इंग्लैंड का हेनरी सप्तम (Henry VII of England, 1485–1509)

प्रथम विश्वयुद्ध: कारण और परिणाम 

फ्रांस एवं इंग्लैंड के मध्य होने वाले दीर्घकालीन युद्धों (1337 ई. से 1453 ई. तक) में, जिन्हें इतिहास में शतवर्षीय युद्ध के नाम से जाना जाता है, प्रारंभ में तो इंग्लैंड को सफलता प्राप्त हुई, किंतु अंततः इंग्लैंड को पराजय का मुँह देखना पड़ा और उसे कैले को छोड़कर सभी जीते हुए फ्रांसीसी प्रदेश छोड़ने पड़े।

इंग्लैंड का हेनरी सप्तम (Henry VII of England, 1485–1509)
इंग्लैंड का हेनरी सप्तम

शतवर्षीय युद्ध के कारण इंग्लैंड में जहाँ एक ओर राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ, वहीं दूसरी ओर शतवर्षीय युद्ध के समाप्ति के दो वर्ष बाद ही यॉर्क तथा लंकास्टर परिवारों के मध्य सत्ता के प्रश्न पर भयंकर सामंती युद्ध हुआ, जिसे इतिहास में गुलाबों का युद्ध’ (1455-1485 ई.) के नाम से जाना जाता है। इस गृह-युद्ध को गुलाबों का युद्ध इसलिए कहा जाता है क्योंकि यार्क राजवंश का प्रतीक श्वेत गुलाब था और लंकास्टर राजवंश का प्रतीक लाल गुलाब था और यह संघर्ष दोनों घरानों के बीच हुआ था।

अंततः गुलाबों के युद्ध की समाप्ति 1485 ई. में वासवर्थ के युद्ध से हुई, जिसमें हेनरी ट्यूडर ने रिचर्ड तृतीय को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया। यही हेनरी ट्यूडर 1485 ई. में हेनरी सप्तम के नाम से इंग्लैंड की गद्दी पर बैठा और ट्यूडर राजवंश की स्थापना की।

हेनरी सप्तम (1485-1509 ई.) ट्यूडर वंश का संस्थापक और पहला शासक था। उसने वासवर्थ के युद्ध में रिचर्ड तृतीय को निर्णायक रूप से पराजित किया और 18 जनवरी 1486 ई. को यॉर्क वंश की एलिजाबेथ से वेस्टमिंस्टर एब्बे में विवाह किया। इस विवाह द्वारा गुलाबों के युद्ध का सदैव के लिए अंत हो गया और यॉर्क तथा लैंकेस्टर के राजघरानों का एकीकरण हो गया।

हेनरी सप्तम को इंग्लैंड के नवयुग का प्रतिनिधि भी कहा जाता है, क्योंकि उसने इंग्लैंड में न केवल एक शक्तिशाली राजतंत्र की स्थापना करके अपने सिंहासन की रक्षा की, बल्कि तत्कालीन समाज को मध्ययुगीन कुरीतियों एवं अंधविश्वासों, सामंती अत्याचारों से मुक्त कर आधुनिक युग में प्रविष्ट कराते हुए बौद्धिकता एवं तर्कवादिता के पथ की ओर अग्रसर किया। यही कारण है कि उसके शासनकाल को इंग्लैंड के इतिहास में ‘बीजारोपण एवं सुधारों का काल कहा गया है।

हेनरी सप्तम को राजतंत्र को शक्तिहाली बनाने के लिए दृढ़ आधार प्राप्त नहीं हुआ, किंतु फिर भी, वह अपने प्रयत्नों में सफल हुआ। हेनरी सप्तम ने इंग्लैंड में राजा के पद की महत्ता, जो मध्ययुग के अंत तक शक्तिशाली सामंतों के कारण समाप्तप्रायः हो गई थी, को पुनर्स्थापित किया। इस प्रकार अपने शासनकाल में उसने इंग्लैंड को शांति, सुरक्षा, सम्मान एवं एक दृढ़ सरकार प्रदान की।

हेनरी सप्तम द्वारा नवीन राजतंत्र की स्थापना करने अथवा राजतंत्र को दृढ़ करने से एक महत्वपूर्ण लाभ यह हुआ कि इसने देश के सभी छोटे-बड़े भागों को आपस में मिलाकर लोगों में राष्ट्रवाद की भावना को जन्म दिया, जिसे हेनरी सप्तम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाना चाहिए।

