा संस्थाओं और कानूनों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया, बल्कि वास्तविक सत्ता अपने हाथों में रखी। कुछ कुलीन उसके साथ सहयोग करते रहे और प्रशासनिक पदों पर बने रहे, जबकि उसके विरोधियों में से कुछ निर्वासन में चले गए।

उसने विरोधी कुलीन परिवारों, विशेषकर एल्कमियोनिड्स की राजनीतिक शक्ति को सीमित किया और अपने समर्थकों को प्रशासन में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया। उसकी राजनीतिक सफलता का एक प्रमुख कारण सामान्य नागरिकों और ग्रामीण किसानों के हितों को ध्यान में रखने वाली नीतियाँ थीं।

अरस्तू ने पिसिस्ट्राटस के शासन को अपेक्षाकृत संयमित, उदार और लोकप्रिय बताया है। एक प्रसिद्ध प्रसंग में एक किसान की स्पष्टवादिता से प्रभावित होकर पिसिस्ट्राटस द्वारा उसे कर से मुक्त करने का उल्लेख मिलता है। अरस्तू के अनुसार, उसका शासन सामान्य तानाशाही की अपेक्षा अपेक्षाकृत संयमित दिखाई देता था।

पिसिस्ट्राटस की मृत्यु और पिसिस्ट्राटिड शासन

पिसिस्ट्राटस की मृत्यु 527 ईसा पूर्व में हुई। उसके बाद उसका बड़ा पुत्र हिपियास शासक बना, जबकि उसका भाई हिपार्कस भी शासन में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा। इनके शासन को सामूहिक रूप से पिसिस्ट्राटिड शासन कहा जाता है। प्रारंभिक वर्षों में दोनों ने अपने पिता की नीतियों को काफी हद तक जारी रखा तथा प्रशासनिक व्यवस्था और कानूनों में बड़े परिवर्तन नहीं किए।

हिपार्कस की हत्या और शासन में परिवर्तन

514 ईसा पूर्व में हारमोडियस और एरिस्टोगिटन ने हिपार्कस की हत्या की योजना बनाई। प्राचीन स्रोतों के अनुसार, हिपार्कस और हारमोडियस के बीच व्यक्तिगत विवाद उत्पन्न हुआ था। पैनाथेनिक उत्सव के अवसर पर षड्यंत्रकारियों ने हमला किया और हिपार्कस की हत्या कर दी, जबकि हिपियास बच गया। थ्यूसीडाइड्स के अनुसार वास्तविक राजनीतिक सत्ता हिपियास के हाथों में थी। हिपार्कस की मृत्यु के बाद हिपियास अधिक कठोर और संदेहशील हो गया। उसने संभावित विरोधियों के विरुद्ध दमन बढ़ाया और शासन को अधिक निरंकुश बना दिया। इससे पिसिस्ट्राटिड शासन के प्रति जनता और कुलीन वर्ग का असंतोष बढ़ गया।

पिसिस्ट्राटिड शासन का अंत

हिपियास के विरुद्ध एल्कमियोनिड्स ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने डेल्फी के ओरेकल के माध्यम से स्पार्टा को एथेंस में हस्तक्षेप के लिए प्रेरित किया। अंततः स्पार्टा ने सैन्य अभियान चलाया और 510 ईसा पूर्व में हिपियास को सत्ता से हटा दिया। इसके साथ पिसिस्ट्राटिड शासन का लगभग चार दशक लंबा दौर समाप्त हो गया।

हिपियास को एथेंस छोड़ना पड़ा और वह अंततः फारसी साम्राज्य में पहुँचा। बाद में वह फारसी राजा डेरियस प्रथम के संपर्क में रहा और यूनान के विरुद्ध फारसी अभियानों में सहयोगी बना। 490 ईसा पूर्व में फारसी आक्रमण के समय वह फारसी सेना के साथ था तथा मैराथन के युद्ध के दौरान एथेंस और उसके आसपास के क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी देने में सहायता की।

