मौर्य सम्राट बिंदुसार (Mauryan Emperor Bindusara)
बिंदुसार (ई.पू. 298- ई.पू. 273) चंद्रगुप्त की मृत्यु के पश्चात् उनका पुत्र बिंदुसार ई.पू. 298 […]
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बिंदुसार (ई.पू. 298- ई.पू. 273) चंद्रगुप्त की मृत्यु के पश्चात् उनका पुत्र बिंदुसार ई.पू. 298 […]
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भारतीय प्रायद्वीप प्रागैतिहासिक काल से ही विभिन्न धर्मों के उद्भव, विकास और स्थायित्व का आश्रयदाता
श्रमण परंपरा की प्राचीनता (Antiquity of the Shramana Tradition) Read More »
जिस समय मगध के नेतृत्व में पूर्वी भारत में एकीकरण की प्रक्रिया चल रही थी,
भारत पर ईरानी और यूनानी आक्रमण ( Iranian and Greek Invasions of India) Read More »
जैन परंपरा में लोक विश्व, जगत् अथवा संसार के लिए जैन परंपरा में सामान्यरूप से
जैन परंपरा में लोक और ईश्वर (Folk and God in Jain Tradition) Read More »
चंद्रगुप्त मौर्य के आगमन से भारतीय इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात हुआ और
मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य (Maurya Emperor Chandragupta Maurya) Read More »
व्यवहार की दृष्टि से ज्ञान का अर्थ जानना, समझना या परिचित होना होता है। प्रत्येक
जैन दर्शन में ज्ञान मीमांसा (Epistemology in Jain Philosophy) Read More »
जैन परंपरा में आचार जैन परंपरा में आचार के स्तर पर श्रावक और श्रमण- ये