हेनरी सप्तम द्वारा इंग्लैंड में शक्तिशाली राजतंत्र (जिसे नवीन राजतंत्र कहा जाता है) की स्थापना करना आसान नहीं था, क्योंकि उसके पास न तो शक्तिशाली सेना थी और न ही धन। इसलिए उसकी सफलता निश्चित रूप से उसकी कार्य-कुशलता एवं योग्यता को प्रमाणित करता है।

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इंग्लैंड की स्थिति

आधुनिक युग के आरंभ के साथ ही देश की राजनीतिक, सामाजिक तथा धार्मिक परिस्थितियों में महान् परिवर्तन हुआ। हेनरी ट्यूडर के सिंहासनारूढ़ होने से पूर्व देश में अशांति, अत्याचार एवं कुव्यवस्था व्याप्त थी। मध्य युग में व्यक्ति का कोई महत्व नहीं था और सामंतशाही के कारण राजसत्ता निर्बल थी। जनता पर अनेक प्रकार के अत्याचार होते थे, लेकिन राजा किसी भी प्रकार का सुधार करने में असमर्थ था। इंग्लैंड में शाम होते ही लोग घरों में दुबुक जाते थे क्योंकि चोर और लुटेरे सामाजिक जीवन को नारकीय बनाये हुए थे। इंग्लैंड की सामाजिक स्थिति के संबंध में वेनिस के एक राजदूत ने कहा था: ‘संसार के किसी भी देश में इतने चोर और लुटेरे नहीं हैं, जितने इस समय इंग्लैंड में हैं

सामंत किसानों पर विभिन्न प्रकार से अत्याचार करते थे। उनकी शक्ति को चुनौती देने वाला कोई नहीं था। इसके अतिरिक्त, शिक्षा के अभाव में दिशाहीन इंग्लैंड की जनता अंधविश्वास के सघन अंधकार में भटक रही थी। ऐसे विकट समय में हेनरी ट्यूडर का हेनरी सप्तम के नाम से इंग्लैंड के सिंहासन पर आरूढ़ होना, रात्रि के घोर अंधकार को मिटाते हुए उषा की लालिमा के समान था।

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हेनरी सप्तम की उपलब्धियाँ (Achievements of Henry VII)

ट्यूडर वंश की स्थापना के साथ ही मध्यकाल की कुप्रथाओं का अंत होने लगा। हेनरी सप्तम ने सामाजिक कुरीतियों एवं धार्मिक बुराइयों को दूर करके समाज को शुद्ध करने का प्रयास किया। उसने सामंतवाद का अंत किया और राजा तथा प्रजा के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। उसने शिक्षा की ओर पर्याप्त ध्यान दिया, परिणामस्वरूप इंग्लैंड का आधुनिकीकरण एवं लोगों की विचारधारा में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। हेनरी सप्तम के शासन के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार थे-

  1. राजा की शक्ति में वृद्धि करने हेतु राजतंत्र की स्थापना।
  2. इंग्लैंड में व्याप्त अशांति एवं अव्यवस्था को समाप्त कर शांति एवं सुव्यवस्था की स्थापना।
  3. प्रशासन की कार्यकुशलता एवं क्षमता में वृद्धि करना।
  4. शांति बनाये रखने के लिए वैदेशिक युद्ध एवं आंतरिक विद्रोह पर नियंत्रण रखना।

हेनरी सप्तम ने अपने इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए निम्नलिखित कार्य किये-

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विद्रोह तथा षड्यंत्रों का दमन

हेनरी सप्तम को इंग्लैंड की राजगद्दी पर आसीन होते ही अनेक विद्रोहों का सामना करना पड़ा। हेनरी ने इन विद्रोहों का कठोरतापूर्वक दमन किया।

हेनरी के विरुद्ध पहला विद्रोह 1487 ई. में लिंकन के नेतृत्व में लैम्बर्ट सिमनल ने किया। यार्कवंशीय लोगों ने लैम्बर्ट सिमनल को ‘अर्ल ऑफ वारविच बताकर आयरलैंड का राजा घोषित कर दिया। किंतु हेनरी ने जब वास्तविक अर्ल ऑफ वारविक को बंदीगृह से निकालकर जनता के समक्ष प्रस्तुत कर दिया, तो इंग्लैंड की जनता हेनरी के पक्ष में हो गई और विद्रोह आसानी से दबा दिया गया। हेनरी ने 1487 ई. में स्टोक के युद्ध में विद्रोहियों को परास्त किया, लिंकन की हत्या कर दी गई और सिमनल को बंदी बना लिया गया। अंततः हेनरी ने सिमनल को क्षमा कर दिया और राजभवन के रसोई घर में नौकर रख लिया। अन्य विद्रोहियों को कठोर दंड दिये गये।