पिसिस्ट्राटिड शासन की प्रकृति

पिसिस्ट्राटस और उसके उत्तराधिकारियों ने सोलोन द्वारा स्थापित राजनीतिक संस्थाओं को पूरी तरह समाप्त नहीं किया। उन्होंने मौजूदा कानूनों और प्रशासनिक पदों को बनाए रखते हुए वास्तविक राजनीतिक शक्ति अपने परिवार के हाथों में केंद्रित की। महत्त्वपूर्ण पदों पर समर्थकों की नियुक्ति, राजनीतिक गठबंधनों और वैवाहिक संबंधों का उपयोग तथा आवश्यकता पड़ने पर सैन्य शक्ति का सहारा उनकी सत्ता बनाए रखने के प्रमुख साधन थे।

इस प्रकार पिसिस्ट्राटिड शासन एक संक्रमणकालीन व्यवस्था था। इसमें पारंपरिक संवैधानिक संस्थाएँ औपचारिक रूप से बनी रहीं, किंतु उन पर शासक परिवार का प्रभाव निर्णायक था। पिसिस्ट्राटस ने सामान्य जनता, विशेषकर छोटे किसानों का समर्थन प्राप्त किया और इसी जनाधार के सहारे कुलीन गुटों के प्रभाव को संतुलित किया।

क्लीस्थनीस और लोकतांत्रिक परिवर्तन

पिसिस्ट्राटिड शासन के पतन के बाद एथेंस में सत्ता के लिए संघर्ष आरंभ हुआ। अंततः क्लीस्थनीस प्रमुख राजनीतिक नेता के रूप में उभरा। उसने एथेंस की राजनीतिक व्यवस्था में व्यापक सुधार किए। नागरिकों को दस नए कबीलों में संगठित किया गया, जिससे पुराने कुलीन परिवारों के क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर करने में सहायता मिली।

क्लीस्थनीस ने पाँच सौ की परिषद की स्थापना की। इस परिषद ने प्रशासन और राजनीतिक निर्णयों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग 508-507 ईसा पूर्व में हुए इन सुधारों ने एथेंस में लोकतांत्रिक शासन के विकास के लिए आधार तैयार किया।

पिसिस्ट्राटस की विरासत

पिसिस्ट्राटस की विरासत विरोधाभासी थी। एक ओर उसने व्यक्तिगत सत्ता स्थापित करके नागरिकों की स्वतंत्र राजनीतिक भागीदारी को सीमित किया, दूसरी ओर उसके शासन ने एथेंस में दीर्घकालीन राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया। उसने छोटे किसानों को सहायता दी, कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित किया तथा सार्वजनिक निर्माण और धार्मिक उत्सवों को संरक्षण दिया। उसके शासन में पैनाथेनिक उत्सव, डायोनिसियाई समारोह और एल्यूसिस की धार्मिक परंपराओं को संरक्षण मिला। इससे एथेंस और एटिका के विभिन्न समुदायों के बीच साझा धार्मिक तथा नागरिक पहचान मजबूत हुई। सार्वजनिक निर्माणों ने नगर के विकास को गति दी तथा व्यापार और कृषि के विस्तार ने आर्थिक आधार को मजबूत किया।

अरस्तू ने पिसिस्ट्राटस के शासन को अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और समृद्ध बताया है। बाद की परंपरा में उसके शासनकाल को कभी-कभी ‘स्वर्ण युग’ के रूप में स्मरण किया गया तथा इसकी तुलना क्रोनोस के स्वर्ण युग से की गई।

ऑस्ट्रासिज़्म और पिसिस्ट्राटिड अनुभव

एथेनियाई लोकतंत्र के विकास के बाद ऑस्ट्रासिज़्म की व्यवस्था सामने आई। इसके अंतर्गत किसी प्रभावशाली नागरिक को जनमत के आधार पर सामान्यतः दस वर्षों के लिए एथेंस से निर्वासित किया जा सकता था। इसका उद्देश्य ऐसे व्यक्ति के अत्यधिक शक्तिशाली बनने की संभावना को रोकना था, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता था। यद्यपि ऑस्ट्रासिज़्म की स्थापना को सीधे पिसिस्ट्राटस की नीतियों का परिणाम मानना उचित नहीं है, फिर भी पिसिस्ट्राटिड अनुभव ने एथेनियाई राजनीतिक चिंतन में व्यक्तिगत सत्ता के प्रति सावधानी को मजबूत किया।

error: Content is protected !!
Scroll to Top