हेनरी के विरूद्ध दूसरा विद्रोह 1490 ई. में प्रारंभ हुआ और लगभग सात वर्षों तक चलता रहा। पार्किन बार्बेक ने स्वयं को एडवर्ड चतुर्थ का पुत्र रिचर्ड घोषित किया और अनेक स्थानों से सहायता प्राप्त करने में सफल हुआ। उसे एडवर्ड चतुर्थ की बहन बर्गंडी की मार्गरेट ने भी सहायता दी। उसे फ्रांस के राजा ने आमंत्रित किया, किंतु 1492 ई. में ही हेनरी ने फ्रांस से इटेपल्स की संधि कर ली, जिसके कारण उसे फ्रांस ने निष्कासित कर दिया। बार्बेक ने 1491 ई. में पहली बार उत्तरी आयरलैंड पर आक्रमण किया, किंतु हेनरी ने उसे युद्ध-स्थल छोड़कर भागने पर विवश किया। 1495 ई. में मार्गरेट से सहायता मिलने पर उसने पुनः इंग्लैंड पर आक्रमण किया, लेकिन असफल रहा।

पार्किन बार्बेक ने 1497 ई. में अंतिम बार कुछ हज़ार सैनिकों के साथ इंग्लैंड पर आक्रमण किया, किंतु टांटन के युद्ध में हेनरी ने वार्बेक को पराजित कर बंदी बना लिया। उसे अर्ल ऑफ वारविक के साथ लंदन के टॉवर हाउस में रखा गया। दो वर्ष बाद 1499 ई. में उसने अर्ल ऑफ वारविक के साथ भागने की योजना बनाई, किंतु असफल रहा। इस बार हेनरी ने पार्किन वार्बेक और अर्ल ऑफ वारविक को मृत्युदंड दे दिया।

हेनरी सप्तम के समय में तीसरा विद्रोह रिचर्ड तृतीय के अनुयायी लॉर्ड लॉवेल ने किया। वह हेनरी सप्तम को राजा नहीं मानता था। उसने अपने साथियों के साथ हेनरी के विरुद्ध विद्रोह किया, किंतु हेनरी ने सुगमतापूर्वक इस विद्रोह का दमन किया।

हेनरी सप्तम के शासनकाल का चौथा विद्रोह इतिहास में कार्निवालिस के नाम से प्रसिद्ध है। कोर्निश के निवासियों ने करों की अधिकता के विरोध में कर देने से इनकार कर दिया और सशस्त्र विद्रोहियों ने लंदन को घेर लिया। हेनरी ने 1497 ई. में ब्लेक हीथ के युद्ध में इन विद्रोहियों को पराजित किया। इस प्रकार हेनरी ने सभी विद्रोहों और षड्यंत्रों का कठोरतापूर्वक दमन किया।

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सामंती व्यवस्था का अंत

हेनरी सप्तम एक शांतिप्रिय शासक था और देश में शांति स्थापित करना चाहता था। वह सामंतों द्वारा जनता पर किये जा रहे अत्याचारों से भली-भाँति परिचित था। सामंत वर्ग अत्यधिक शक्तिशाली, पद-लोलुप और अराजकता फैलाने वाला था। देश में शांति स्थापित करने तथा जनता के कष्टों के निवारण के लिए हेनरी सप्तम् ने अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये-

पुलिस की व्यवस्था: इंग्लैंड की जनता की सुरक्षा हेतु हेनरी ने पुलिस का संगठन किया। हेनरी सप्तम के शासन से पूर्व इंग्लैंड में जन-जीवन अत्यंत असुरक्षित था। यात्रा में लुटेरों का भय रहता था। पुलिस की व्यवस्था कर हेनरी ने जनता में व्याप्त भय को दूर किया और जन-जीवन को सामान्य स्थिति में लाने में सफल हुआ।

विधि का निर्माण: देश में सुचारु शासन व्यवस्था स्थापित करने के लिए कठोर नियमों का होना आवश्यक है, जिससे अपराधियों एवं असामाजिक तत्वों को दंड दिया जा सके। अतः हेनरी ने संसद के द्वारा आवश्यक कानून पारित कराये। संसद के उसके पक्ष में होने के कारण ऐसा करने में उसे किसी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा।

वर्दीधारी तथा अधीन सेना के विरुद्ध नियम: हेनरी ने सामंतों की शक्ति को कुचलने के लिए संसद से वर्दीधारी तथा अधीन सेना रखने के विरुद्ध नियम पारित कराये। इसके द्वारा कोई भी सामंत व्यक्तिगत सेना नहीं रख सकता था। जिन्होंने इस नियम की अवहेलना की उन्हें कठोर दंड दिये गये। सामंतों को न्यायालयों में पैरवी करने का अधिकार भी इस नियम के द्वारा समाप्त हो गया। यह नियम राजा की शक्ति में वृद्धि करने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

न्यायाधीशों की नियुक्ति: हेनरी सप्तम ने शांति स्थापित करने के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति की। इन न्यायाधीशों को अपने-अपने प्रदेशों में सामंतों को अशांति और अराजकता फैलाने पर कठोर दंड देने की आज्ञा दी गई।

कोर्ट ऑफ स्टार चैंबर की स्थापना:  हेनरी सप्तम ने सामंतों के विरुद्ध अनेक नियम बनाये और उनका कठोरतापूर्वक पालन करवाने के उद्देश्य से एक न्यायालय की स्थापना की। इस न्यायालय की स्थापना एक ऐसे भवन में की गई थी, जिसकी छत में सितारे जड़े थे। इसी कारण इसका नाम ‘कोर्ट ऑफ स्टार चैंबर पड़ा। इस न्यायालय के न्यायाधीश राज्य के उच्च मंत्री हुआ करते थे। इसने अपना कार्य अत्यंत सुचारु ढ़ंग से किया, परिणामस्वरूप वर्दीधारी और अधीन सेना रखने के विरुद्ध बना नियम पूर्णतः सफल रहे। इस न्यायालय की अनेक शाखाएँ भी स्थापित की गईं। जिन सामंतों ने इनका विरोध किया, उनका कठोरतापूर्वक दमन किया गया। इस प्रकार सामंत राजा से भयभीत होने लगे और अनुशासन-प्रिय हो गये।

मंत्रियों की नियुक्ति: हेनरी सप्तम ने सामंतों की शक्ति को पूर्णतः समाप्त करने के उद्देश्य से सामंतों को प्रिवी कौंसिल से बाहर कर दिया और उनके स्थान पर आर्कबिशप मार्टन और फोक्स जैसे अपने अनुयायियों को नियुक्त किया तथा एडमंड डडले व रिचर्ड इम्पसन को अपना मुख्य परामर्शदाता नियुक्त किया।

बारूद पर अधिकार: सामंत वर्ग बारूद का प्रयोग करता था, अतः राजा के लिए उनका दमन करना आसान नहीं था। सामंतों के अधिकार में विशाल दुर्ग थे, जिनमें वह बारूद एवं सेना का प्रबंध रखते थे। हेनरी सप्तम समय में इंग्लैंड में बारूद के अनेक कारखाने प्रारंभ किये गये। राजा ने इन कारखानों को अपने अधिकार में ले लिया और बारूद के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाकर बड़ी-बड़ी तोपों पर अधिकार कर लिया। हेनरी ने बारूद की सहायता से सामंतों के दुर्गों को ध्वंस कर सामंतों की शक्ति को पूर्णतः समाप्त कर दिया।

मध्य वर्ग का साथ: इंग्लैंड में मध्य वर्ग की स्थिति भी दयनीय थी। हेनरी ने अनुभव किया कि मध्य वर्ग अशांति एवं अराजकता का विरोधी तथा सामंतों के विरुद्ध है और राजा के पक्ष में है। अतः हेनरी ने मध्यवर्गीय जनता की स्थिति में सुधार कर उनका सहयोग लिया। उसने मध्यवर्गीय लोगों को उच्च पद प्रदान किये, व्यापार-संबंधी नियम पारित कर उनकी आर्थिक सहायता की और सामंतों के स्थान पर उन्हें प्रिवी कौंसिल में स्थान दिया। इस प्रकार मध्य वर्ग के सहयोग से हेनरी के लिए सामंतों का दमन करना और आसान हो गया।

प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत 

धनोपार्जन का प्रयत्न

हेनरी सप्तम अनुभव करता था कि धन के अभाव में इंग्लैंड का राजसिंहासन उसके हाथ से निकल सकता है। अतः उसने सांविधानिक तथा अन्य तरीकों से धनोपार्जन करने का प्रयत्न किया। यद्यपि हेनरी सप्तम को संसद के द्वारा धन प्राप्त होता था, किंतु वह उसके लिए पर्याप्त नहीं था। हेनरी सप्तम का विचार सामंतों के दमन के पश्चात् संसद की शक्ति को भी कम करना था। यदि हेनरी को धन प्राप्त करने का कोई अन्य रास्ता मिल जाता, तो वह संसद से स्वतंत्र हो जाता। अतः अपने इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु उसने निम्नलिखित कार्य किए-

कर में वृद्धि: हेनरी के पास काफी भूमि थी, उस पर कर बढ़ाने के लिए राजा की किसी की आज्ञा लेने की आवश्यकता नहीं थी। इसलिए हेनरी ने अपनी भूमि पर कर बढ़ा दिया, जिससे उसकी व्यक्तिगत आय बावन हजार पौंड से बढ़कर एक लाख बयालीस हजार पौंड हो गई।

सामंतों की संपत्ति पर अधिकार: लंकास्टर एवं यार्क वंशों के मध्य हुए गुलाबों के युद्ध में अनेक सामंतों की मृत्यु हो गई थी। हेनरी सप्तम ने सभी ऐसे सामंतों की संपत्ति को अपने अधिकार में ले लिया।

शांतिप्रिय नीति द्वारा बचत: हेनरी ने शांतिप्रिय नीति अपनाकर युद्धों में खर्च होने वाली एक बड़ी धनराशि की बचत की। 1492 में फ्रांस के साथ इटेपल्स की संधि करके उसने हरजाने के रूप में फ्रांस से काफी धन प्राप्त किया।

आर्थिक दंड: स्वयं को धनी बनाने के उद्देश्य से हेनरी ने मृत्युदंड तथा कारावास की सजा कम करके उनके स्थान पर भारी आर्थिक दंड देने की नीति का पालन किया। कोर्ट ऑफ स्टार चैंबर, कौंसिल ऑफ वेल्स तथा कौंसिल ऑफ नॉर्थ अपराधियों को अकसर आर्थिक दंड ही देते थे। कार्नवाल के विद्रोहियों से भी काफी धन वसूल किया गया। हेनरी ने एम्पसन तथा डडले को अपना वित्तीय प्रतिनिधि नियुक्त किया, जिनका कार्य न्यायालयों में आर्थिक दंड के रूप में प्राप्त हुई धनराशि को एकत्र करना था।

क्षमा-पत्रों एवं पदों को बेचना: हेनरी सप्तम ने क्षमा-पत्रों को बेचना प्रारंभ कर दिया। कोई भी अपराधी इन क्षमा-पत्रों को खरीदकर अपने को दंड से बचा सकता था। उसने उच्च पदों को बेचकर भी काफी धन एकत्रित किया था।

राजा का व्यक्तिगत व्यापार: एडवर्ड चतुर्थ के समान हेनरी ने अपना व्यक्तिगत व्यापार प्रारंभ किया। उसने मुख्यतः फिटकरी, ऊन, शराब तथा टिन का व्यापार किया। इस व्यापार से उसे बहुत लाभ हुआ।

बलात् उपहार : हेनरी सप्तम ने अपने मंत्रियों की सहायता से काफी धन उपहार के रूप में प्राप्त किया। हेनरी ने मॉर्टन को अपना वित्तीय प्रतिनिधि नियुक्त किया। उसने धन एकत्र करने के लिए एक नवीन नीति अपनाई, जिसे ‘मॉर्टन फॉर्क  के नाम से जाना जाता है। इस नीति के अंतर्गत धनिक वर्ग से कहा जाता था कि आप अपने ऊपर काफी धन खर्च करते हैं, अतः कुछ धन देकर राजा की सहायता करें और निर्धनों से कहा जाता था कि आपने सादा जीवन व्यतीत करके काफी धन एकत्र कर रखा है, अपने धन में से कुछ धन देकर राजा की सहायता करें। इसके अतिरिक्त हेनरी ने अपने पुत्र तथा पुत्री के विवाह के नाम पर भी जनता से काफी धन प्राप्त किया। इस प्रकार हेनरी ने विभिन्न साधनों से पर्याप्त धन एकत्र किया। अपनी मृत्यु के समय उसने अपने पुत्र के लिए अठारह लाख पौंड की धनराशि छोड़ी।

हेनरी सप्तम एक कुशल एवं योग्य सम्राट् था। अपने शासनकाल में उसने इंग्लैंड को सम्मानजनक स्थिति में पहुँचा दिया। 24 वर्षों तक इंग्लैंड का शासक रहने के पश्चात् 21 अप्रैल, 1509 ई. को रिचमंड पैलेस में तपेदिक से उसकी मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के समय तक इंग्लैंड न केवल आंतरिक दृष्टि से ही सुदृढ़ हो गया, वरन् यूरोपीय राष्ट्रों के मध्य भी महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर चुका था।

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